NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अदालत ने सुधा भारद्वाज को जेल के बाहर से किताबें मंगवाने की अनुमति दी
पिछले महीने भारद्वाज और सह आरोपी गौतम नवलखा एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हनी बाबू ने अपनी वकील चाँदनी चावला चावला के माध्यम से अलग-अलग अर्ज़ियाँ लगाकर जेल के बाहर से किताबें एवं अख़बार मंगाने की अनुमति मांगी थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Jan 2021
अदालत

मुम्बई: मुम्बई की एक विशेष एनआईए अदालत ने कथित तौर पर एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को भायखला जेल के बाहर से किताबें प्राप्त करने की अनुमति दे दी है। वह इसी जेल में बंद हैं। बुधवार को उपलब्ध कराये गये आदेश से यह जानकारी सामने आयी।

विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश डी ई कोठालिकर ने मंगलवार को इस संबंध में भारद्वाज की याचिका मंज़ूर की थी।

न्यायाधीश ने जेल अधीक्षक को भारद्वाज को हर महीने जेल के बाहर से पांच किताबें मंगवाने देने का निर्देश दिया। यह जेल मध्य मुम्बई में है।

पिछले महीने भारद्वाज और सह आरोपी गौतम नवलखा एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू ने अपनी वकील चांदनी चावला के माध्यम से अलग-अलग अर्जियां लगाकर जेल के बाहर से किताबें एवं अख़बार मंगाने की अनुमति मांगी थी।

नवलखा और बाबू नवी मुम्बई की तलोजा जेल में हैं। बाबू और नवलखा की अर्ज़ियाँ पर अगली तारीख पर सुनवाई होगी।

हालंकि अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अधीक्षक ध्यानपूर्वक पुस्तकें देखेंगे और यदि उनमें हिंसा की सीख देने वाली कोई आपत्तिजनक सामग्री, अश्लील सामग्री या रिवोल्युशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट या भाकपा (माओवादी) का प्रचार करने वाली कोई सामग्री पायी जाती है तो वह आवेदक को ऐसी किताब नहीं लेने देंगे।’’

इसी बीच, इस मामले में अन्य आरोपी , सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेल्टुम्बडे ने मंगलवार को दायर की गयी अपनी नयी ज़मानत याचिका में कहा है कि अभियोजन का यह सिद्धांत कि वह दूसरों को सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए भड़का रहे थे, ‘‘पाखंड’’ है।

इन सभी पर कोरेगांव-भीमा के निकट हिंसा भड़काने का भी आरोप है।  इस मामले  में देश के कई बुद्धजीवियों, पत्रकारों, लेखकों सहित समाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी हुई है। हालांकि, किसी भी मामले में पुलिस कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है। इसमें आनन्द तेलतुम्बड़े के अतिरिक्त, सुधा भारद्वाज, सोमा सेन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस, फादर स्टेन स्वामी, सुधीर धावले वरवरा राव, रोना विल्सन, गौतम नवलखा, जैसे बुद्धिजीवी भी शामिल हैं। यह सभी, आम लोगों के सम्मानपूर्वक जीने के हक के पक्ष में, कोर्ट से लेकर सड़क तक संघर्षशील रहे हैं। ये लोग स्वास्थ्य-शिक्षा मुफ्त मिले, इसके लिए निजीकरण का विरोध करते रहे हैं और उन आदिवासियों के साथ खड़े हुए जिनकी जीविका के संसाधन को छीन कर पूंजीपतियों के हवाले किया जाता रहा है। इसलिए ये लोग शासक वर्ग के आंखों के किरकिरी बने हुए थे।

सुधा भरद्वाज, सोमा सेन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंजाल्विस, फादर स्टेन स्वामी, सुधीर धावले, वरवरा राव, रोना विल्सन भीमा कोरेंगांव केस में जून और सितम्बर, 2018 से ही महाराष्ट्र के जेलों में बंद हैं। जबकि उस केस के असली गुनाहगार संभाजी भिड़े और मिलिन्द एकबोटे बाहर हैं। 

महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद केन्द्र सरकार ने इस केस को एनआईए के हाथों में सुपुर्द कर दिया था। 18 माह बाद लम्बी कानूनी प्रक्रिया झेलने के बाद 14 अप्रैल 2020, को गौतम नवलखा और आनन्द तेलतुम्बड़े को एनआईए के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। तब से ही ये दोनों भी जेल में है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Sudha Bharadwaj
gautam navlakha
bheema koregaon

Related Stories

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे HC ने की गौतम नवलखा पर सुनवाई, जेल अधिकारियों को फटकारा

सामाजिक कार्यकर्ताओं की देशभक्ति को लगातार दंडित किया जा रहा है: सुधा भारद्वाज

साल 2021 : खेत से लेकर सड़क और कोर्ट तक आवाज़ बुलंद करती महिलाएं

किसानों की हर मांग पर मानी सरकार, सुधा भारद्वाज जेल से बाहर और अन्य ख़बरें

एल्गार परिषद मामला: तीन साल बाद जेल से रिहा हुईं अधिवक्ता-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज

अदालत ने सुधा भारद्वाज को 50,000 रुपये के मुचलके पर जेल से रिहा करने की अनुमति दी

सुधा भारद्वाज को SC से राहत, यूपी के aspirant शिक्षक तेज़ करेंगे आंदोलन और अन्य ख़बरें

एल्गार परिषद मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सुधा भारद्वाज की ज़मानत के ख़िलाफ़ एनआईए की याचिका ख़ारिज की

एल्गार परिषद मामले में सुधा भारद्वाज को ज़मानत, सरकार के पास मृत किसानों के नहीं हैं आंकड़े और अन्य

एल्गार परिषद : बंबई उच्च न्यायालय ने वकील सुधा भारद्वाज को ज़मानत दी


बाकी खबरें

  • बी. के. चतुर्वेदी
    भारत का लोकतंत्र उतना ही मज़बूत होगा, जितना इसके संस्थान ताक़तवर होंगे
    16 Jun 2021
    फ़्रांस के एक NGO 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' द्वारा प्रकाशित 'वर्ल्ड प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स' 2021 में भारत को फिर 180 देशों में 142वें पायदान पर रखा गया है।
  • यूपी: एक ट्वीट पर पत्रकारों से लेकर ट्विटर तक पर मुक़दमा
    असद रिज़वी
    यूपी: एक ट्वीट पर पत्रकारों से लेकर ट्विटर तक पर मुक़दमा
    16 Jun 2021
    बुज़ुर्ग से पिटाई मामले में ट्वीट करने पर ग़ाज़ियाबाद में पुलिस ने नौ लोगों के ख़िलाफ़ दंगा भड़काने की कोशिश के आरोप में मुक़दमा लिख लिया। जिसमें तीन पत्रकार हैं, एक डिजिटल मीडिया संस्थान के अलावा…
  •  मोदी-कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच क्यों बँटी पासवान जी की पार्टी?
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी-कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच क्यों बँटी पासवान जी की पार्टी?
    16 Jun 2021
    केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलों के बीच ही ये बँटवारा क्यों हो गया? इसमें बिहार की राजनीति, खासकर नीतीश कुमार के जद(यू) और उसके सहयोगी दल-भाजपा के दिलचस्प सियासी समीकरणों की कितनी भूमिका है…
  • कोरोना की आने वाली तीसरी लहर से लड़ो, Twitter से नहीं।
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना की आने वाली तीसरी लहर से लड़ो, Twitter से नहीं।
    16 Jun 2021
    क्या मोदी सरकार कोरोना की तीसरी लहर के लिए तैयार है। आज अभिसार शर्मा बात रहे हैं के मोदी सरकार ने कोरोना की वैक्सीन को लेकर देश के जनता को गलत जानकारी दी थी और गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया था
  • फरीदाबाद : 'घर में ही रहें' की नसीहत के बीच खोरी गांव के 10 हज़ार परिवार को बेघर करने की तैयारी!
    मुकुंद झा
    फरीदाबाद : 'घर में ही रहें' की नसीहत के बीच खोरी गांव के 10 हज़ार परिवार को बेघर करने की तैयारी!
    16 Jun 2021
    सर्वोच्च न्यायालय के 'अतिक्रमण' हटाने के आदेश के बाद से हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली क्षेत्र में बसे खोरी गांव बस्ती के 10000 से भी ज़्यादा परिवारों पर बेघर होने का ख़तरा मंडरा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License