NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
तीन साल हेल्थ इंश्युरेंस के पैसे भरे, बीमार हुए तो एचडीएफसी अर्गो कंपनी ने दिखा दिया ठेंगा
शैलकुमारी फूट फूटकर रोते हुए बताती हैं कि कंपनी वालों ने उन्हें बर्बाद कर दिया। वो बताती हैं कि-“हर साल साढ़े सात हजार रुपये मेरा भाई कंपनी की जेब में भरता है और कंपनी ने गाढ़े वक्त में हमें ठेंगा दिया दिया।”
सुशील मानव
09 Jan 2021
शैलकुमारी

2 साल पहले जौनपुर निवासी शैलकुमारी ने भाई को राखी बाँधी तो भाई ने राखी बँधाई में बहन को ‘अपोलो म्युनिच’ का हेल्थ इंश्युरेंस दे दिया। तब से भाई ने दो बार उस हेल्थ इंश्युरेंस का रिन्युवल भी करवाया। वहीं इस साल अपोलो म्युनिच को एचडीएफसी अर्गो ने खरीद लिया। इस तरह शैलकुमारी अपोलो म्युनिच से एचडीएफसी अर्गो की कस्टमर बन गईं। पिछले तीन साल में शैलकुमारी कभी बीमार न पड़ी तो उन्हें उस हेल्थ इंश्युरेंस की ज़रूरत ही न पड़ी। लेकिन इस साल कोरोना-काल में जब वो बीमार पड़ गई तो उन्होंने कर्जा लेकर अपना इलाज करवाया ये सोचकर कि भाई की वो राखी बँधाई हेल्थ इंश्युरेंस उनके मुसीबत में काम आएगा। लेकिन जब उन्होंने अपने हेल्थ इंश्युरेंस कंपनी की ओर सहायता के लिए देखा तो कंपनी ने उन्हें ठेंगा दिखा दिया।

image

शैलकुमारी फूट फूटकर रोते हुए बताती हैं कि कंपनी वालों ने उन्हें बर्बाद कर दिया। वो बताती हैं कि-“हर साल साढ़े सात हजार रुपये मेरा भाई कंपनी की जेब में भरता है और कंपनी ने गाढ़े वक्त में हमें ठेंगा दिया दिया।”

शैल कुमारी तमाम अस्पतालों के पर्चे दिखाते हुए बताती हैं कि पेट के ऊपर एक छोटी सी फुन्सी हो गई। और उसी फुन्सी के वेदन पूरे पेट में अचानक असहनीय दर्द हुआ तो 11 जुलाई कोवो बेलवार स्थित सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दवा लेने गई। दो खुराक दवा देने के साथ ही उनसे कहा गया कि आराम न मिले तो किसी प्राइवेट अस्पताल में दिखा लो। अगले दिन यानी 12 जुलाई को शैलकुमारी सुजानगंज स्थित ‘सुशीला हॉस्पिटल’ में डॉ शुचिता गुप्ता को दिखाकर दवा ले आई। डॉ. शुचिता गुप्ता ने अल्ट्रासाउंड करवाया और दवाई दी।

शैलकुमारी आगे बताती हैं कि –“दो दिन दवाई खायी लेकिन आराम मिलने के बजाय तबीयत और बिगड़ती चली गई। 15 जुलाई की रात तबीयत ज़्यादा खराब हो गई तो पति आनंद, देवरानी और देवर मुझे अचेतावस्था में निजी वाहन से लेकर इलाहाबाद आए। यहां फूलपुर तहसील में मेरा मायका है। वहां से भाई को लेकर मुझे इलाहाबाद ले जाया गया। राते के 10-11 बजे कई निजी अस्पताल के दरवाजे पर गये सबने कोरोना टेस्ट का सर्टिफिकेट मांगकर लौटा दिया। कोरोना काल में रात में कोई लेने को तैयार नहीं था। तब इलाहाबाद के धोबीघाट स्थित अमन अस्पताल गई। वहां मुझे रात में 1 बजे भर्ती किया गया। तमाम जांच हुई। डॉक्टर एम आई ख़ान जो कि इलाहाबाद  में पेट के अच्छे सर्जन में गिने जाते हैं ने मेरे भाई और पति को बताया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। पेट में इन्फेक्शन हो गया है पस भर गया है। अतः ऑपरेशन करके पस बाहर निकालना पड़ेगा।”

शैलकुमारी के पति आनंद कुमार बताते हैं कि –“16 जुलाई को लगभग 5 घंटे का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन करके लगभग 6 इंच पेट फाड़ा गया। उससे पस निकाला गया। डॉक्टर ने मुझसे कहा कि दिन में दो बार एंटी प्वाइजन इंजेक्शन देना पड़ेगा। इंजेक्शन महंगा है अफोर्ड कर लोगे कि नहीं।”

image

आनंद कुमार आगे बताते हैं कि –“मेरे पास उस समय कोई और चारा नहीं था। मेरे पास कोई ज़मीन जायदाद या प्रोपर्टी नहीं है। मैं गरीब आदमी हूँ। बीबी के गहने गिरवी रखे, ब्याज पर पैसे लिए, दोस्तों से उधार लिया, कुछ ससुराल पक्ष से मदद मिली। कुल मिलाकर अस्पताल में एक सप्ताह के इलाज का बिल आया 1 लाख 19 हजार रुपये।

