NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
...वह आयेंगे, हिंसा का नक़ाब पहन कर
हमारे दौर के अहम शायर और वैज्ञानिक गौहर रज़ा ने दिल्ली हिंसा के परिदृश्य में यह नज़्म (कविता) लिखी है जो इस हिंसा के पीछे की सच्चाई को रेशा रेशा उधेड़ कर हमारे सामने रख देती है। ये सब क्यों, कैसे, किसलिए हो रहा है और इसका हम-आप किस तरह मुकाबला कर सकते हैं, आप इस कविता के जरिये बखूबी जान-समझ सकते हैं।
गौहर रज़ा
25 Feb 2020
Delhi Violence

वह डरे हुए हैं-

वह डरे हुए है, बहुत डरे हुए हैं
वह हिंसा परोसने आएँगे,
क्योंकि वह बहुत सहमे हुए हैं
उनके पास,
पत्थर, आंसू गैस, गोली और जेल होगी
बस यही तो है उनके पास,
सब कुछ बेहद घिनावना और बदशक्ल
वह ये सब इस्तेमाल करेंगे
क्योंकि वह डरे हुए हैं

 

याद रहे
तुम्हारे पास नारे हैं, कविताएं हैं, कहानियां हैं
किताबें हैं, क़लम है, सड़कें हैं , गलियाँ हैं
और बलखाती हुई पगडंडियां हैं
और इन सब पर इतिहास लिखने की ताक़त है
इंद्रधनुष बिखरे रंग हैं
मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू है
कल कल बहते झरनों की गुनगुनाहट है
आवाज़ उठाने की हिम्मत है
कबीर,ख़ुसरो , मीरा, रैदास, नानक, मीर, ग़ालिब, फ़ैज़ और साहिर हैं
तुम्हारे पास स्टीव बिको, भगत सिंह,पाब्लो नरूदा, टैगोर, अम्बेडकर और गांधी हैं,
ख़ूबसूरत विचारों का एक बड़ा समन्दर है

 

याद रहे उनके पूर्वज
हिटलर, मुसोलिनी, पिनोचे, सावरकर और जनरल ज़िया जैसे भयानक हैं
उनकी झोली में,
जले हुए घर हैं
उजड़े हुए शहर,
रौंदे हुए गाँव, ज़ख़्मी खेत और पामाल खलियान हैं,
सिसकते हुए बच्चे हैं
वह जहां से गुजरते हैं,
बिलखती हुई मांओं को बेआसरा छोड़ जाते हैं

 

तुम्हारे पास मानवता की छलनी में छना हुआ अथाह ख़ज़ाना है
वह दौलत
जो पिछली नस्लों ने हमें बख़्शी है
वह दौलत
जो हम पर अगली नस्लों का उधार है
उनकी झोली लूटा हुए सरमाया, लालच, हिंसा और डर से भारी है

 

वह डरे हुए हैं, बेहद सहमे हुए हैं
इसलिए हमला करेंगे
वह आयेंगे, हिंसा का नक़ाब पहन कर
हिंसा की चादर को चीर कर देखना
लालच, नफ़रत और डर के सिवा
कुछ नहीं है वहाँ


वह आयेंगे
अपने आक़ाओं से भीख में माँगी हुई हिफ़ाज़त का वादा ले कर
क्योंकि वह डरे हुए हैं,
सहमे हुए है, बहुत सहमे हुए हैं


यक़ीन करो के उनके आक़ा
इसी लालच, नफ़रत और डर की छड़ी से
उन्हें हांकते रहे हैं
जंगली जानवरों की तरह
वह इस धरती पर बसने वाले अकेले जानवर हैं
जो अहिंसा, भाईचारे और मोहब्बत के नारों से डरते है,
मगर जब डरते हैं तो
जानवरों की तरह ही हमला करते हैं


वह तुम्हारे बीच जंगली जानवरों की तरह आएँगे
क्योंकि वह जानवरों की तरह डरे हुए हैं


उन पर तरस खाओ के वह बेहद डरे हुए हैं
वह तुम पर हमला करेंगे, क्यों कि
उन्हें अपने आक़ाओं को दिखाना है
कि वह डरे हुए नहीं हैं


उन्हें इंसान बनने में अभी
कई और सदियाँ लगेंगी

 

(दिल्ली, 24-02-2020)
Delhi Violence
CAA Protest
Anti CAA
Pro CAA
Hindu-Muslim Riots
Communal riots
communal violence
delhi police
Amit Shah
BJP

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है


बाकी खबरें

  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    कड़ी कार्रवाई के बावजूद सूडान में सैन्य तख़्तापलट का विरोध जारी
    18 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ती हिंसा के बावजूद अमेरिका और उसके क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र भी बातचीत का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, सड़कों पर "कोई बातचीत नहीं, कोई समझौता…
  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License