NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
देशभर में किसानों की तिरंगा यात्रा, प्रधानमंत्री के भाषण से निराश
किसानों को उम्मीद थी कि जब प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से भाषण देंगे तो उनके बारे में भी कुछ बोलेंगे लेकिन वो इस मामले पर कुछ नहीं बोले। जिससे आंदोलनरत किसान मायूस हुए। हालांकि उन्होंने अपना जज़्बा कायम रखते हुए देश भर में तिरंगा यात्राएं निकालीं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Aug 2021
देशभर में किसानों की तिरंगा यात्रा

किसान आंदोलन अब नौवें महीने में प्रवेश होने जा रहा है। आंदोलन के 262वें  दिन यानी देश की स्वतंत्रता दिवस पर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देशभर में तिरंगा यात्रा निकाली गई। वहीं देश के प्रधानमंत्री ने हर साल की तरह लालकिले की प्रचीर पर झंडारोहण किया और अपना संबोधन भी दिया। हालाँकि इस बार लालकिले की सूरत बदली हुई थी क्योंकि सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लालकिले के सामने लोहे के कंटेनर की दिवार बनवा दी थी। 

किसानों को उम्मीद थी कि जब प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से भाषण देंगे तो उनके बारे में भी कुछ बोलेंगे लेकिन वो इस मामले पर कुछ नहीं बोले। जिससे आंदोलनरत किसान मायूस हुए। हालांकि प्रधानमंत्री ने किसानों को लेकर अपने चिर परिचित अंदाज में बड़े दावे किए, जिसपर किसान संगठनों ने सवाल उठाए। वहीं पश्चिमी यूपी में बीजेपी और किसान यूनियन का टकराव हुआ। जो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक आक्रामक कर सकता है।  

किसानों ने निकालीं ‘तिरंगा यात्राएं’

भारत के इस 75वें स्वतंत्रता दिवस पर, एसकेएम ने ऐसी तिरंगा यात्राओं को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों और दिल्ली के बाहर मोर्चा स्थलों तक निकालने का आह्वान किया था और उसके आह्वान का असर भी दिखा।  

संयुक्त किसान मोर्चे ने अपने बयान में कहा कि धरना स्थलों पर भी किसानों ने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर पैदल और वाहनों पर मार्च निकाला। तमिलनाडु के किसानों का एक बड़ा समूह, जो सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं, ने सिंघु मोर्चा मार्च में हिस्सा लिया। इस तरह का मार्च हरियाणा-राजस्थान सीमा पर भी किसान कावड़ यात्रा के रूप में आयोजित किया गया, जहाँ किसान एक हाथ में अपने खेतों की मिट्टी और दूसरे हाथ में गांव का पानी लेकर जा रहे थे, जिसे शहीद स्मारक भवन में जमा किया गया। यात्रा का आयोजन टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर भी किया गया। मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी में अनोखे अंदाज में एक तिरंगा यात्रा निकाली गई। ऐसी अनेक यात्राओं में हरियाणा और पंजाब के हजारों लोग शामिल हुए। सिरसा में निकाली गई तिरंगा यात्रा में एक बेहद रंगारंग झांकी शामिल थी। 

ट्रैक्टरों पर किसानों की मशीनरी (खाद्य प्रसंस्करण मशीनों सहित) लगी हुई थी, जो महिलाओं द्वारा चरखे पर सूत कताई के साथ प्रदर्शित की गई थी। करनाल, जींद, यमुनानगर और अन्य जगहों से भी ऐसी रिपोर्ट आई हैं। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में महिला किसान शामिल हुईं।

जींद के उचाना में महिलाओं के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया और उन्होंने स्थानीय मंडी में तिरंगा फहराया। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि केन्द्र द्वारा मांगें स्वीकार किए जाने तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा कि उन्होंने पंजाब में 40 स्थानों पर ‘किसान मजदूर मुक्ति संघर्ष दिवस’ मनाया।