कैशलेस पेमेंट के सवाल पर शैलकुमारी के भाई प्रवीण कुमार बताते हैं कि –“हमने अस्पताल मैनेजमेंट से बात की थी इस बाबत। पता चला कि अमन हॉस्पिटल का एचडीएफसी अर्गो के साथ कोई कंटैक्ट नहीं है। तो मैंने सोचा कि कैशलेस नहीं हो रहा न सही, बाद में रिइम्बर्समेंट क्लेम से इलाज में खर्च हो रहे रुपये इंश्युरेंस कंपनी से मिल जाएंगे तो जिनसे उधार या ब्याज पर पैसा लिया जा रहा है उन्हें चुका दिया जायेगा।”

प्रवीण कुमार आगे बताते हैं कि -“हमने अस्पताल से रिलीज होते ही रिइम्बर्समेंट क्लेम के लिए सिविल लाइंस स्थित कंपनी के ब्रांच गये तो वहां कहा गया कि सब कुछ ऑनलाइन होगा। डॉक्युमेंट ऑनलाइन भेजिए। सभी डॉक्टुमेंट जिसमें अस्पताल का डिस्चार्ज कार्ड,मेडिकल बिल,इलाज करने वाले डॉक्टर का लेटर हेड पर इलाज का सर्टिफिकेशन,अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, मेडीकेशन/ ट्रीटमेंट चार्ट, वाइटल साइन चार्ट, डॉक्टर्स प्रोग्रेस नोट्स सब अटैच करके भेज दिया। कंपनी की ओर सेक्लेम नंबर- RR-HS20-1199643 जेनरेट कर दिया गया।

प्रवीण कुमार के मुताबिक इंश्युरेंस कंपनी के लोग 3 सितंबर को वेरीफिकेशन के लिए घर आये मरीज से बात की, सारे मेडिकल डॉक्युमेंट्स देखे तस्वीरें खींचकर ले गये। जाते जाते वेरीफिकेशन करने वाले लोगों ने कहा भी कि आपका केस जेनुइन है, बहुत जल्द ही आपके क्लेम को मंजूरी मिल जाएगी। फिर उनके कुछ लोग अस्पताल भी गये। लेकिन पहले कोरोना के नाम पर लंबे समय तक प्रोसेसिंग का झांसा देकर कंपनी ने टरकाया फिर 2 अक्टूबर को कंपनी का ईमेल आया कि आपका क्लेम रिजेक्ट कर दिया है, कारण में बताया गया ‘मिसरिप्रेजेंटेशन ऑफ मटेरियल फैक्ट’ । हमने बहुत जानने की कोशिश की क्या फैक्ट गलत झूठा था लेकिन उन्होंने हमें कुछ भी डिटेल नहीं दिया। हम कस्टमर केयर से लेकर इलाहाबाद सिविल लाइंस स्थित ऑफिस तक गये पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई न कोई डिटेल दिया गया कि क्यों हमारा बिल रद्द कर दिया गया। जबकि हमने उनके द्वारा मांगे गए हर एक कागज को जमा किया था।”

इस बाबत जब हमने शैलकुमारी का इलाज करने वाले सर्जन डॉक्टर एम. आई. ख़ान से बात की तो उन्होंने बताया कि-“हां मैंने जौनपुर निवासी शैलकुमारी का ट्रीटमेंट किया था। जब वो अमन अस्पताल लायी गई थी तो उनकी तबीयत बहुत ज़्यादा खराब थी। थोड़ा और लेट हो जाता तो जान बचानी मुश्किल हो जाती। डॉ. खान बताते हैं कि शैलकुमारी के पेट में बायीं तरफ नेकरिटाइजिंग फसाईटिस (Necrotising fasciitis)हो गया था।

image

डॉ. खान इंश्युरेंस कंपनी के वेरीफिकेशन के बाबत बताते हैं कि –“एचडीएफसी अर्गो से कुछ लोग आये थे। वो लोग जिस कमरे में शैल कुमारी एडमिट थी उसकी तस्वीर तक खींचकर ले गये। पेमेंट से लेकर ट्रीटमेंट का सारा डॉक्युमेंट मांगा, लिया। मुझसे मेरा मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा, मेरी सर्टिफिकेट तक कीफोटोमोबाइल में क्लिक करके ले गये।”

