NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना से पहले हाइवे पर भूख-प्यास और निमोनिया से मर जायेंगे ये बिहारी मज़दूर
बिहार सरकार ने 26 मार्च को 100 करोड़ रुपये की घोषणा इन मज़दूरों की मदद के लिए भी जारी की थी, मगर इन मजदूरों की मदद के लिए कहीं कैंप खुले हों, ऐसी जानकारी नहीं मिलती।
पुष्यमित्र
28 Mar 2020
 बिहारी मजदूर

इसी मार्च महीने की शुरुआत में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि चांद पर भी नौकरी निकल जाये तो बिहारी वहां पहुंच जायेंगे। उससे दो-तीन दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान मंडल में बयान दिया था कि बिहार अपने हुनर से बाहर जाकर कमाते हैं, पलायन को शर्म की बात नहीं माना जाना चाहिए।

मगर अभी यह महीना बीता भी नहीं है कि देश के अलग-अलग इलाकों में हजारों की संख्या में बिहारी मजदूर सड़कों पर लॉंग मार्च करते नजर आ रहे हैं। वह भी कोरोना के उस दौर में जब पूरा देश लॉक डॉउन है, देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी लोगों को अनिवार्य रूप से घरों में बंद रहने का निर्देश दिया है, सड़कों पर पुलिस हर आने-जाने वाले पर डंडा बरसा रही है। मगर फिर हर सड़क पर सिर पर झोला और हाथ में छोटे बच्चों को पकड़े ये निरीह लोग निकल पड़े हैं और किसी सूरत में अपने घर लौट आना चाहते हैं।

27 मार्च, 2020 की रात दिल्ली से नोएडा के रास्ते पर बीस हजार से अधिक ऐसे ही लोग सड़कों पर सपरिवार आगे बढ़ रहे थे। ऐन उसी वक्त बारिश भी शुरू हो गयी। उस इलाके में कहीं सिर छिपाने के लिए जगह नहीं थी। पता नहीं इन लोगों की रात कहां गुजरी होगी। उस रोज दिन भर सोशल मीडिया पर अपील आती रही, फलां जहां 200 बिहारी मजदूर फंसे हैं, फलां जहां 250 मजदूर। ये सूचनाएं त्रिवेंद्रम से लेकर पंजाब के होशियारपुर तक की थी। इन लोगों ने कागज की पर्चियों पर अपने नाम और नंबर लिखकर कहीं भेजा था। फिर उन लोगों ने सोशल मीडिया पर डाला। कुछ पत्रकारों और खास कर बिहार के विपक्षी दल के नेता तेजस्वी यादव ने इन सूचियों को संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और बड़े नेताओं को रिट्वीट किया। खबर है कि इस अभियान से कुछ मजदूरों को मदद भी मिली।

मगर इस बीच सबसे दिल तोड़ देने वाला रवैया बिहार सरकार का रहा। सरकार ने 26 मार्च को एक हेल्पलाइन नंबर, दिल्ली स्थित बिहार भवन के नंबर और कुछ और अधिकारियों के नंबर जारी किये थे कि देश में कहीं भी बिहार के मजदूरों को मदद की जरूरत हो तो कृपया इन नंबरों पर संपर्क करें। किसी को परेशान नहीं होने दिया जायेगा। मगर इनमें से एक भी नंबर पर 27 मार्च के पूरे दिन किसी का संपर्क नहीं हो पाया। बिहार सरकार ने 26 मार्च को 100 करोड़ रुपये की घोषणा इन मजदूरों की मदद के लिए भी जारी की थी, मगर इन मजदूरों की मदद के लिए कहीं कैंप खुले हों, ऐसी जानकारी नहीं मिलती।

फरवरी माह में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंस, मुंबई ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक बिहार के हर दूसरे घर से कोई न कोई व्यक्ति रोजी-रोजगार के लिए राज्य से बाहर पलायन करता है। इनमें से 90 फीसदी लोग अकुशल मजदूर का काम करते हैं। अभी राज्य की आबादी 11 करोड़ है, इस लिहाज से देखा जाये तो बिहार के एक करोड़ अकुशल मजदूर देश के अलग-अलग कोने में रहकर अकुशल मजदूरों का काम करते हैं।

यह लॉक डाउन उन सबों के लिए आफत बनकर आयी है। उनके काम के ठिकाने बंद हो चुके हैं, किराया न मिलने के डर से उनके मकान मालिकों ने उन्हें घरों से निकाल दिया है। महानगरों में उनके लिए कहीं कोई मदद नहीं है। अब सड़क ही उनका सहारा है और वे अपने कमजोर पांवों से हजारों किमी की दूरी नाप लेने का प्रण लेकर निकल चुके हैं।

लॉक डाउन से पहले स्पेशल ट्रेन चलाकर उन्हें बिहार भेजा गया। उस वक्त तक अनुमानतः लगभग 80 हजार से एक लाख मजदूर बिहार पहुंचे थे। सरकार के मुताबिक स्टेशन पर उनकी स्क्रीनिंग हुई, फिर उन्हें घर भेज दिया गया। अब जो बच गये वे पैदल घर जाने के लिए निकल पड़े हैं। न खाने का ठिकाना न सोने का। साथ में परिवार भी है। इनके चेहरों पर कोरोना का कोई भय नहीं, सिर्फ घर पहुंचने की आतुरता है। जगह-जगह पुलिस द्वारा इन्हें परेशान किये जाने, पीटने की भी खबरें आ रही हैं।

