NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
उच्चतम न्यायालय कोविड-19 की भयावह स्थिति के चलते जेलों में भीड़ कम करने पर आदेश करेगा पारित
उच्चतम न्यायालय ने देश में महामारी की स्थिति को ‘‘अत्यंत भयावह’’ करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि वह कोविड-19 के मामलों में वृद्धि की वजह से जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करने के मुद्दे पर आदेश पारित करेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 May 2021
उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने देश में महामारी की स्थिति को ‘‘अत्यंत भयावह’’ करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि वह कोविड-19 के मामलों में वृद्धि की वजह से जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करने के मुद्दे पर आदेश पारित करेगा।

शीर्ष अदालत ने कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार के लिए 23 मार्च 2020 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उच्चस्तरीय समितियां गठित करने का भी निर्देश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने देश में महामारी के चलते जेलों में भीड़ कम करने के लिए लंबित स्वत: संज्ञान मामले में नयी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘वर्तमान स्थिति अत्यंत भयावह है। पिछली बार (23 मार्च) किए गए निवेदनों पर अब फिर से विचार किए जाने की आवश्यकता है।’’

पीठ ने कहा कि वह राष्ट्रीय सेवा कानूनी प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए कुछ श्रेणियों के कैदियों को पैरोल या जमानत पर रिहा करने पर विचार के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में उच्चाधिकार प्राप्त समितियां गठित करने पर विचार करेगी।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह शनिवार को उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों से बात करेंगे और उनसे उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करने पर विमर्श करेंगे जिससे कि महामारी के दौरान कैदियों की त्वरित रिहाई के लिए इनका तेजी से गठन किया जा सके।

पीठ ने कहा, ‘‘हम मुद्दों पर विचार करेंगे और आदेश पारित करेंगे।’’

दिल्ली में कोविड-19 के दौरान कैदियों की रिहाई को लेकर एचपीसी की हुई बैठक

कोविड-19 का प्रसार रोकने के उद्देश्य से जेलों में कैदियों की संख्या कम करने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गठित एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की जेलों से कैदियों की रिहाई पर विचार करने के वास्ते 4 मई शाम में एक बैठक हुई।

यह जानकारी राष्ट्रीय राजधानी में तीन जेलों में कैदियों की संख्या कम करने के लिए गैर-जघन्य अपराधों में शामिल कैदियों की जमानत या पैरोल पर अस्थायी रिहाई के अनुरोध वाली तीन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान डीएसएलएसए (दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) के सदस्य सचिव कंवल जीत अरोड़ा द्वारा मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की एक पीठ के समक्ष दी गई।

यह जानकारी मुहैया कराये जाने के मद्देनजर अदालत ने मामले को 13 मई को अगली सुनवायी के लिए सूचीबद्ध किया।

सुनवायी के दौरान जेल विभाग की ओर से पेश दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता संतोष के त्रिपाठी ने पीठ को बताया कि जेलों में कई सौ कोविड-19 मामलों को देखते हुए 890 दोषियों को पैरोल पर रिहा करने पर विचार करने के लिए एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।

जेल महानिदेशक ने कहा है, ‘‘यह जेल विभाग द्वारा प्रस्तावित किया गया है कि कोविड-19 की ताजा लहर को देखते हुए सरकार जेलों में भीड़ कम करने के लिए पात्र दोषियों को कैदियों की सुरक्षा के हित में आपातकालीन पैरोल देने पर विचार कर सकती है। तदनुसार, जेल विभाग ने 26 अप्रैल को दिल्ली सरकार को एक पत्र लिखा है जिसमें प्रस्ताव दिया गया है कि 890 दोषियों को जिन्हें पहले ही आपातकालीन पैरोल दी गई थी और जिन्होंने उसकी समाप्ति के बाद आत्मसमर्पण किया था, जिनके खिलाफ कोई प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं है, उन्हें तुरंत आठ सप्ताह का आपातकालीन पैरोल दिया जा सकता है।’’

यह भी कहा गया है कि जेल विभाग ने कैदियों के बीच कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकार की सलाह के अनुसार सभी रोकथाम उपाय किए हैं, लेकिन सावधानियों और रोकथाम उपायों के बावजूद जेलों में कोरोना वायरस के मामले सामने आ रहे हैं।

हलफनामे के अनुसार, 27 अप्रैल की स्थिति के अनुसार 260 कैदी और 114 जेल कर्मचारी कोविड-19 संक्रमित थे।

विभाग ने यह भी कहा है कि विचाराधीन कैदियों (यूटीपी) के संबंध में यह भी एक सुझाव दिया गया है कि जिनके खिलाफ ऐसे मामले जिनमें अपराधों के लिए 7 साल या उससे कम की सजा का प्रावधान है तो उन्हें जमानत या अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए क्योंकि कोविड-19 की नई लहर "पिछले साल की तुलना में बहुत ताकतवर है।’’

कोविड-19 के खतरे के बीच महबूबा ने प्रधानमंत्री मोदी से सभी राजनीतिक बंदियों को छोड़ने की अपील की

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोविड-19 की बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर और इसके बाहर की जेलों में बंद सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने की अपील की।

महबूबा ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, “दुनिया भर में, अधिकतर देशों ने खतरनाक कोविड संकट के मद्देनजर कैदियों को पैरोल पर रिहा कर दिया है। भारत जैसे लोकतांत्रिक और सभ्य देश को इस मामले में अपने पैर नहीं खींचने चाहिए और इन बंदियों को तुरंत रिहा कर देना चाहिए, ताकि वे ऐसे समय में अपने घर लौट सकें, जब जान को खतरा हो।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "वह उस मानवीय त्रासदी का राजनीतिकरण नहीं करना चाहती हैं, जो हम सबको प्रभावित कर रही है।" उन्होंने कहा, ‘‘यह एक अभूतपूर्व मानवीय संकट है जो जाति, रंग, धर्म या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं करता है और इसने सभी को प्रभावित किया है। शायद इस दुखद समय में एकमात्र उम्मीद की किरण यह है कि कैसे भारतीय धार्मिक और क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर एक-दूसरे की मदद करने के लिए आगे आएं।’’

हालाँकि इसी तरह की मांग देश के अन्य राज्यों में भी उठ रही है।  महारष्ट्र , दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई जेलों में कैदियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।  इसको देखते हुए कई  सामजिक कार्यकर्ता जेल में बंद राजनैतिक बंदियों को रिहा करने की मांग उठा रहे है जबकि दिल्ली में उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी यह मामला विचारधीन है।  

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Supreme Court
COVID-19
prisoners
Corona and Jails

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License