डॉ. खान से बात करने के बाद जब हमने गूगल पर Necrotising fasciitis सर्च किया तो पाया ये रेयर बैक्टीरियल इन्फेक्शन की बीमारी है, जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है और मौत का कारण बनता है। इस बीमारी में मृत्युदर 32.2 प्रतिशत है। ये बीमारी पेट के ऊतकों पर हमला करती है। ‘सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ की साइट पर साफ लिखा है कि इस बीमारी के इलाज के लिए एक्युरेट डायग्नोसिस, रैपिड एंटीबॉयोटिक ट्रीटमेंट और तत्काल सर्जरी बहुत ज़रूरी है इन्फेक्शन को फैलने से रोकने के लिए।

वहीं जब हम एचडीएफसी अर्गो के सिविल लाइंस स्थित ऑफिस गये तो वहां हमें बताया गया कि वहां पर सिर्फ़ पॉलिसी से जुड़े मुद्दे देखे जाते हैं। क्लेम का काम दिल्ली ऑफिस से हैंडिल किया जाता है। जब हमने शैलकुमारी के क्लेम की डिटेल जाननी चाही तो हमसे कहा गया कि इसकी जानकारी उन लोगो के पास नहीं होती है।

वहीं कंपनी के सिविल लाइंस ब्रांच में बैठे कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि 1 लाख के ऊपर जिनका भी बिल होता है उनका पेमेंट करने में कंपनी ऐसे ही आनाकानी करती है, और फिर कोई न कोई बहाना बनाकर चलता कर देती है। रिइम्बर्समेंट का केस लेकर आये एक एजेंट को वहां के ऑफिसर ने हमारे सामने ही कहा कि क्या कर रहे हो। कोरोना में पॉलिसी एक भी नहीं ला रहे बस क्लेम लेकर चले आ रहे हो ऐसे कैसे काम चलेगा। 

जौनपुर निवासी आनंद शुक्ला मुंबई में सिरोया ज्वैलर्स में काम करते थे, 15 हजार रुपये मासिक के वेतन पर। लेकिन कोरोना महामारी में उन्हें भी व्यवस्था ने मार भगाया। तब से 10 महीने हो गये हैं वो सुजानगंज बेल्वार स्थित अपने घर पर बेरोजगारी के दिन काट रहे हैं। उन्होंने जिन जिन लोगो से पैसा उधार लिया था वो सब अब उनका बाल नोच रहे हैं। शैलकुमारी आनंद शुक्ला के दो बच्चे हैं, बूढ़े मां-बाप है। आमदनी को कोई जरिया नहीं है और बीबी की बीमारी ने डेढ़ लाख का कर्ज़दार बना दिया है, ब्याज जोड़कर कर्ज़ 2 लाख के करीब हो गया है। 

Health Insurance
public health insurance
HDFC
HDFC ERGO
HDFC ERGO General Insurance Company

Related Stories

महामारी भारत में अपर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवरेज को उजागर करती है

हेल्थ बीमा होने के बावजूद अगर इलाज का खर्च जेब से करना पड़े तो बीमा लेने का क्या फ़ायदा? 


बाकी खबरें

  • Bank union strike
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बैंक यूनियनों का ‘निजीकरण’ के ख़िलाफ़ दो दिन की हड़ताल का ऐलान
    06 Dec 2021
    दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने सरकार को 16 व 17 दिसंबर की हड़ताल का नोटिस दे दिया है। 
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: स्वास्थ्य विभाग का नया ‘संकल्प पत्र, सरकारी ब्लड बैंकों से नहीं मिलेगा निःशुल्क ख़ून, स्वास्थ्य जन संगठनों ने किया विरोध
    06 Dec 2021
    राजधानी रांची स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में लोगों को पैसों से ब्लड मिल रहा है। बीपीएल व आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ किसी भी गरीब-लाचार अथवा धनवान व्यक्ति को समान रूप से प्रदेश के किसी भी सरकारी…
  • Babasaheb
    बादल सरोज
    65 साल बाद भी जीवंत और प्रासंगिक बाबासाहब
    06 Dec 2021
    जाति के बारे में उनका दृष्टिकोण सर्वथा वैज्ञानिक था। उन्होंने जाति व्यवस्था का तब तक का सबसे उन्नत विश्लेषण किया था। वे अपने जमाने के बड़े नेताओं में अकेले थे, जिसने जाति व्यवस्था के ध्वंस यानि…
  • vinod dua
    शंभूनाथ शुक्ल
    मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!
    06 Dec 2021
    हम लोगों ने जब पत्रकारिता शुरू की थी, तब इमरजेंसी के दिन थे। लोगों में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रति ग़ुस्सा था और लोग आंदोलन कर रहे थे। किंतु धार्मिक आधार पर बँटवारे की कोई बात नहीं थी। कोई…
  • india and bangladesh
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत-बांग्लादेश संबंध का मौजूदा दौर
    06 Dec 2021
    नई दिल्ली के मौन प्रोत्साहन से प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की घरेलू राजनीति को उनके सत्तावादी शासन के मामले में निर्णायक रूप से फ़ायदा हुआ है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License