NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
बीते साल का सूत्र वाक्य: 'आपदा में अवसर'
पूरे विश्व में बीता साल कोरोना के साल के रूप में ही जाना जायेगा पर भारत में 'अवसर' के रूप में याद किया जायेगा। पूरे विश्व में सिर्फ़ हमारा देश ही ऐसा रहा जिसने 'आपदा को अवसर' मान कर भुनाया। 
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
03 Jan 2021
cartoon

2020 बीत गया और 2021 आ गया। 2020 बहुत ही कठिनाई में बीता। आपदा में बीता। कोरोना ने पूरे विश्व में कहर ढा दिया। पूरे विश्व में बीता साल कोरोना के साल के रूप में ही जाना जायेगा पर भारत में 'अवसर' के रूप में याद किया जायेगा। पूरे विश्व में सिर्फ हमारा देश ही ऐसा रहा जिसने 'आपदा को अवसर' मान कर भुनाया। 

कोरोना फैलना शुरू ही हुआ था कि सरकार जी ने 'आपदा में अवसर' का लाभ उठाना शुरू कर दिया। लोगों से भी कहना शुरू कर दिया कि 'आपदा में अवसर' ढूंढें। अब लोग तो आपदा में आपदा (बीमारी) से बचने में लगे थे, अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे अवसर कहाँ से ढूंढते। वे तो नौकरी बचा रहे थे, खाने की लाइनों में लगे थे, अवसर कहाँ तलाशते। लोग तो घर पहुँचने के लिए पैदल चल रहे थे, लाठियाँ खा रहे थे, रास्ते में मर रहे थे, अवसर कहाँ से पहचानते।

लोगों के लिए तो अवसर यही था कि मालिक चाहे आधी तनख्वाह दे दे पर नौकरी से न निकाले। खाने को मिल जाये भले ही आधा पेट मिले या दिन में एक बार मिले। बिना हाथ पैर टूटे, सही सलामत घर गाँव पहुँच जायें, रास्ते में ही न गुजर जायें। अवसर यह भी था कि गाँव जाने के लिए रेल मिल जाये और सरकार बिना खाने के, बिना पानी के डेढ़ दिन का सफर चार दिन में पूरा करा बस गाँव पहुँचा दे। जिस जनता को जान बचाने की पड़ी थी, वह अवसर कहाँ से ढूंढती और उसे अवसर कहाँ से मिलता। 

लेकिन सरकार जी का तो आह्वान था, आदेश था 'आपदा में अवसर' ढूंढने का। बेचारी जनता तो आज्ञा का पालन कर नहीं पा रही थी। तो सरकार ने ही सरकार जी की आज्ञा का पालन करना शुरू दिया। इस तरह से वर्ष 2020 रहा सरकार द्वारा 'आपदा में अवसर' भुनाने का वर्ष। 

इधर वर्ष 2020 शुरू हुआ, कोरोना के रुप में आपदा ने देश में पदार्पण किया, सरकार ने उसे अवसर बना लाभ उठाना शुरू कर दिया। 'नमस्ते ट्रम्प' का आयोजन तो किया ही, उत्तर पूर्व दिल्ली में अवसर ढूंढ, दंगा मैनेज करा अहिंसक और शांतिपूर्वक ढंग से चलने वाले सीएए और एनआरसी विरोधी आंदोलनों को भी कुचल दिया। और जो बचे-खुचे आंदोलन था उसे लॉकडाउन से खत्म किया। यह तो 'आपदा को अवसर' बनाने की  शुरुआत भर थी। इसके बाद और भी कई ऐसे मौके आये जब सरकार ने 'आपदा में अवसर' ढूंढ निकाला।

देश में कोरोना की आपदा पधार चुकी थी। उसके स्वागत में जनता कर्फ्यू लग चुका था और थाली ताली भी बज चुके थे। सरकार जी को छोड़ कर अन्य किसी को नहीं पता था कि दो ही दिन बाद लॉकडाउन लगने वाला है। यहाँ भी 'कर्मठ' सरकार ने 'अवसर' हाथ से नहीं निकलने दिया। बीच में ही तख्तापलट कर मध्य प्रदेश में पक्ष को विपक्ष और विपक्ष को पक्ष बना दिया।

