NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बहुत पेचीदा और ख़तरनाक़ भी है क्रिप्टकरेंसी का खेल !
क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की टेक्नोलॉजी पर काम करने वाला सिस्टम है तो यह भी साफ है कि इसमें सेंध लगाई जा सकती है। इसे हैक किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल गैरक़ानूनी कामों के लिए किया जा सकने की पूरी संभावना है।
अजय कुमार
12 Mar 2020
cryptocurrency

चार मार्च, 2020 को सुप्रीम कोर्ट का वर्चुअल करेंसी यानी आभासी मुद्रा से जुड़ा अहम फैसला आया। फैसला यह था कि भारत में अब वर्चुअल करेंसी के जरिये व्यापार किया जा सकेगा। पहले आरबीआई ने इस पर प्रतिबंध लगाया था। आरबीआई ने साल 2018 में वर्चुअल करेंसी को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर के तहत यह आदेश था कि कोई भी बैंक और संस्था वर्चुअल करेंसी के जरिये लेन देन न करे।

वर्चुअल करेंसी के तहत किसी भी तरह की सेवा या सामान के लेन-देन का काम न किया जाए। इस सर्कुलर के बाद वर्चुअल करेंसी पर एक इंटर पार्लियामेंट्री कमेटी भी बैठी थी। इस कमेटी का भी सुझाव था कि वर्चुअल करेंसी को बैन कर दिया जाए। इसकी जगह पर भारत सरकार की तरफ से ऑफिसियल डिजिटल करेंसी यानी आधिकारिक डिजिटल करेंसी जारी की जाए।

अब इस पर किसी तरह की राय शुमारी करने से पहले यह समझ लेते हैं कि वर्चुअल करेंसी क्या होती है?

इसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। आधारभूत तरीके से कहें तो इसे क्रिप्टोकरेंसी कहा जाता है। क्रिप्टोग्राफी मूल रूप से एक ग्रीक शब्द है। जिसका मतलब होता है 'एक ऐसी लिखावट जिसे वह पढ़ पाए, जिसे उसके कोड का पता हो। यानी एक तरह की इनकोडेड लिखावट। जिसे जरूरी कोड की मदद से समझा जा सकता है।और वही समझ सकता है जिसके पास इसका कोड हो। यानी यह क्रिप्टोकरेंसी केवल एक ऐसे समुदाय के भीतर ही काम कर सकती है, जो कोड को डिकोड कर सकता हो। सतोशी नाकामोतो को वर्चुअल करेंसी ‘बिटकॉइन’ का संस्थापक माना जाता है और बिटकॉइन को पहली वर्चुअल करेंसी माना जाता है। बिटकॉइन की तरह की लाइटकॉइन, पीरकॉइन, एथेरियम भी वर्चुअल करेंसी है।

यहां सबसे जरूरी बात यह कि इस पर किसी केंद्रीय अथॉरिटी का कंट्रोल नहीं होता है। यानी इसके लिए कोई रिज़र्व बैंक टाइप कंट्रोलिंग अथॉरिटी नहीं होती है। जो यह बताये कि कितनी क्रिप्टोकरेंसी होगी या नहीं होगी। अगर फेक क्रिप्टोकरेंसी जारी की जाएगी तो उसपर कैसे कंट्रोल होगा? कितने बिटकॉइन जारी किये जाने चाहिए और कोई गड़बड़ी आये तो उसके साथ कैसे निपटा जाए।

केंद्रीय अथॉरिटी न होने के आभाव में एक सवाल यह उठता है कि कोई भी व्यक्ति बहुत सारी क्रिप्टोकरेंसी जारी कर सकता है। फेक क्रिप्टोकरेंसी जारी कर सकता है। जैसे अगर रिज़र्व बैंक के सिवाय सबको नोट छापने की इजाजत दे दी जायेगी तो फेक नोटों की बाढ़ आ जाएगी। इसके जवाब में क्रिप्टोकरेंसी के मॉडल में ब्लॉकचेन मॉडल अपनाया जाता है। ब्लॉकचेन मॉडल यानी एक तरह का ग्लोबल लेजर।

