NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : गोभी की सब्ज़ी और उच्चता का एहसास
फूलगोभी, टमाटर और प्याज़ को खाकर उच्चता का एहसास होने में सरकार का जो योगदान है उसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए...।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
13 Oct 2019
cauliflower
फोटो साभार : हिन्दुस्तान

हाल में ही, कुछ दिन पहले कमला ने, मेरी पत्नी कमला ने फूलगोभी की सब्ज़ी बनाई, अदरक, टमाटर और प्याज़ में छुकी हुई। साथ में थी टमाटर, प्याज़ और मिर्च की चटनी। 

प्लेट में सब्ज़ी और चटनी परोस उसने अपने मोबाइल से उसकी फोटो खींची। उसके बाद ही वह सब्ज़ी उसने मुझे खाने के लिए दी। मुझे यह बात कुछ समझ नहीं आई। इतना आम और साधारण सा खाना, और उसकी मोबाइल से फोटो खींची जा रही है। बात समझ में आने लायक थी भी नहीं। मैं पूछ ही बैठा, "मैडम, यह फोटो क्यों खींची जा रही है"।

tirchhi nazar.PNG

"यह फोटो मैं फेसबुक पर डालूंगी”, कमला ने जवाब दिया। "फेसबुक पर! वह भी सब्ज़ी की फोटो"। मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं था। "हां, तुम्हें पता भी है, गोभी आजकल एक सौ बीस रुपये किलो मिल रही है"। और टमाटर-प्याज़ की चटनी, ये टमाटर और प्याज़ तो सस्ते ही होंगे। इनकी फोटो क्यों खींची जा रही है"? मेरा प्रश्न था।

"वाह मेरे ठनठन गोपाल"। जब भी कमला को मेरी कोई बात बेवकूफी भरी लगती है तो वह ऐसे ही बोलती है। मेरी प्रश्न वाचक दृष्टि देख कमला बोली "तुम कभी घर का कोई काम काज तो करते हो नहीं, तो तुम्हें सब्जियों के दाम भी कहां से पता होंगे। पता भी है, ये टमाटर सौ रुपये चल रहे हैं और प्याज़ भी अस्सी रुपये किलो है"।

"मैं ये फूलगोभी की सब्ज़ी और टमाटर प्याज़ की चटनी की फोटो फेसबुक पर जरूर डालूंगी। वह जो गुप्तानी है न, वही गुप्ता जी की वाइफ, वह दुबई गई थी घूमने। उसने वहां की फोटो भी डाली थी। अब उसे भी पता चल जायेगा कि हम भी कोई ऐरे गैरे नहीं हैं। इतनी मंदी के दौर में भी इतनी महंगी महंगी सब्जियां खाते हैं"।

फूलगोभी, टमाटर और प्याज़ को खाकर उच्चता का अहसास होने में सरकार का जो योगदान है उसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। यह सरकार की ही मेहरबानी है जिसकी वजह से कोई भी व्यक्ति गोभी जैसी आम सब्ज़ी खाने के बाद भी अपने को श्रेष्ठ समझ सकता है, गौरान्वित हो सकता है। ऐसे ही गौरव का अहसास तीन साल पहले भी अरहर की दाल को खा कर होता था जब सरकार ने अरहर की दाल बहुत महंगी कर दी थी। तब अरहर की दाल दो सौ रुपये से भी अधिक में मिल रही थी। खैर कमला ने गोभी की सब्ज़ी और मिर्च-प्याज़ की चटनी की फोटो फेसबुक पर डाल ही दी।

अगले दिन सुबह जब मैं सो कर उठा तो कमला ने खुशी से बताया कि उसकी फेसबुक पोस्ट को रात भर में ही पचास से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं। उसका यह फेसबुक स्टेट्स तो बहुत ही पसंद किया जा रहा था। वह बहुत खुश थी। और अगले तीन ही दिनों में उसका फेसबुक स्टेटस वायरल हो गया था।

पर चौथे दिन ही जो न होना चाहिए था वह हो गया। घर के आगे एक सरकारी जीप आ कर खडी़ हुई। उसमें से तीन चार लोग धड़ाधड़ उतरे और लगे घर में घुसने। उन्होंने बताया कि वे खाद्य एवं संभरण विभाग से हैं और उन्हें सूचना मिली है कि हमारे घर में गोभी, टमाटर और प्याज़ जैसी दुर्लभ और महंगी सब्जियों का बहुत बडा़ स्टाक मौजूद है। उन्होंने हमें हमारे घर का सर्च वारंट दिखा हमारे घर की तालाशी ली।

