NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मुसलमानों के जनसंहार का ख़तरा और भारत गणराज्य
देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
अजय सिंह
25 Jan 2022
genocide
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार: Aljazeera

देश के संविधान में घोषित लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष भारत गणराज्य क्या अब ‘कट्टर हिटलरी हिंदू राष्ट्र राज्य’ और ‘मुस्लिम जनसंहार (जेनोसाइड) का गणराज्य’ बनने जा रहा है? लेखक-विचारक आनंद तेलतुंबडे ने जिस तरह 2018 में ‘रिपब्लिक ऑफ़ कास्ट’ (जाति का गणराज्य) नामक किताब लिखी थी, क्या उसी तरह अब ‘रिपब्लिक ऑफ़ जेनोसाइड’ (जनसंहार का गणराज्य) शीर्षक से किताब लिखने का वक़्त आ गया है?

भारत के गणराज्य बनने और संविधान लागू होने के 72 साल बाद इन सवालों से हमें रूबरू होना पड़ रहा है। यह गहरी विडंबना है कि इस बार का गणतंत्र दिवस यह ‘तोहफ़ा’ लेकर आया है।

देश में मुसलमानों के जनसंहार या क़त्ल-ए-आम का ख़तरा वाक़ई गंभीर है, और इसे लेकर देश-विदेश में चेतावनियां दी जाने लगी हैं। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। क्योंकि जो शुरुआती संकेत मिल रहे हैं, उनसे पता चलता है कि हिंदू जनमानस में लंबे समय से पैठ जमाये मुस्लिम-घृणा को अब मुसलमानों का जनसंहार करने की संभावना और औचित्य तक पहुंचा दिया गया है—बेहद डरावने और घृणास्पद ढंग से।

दिसंबर 2021 में हरिद्वार में जो तथाकथित धर्म संसद हुई, जिसमें मुसलमानों का जनसंहार करने की खुली अपील जारी की गयी, उसे और उसके बाद की मुस्लिम-विरोधी घटनाओं को केंद्र सरकार और भाजपा-शासित राज्य सरकारों की शह साफ़-साफ़ दिखायी दे रही है। प्रधानमंत्री ने मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम करने की सार्वजनिक अपील पर एक लफ़्ज तक नहीं कहा। जिन लोगों ने य़ह अपील जारी की, उनके ख़िलाफ़ गंभीर दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई।

केंद्र में क़रीब आठ सालों से कट्टर हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और कट्टर हिंदुत्ववादी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। यह हिंदुत्ववाद अपने भीतर फ़ासीवाद को समेटे हुए है और इस्लाम धर्म व मुसलमान इसके मुख्य निशाने पर हैं।

हरिद्वार के जमावड़े के कुछ दिन बाद पत्रकार व टेलीविज़न प्रस्तुतकर्ता करन थापर ने डिजिटल समाचार माध्यम ‘द वायर’ के लिए दो ख़ास व्यक्तियों से बातचीत की। इनमें से एक थे, हिंदी फ़िल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह। और दूसरे थे, अमेरिकी संस्था ‘जेनोसाइड वाच’ के संस्थापक ग्रेगरी स्टेनटन। यह संस्था दुनिया भर में जनसंहारों पर नज़र रखती है और भावी जनसंहारों के बारे में चेतावनियां देती है।

इसे भी पढ़ें :   घर वापसी से नरसंहार तक भारत का सफ़र

करन थापर से बातचीत में नसीरुद्दीन शाह ने इस बात पर गहरी निराशा जतायी कि हरिद्वार घोषणा के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की और वह पूरी तरह इस मसले पर ख़ामोश रहे। नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि मुसलमानों का जनसंहार करने की सार्वजनिक घोषणा के प्रति मोदी की चुप्पी से लगता है कि वह इसका समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से मुसलमानों में गहरा ख़ौफ व असुरक्षा का भाव पैदा हो गया है, और इससे गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।