एक तरह से खाते की ऐसी किताब जिसे पूरी दुनिया में डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करने वाले अपनाते हैं। जिसमें हर एक क्रिप्टोकरेंसी का रिकॉर्ड रखा जाता है। यानी जब किसी को क्रिप्टोकरेंसी के तौर पर एक बिटकॉइन भेजा जाता है तो इसका मतलब है कि ग्लोबल लेजर में इसका रिकॉर्ड रखा जा रहा है। जैसे नरेंद्र ने अगर राहुल को 100 बिटकॉइन भेजे तो यह ब्लॉकचेन के तहत ग्लोबल लेजर में रिकॉर्ड हो जाएगा। उसके बाद नरेंद्र और राहुल चाहें कितनी भी कोशिश कर लें उसका डुप्लीकेट नहीं बना सकते हैं। क्योंकि रिकार्डेड इंट्री का मिलान किया जाएगा और क्रॉस चेक होने पर उसका बाद में इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।

अब सवाल यह भी उठता है कि ब्लॉकचेन में कैसे रिकॉर्ड रखा जाता है? रिकॉर्ड रखने का पैमाना यह है कि कोई भी लेन- देन हो तो सबको पता चल जाए। इसलिए बिटकॉइन देने वाले और लेने वाले के अपने अकॉउंट नंबर की जानकारी पूरे सिस्टम को देनी होती है। साथ में कितने बिटकॉइन का लेन-देन हुआ, इसकी भी जानकारी देनी होती है। चूँकि यह जानकारी इन्क्रिप्टेड तरीके से पब्लिक की जाती है इसलिए इन्क्रिप्टेड मेथड के 'पब्लिक की' के जरिये यह जानकारी सबको मिल जाती है।

इसके अलावा एक 'प्राइवेट की' होती है। इस 'की' यानी कुंजी के जरिये पब्लिक की हुई जानकारी में फेरबदल करने की अनुमति किसी को नहीं मिल पाती है। इसमें फेरबदल वही कर पाते हैं, जिसके पास 'प्राइवेट की' होती है। और 'प्राइवेट की' उसी के पास होती है, जिससे वह लेन-देन जुड़ी होती है। इसलिए किसी अकाउंट के बारें में पब्लिक जानकरी होते हुए भी उसमें तब-तक फेरबदल नहीं की जा सकती है जब तक 'प्राइवेट की' की जानकारी नहीं होती है।

अब मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि यह काम तो कोई भी कर सकता है। केवल इनकोड और डिकोड करने की है तो बात है। लेकिन ऐसा नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी डाउनलोड तो आसानी से किया जा सकता है लेकिन उसके बाद का पचड़ा बहुत मुश्किल है। इसकी इनकोडिंग और डिकोडिंग में बहुत अधिक टाइम लगता है। बहुत अधिक बिजली लगती है। यह एक तरह की मैथमेटिकल प्रॉब्लम की एक सीरीज होती है। इसे हल करके ही एक क्रिप्टोकरेंसी हासिल की जाती है। इसे हल करना आसान नहीं होता है। हर क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक नए मैथमेटिकल प्रॉब्लम को सॉल्व किया जाता है। यह काम आम कम्प्यूटर के बूते के बस की बात नहीं होती है। इसके लिए विशेष कम्यूटर की जरूरत होती है। इसके जरिये यह प्रॉब्लम सॉल्व होती है।

अब बात करते हैं कि क्या इसे पैसा कहा जा सकता है? इस मुद्दे पर फ्री सॉफ्टवेयर मूवमेंट के अध्यक्ष प्रबीर पुरकायस्थ कहते हैं कि पैसे का इस्तेमाल हम लेन देन के लिए करते हैं। यह एक तरह का एसेट्स होता है। मेरा मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसे कि बिटकॉइन का इस्तेमाल कुछ ही तरह के लेन देन के लिए किया जा सकता है। यह पूरी तरह से लेन देन के लिए नहीं बना है। इससे आप सीधे तौर पर जाकर चावल नहीं खरीद सकते हैं। आप एक बिटकॉइन के बदले जो डॉलर मिलेगा उसी से कुछ खरीद पाएंगे। और केवल बिटकॉइन वही हासिल कर पाएंगे जो विशेष कम्प्यूटर पर मैथमेटिकल प्रॉब्लम हल कर पाएंगे। यानी यह सबके लिए उपलब्ध नहीं है। जबकि पैसा सबके लिए उपलब्ध होता है। आप काम कीजिए और पैसा लीजिए।

यह सट्टा बाजार की तरह है, इसकी कीमत में उतार चढ़ाव की संभावना बहुत अधिक होती है। इसलिए इसमें लगाए गए पैसे से कमाई हो भी सकती है और पैसा डूब भी सकता है। मौजूदा वक्त में 1 बिटकॉइन की कीमत 6 लाख 68 हजार रुपये है। पिछले साल इन्हीं दिनों यानी 5 मार्च 2019 को 1 बिटकॉइन की कीमत 2 लाख 70 हजार रुपये थे। 15 दिसंबर 2017 को 1 बिटकॉइन की कीमत 12 लाख 59 हजार रुपये थी। ऐसे में आप देख सकते हैं कितनी जल्दी बिटकॉइन की कीमत ऊपर चढ़ती है और नीचे गिरती है।

