NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
एसएमजी की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस ने पैन-अफ़्रीकीवाद, साम्राज्यवाद-विरोधी और अंतर्राष्ट्रीयवाद का आह्वान किया
समाजवाद को आगे बढ़ाने के लिए 1993 में स्थापित सोशल फॉरम ऑफ़ घाना (एसएफजी) की सदस्यता में वृद्धि हुई है और अब इसका नाम सोशल मूवमेंट ऑफ घाना (एसएमजी) कर दिया गया है।
पीपल्स डिस्पैच
03 Aug 2021
एसएमजी की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस ने पैन-अफ़्रीकीवाद, साम्राज्यवाद-विरोधी और अंतर्राष्ट्रीयवाद का आह्वान किया

सोशल फॉरम ऑफ घाना (एसएफजी) के रूप में अस्तित्व में रही सोशल मूवमेंट ऑफ घाना (एसएमजी) की पहली राष्ट्रीय कांग्रेस सप्ताहांत में 30 जुलाई और 1 अगस्त को देश के मध्य क्षेत्र में स्थित शहर विन्नेबा में आयोजित की गई थी।

घाना के 130 प्रतिनिधियों और अन्य अफ्रीकी, दक्षिण अमेरिकी, उत्तरी अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई देशों के फ्रेटर्ननल ऑर्गनाइजेशन के 27 पर्यवेक्षकों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। फोरम से मूवमेंट में इस संगठन का नाम बदलने का निर्णय और एक संविधान इस सम्मेलन में अंगीकृत किया गया।

कांग्रेस द्वारा अपनाए गए अंतिम प्रस्ताव में कहा गया कि इस संविधान द्वारा प्रदान किए गए ढांचे के भीतर, "लोगों के हाथों में सत्ता की वापसी के लिए संघर्ष… [आगे बढ़ने के लिए] हमारे लड़ाके संगठन और नेटवर्क का निर्माण कर सकते हैं"।

एसएफजी की स्थापना 1993 में एक तानाशाही सरकार के अधीन मात्र चार सदस्यों द्वारा की गई थी। इसका मिशन का उद्देश्य सोशलिज्म और पैन-अफ्रीकनिज्म के मामले और घाना के पहले प्रधानमंत्री वामपंथी नेता क्वामे नक्रमाह की विरासत को सार्वजनिक संवाद में आगे बढ़ाना था। पूर्व प्रधानमंत्री के समाजवादी परियोजना की स्वतंत्रता के एक दशक से भी कम समय में सीआईए-समर्थित सैन्य तख्तापलट द्वारा कटौती कर दी गई थी।

दशकों से अपने मीडिया संगठनों, अध्ययन समूहों, सांस्कृतिक स्थलों और किताबों की दुकानों के माध्यम से एसएफजी ने अपनी गतिविधियों का विस्तार किया। खासकर पिछले तीन वर्षों में इस संगठन का आकार तब बढ़ गया जब युवा बड़ी संख्या में संगठन में आए। इसकी सदस्यता लगभग 3,000 तक बढ़ गई।

क्वेसी प्रैट जूनियर सम्मेलन में एसएमजी के महासचिव के रूप में फिर से चुने गए। कियेरेटवी ओपोकू और कोफी हेनाकू को क्रमशः संयोजक और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के सचिव के रूप में चुना गया।

इस सम्मेलन ने देश के भीतर इस समूह के विस्तार के लिए काम करने के लिए एक कार्यक्रम तैयार करने के साथ-साथ सहारवी और फिलिस्तीनी आंदोलन, क्यूबा और चीन के साथ एकजुटता व्यक्त करने सहित विभिन्न प्रस्तावों को अपनाया।

Ghana
SMG
Congress
Social forum of Ghana

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License