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राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
एक असाधारण दुनिया का निर्माण करने के लिए साधारण लोगों का अद्भुत दृढ़ संकल्प
अमेरिका में आयोजित हो रहा लोकतंत्र का शिखर सम्मेलन लोकतंत्र का शिखर सम्मेलन नहीं है बल्कि अमेरिका की अगुवाई में उन देशों को लाने की कवायद है जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका की ढहती हुई सत्ता को नजरअंदाज करें।
ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
16 Dec 2021
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मवाम्बा चिक्वेम्बा (ज़ाम्बिया), पावर, 2019

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मानवाधिकार दिवस के अवसर पर 9-10 दिसंबर को लोकतंत्र के लिए शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 111 देशों को लालच देकर बुलाया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने लिखा, 'हम शिखर सम्मेलन के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए सभी देशों, संगठनों और व्यक्तियों का स्वागत करते हैं।’ हालाँकि, ऐसे 82 देश हैं जिन्हें आमंत्रित नहीं किया गया, जिनमें दो बड़े देश (चीन और रूस) जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और कैरिबियन के दो छोटे देश (क्यूबा और हैती) शामिल हैं। लोकतंत्र के नाम पर अमेरिकी सरकार अपनी सत्ता को मज़बूत करने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपने ही एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। यह लोकतंत्र के लिए शिखर सम्मेलन नहीं है, बल्कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका की कलंकित छवि को फिर से ठीक करने के लिए एक समूह को एक साथ लाने का शिखर सम्मेलन है।

किस तरह से कलंकित? इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट का डेमोक्रेसी इंडेक्स संयुक्त राज्य अमेरिका को 'दोषपूर्ण लोकतंत्र' बताता है, जो स्रोत को देखते हुए चौंकाने वाला है। क्या चीज़ इसे ' दोषपूर्ण' बनाता है? तीन बिंदुओं पर नज़र डालने से इसका उदाहरण मिलता है: (1) अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया धन और लॉबी समूहों के भ्रष्ट प्रभाव से ग्रस्त है, जबकि मतदान अधिकार अधिनियम के प्रभाव ने सामाजिक अल्पसंख्यकों पर मतदान केंद्र तक पहुँचने के लिए प्रतिकूल दबाव डाला है; (2) अमेरिका में दुनिया में सबसे अधिक क़ैद की दर है, सामाजिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ यह एक स्पष्ट पूर्वाग्रह है  - विशेष रूप से मृत्युदंड के मामले में; (3) संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हुए अमेरिका ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली और अपनी विशाल सेना का इस्तेमाल दुनिया भर के देशों को कष्ट देने तथा उनपर नियंत्रण करने के लिए किया है।

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य - सभी सबूतों के ख़िलाफ़ - न केवल यह सुझाव देना है कि अमेरिका एक समृद्ध लोकतंत्र है, बल्कि अपने विरोधियों (विशेष रूप से, चीन और रूस, साथ ही क्यूबा, ​​​​ईरान और वेनेजुएला भी) के ख़िलाफ़ अमेरिका द्वारा थोपे गए हाइब्रिड युद्ध को बढ़ावा देने के लिए लोकतंत्र के उदात्त विचार का उपयोग करना भी है। यह लोकतांत्रिक आदर्शों का एक क्रूर और निंदक दुरुपयोग है, जिसे युद्ध का एक उपकरण बनाने के बजाय मानव क्षमता की पूरी व्यापकता में आगे बढ़ाने के लिए जुटाया जाना चाहिए।