ग्रेगरी स्टेनटन ने करन थापर से बातचीत में बहुत साफ़ लहजे में कहाः ‘हम चेतावनी दे रहे हैं कि भारत में मुसलमानों का क़त्ल-ए-आम कभी भी शुरू हो सकता है।’ उन्होने कहा कि भारतीय राज्य असम व भारत के हिस्से वाले कश्मीर में मुसलमानों के जनसंहार के शुरुआती लक्षण और प्रक्रियाएं दिखायी दे रही हैं।

ग्रेगरी स्टेनटन का कहना था कि 2019 में जम्मू-कश्मीर में संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बनाने का साफ़ मक़सद था, मुसलमानों को निशाना बनाना। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के मुताबिक देश धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है, यह हिंदू राष्ट्र नहीं है, हालांकि इसे हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश हो रही है, और यह संविधान-विरोधी क़दम है।

मुश्किल यह है कि मुसलमानों का जनसंहार करने की अपील का किसी भी विपक्षी राजनीतिक पार्टी ने—वाम को छोड़कर—न तो विरोध किया, न निंदा की, न इसके विरोध में जन कार्रवाई की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आदि—सभी पार्टियां इस मुद्दे पर पूरी तरह ख़ामोश रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह! वाम को छोड़कर बाक़ी सभी को हिंदुत्ववाद किसी-न-किसी रूप में भाता है, और इसीलिए वे मुसलमानों के जनसंहार के गंभीर ख़तरे की तरफ़ से उदासीन हैं।

(लेखक कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

इसे भी पढ़ें: हिंदुत्व नहीं, बल्कि नए दृष्टिकोण वाला सामाजिक विज्ञान ही दिमाग को उपनिवेश से मुक्त कर सकता है

Gregory Stanton
genocide
Hindutva
Narendra modi
Amit Shah
BJP
Muslims
RSS
Ghar Wapsi

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा


बाकी खबरें

  • workers
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: धीमी मौत मर रहा है भगवान कृष्ण को संवारने-सजाने वाला मथुरा-वृंदावन का उद्योग
    07 Feb 2022
    हिंदुत्व की उच्च डेसिबल की राजनीति हिंदू और मुस्लिम समुदायों से आने वाले कारीगरों, व्यापारियों और निर्माताओं की आजीविका को बचाने में विफल रही है।
  • yogi and amit shah
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा को चुनावों में भगवान और मुसलमान का ही सहारा
    07 Feb 2022
    ख़बरों की इस भाग दौड़ में ख़बरों का मर्म छूट जाता है। इस हफ़्ते की कुछ ख़ास ख़बरें लेकर आए हैं अनिल जैन, जिसमें राम जी की जाति से लेकर केजरीवाल का मोदी मॉडल तक शामिल है। 
  • Lata Mangeshkar
    नम्रता जोशी
    लता मंगेशकर की उपलब्धियों का भला कभी कोई विदाई गीत बन सकता है?
    07 Feb 2022
    संगीत और फ़िल्म निर्माण में स्वर्ण युग के सबसे बड़े नुमाइंदों में से एक लता मंगेशकर का निधन असल में वक़्त के उस बेरहम और अटूट सिलसिले का एक दुखद संकेत है, जो अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन चुके…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक महीने बाद कोरोना के एक लाख से कम नए मामले सामने आए  
    07 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 83,876 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.62 फ़ीसदी यानी 11 लाख 8 हज़ार 938 हो गयी है।
  • MGNREGA
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बजट 2022: गांव और किसान के प्रति सरकार की खटकने वाली अनदेखी
    07 Feb 2022
    कोविड-19 के इस भयानक दौर में यह आशा की जा रही थी कि सरकार न केवल मनरेगा को ज्यादा मजबूती देगी, बल्कि शहरी इलाकों के लिए भी कोई ऐसी ही योजना लाई जाएगी। विगत वित्तीय वर्ष के संशोधित आकलन की तुलना में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License