NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
द ग्रेट इंडियन डिजास्टर : लोग परेशान और सरकार ख़ुश
सरकारी और निजी खपत व्यय में कमी प्रभावी प्रतिक्रिया की मांग करता है लेकिन मोदी सरकार नागरिकता के मुद्दों और जनसंख्या रजिस्टर में व्यस्त है।
सुबोध वर्मा
07 Mar 2020
The Great Indian Disaster

हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख घटक 'सरकार के अपने खर्च' और 'लोगों के खर्च' की हालत बदतर हैं। वास्तव में, इनमें धीमी गति से वृद्धि यह दर्शाती है कि आर्थिक मंदी अभी घातक बनी हुई है। हर कोई यह जानता है, किसी भी उद्योगपति या उसके कर्मचारी या छोटे व्यापारी और सड़क पर किसी भी व्यक्ति से पूछें तो आपको एक ही बात बताई जाएगी कि सब कुछ धीमा हो गया है।

लेकिन, इसे सामने लाना आवश्यक है क्योंकि आर्थिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और अन्य लोग यह सुझाव देने की कोशिश कर रहे हैं कि मंदी का बुरा दौर खत्म हो चुका है जिसका मतलब है कि यह जल्द ही दूर होने वाली है। इतना तेजी से नही!

नीचे दिए गए चार्ट में सरकार का खुद का आंकड़ा जो दिखाता है उस पर एक नज़र डालें। जनवरी-मार्च 2019 में सरकारी खर्च 14% से ज़्यादा की उचित दर से बढ़ रहा था। यहां से अक्टूबर-दिसंबर 2019 में यह 11.8% तक नीचे चला गया है। अगर सरकार खुद अपना पैसा खर्च नहीं करने जा रही है तो देश को मंदी से बाहर निकलने की उम्मीद कैसे है?

graph.png

लेकिन वित्त मंत्रालय के दिग्गज जो हमारे प्रधानमंत्री द्वारा निर्देशित हैं उन्हें ऐसा लगता है कि सिस्टम में लिक्विडिटी भरना और कॉर्पोरेटों के करों में कटौती करना ही एक समाधान है। ये उपाय स्पष्ट रूप से विफल हो रहे हैं- हालांकि ये उनके लाभ मार्जिन को बढ़ाने में बड़े उद्योगपतियों की मदद करते हैं।

अब ऊपर दिए गए चार्ट में लाल रेखा को देखें। यह निजी खपत व्यय को दर्शाता है जिसका मतलब है भारत के लोगों और अन्य निजी संस्थाओं द्वारा किया गया कुल खर्च। जुलाई-सितंबर 2019 में इसकी वृद्धि दर लगभग 9% से घटकर 2019 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सिर्फ 6% रह गई है।

उपभोग व्यय में गिरावट का मतलब है कि परिवार कम खर्च कर रहे हैं क्योंकि वे अपने बुनियादी ज़रुरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं। ये परेशानी बेरोज़गारी के चलते और बढ़ गई है, जिसे इस वर्ष फरवरी में सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी द्वारा 8% बतया गया था जिससे निपटने के लिए कोई संकेत नहीं थे।

इसलिए कहा जा सकता है कि ताबूत में आखिरी कील हरे रंग की लाइन में दिखाया गया है जो सकल नियत पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) के लिए विकास दर को प्रस्तुत करता है, जो कि औद्योगिक नियोक्ताओं द्वारा अचल संपत्तियों (जैसे उद्योग और मशीनरी या भूमि) में निवेश है।

नकारात्मक क्षेत्र में फैली विकास दर में भारी और नाटकीय गिरावट का मतलब है कि उद्योगपति किसी भी नई उत्पादक क्षमता के निर्माण में निवेश नहीं कर रहे हैं। वास्तव में, वे ऐसा करने से भाग रहे हैं। इसलिए, अब या निकट भविष्य में कोई नए रोज़गार निर्माण की संभावना नहीं है।

अर्थव्यवस्था को सुस्ती से बाहर निकालने के लिए निजी उद्यम और बाज़ार पर मोदी सरकार के भरोसा करने का यह आखिरी प्रयास पूरी तरह भ्रामक चरित्र को दिखाता है। कॉर्पोरेट टैक्स कटौती और रियल एस्टेट के लिए विशेष फंड जैसी भारी रियायतों के बावजूद कुछ भी नहीं सुधर पा रहा है। दावा किए जाने पर भी अर्थव्यवस्था या रोज़गार की मदद के लिए श्रम कानून के बदलाव ने भी कुछ नहीं किया है। वास्तव में, वे नियोक्ताओं को इस संकट में श्रमिकों से छुटकारा पाने और उनके मुनाफे की रक्षा करने में मदद कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर इस तरह की व्यापक विफलता को भी अद्भुत सावधानी से देखा जाना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगियों ने देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को लागू करने के लिए विभाजनकारी नागरिकता कानूनों को लाकर और ऐसे कानूनों का नाम पर या जनसंख्या या नागरिक रजिस्टर के विनाशकारी प्रस्तावों के नाम पर सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने की कोशिश की है। एकमात्र उद्देश्य जो वे फिलहाल पूरा कर रहे हैं वह है डूबती अर्थव्यवस्था से लोगों का ध्यान भटकाना। लेकिन ऐसा कब तक?

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

The Great Indian Disaster: Hurting People, Happy Government

indian economy
fiscal deficit
Indian banking system
Nirmala Sitharaman
Narendra modi

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License