NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
'वीर' सावरकर और नया आधुनिक इतिहास
“बताया जाता है कि काला पानी में कैदियों को इतना अधिक कष्ट दिया जाता था कि वीर लोग सह नहीं पाते थे। यह बात अलग है कि आम कैदी सहते रहते थे क्योंकि उन्हें माफ़ीनामा लिखना नहीं आता था…” पढ़िए डॉ. द्रोण का साप्ताहिक व्यंग्य स्तंभ ‘तिरछी नज़र’
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
08 Dec 2019
savarkar
फोटो साभार :  अमर उजाला

विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न मिलते मिलते रह गया। महाराष्ट्र में चुनावों में भाजपा की ओर से सावरकर को दांव पर लगा दिया गया था और भाजपा/ शिवसेना गठबंधन ने जीत भी हासिल कर ली थी तो सावरकर का भारत रत्न बनना तय ही था। यह मेरा नहीं, मोदी जी का कहना था कि अगर भाजपा महाराष्ट्र में जीत हासिल कर लेती है तो सावरकर को, जी हां विनायक दामोदर सावरकर को, भारत रत्न से सम्मानित किया जायेगा।

logo tirchhi nazar_8.PNG

यानी मोदी जी भी यह मानते थे कि सावरकर भारत रत्न न थे, न हैं, और अब निकट भविष्य में शायद ही बन पायें क्योंकि सावरकर ने महाराष्ट्र का चुनाव जितवा दिया पर महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनवा पाये।  अब देखना पड़ेगा कि सावरकर भविष्य में भारत रत्न कैसे बन सकते हैं।

सावरकर क्योंकि वीर थे इसलिए उनका काम करने का तरीका अलग और अनोखा था। वे हिंसा में विश्वास करते थे, पर स्वयं हिंसा नहीं करते थे। वे अपने शिष्यों को प्रेरित कर हिंसा करवाते थे। जब 1909 में लंदन में गांधी जी सावरकर से मिले थे तब भी सावरकर ने मदनलाल ढींगरा से विली की हत्या करवाई थी।

सावरकर ने मदनलाल ढींगरा को इतना उकसाया और धिक्कारा था कि उसके पास विली को मारने के अलावा और कोई चारा नहीं रहा था। गांधी जी को यह पसंद नहीं था। वैसे भी सावरकर का मानना था कि सच्चे वीर पीछे से ही वार करते हैं। 'वीर' सावरकर स्वयं भी ऐसा ही करते थे। उन्हें पता था पकड़ा तो वही जायेगा न जो सामने आयेगा। इसीलिए गांधी जी की हत्या में भी गोडसे पकड़ा गया और 'वीर' सावरकर बच गए।

जब विनायक दामोदर सावरकर को कालेपानी की सजा सुनाई गई तो वह महान 'वीर' पुरूष दो महीने से भी कम समय में पहला माफ़ीनामा लिख बैठा। बताया जाता है कि कालेपानी में कैदियों को इतना अधिक कष्ट दिया जाता था कि वीर लोग सह नहीं पाते थे। यह बात अलग है कि आम कैदी सहते रहते थे क्योंकि उन्हें माफ़ीनामा लिखना नहीं आता था। उन दिनों भारत में साक्षरता दर कम थी। सावरकर साक्षर थे इसलिए उस वीर योद्धा ने छह या आठ माफीनामे लिखे। जब एक इतने सारे माफीनामे लिखने वाले को भारत रत्न दिया जायेगा तो भगत सिंह को तो अवश्य ही कष्ट होगा, जिन्होंने माफी मांगना गवारा नहीं किया और हंसते हुए फांसी पर चढ़ गये।