प्रबीर कहते हैं कि एक बैंक का एक क्रेडिट कार्ड एक सेकंड में तकरीबन 60 हजार लेन देन कर सकता है। लेकिन ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी के सहारे चलने वाले बिटकॉइन के जरिये एक सेकंड में केवल 3 से 7 लेन देन ही हो पाते हैं। यानी इसके जरिये लेन-देन करने में बहुत अधिक टाइम लगता है। बिटकॉइन का सिस्टम अकॉउंट नंबर के सहारे काम करता है। यानी इसमें किसी के नाम का उल्लेख नहीं होता है इसलिए इसका इस्तेमाल गैरक़ानूनी कामों के लिए किया जा सकने की पूरी संभावना है। मनी लॉड्रिंग से लेकर आतंक के लिए पैसा उगाही करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। जब किसी देश का इस पर रेगुलेशन ही नहीं है, किसी तरह का इसपर नियंत्रण ही नहीं है तो कोई भी एक बिटकॉइन के बदले रुपये या डॉलर का किसी भी जगह ट्रांसफर करेगा और उसपर किसी तरह की रोक भी नहीं लग पाएगी।

क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की टेक्नोलॉजी पर काम करने वाला सिस्टम है तो यह भी साफ है कि इसमें सेंध लगाई जा सकती है। इसे हैक किया जा सकता है। इसे हैक भी किया गया है। हाल ही में साउथ कोरियन क्रिप्टोकरेंसी को हैक कर लिया गया। जिसमे बहुत सारे लोगों का पैसा डूब गया।

बहुत सारे देशों में इस क्रिप्टोकरेंसी का क़ानूनी तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यूनाइटेड नेशंस, यूरोप के कुछ देश, वेनेजुएला जैसे कई देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि भारत इसके लिए कैसे नियम कानून बनाता है ? इसे कैसे लागू करता है?

cryptocurrency
bitcoin
Cryptography
Block chain technology
RBI
Supreme Court
Central Authority
Digital Currency

Related Stories

एजीआर विवाद में सरकार टेलीकॉम कंपनियों से वसूलेगी 92000 करोड़


बाकी खबरें

  • भाषा
    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री इस महीने के अंत में भारत आ सकते हैं
    05 Apr 2022
    जॉनसन की भारत यात्रा 22 अप्रैल के आसपास हो सकती है। पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को भारत का दौरा रद्द करना पड़ा था। 
  • भाषा
    आगे रास्ता और भी चुनौतीपूर्ण, कांग्रेस का फिर से मज़बूत होना लोकतंत्र के लिए ज़रूरी: सोनिया गांधी
    05 Apr 2022
    ‘‘हम भाजपा को, सदियों से हमारे विविधतापूर्ण समाज को एकजुट रखने और समृद्ध करने वाले सौहार्द व सद्भाव के रिश्ते को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे।’’
  • भाषा
    'साइबर दूल्हो' से रहें सावधान, साइबर अपराध का शिकार होने पर 1930 पर करें फोन
    05 Apr 2022
    अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य की शादी के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन विज्ञापन देख रहे हैं, तो थोड़ा होशियार हो जाएं। साइबर ठग अब शादी के नाम पर भी ठगी करने में जुट गए हैं। देश के महानगरों मे अब तक इस तरह…
  • मीनुका मैथ्यू
    श्रीलंकाई संकट : राजनीति, नीतियों और समस्याओं की अराजकता
    05 Apr 2022
    वित्तीय संस्थानों के कई हस्तक्षेपों के बावजूद श्रीलंकाई सरकार अर्थव्यवस्था की व्यवस्थित गिरावट को दूर करने में विफल रही है।
  • इंद्रजीत सिंह
    विभाजनकारी चंडीगढ़ मुद्दे का सच और केंद्र की विनाशकारी मंशा
    05 Apr 2022
    इस बात को समझ लेना ज़रूरी है कि चंडीगढ़ मुद्दे को उठाने में केंद्र के इस अंतर्निहित गेम प्लान का मक़सद पंजाब और हरियाणा के किसानों की अभूतपूर्व एकता को तोड़ना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License