उन्होंने कहा कि ‘काले कानूनों’ के खिलाफ संघर्ष के दौरान मरने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए सभी ने कुछ पल का मौन रखा। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के धर्मेंद्र मलिक ने कहा, ‘‘हमने सुबह आठ बजे झंड़ा फहराया। हापुड़ से 500 मोटरसाइकिलों की ‘तिरंगा यात्रा’ स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए दोपहर करीब दो बजे गाजीपुर सीमा पर पहुंची।’’

भूतपूर्व सैनिकों ने स्वतंत्रता दिवस पर सिंघू बॉर्डर की ओर किया मार्च

पूर्व सैनिकों ने रविवार को आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सिंघू बॉर्डर की ओर मार्च किया, जहां प्रदर्शन कर रहे किसान ‘किसान मजदूर आजादी संग्राम दिवस’ मनाया। 

किसान नेता रमिंदर सिंह पटियाला ने बताया कि वरिष्ठ किसान नेता सतनाम सिंह (85) ने सिंघू बॉर्डर पर तिरंगा फहराया और इस अवसर पर कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘सतनाम सिंह ने सुबह 11 बजे तिरंगा फहराया, जिसके बाद पूर्व सैनिकों ने अपनी वर्दी में मार्च किया। जालंधर के डीएवी कॉलेज के छात्रों ने करीब डेढ़ घंटे तक ‘भांगड़ा’ किया।’’

जम्हूरी किसान सभा के महासचिव कुलवंत सिंह ने बताया कि ‘किसान मजदूर आजादी संग्राम दिवस’ देशभर में मनाया जा रहा है।

पटियाला ने कहा, ‘‘पूर्व सैनिकों ने केएफसी रेस्त्रां से लेकर सिंघू बॉर्डर में मुख्य मंच तक मार्च किया। ‘किसान मजदूर आजादी संग्राम दिवस’ देशभर में मनाया जा रहा है, जहां लोग किसानों के समर्थन में झंडे फहरा रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री के भाषण खोखले दावे: किसान

संयुक्त मोर्चे ने लालकिले से प्रधानमंत्री के भाषण को खोखला दावा बताया, उन्होंने कहा देश के छोटे और सीमांत किसानों के पक्ष में नीतियों के बारे में फिर से खोखले दावे करने के बावजूद, प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ऐतिहासिक किसान आंदोलन का उल्लेख करने से कतराते रहे।

किसान संगठन ने कहा 'इस तथ्य को बेवजह टाला जा रहा था कि एक कठोर सरकार और नागरिक-विरोधी, कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों के खिलाफ मौजूदा संघर्ष में लगभग 600 किसान शहीद हुए हैं।

किसानों ने सरकार की योजनाओं को विफल बताया। संयुक्त मोर्चे ने कहा यह गहरी विडंबना है कि प्रधानमंत्री बहुप्रचारित ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (पीएमएफबीवाई) के बारे में बात करते रहे, इसके बावजूद कि यह योजना पूरी तरह से विफल रही है। जलवायु परिवर्तन के युग में, भारत की कृषि-बीमा योजना में पहले की तुलना में अब किसानों का कवरेज घटा है, बीमा कंपनियों को अधिक लाभ मिला है, और ऐसा करने के लिए करदाताओं का पहले की तुलना में अधिक धन खर्च हुआ है।

किसानो ने प्रधानमंत्री द्वारा पिछले सालो में 2022 तक किसानो की आय दोगुनी करने के दावे पर, इस बार नहीं बोलने पर भी सवाल उठाए।  उन्होंने कहा  “किसानों की आय दोगुनी करने” के दावों और प्रतिबद्धताओं पर आश्चर्यजनक चुप्पी रही, भले ही इस दावे को अमल में लाने के लिए आधिकारिक समय सीमा अगले साल ही है।

भारत के स्वतंत्रता दिवस पर अमेरिकी किसानों ने विरोध कर रहे भारतीय किसानों के साथ एकजुटता का संदेश दिया। भारतीय प्रदर्शनकारियों के अमेरिकी समकक्षों ने मुक्त व्यापार नीति, जिसने वहां के किसानों को गरीब जबकि कॉर्पोरेट और पूँजीपतियों को अमीर बना दिया है, में अपनी पीड़ा और संकट का वर्णन किया। उनकी लगभग विलुप्त होने की कहानी भारतीय किसानों के लिए एक सबक है।