गज़बिया सिरी (मिस्र), एक मिस्र का परिवार, 1955

दुनिया में पहले से ही लोकतंत्रों का नियमित शिखर सम्मेलन रहा है। इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा कहते हैं। हर साल सितंबर में इसका अपना सत्र आयोजित होता है, जहाँ सरकारों के प्रमुख मानवता के सामने आने वाली दुविधाओं पर अपना दृष्टिकोण पेश करने आते हैं। जो चीज़ संयुक्त राष्ट्र महासभा को एक साथ बाँधती है वह इस या उस शक्तिशाली राष्ट्र की सनक नहीं है, बल्कि मानवता के इतिहास में सबसे मौलिक दस्तावेज़ों में से एक है: संयुक्त राष्ट्र चार्टर, जून 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना करने वाले इक्यावन देशों द्वारा जिसे अपनाया गया। आज, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य हैं, जिनमें से प्रत्येक चार्टर के हस्ताक्षरकर्ता हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में प्रत्येक देश चार्टर का पालन करने के लिए बाध्य हैं, जो इसे इस ग्रह का सबसे बड़ा आम सहमति वाला दस्तावेज़ बनाता है। चार्टर का अनुच्छेद-2 दो बिंदुओं पर स्पष्ट है: (1) कि संयुक्त राष्ट्र 'अपने सभी सदस्यों की संप्रभु समानता' पर आधारित है; और (2) कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को 'अपने अंतर्राष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीक़े से सुलझाना' चाहिए। चार्टर के अध्याय VI और VII में तरीक़े के बारे में निर्दिष्ट किया गया हैं, इस सटीक निर्धारण के साथ कि कोई भी देश दूसरे को नुक़सान नहीं पहुँचाएगा जब तक कि कार्रवाई करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव न हो; संयुक्त राष्ट्र प्राधिकरण के बिना कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।

इस बीच, अमेरिका ने 1961 से क्यूबा की संप्रभु जनता के ख़िलाफ़ एक हानिकारक नाकाबंदी लागू कर रखी है। यह नाकाबंदी अवैध है और शुरुआत से ही अवैध है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा अधिकृत नहीं है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्यों ने पिछले तीस वर्षों से अमेरिका की अवैध नाकेबंदी को समाप्त करने के लिए भारी संख्या में मतदान किया है। इस साल 184 देशों ने अमेरिका के ख़िलाफ़ मतदान किया। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पैरिला ने कहा, 'नाकाबंदी दम घोंट देती है और मार देती है। इसे समाप्त होना चाहिए'।

मॉर्न चीयर (कंबोडिया), हैंड इन हैंड, 2021

क्यूबा, ​​​​110 करोड़ जनसंख्या वाला एक छोटा-सा द्वीपीय देश कभी भी संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा के लिए ख़तरा नहीं बना। क्यूबा सरकार ने कभी भी संयुक्त राज्य अमेरिका पर आक्रमण करने की कोशिश नहीं की। वास्तव में, ऐसा सोचना भी बेतुकी बात है, क्योंकि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे घातक सेना है और जो भी उस पर हमला करने की कोशिश करेगा वह उसे मिटा देगा (जैसा कि 1941 के बाद जापान में हुआ था और जैसा कि 2001 के बाद अल-क़ायदा के साथ हुआ था)। यह देखते हुए कि क्यूबा अमेरिका के लिए ख़तरा नहीं है, अमेरिका ने क्यूबा की अवैध नाकेबंदी क्यों कर रखी है?

उपनिवेशवाद और दासता के दयनीय इतिहास के परिणामस्वरूप क्यूबा की पूर्व-क्रांति अर्थव्यवस्था चीनी के उत्पादन और पर्यटन से घुट गई थी। जिस देश की अर्थव्यवस्था साम्राज्यवादियों के लिए खेल का मैदान रही हो वैसे ग़रीब देश में समाजवाद का निर्माण करना आसान नहीं है। क्यूबा में कुछ क़ीमती धातुएँ और खनिज हैं, वरना अमेरिका जैसे देशों के पूँजीपतियों का ध्यान उसकी ओर भला क्यों होता। तो, इस बात को देखते हुए कि क्यूबा के पास प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी आपूर्ति नहीं है, अमेरिका ने क्यूबा की अवैध नाकेबंदी क्यों कर रखी है?