हमारे घर में चार टमाटर और पांच प्याज़ निकले। हम दो प्राणी हैं और कानून के हिसाब से, इस ‘आपातकाल’ में हम दो प्याज़ दो टमाटर से अधिक का स्टाक अपने घर में नहीं रख सकते थे। ख़ैर अब हम उनसे कैसे बचे, यह इस काल में जब रिश्वत का लेन देन बिल्कुल ‘समाप्त’ हो चुका है, बताना उचित नहीं होगा।

दो तीन दिन बाद आय कर विभाग ने भी हमारे घर पर छापा मार दिया। वे तो काफी सारे अफसर आये थे और साथ में पुलिस भी लाये थे। उन्होंने आते ही हम दोनों को एक कमरे में बिठा दिया। हमारे मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिये। आयकर अधिकारी हमसे यह पूछने लगे कि आपने सब्ज़ी किससे खरीदी थी। क्या आपके पास रसीद है। पत्नी के यह बताने पर कि सब्ज़ी हमने ठेले पर से खरीदी थी और कोई रसीद भी नहीं थी। उन्होंने जानना चाहा कि हमने भुगतान कैसे किया था।

पत्नी ने जब यह बताया कि भुगतान कैश किया गया था, वे भड़क उठे। उन्होंने बताया कि इस कैशलेस काल में कैश भुगतान करना, वह भी इतनी मूल्यवान चीजों का, कानून का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री जी ने देश की उन्नति के लिए किस तरह से, दिन रात एक कर, देश को कैशलेस बना दिया है। इसके बाद वे हमारे द्वारा किये गये कैश भुगतान को छिपाने के लिए हम से कैश ले, हमें कैशलेस बना रुखसत हुए। इसके बाद हमारे पास आगे के किसी भी भुगतान के लिए सिर्फ कैशलेस सुविधा ही बची थी।

वह दिन है और आज का दिन है, श्रीमती जी ने अपना फेसबुक अकाउंट चेक भी नहीं किया है।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

cauliflower
tomato
Onions
vegetable price rise
food price rise
BJP
economic crises
Satire
Political satire
Right to Food

Related Stories

अगर फ़्लाइट, कैब और ट्रेन का किराया डायनामिक हो सकता है, तो फिर खेती की एमएसपी डायनामिक क्यों नहीं हो सकती?

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामले घटकर 10 लाख से नीचे आए 
    08 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 67,597 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 9 लाख 94 हज़ार 891 हो गयी है।
  • Education Instructors
    सत्येन्द्र सार्थक
    शिक्षा अनुदेशक लड़ रहे संस्थागत उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हक़ की लड़ाई
    08 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि 2019 तक उन्हें नियमित कर दिया जायेगा। लेकिन इस वादे से भाजपा पूरी तरह से पलट गई है।
  • Chitaura Gathering
    प्रज्ञा सिंह
    यूपी चुनाव: मुसलमान भी विकास चाहते हैं, लेकिन इससे पहले भाईचारा चाहते हैं
    08 Feb 2022
    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव के मुआयने से नफ़रत की राजनीति की सीमा, इस इलाक़े के मुसलमानों की राजनीतिक समझ उजागर होती है और यह बात भी सामने आ जाती है कि आख़िर भाजपा सरकारों की ओर से पहुंचायी जा…
  • Rajju's parents
    तारिक़ अनवर, अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव : गांवों के प्रवासी मज़दूरों की आत्महत्या की कहानी
    08 Feb 2022
    महामारी की शुरूआत होने के बाद अपने पैतृक गांवों में लौटने पर प्रवासी मज़दूरों ने ख़ुद को बेहद कमज़ोर स्थिति में पाया। कई प्रवासी मज़दूर ऐसी स्थिति में अपने परिवार का भरण पोषण करने में पूरी तरह से असहाय…
  • Rakesh Tikait
    प्रज्ञा सिंह
    सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत
    08 Feb 2022
    'वो जाटों को बदनाम करते हैं क्योंकि उन्हें कोई भी ताक़तवर पसंद नहीं है' - राकेश टिकैत
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License