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...वह आयेंगे, हिंसा का नक़ाब पहन कर
हमारे दौर के अहम शायर और वैज्ञानिक गौहर रज़ा ने दिल्ली हिंसा के परिदृश्य में यह नज़्म (कविता) लिखी है जो इस हिंसा के पीछे की सच्चाई को रेशा रेशा उधेड़ कर हमारे सामने रख देती है। ये सब क्यों, कैसे, किसलिए हो रहा है और इसका हम-आप किस तरह मुकाबला कर सकते हैं, आप इस कविता के जरिये बखूबी जान-समझ सकते हैं।
गौहर रज़ा
25 Feb 2020
Delhi Violence

वह डरे हुए हैं-

वह डरे हुए है, बहुत डरे हुए हैं
वह हिंसा परोसने आएँगे,
क्योंकि वह बहुत सहमे हुए हैं
उनके पास,
पत्थर, आंसू गैस, गोली और जेल होगी
बस यही तो है उनके पास,
सब कुछ बेहद घिनावना और बदशक्ल
वह ये सब इस्तेमाल करेंगे
क्योंकि वह डरे हुए हैं

 

याद रहे
तुम्हारे पास नारे हैं, कविताएं हैं, कहानियां हैं
किताबें हैं, क़लम है, सड़कें हैं , गलियाँ हैं
और बलखाती हुई पगडंडियां हैं
और इन सब पर इतिहास लिखने की ताक़त है
इंद्रधनुष बिखरे रंग हैं
मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू है
कल कल बहते झरनों की गुनगुनाहट है
आवाज़ उठाने की हिम्मत है
कबीर,ख़ुसरो , मीरा, रैदास, नानक, मीर, ग़ालिब, फ़ैज़ और साहिर हैं
तुम्हारे पास स्टीव बिको, भगत सिंह,पाब्लो नरूदा, टैगोर, अम्बेडकर और गांधी हैं,
ख़ूबसूरत विचारों का एक बड़ा समन्दर है

 

याद रहे उनके पूर्वज
हिटलर, मुसोलिनी, पिनोचे, सावरकर और जनरल ज़िया जैसे भयानक हैं
उनकी झोली में,
जले हुए घर हैं
उजड़े हुए शहर,
रौंदे हुए गाँव, ज़ख़्मी खेत और पामाल खलियान हैं,
सिसकते हुए बच्चे हैं
वह जहां से गुजरते हैं,
बिलखती हुई मांओं को बेआसरा छोड़ जाते हैं

 

तुम्हारे पास मानवता की छलनी में छना हुआ अथाह ख़ज़ाना है
वह दौलत
जो पिछली नस्लों ने हमें बख़्शी है
वह दौलत
जो हम पर अगली नस्लों का उधार है
उनकी झोली लूटा हुए सरमाया, लालच, हिंसा और डर से भारी है

 

वह डरे हुए हैं, बेहद सहमे हुए हैं
इसलिए हमला करेंगे
वह आयेंगे, हिंसा का नक़ाब पहन कर
हिंसा की चादर को चीर कर देखना
लालच, नफ़रत और डर के सिवा
कुछ नहीं है वहाँ


वह आयेंगे
अपने आक़ाओं से भीख में माँगी हुई हिफ़ाज़त का वादा ले कर
क्योंकि वह डरे हुए हैं,
सहमे हुए है, बहुत सहमे हुए हैं


यक़ीन करो के उनके आक़ा
इसी लालच, नफ़रत और डर की छड़ी से
उन्हें हांकते रहे हैं
जंगली जानवरों की तरह
वह इस धरती पर बसने वाले अकेले जानवर हैं
जो अहिंसा, भाईचारे और मोहब्बत के नारों से डरते है,
मगर जब डरते हैं तो
जानवरों की तरह ही हमला करते हैं


वह तुम्हारे बीच जंगली जानवरों की तरह आएँगे
क्योंकि वह जानवरों की तरह डरे हुए हैं


उन पर तरस खाओ के वह बेहद डरे हुए हैं
वह तुम पर हमला करेंगे, क्यों कि
उन्हें अपने आक़ाओं को दिखाना है
कि वह डरे हुए नहीं हैं


उन्हें इंसान बनने में अभी
कई और सदियाँ लगेंगी

 

(दिल्ली, 24-02-2020)
Delhi Violence
CAA Protest
Anti CAA
Pro CAA
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Communal riots
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Amit Shah
BJP

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