पश्चिमी यूपी में बीजेपी विधायक को करना पड़ा किसानों के गुस्से सामना 

जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, बीजेपी नेताओं के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार और काले झंडे का विरोध अब उत्तर प्रदेश में भी फैल गया है। मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली में स्थानीय विधायक उमेश मलिक को स्थानीय किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।  वहां बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री संजीव बालयान ने पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कानून व्यवस्था अपने हाथो में लेने की बात कही, और उसका वीडियो सोशल मीडया पर वायरल हो रहा है।  जिसके बाद से लोग इसकी तुलना, दिल्ली दंगो से पहले बीजेपी नेता कपिला मिश्रा के दिए हुए भाषण से कर रहे है। हालांकि उनकी इस धमकी के बाद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने साफ कहा है कि बीजेपी के लोग माहौल ख़राब करना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होगा नहीं, किसान अपने आंदोलन को और तेज़ करेगा।  

संयुक्त मोर्चे ने भी कहा कि ‘मिशन उत्तर प्रदेश’के तहत 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में आयोजित किये जाने वाली विशाल जन-सभा की तैयारी जोरों पर चल रही है। न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में बल्कि आसपास के अन्य राज्यों में भी लामबंदी बैठकें आयोजित की जा रही हैं। योजना है कि किसानों की इस सभा से मोदी सरकार और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों द्वारा अपनाई गई किसान-विरोधी, कॉर्पोरेट-समर्थक नीतियों का संदेश उत्तर प्रदेश के कोने-कोने तक पहुँचाया जाएगा।

हरियाणा के हिसार में भी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ को काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे किसानों ने कहा कि उनका विरोध राष्ट्रीय ध्वज के खिलाफ नहीं है, जिसका वे सम्मान करते हैं और जिसकी गरिमा को बनाए रखेंगे, बल्कि भाजपा की पार्टी गतिविधियों और उसके नेताओं के खिलाफ है।

farmers protest
Tiranga Yatra
kisan andolan
75th Independence day
Samyukt Kisan Morcha
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: NIOS से डीएलएड करने वाले छात्रों को प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनुमति नहीं
    23 Oct 2021
    उत्तराखंड सरकार द्वारा नवंबर 2020 में प्राथमिक शिक्षक के 2287 पदों पर भर्ती के लिए सूचना जारी की गई थी, इसमें राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से होने वाले डीएलएड को मान्य किया गया…
  • Supreme Court
    न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा- प्रोविजनल एलॉटमेंट के समय कोई पैसा नहीं लिया जाएगा, फ़ाइनल एलॉटमेंट पर तय होगी किस्त 
    23 Oct 2021
    मजदूर आवास संघर्ष समिति ने कहा कि अस्वीकृत आवेदन की प्रकिया में अपारदर्शिता है एवं प्रार्थी को अपील का मौका न देना सरासर अत्याचार एवं धोखा है।
  • inflation
    अजय कुमार
    सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 
    23 Oct 2021
    आख़िर क्या वजह है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों में कमी आने के बाद भी आम आदमी इस पर भरोसा नहीं कर पाता।
  • 100 crore vaccines
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक: क्या भारत सचमुच 100 करोड़ टीके लगाने वाला दुनिया का पहला देश है?
    23 Oct 2021
    भारत न तो पहला देश है जिसने 100 करोड़ डोज़ लगाई है और न ही भारत का टीकाकरण विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है।
  • shareel
    द लीफलेट
    सीएए विरोधी भाषण: भीड़ उकसाने के ख़िलाफ़ ‘अपर्याप्त और आधे-अधूरे सुबूत’, फिर भी शरजील इमाम को ज़मानत से इनकार
    23 Oct 2021
    दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर अपने कथित भड़काऊ भाषण के सिलसिले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License