NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बेलारूस में विरोध का अंतिम चरण अब दिखने लगा
अभी भी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के पक्ष में संभावनाएं दिख रही हैं। संभवतः मॉस्को भी उस पर दांव लगा रहा है।
एम. के. भद्रकुमार
27 Oct 2020
Massive protests in Minsk after lull of few weeks

पिछले 3-4 वीकेंड के बाद बेलारूस के मिन्स्क में सरकार-विरोधी प्रदर्शन फिर शुरु हो गया। यह तीन मुद्दों को लेकर हुआ है।

पहला, शुरु के ऐसे कुछ संकेत हैं कि मॉस्को ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के 14 सितंबर को सोची में उनकी बैठक में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिए गए आश्वासनों पर पीछे हटने से निराश महसूस किया है कि वह संवैधानिक सुधार और एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया को प्रारंभ करेंगे और इसके बाद नए सिरे से चुनाव कराएंगे और लोकतांत्रिक फैसले को स्वीकार करेंगे।

दूसरा, 23 अक्टूबर को लुकाशेंका को यूएस सेक्रेट्री ऑफ स्टेट माइक पोम्पियो के एक फोन कॉल ने बेलारूस के विपक्ष का मनोबल बढ़ाया है। तीसरा, अगस्त महीने में हुए पिछले चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार और बेलारूस के स्व-घोषित "राष्ट्रीय नेता" स्वेतलाना तिखानोव्सकाया ने 26 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया जिसने बिल्कुल आदर्श, वास्तविक या अवास्तविक माहौल बना दिया है।

22 अक्टूबर को मॉस्को में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पुतिन ने कहा कि ''पूर्व सोवियत काल'' में रूस की स्थिति स्पष्ट रुप से पूरी तरह से निराशा और त्याग वाली थी। बेलारूस पर नज़र रखने के साथ, उन्होंने खेद व्यक्त किया कि पूर्व सोवियत गणराज्यों को बांधने वाले "हितों की हिस्सेदारी" की पर्याप्त रूप से सराहना नहीं की जाती है। उन्होंने कहा, "एक सामान्य बुनियादी ढांचा, सामान्य परिवहन और ऊर्जा प्रणाली तथा एक आम भाषा जो हमें विभाजित करने के बजाय एकजुट करती है वह हमारा अलग प्रकार का प्रतिस्पर्धी बढ़त है।"

पुतिन ने कहा कि कैसे यूक्रेन में कलर रिवॉल्यूशन ने एक देश को नष्ट कर दिया जो "शायद सबसे औद्योगिक सोवियत गणराज्य था, न कि उनमें से केवल एक था"। पुतिन ने कहा, "यूक्रेनियन स्टैटिस्टिकल सर्विस द्वारा प्रकाशित सिकुड़ते उत्पादन के आंकड़े को पढ़ें तो पता चलेगा कि वह एक से अधिक महामारी था। स्थानीय उद्योगों में से कुछ यानी विमान उद्योग, जहाज़ निर्माण, रॉकेट निर्माण जैसे उद्योगों पर कभी पूरा सोवियत संघ और यूक्रेन खुद गर्व करता था और जो सोवियत के लोगों की कई पीढ़ियों द्वारा विकसित किया गया था और जो सभी सोवियत गणराज्यों की विरासत जिस पर गर्व हो सकता था और होना भी चाहिए वह लगभग समाप्त हो चुका है। यूक्रेन को ग़ैर-औद्योगीकृत किया जा रहा है।”

बेलारूस की स्थिति के प्रत्यक्ष संदर्भ में पुतिन ने संकेत दिया कि रूस का उस देश में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि पश्चिम को भी बेलारूस के लोगों को "शांति से अपनी स्थिति को संभालने और उचित निर्णय लेने का अवसर देना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "वे जो निर्णय लेंगे, वह देश के संविधान में संशोधन करने या एक नया संविधान अपनाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है ... लोगों की विशिष्टताओं, संस्कृति और इतिहास को ध्यान में रखे बिना बाहर से पेश किए गए कभी भी कुछ भी उस संस्कृति और उन लोगों के लिए काम नहीं करेगा।"

इसके समक्ष यह पहले के रूसी रुख से एक नाटकीय बदलाव के रूप में देखा जा सकता है जो संकेत दे रहा है कि चाहे कुछ भी हो मॉस्को बेलारूस को रूसी सीमा के भीतर रखने के लिए दृढ़ संकल्प था।

रूस की मीडिया ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट किया कि खुफिया प्रमुख सर्गेई नार्यिशकिन अघोषित दौरे पर मिन्स्क में थे। नेज़ाविसीमाया गजेटा अखबार के अनुसार, लुकाशेंका क्रेमलिन के लिए "बहुत जहरीला" हो गए हैं, इसलिए यह संवैधानिक सुधार और मिन्स्क में एक संभावित उत्तराधिकारी के लिए दबाव डाल रहे हैं।

