NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
बात बोलेगी : सहकारिता मंत्रालय के पीछे RSS के विस्तार की रणनीति !
इस बात की आशंका है कि आने वाले दिनों में यह मंत्रालय विविध और व्यापक सहकारिता आंदोलन को एक तरह के विचारों की दिशा में काम करने के लिए बाध्य करेगा।
भाषा सिंह
08 Jul 2021

मोदी सरकार ने मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ ही एक नया मंत्रालय बनाया सहकारिता मंत्रालय (co-operation ministry)  और इसकी कमान सौंपी सीधे गृह मंत्री अमित शाह को। इस मंत्रालय के बनाये जाने—या इसकी मांग सहकारिता क्षेत्र से आने की खबर नहीं थी। फिर सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों यह मंत्रालय बनाया गया और मोदी सरकार में सबसे ताकतवर व्यक्ति अमित शाह को इसकी कमान सौंपी गई। इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसका अनुषांगिक संगठन सहकार भारती का होना है।

सहकार भारती के संस्थापक सदस्य सतीश काशीनाथ मराठे, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में अंशकालिक निदेशक हैं, ने सबसे पहले मोदी सरकार द्वारा इस नये मंत्रालय को बनाये जाने का स्वागत किया और आभार जताया कि केंद्र सरकार ने सहकार भारती की फरवरी में रखी गई मांग को अमलीजामा पहना दिया। मोदी सरकार की तत्परता का आलम यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक संगठन ने फरवरी में नये मंत्रालय की मांग की और जुलाई के पहले पखवारे से पहले ही उस पर अमल हो गया। इसके जरिये देश भर के सहकारी क्षेत्र को सीधे केंद्र के अंतर्गत लाने, उसे नये ढंग के नियम-कायदे में बांधने की शुरुआत हो गई है।

नोटबंदी, जीएसटी के बाद यह सहकारिता मंत्रालय देश के अंचल में बसे और जीवंत आर्थिक स्रोत पर कब्जा जमाने वाला कदम हो सकता है। जैसा कि हम सब जानता है कि देश भर में सहकारिता आंदोलन औऱ इसकी अनगिनत इकाइयां मंदी के दौर में भी लाखों की तादाद में लोगों को आजीविका मुहैया कर रही हैं। साथ ही तमाम राजनीतिक दलों की सहकारिता समितियों-कॉ-ओपरेटिव पर पकड़ मजबूत है। महाराष्ट्र में शरद पवार की एनसीपी की चीनी मिलों पर पकड़ भी लंबे समय से भाजपा को नागवार लग रही है। सहकारिता आंदोलन की खूबसूरती और मजबूती उसका विकेंद्रित स्वरूप है—जिसे इस मंत्रालय के तहत नष्ट करने की कोशिश की गई है। शायद यही वजह है कि इसकी कमान गृह मंत्री को सौंपी गई है—सारी जानकारी, सारे स्रोत एक केंद्र में जाएं और वहां से ही ऑपरेशन को अंजाम दिया जाए।

सरकार की इस तैयारी और आरएसएस की रणनीति-दोनों देश के विविधता और विकेंद्रीयकरण के प्रतीक सहकारिता आंदोलन को एक अलग प्रशासनिक, वैधानिक और नीतिगत ढांचे (सरकारी बयान) में बांधने और रेगुलेट करने की है।

मोदी सरकार की तरफ से जो जानकारी सार्वजनिक की गई है उसके मुताबिक यह मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए कारोबार में आसानी के लिए तमाम प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित करने औऱ बहु-राज्य सहकारी समितियों का विकास सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा। इसकी तैयारी वित्त मंत्री निर्मला सीमारण ने अपने बजट भाषण में ही कर दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था, सहकारी समितियों के लिए कारोबार करना आसान बनाने के उद्देश्य से मैं उनके लिए एक अलग प्रशासनिक ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव करती हूं।

इस नये मंत्रालय की तैयारी अपने चिरपरिचित अंदाज में मोदी सरकार ने पूरे गुपचुप तौर से की। और फिर सहकार से समृद्धि  के स्लोगन के साथ पेश कर दिया। इस बारे में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने जो ट्वीट किया, उससे कई चिंताजनक पहलुओं पर विचार करना जरूरी हो उठाता है। सीताराम येचुरी ने सवाल उठाया कि अभी तक कोऑपरेटिव सोसाएटीज राज्य सरकारों के अंतर्गत आती है, संविधान के 7वें शिड्यूल के मुताबिक, राज्य सरकारों के तहत चलती हैं। ऐसे में यह नया मंत्रालय भारत के संघीय ढांचे (फेडरल स्ट्रचर) को नष्ट करेगा। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि देश के सार्जिनक क्षेत्र के बैंकों को लूटने और वहां से पूंजीपतियों के भयानक ऋण देने के बाद अब वे देश भर में फैले सहकारी बैंकों को लूटने की तैयारी कर रहे हैं।

Why a new Cooperation Ministry PM Modi?
Cooperative Societies is a State Subject in Constitution’s 7th Schedule. Yet another assault on federalism.
After looting PSU banks giving huge loans to cronies
now targeting deposits in cooperative banks across the country for more loot.

— Sitaram Yechury (@SitaramYechury) July 7, 2021

इस बात की आशंका है कि आने वाले दिनों में यह मंत्रालय विविध और व्यापक सहकारिता आंदोलन को एक तरह के विचारों की दिशा में काम करने के लिए बाध्य करेगा। सहकार भारती का लक्ष्य भी यही है—वह सहकारिता आंदोलन में गड़बड़ियों को ठीक करने की जो बात करते हैं। 

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

इसे भी पढ़ें : मोदी मंत्रिमंडल फेरबदलः चुनावी तीर के साथ नाकामी छुपाने के लिए मेकअप

RSS
BJP
modi cabinet
modi cabinet reshuffle
cabinet minister
Union Minister of State
Electoral politics
UP ELections 2022
gujrat election 2022
karnataka
caste equation
modi sarkar
Modi government

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़

कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License