'अवसर' हाथ में आये और पैसा न बनाया जाए, यह तो नौसिखिएपन की निशानी होती। तो सरकार जी ने आपदा के प्रबंधन के लिए अलग से 'पीएम केयर्स फंड' बना लिया। इस फंड में सरकार जी को किसी को भी यह न बताने की सुविधा है कि सरकार जी ने कहां और कितना खर्च किया। जनता पर किया या फिर बस जनता के नाम पर ही किया। आपदा पर कुछ खर्च किया भी या फिर कुछ भी खर्च नहीं किया। 

सरकार ने' आपदा को अवसर' बनाते हुए न जाने कितने आंदोलनकारियों को, चाहे वे डॉक्टर रहे हों या छात्र, गिरफ्तार कर लिया। जो भी सरकार के विरोध में था उसे देशद्रोही मान लिया। वैसे इसका आपदा से कोई लेना-देना नहीं है। देश में मोदी और प्रदेश में योगी का विरोध करने पर देशद्रोह की धारायें तो अपने आप में ही लग जाती हैं। अगर अल्पसंख्यक हों तो और भी कड़ी लग जाती हैं। 

सरकार ने 'आपदा में अवसर' का लाभ तो बहुत उठाया पर मास्टर स्ट्रोक अभी बाकी था। सरकार में 'इन्वेस्ट' करने वालों का सरकार पर दवाब बढ़ रहा था। उन्होंने सरकार जी को चेता दिया था कि अब बस और सब्र नहीं होता है, आखिर सब्र की भी कीमत होती है। सरकार जी को 'फाइनेंसर्स' को कीमत चुकानी ही थी। 'आपदा को अवसर' बनाया गया। कृषि कानूनों पर अध्यादेश लाया गया। बाद में इन कानूनों को संसद में भी बिना बहस, चीख चिल्ला कर पास करवाया गया। आपदा में अवसर बना, सारा देश 'फाइनेंसर' कारोबारियों के पास गिरवी रख दिया। 

अब कृषि कानूनों के विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं पर जमे हैं। पूस की इस कंपकंपाती ठंड में डटे हैं। और अब तो बारिश भी शुरू हो गई है। लेकिन सरकार को कोई जल्दी नहीं है। वह तो बंद कमरों में हीटर पर हाथ सेंक रही है। वह आंदोलन को कुचलने के लिए अवसर तलाश रही है। आपदा अभी खत्म नहीं हुई है। आपदा अभी जारी है। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Year 2020
Opportunity in disaster
Narendra modi
COVID-19
PM CARES fund
Modi government

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • kisan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर हत्याकांड: देशभर में मनाया गया शहीद किसान दिवस, तिकोनिया में हुई ‘अंतिम अरदास’
    12 Oct 2021
    तिकोनिया में शहीद किसानों को याद में ‘अंतिम अरदास’ कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें किसान नेताओं के साथ विभिन्न राज्यों के किसान और भारी संख्या में अन्य आम लोग यहां पहुंचे।
  • covid
    भाषा
    विशेषज्ञ पैनल ने दो साल तक के बच्चों के लिए कोवैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की
    12 Oct 2021
    हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने दो से 18 साल तक के बच्चों एवं किशोरों में इस्तेमाल के लिए कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन के 2/3 चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है।
  • Will Damodar River Again be Bengal’s ‘Sorrow
    रबींद्र नाथ सिन्हा
    क्या दामोदर नदी फिर से बंगाल का 'शोक' बनेगी?
    12 Oct 2021
    5 अक्टूबर को ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को ख़त लिखते हुए बाढ़ की स्थितियों में आपात हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने दामोदर घाटी निगम के अनियोजित और अनियंत्रित पानी छोड़ने की गतिविधि को दक्षिण बंगाल…
  • taliban
    न्यूज़क्लिक टीम
    तालिबान पर अमेरिकी दांव, EU-नेटो-चीन के बीच कूटनीति
    12 Oct 2021
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने तालिबान से अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत के कूटनीतिक मायनों पर न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। साथ ही जर्मनी में सत्ता…
  • Nobel in Economics
    अजय कुमार
    न्यूनतम मज़दूरी बढ़ने से रोजगार कम नहीं होता : जानिए इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल की कहानी
    12 Oct 2021
    न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने पर रोजगार बढ़ेगा या घटेगा? ऐसे सवालों का जवाब देना बहुत कठिन काम है। इस कठिन काम को जिन अर्थशास्त्रियों ने सुलझाया है। उन्हें ही इस बार का नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License