अगले ही दिन पोम्पिओ का लुकाशेंको को फोन आया जिससे पता चलता है कि वाशिंगटन माहौल को भांप रहा रहा है। वाशिंगटन यह सुनिश्चित कर रहा है कि क्या: ए) क्रेमलिन लुकाशेंको के साथ मनोवैज्ञानिक युद्ध कर रहे हैं, ताकि वह रूसी मांगों के लिए प्रभावित हो सके; बी) क्या रूस बेलारूस में सत्ता परिवर्तन और मिन्स्क में एक पश्चिमी समर्थक उत्तराधिकारी शासन के उद्भव के रूप में स्वीकार करने के लिए निर्णय बदल सकता है; या सी) क्या मॉस्को और मिन्स्क केवल अमेरिका को धोखा देने के लिए बड़े पैमाने पर झूठी घटना का मंचन कर रहे हैं।

बेशक, संभावना यह है कि उपरोक्त सभी तीन संभावनाएं एक ऐसी स्थिति में मौजूद हैं जो कि चौतरफा तरीके से पारदर्शिता की घोर कमी को चित्रित करता है। पुतिन द्वारा बेलारूस में एक व्यवस्थित लोकतांत्रिक ट्रांजिशन को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने के प्रस्ताव को पोम्पिओ के दिलचस्पी लेने की संभावना है जिसे अमेरिका-रूस संबंधों के वर्तमान माहौल में पूरी तरह से खंडन किया जाना चाहिए। न ही मॉस्को एक ग्रहणशील यूरोपीय संघ के सहयोगी की उम्मीद कर सकता है।

दूसरी ओर यह तथ्य कि मिन्स्क में वीकेंड का विरोध तेज़ हो गया है जो यह दर्शाता है कि वाशिंगटन कलर रिवॉल्यूशन के साथ पूरी तरह से आगे बढ़ रहा है।

वास्तव में, यदि तिखानोवस्काया की हड़ताल के आहवान ने बेलारूस की सरकार द्वारा संचालित औद्योगिक संयंत्रों में श्रमिकों से महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त किया तो ऐसे में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। सरकार बेलारूस की कमांड अर्थव्यवस्था के 80 प्रतिशत को नियंत्रित करती है और यदि कमांड की श्रृंखला कमज़ोर होती है तो मुश्किल के दरवाज़े खुल जाएंगे।

इसके विपरीत, अगर हड़ताल का आह्वान नाकाम हो जाता है तो इसका मतलब होगा विपक्षी विरोध अचानक समाप्त होगा जो कि बड़े पैमाने पर समर्थन की कमी के रूप में सामने आएगी। अगले हफ्ते इस घटनाक्रम की स्थिति बेलारूस में खेल समाप्त होने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ये मुश्किल लुकाशेंको के पक्ष में अभी भी दिखती हैं। संभवतः मॉस्को भी उस पर दांव लगा रहा है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल लेख को यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

The Endgame in Belarus is in View

Belarus
Russia
vladimir putin
US
Alexander Lukashenko

Related Stories

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • veto
    एपी/भाषा
    रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
    26 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
  • Gujarat
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: गोबर-धन को आने दो!
    26 Feb 2022
    छुट्टा जानवरों की आपदा का शोर मचाने वाले यह नहीं भूलें कि इसी आपदा में से गोबर-धन का अवसर निकला है।
  • Leander Paes and Rhea Pillai
    सोनिया यादव
    लिएंडर पेस और रिया पिल्लई मामले में अदालत का फ़ैसला ज़रूरी क्यों है?
    26 Feb 2022
    लिव-इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा को मान्यता देने वाला ये फ़ैसला अपने आप में उन तमाम पीड़ित महिलाओं के लिए एक उम्मीद है, जो समाज में अपने रिश्ते के अस्तित्व तो लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: किस तरफ होगा पूर्वांचल में जनादेश ?
    26 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और शिव कुमार बात कर रहे हैं यूपी चुनाव में पूर्वांचाल की. आखिर किस तरफ है जनता का रुख? किसको मिलेगी बहुमत? क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पायेगी? जवाब ढूंढ रहे हैं…
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता
    26 Feb 2022
    ड्रग्स, अफस्पा, पहचान और पानी का संकट। नतीजतन, 5 साल की डबल इंजन सरकार को अब फिर से ‘फ्री स्कूटी’ का ही भरोसा रह गया है। अब जनता को तय करना है कि उसे ‘फ्री स्कूटी’ चाहिए या पीने का पानी?    
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License