दुर्भाग्यवश, जो लोग किसी तरह बिहार पहुंच भी गये हैं, उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है। कोरोना के खौफ की वजह से उनके गांव के लोग ही उन्हें गांव में घुसने से रोक रहे हैं। वे कह रहे हैं, पहले कोरोना मुक्त होने का सर्टिफिकेट लेकर आयें, तब उन्हें गांव घुसने देंगे। बेबस और लाचार होकर वे लोग स्थानीय अस्पतालों के आगे भीड़ लगा रहे हैं।

24 मार्च, 2020 को दरभंगा के डीएमसीएच अस्पताल के सामने ऐसे ही सैकड़ों मजदूरों की कतार नजर आयी। वे कोरोना की जांच कराना चाहते थे। उन्हें शायद यह जानकारी नहीं थी कि डीएमसीएच में अभी तक कोरोना की जांच शुरू नहीं हुई है। यह भी कि बिहार सरकार के पास इतने टेस्ट किट नहीं हैं कि वह लाखों मजदूरों की जांच कर सके।

जो लोग चोरी छिपे किसी तरह अपने गांव घुस पा रहे हैं, उन्हें गांव के लोग पुलिस बुलवा कर गांव से भगा रहे हैं। कई मजदूरों की खेतों में छिपकर रहने की भी खबरें हैं। बिहार सरकार के गृह विभाग ने 22 मार्च, 2020 को एक पत्र जारी कर राज्य के सभी जिला अधिकारियों को उनके इलाके के सभी गांवों में इन मजदूरों के लिए आइसोलेशन सेंटर खोलने कहा था, ताकि जिन मजदूरों को परेशानी हो, वे वहां 14-15 दिनों के लिए ठहर सकें।

मगर स्कूल भवनों की लचर हालत, वहां पानी और शौचालय के अभाव और प्रशासन द्वारा इनिशियेटिव नहीं लेने की वजह से ऐसे बहुत कम केंद्र खुल सके। लिहाजा अलग-अलग राज्यों से लौटने वाले मजदूरों की समस्या जस की तस रह गयी।

देश में कोरोना के प्रसार गंभीर होने की बात कही जा रही है, 26 मार्च तक रोज 60-70 केस मिलते थे, 27 मार्च को एक ही दिन में 140 से अधिक केस सामने आये हैं। इस भीषण स्थिति के बीच पूरे देश में लाखों की संख्या में बिहार के मजदूर सपरिवार सड़कों पर हैं।

कोरोना से पहले इनके भूख-प्यास, प्रताड़ना और निमोनिया से मर जाने का खतरा है। मगर दुर्भाग्यवश इनकी मदद के लिए कोई सरकारी प्रयास प्रभावी नजर नहीं आ रहा।

COVID-19
Coronavirus
Corona Crisis
Lockdown
migrants
Migrant workers
Bihar
labor
Hunger Crisis
poverty
Daily Wage Workers
daily wages

Related Stories

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर

मनरेगा: ग्रामीण विकास मंत्रालय की उदासीनता का दंश झेलते मज़दूर, रुकी 4060 करोड़ की मज़दूरी

कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह

हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत

ग्राउंड रिपोर्ट: कम हो रहे पैदावार के बावजूद कैसे बढ़ रही है कतरनी चावल का बिक्री?

बिहारः खेग्रामस व मनरेगा मज़दूर सभा का मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन

बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!

यूपी चुनाव: बग़ैर किसी सरकारी मदद के अपने वजूद के लिए लड़तीं कोविड विधवाएं

यूपी: महामारी ने बुनकरों किया तबाह, छिने रोज़गार, सरकार से नहीं मिली कोई मदद! 


बाकी खबरें

  • Sitaram Yechury
    संदीप चक्रवर्ती
    स्वतंत्रता दिवस को कमज़ोर करने एवं हिंदू राष्ट्र को नए सिरे से आगे बढ़ाने की संघ परिवार की योजना को विफल करें: येचुरी 
    25 Feb 2022
    माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का “फोकस 5 अगस्त को देश की वास्तविक स्वतंत्रता की तारीख के रूप में बढ़ावा देने पर है।"  
  • russia ukrain
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम
    25 Feb 2022
    यूरोपीय संघ रूस पर और आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंध लगाने को सहमत। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए दो करोड़ डॉलर देने की घोषणा की।
  • ASHA Workers
    अनिल अंशुमन
    बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन
    25 Feb 2022
    आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में भी टाल मटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं ने ‘भूखे रहकर अब और नहीं करेंगी बेगारी’ का ऐलान किया है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 13 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    25 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 94 हज़ार 345 हो गयी है।
  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : अयोध्या के प्रस्तावित  सौंदर्यीकरण में छोटे व्यापारियों की नहीं है कोई जगह
    25 Feb 2022
    अयोध्या के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित लेआउट के परिणामस्वरूप दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त या उन दुकानों का ज़्यादातर हिस्सा तोड़ दिया जाएगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License