क्यूबा के पास ही एक और कैरेबियाई द्वीप हैती है, जिसकी आबादी भी 110 करोड़ है, साथ ही कुछ प्राकृतिक संसाधनों की वजह से पूँजीपतियों के लिए उपयोगी है और संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा के लिए कोई ख़तरा नहीं है। फिर भी, 1804 की क्रांति के बाद से हैती का दम घोंट दिया गया है, उसकी संपत्ति ख़त्म हो गई है, इसके लोगों को संपत्ति की 'क्षतिपूर्ति' में कम से कम 2100 करोड़ डॉलर का भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया है - जिसमें मनुष्य भी शामिल हैं - क्योंकि उसने दास बनाकर लोगों से वृक्षारोपण कराने की प्रथा को समाप्त किया। हैती पर हिंसा का शासन तथा तानाशाही और राजनीतिक अराजकता की एक भयानक व्यवस्था थोपी गई है, जो आज भी जारी है। ये सब कुछ संयुक्त राज्य अमेरिका के लाभ के लिए किया गया है।

हुल्दा गुज़मैन (डोमिनिकन रिपब्लिक), अपने दुश्मनों के प्रति दयालु रहें (इस्तांबुल कैट्स), 2018।

क्यूबा और हैती के प्रति इस दुश्मनी का क्या कारण है? अपनी संप्रभुता के लिए खड़े होने का उनका दुस्साहस और एक ऐसे समाज का निर्माण करने का उनका वादा जो साम्राज्यवादी शक्तियों की ज़रूरतों पर केंद्रित नहीं है। हैती के लोगों ने ग़ुलामी से इंकार किया जब अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्थाएँ कैरिबियन के ग़ुलाम लोगों के मुक्त श्रम पर आधारित थीं। हैती के लोगों द्वारा स्वतंत्रता का वह कार्य अक्षम्य था, और इसी कारण से हैती को दंडित किया गया था, लोकतंत्र के साथ उसके प्रयोग का गला घोंट दिया गया। यदि यह प्रयोग सफल होता तो हैती अन्य उत्पीड़ित लोगों को भी प्रेरित करता, और इसलिए इस प्रयोग को सफल होने से पहले ही समाप्त कर दिया गया।

हैती की तरह क्यूबा ने भी साम्राज्यवाद और उसके माफियाओं के जाल को उखाड़ फेंका। क्रांतिकारी सरकार एक संप्रभु परियोजना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध थी - और बनी हुई है। इसने शासन की एक प्रणाली विकसित की जिसने अपने लोगों के हितों को लाभ से पहले रखा, यह सुनिश्चित किया कि लोगों के पोषण, साक्षरता, स्वास्थ्य और संस्कृति को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाए, और एक बहुत ही ग़रीब देश में समाजवाद का एक मॉडल बनाया। क्यूबाई क्रांति की मिसाल को भी उन साम्राज्यवादियों ने नष्ट किया जो इसकी सफलता को बर्दाश्त नहीं कर सकते थे, और न ही वे असाधारण दुनिया बनाने के लिए आम लोगों के दृढ़ निश्चय को बर्दाश्त कर सकते थे।

हैती की स्वतंत्रता की घोषणा, 1804

1804 के हाईटियन डिक्लेरेशन ऑफ़ इंडिपेंडेंस में, बहादुर क्रांतिकारियों ने लिखा, 'हमने स्वतंत्र होने का साहस किया है। अपने लिए और इसी तरह अपने देश के लिए'। उन्होंने लिखा, यह हैती की जनता है जो स्वतंत्र हैं, लेकिन फ़्रांसीसी नहीं। फ़्रांसीसी 'विजय प्राप्त कर चुके हैं लेकिन अब स्वतंत्र नहीं हैं', क्योंकि वे - संयुक्त राज्य अमेरिका के शासक कुलीनों की तरह - साम्राज्यवाद की कल्पनाओं और पूँजी संचय की अपनी भूख में उलझ गए हैं। उस सपने में न आज़ादी है, न लोकतंत्र है।

डेमोक्रेसी इन वर्ल्ड
Democracy in World
Democracy in America
democracy in China
America democracy summit
America is not a democracy

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