NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
आंदोलन
कृषि
भारत
राजनीति
ठाणे में फसलों की ‘लूट और विनाश’ के मुद्दे पर आदिवासी किसानों का उग्र विरोध प्रदर्शन 
एआईकेएस के नेतृत्व में 1,000 से अधिक आदिवासी किसानों ने सड़क जामकर उन वन कर्मियों के खिलाफ कार्यवाई करने की माँग की, जिन्होंने उनकी फसलों को “लूटा और बर्बाद” किया था।
अमय तिरोदकर
28 Oct 2020
ठाणे

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के झंडे तले करीब 1,000 की संख्या में आदिवासी किसान महिलाओं और पुरुषों ने पिछले सप्ताहांत के दौरान ठाणे शहर के बीचोबीच स्थित ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच किया था। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर स्थित मुख्य सड़क को एक घंटे तक के लिए चक्का-जाम कर वहाँ पर मौजूद हैरान-परेशान पुलिस बल को साँसत में डाल रखा था।
रास्ता रोको मुहिम उसी सूरत में वापस ली गई, जब जिलाधिकारी 23 अक्टूबर के दिन एआईकेएस प्रतिनिधिमंडल से मिले और उनकी मुख्य माँगों को उनके द्वारा स्वीकार कर लिया गया। ये आदिवासी किसान ठाणे शहर एवं ठाणे जिले के शाहपुर तहसील से आये थे।

19 अक्टूबर के दिन वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने बिना कोई नोटिस दिए अचानक से कटाई के लिए तैयार खड़ी धान, अरहर और नगदी फसलों को नष्ट कर दिया और लूट ले गये। ये फसलें यहाँ पर रह रहे कई आदिवासी किसान परिवारों की थीं, जो पिछले कई वर्षों से येऊर पहाड़ियों पर खेती-किसानी का काम कर रहे थे।

आदिवासियों के अनुसार जून में बुआई का काम शुरू होने के बाद से ही जंगलात कर्मियों ने किसानों को परेशान करना शुरू कर दिया था। किसानों ने तब मदद के लिए एआईकेएस से संपर्क साधा था, जिनके नेताओं ने सम्बंधित वन अधिकारीयों से संपर्क स्थापति किया था। उन्होंने इस बाबत अधिकारियों को चेताया था कि इस समय कोरोनावायरस काल चल रहा है और सभी महिला पुरुष किसानों के हाथ में जो कुछ भी काम था वे उसे खो चुके हैं। उनके पास अपने जीवननिर्वाह के स्रोत के तौर पर अब ये फसलें ही बची हैं जिसे वे कई वर्षों से यहाँ पर उगा रहे हैं। आदिवासियों का आरोप है कि इस सबके बावजूद “निर्दयी और भ्रष्ट” जंगलात विभाग के कारकुनों ने वो सारी फसल नष्ट कर डाली जो आज-कल में कटने के लिए तैयार खड़ी थी। 

image 1_0.jpeg

ज्ञातव्य हो कि अक्टूबर माह में महाराष्ट्र में आई भारी बेमौसम की बरसात ने शाहपुर तहसील के बड़े हिस्से में धान की फसल को बर्बाद कर डाला है।

इस सम्बन्ध में एआईकेएस ने दोनों क्षेत्रों के आदिवासी किसानों के एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। शाहपुर के किसानों ने ठाणे शहर के किसानों के साथ अपनी एकजुटता का इजहार किया।

एआईकेएस के अनुसार वार्ता के उपरांत ठाणे जिलाधिकारी राजेश नार्वेकर ने निम्नलिखित माँगों को स्वीकार कर लिया है:

1. चूँकि किसानों की सारी फसल बर्बाद हो चुकी थी, ऐसे में उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जायेगा और साथ ही मानवीय आधार पर छह महीनों तक हर परिवार को प्रति व्यक्ति के हिसाब से 10 किलो अनाज मुहैय्या कराया जायेगा।

2. जिलाधिकारी इस मामले की तहकीकात के सन्दर्भ में एआईकेएस और जंगलात के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक बुलायेंगे ताकि वन विभाग के इस ‘निंदनीय’ कृत्य की जाँच की जा सके। 

3. शाहपुर तहसील में हुई बेमौसम की बरसात के चलते जो फसल बर्बाद हुई है उसका सर्वेक्षण किया जायेगा और राज्य सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार जल्द ही उन्हें मुआवजा दिया जायेगा।

4. बेरोजगारी की बेतहाशा मार को देखते हुए शाहपुर तहसील में मनरेगा (ग्रामीण रोजगार गारंटी) के काम को बड़े पैमाने पर शुरू किया जायेगा।

5. जिला परिषद को इस बात के दिशानिर्देश दिए जायेंगे कि वह शाहपुर तहसील के उन किसानों के नामों को पीम घरकुल (मकान) स्कीम में जोड़े, जो उस सूची में छूट गए थे।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधायक विनोद निकोल द्वारा किया गया था। निकोल ने आदिवासी किसानों को इस बात का आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे को महाराष्ट्र राज्य विधानसभा के अगले सत्र में उठाएंगे।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Thane Sees Intense Protest by Tribal Farmers Against ‘Looting, Destroying’ of Crops

Thane Protests
AIKS Protests
Tribal Peasants
Thane Forest Officials
Maharashtra Protests

Related Stories


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License