लेकिन जब नया इतिहास नई तरह से लिखा जायेगा, जिसका विचार और प्लान तैयार हो रहा है, तो बताया जायेगा कि ये सब माफ़ीनामे सावरकर ने स्वयं नहीं लिखे थे। ये माफ़ीनामे तो अंग्रेजी सरकार ने सावरकर से खुशामद कर लिखवाये थे। बताया जाता है कि अंग्रेज सरकार सावरकर की वीरता से बहुत अधिक डरी हुई थी और इसी डर के कारण ही उन्हें अंडमान जेल से रिहा किया गया। लेकिन साथ ही अंग्रेज सरकार यह भी चाहती थी कि इसके लिए सावरकर स्वयं अनुरोध करें। अतः ये सारे माफ़ीनामे सावरकर ने अंग्रेज सरकार के अनुरोध पर ही लिखे थे।

आधुनिक इतिहास में लिखा जायेगा कि जब अंग्रेजों ने सावरकर को जेल से रिहा किया तो वहां मौजूद अंग्रेज सावरकर के कारण डर से कांप रहे थे। अंग्रेजों को कांपते देख परमवीर सावरकर ने अंग्रेजों को आश्वस्त किया कि वे  जेल से रिहा होने के बाद अंग्रेजों के खिलाफ न ही कुछ कहेंगे और न ही कुछ करेंगे। सावरकर सिर्फ वीर ही नहीं थे अपने वायदे के भी इतने पक्के थे कि उन्होंने उसके बाद जीवनपर्यंत अंग्रेजों के खिलाफ कोई भी कदम नहीं उठाया। अपितु जब जरूरत पड़ी, अंग्रेजों की सहायता ही की।

आधुनिकतम इतिहास, जिसे अभी लिखा जाना बाकी है, यह भी बताता है कि जब सावरकर जेल से छूटे तो उन्होंने अंग्रेजों से मौखिक वायदा भी लिया था कि अंग्रेज जल्द ही भारत छोड़ कर चले जायेंगे। (मौखिक इसलिए क्योंकि इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है, जबकि सावरकर के माफ़ीनामे के प्रमाण मौजूद हैं)। सावरकर को दिये इस वायदे के कारण ही अंग्रेज सावरकर को जेल से रिहा करने के लगभग छब्बीस वर्ष बाद 1947 में भारत छोड़ कर चले गए और हमारा देश 'वीर' सावरकर के इन्हीं प्रयत्नों से पंद्रह अगस्त सन् सैंतालीस को आजाद हुआ।

सावरकर वास्तव में बहुत ही वीर थे। वह इंग्लैंड से भारत लाये जाते समय भी पानी के जहाज से भाग निकले थे। किवदंती है कि वास्तव में कालापानी से भी वह भाग निकले थे। उनके कालापानी जेल से बाहर निकलने की कथा भी बहुत ही विचित्र है। किवदंती यह है कि जब सावरकर के कालापानी की जेल से निकलने की घड़ी आई तो जेल के सारे पहरेदारों को नींद आ गई।

जेल के सारे ताले अपने आप ही टूट गए और दरवाजे अपने आप खुल गए। जेल से निकल कर 'वीर' सावरकर क्रोधित हो जब समुद्र तट पर पहुंचे तो समुद्र बीच में से फट गया और उसने सावरकर को रास्ता दे दिया। सावरकर समुद्र पर चलते चलते सीधा रत्नागिरी पहुंच गए। उस समय रत्नागिरी समुद्र तट पर होता था।

माफ़ीनामे के बारे में भी यह बताया जाता है कि 'वीर' सावरकर के जेल तोड़कर भागने की घटना के बाद जब अंग्रेजों की बहुत बदनामी हुई तो अंग्रेजों ने सावरकर की बहुत अनुनय की। पसीज कर सावरकर ने एक दो नहीं कई सारे माफ़ीनामे अंग्रेजों को लिख कर दे दिये। अंग्रेजों ने वे माफ़ीनामे सम्हाल कर रख लिए और इसीलिए आज भी मौजूद हैं। इस काली करतूत में अंग्रेजों के साथ साथ जवाहर लाल नेहरू नाम के एक देशद्रोही का भी हाथ था। इस वीरता और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए,  किसी और को मिले न मिले, सावरकर को तो भारत रत्न बनता ही है।

अंत में : विरोधी दलों से अनुरोध है कि वे जल्दी से, पश्चिम बंगाल के चुनाव से पहले ही सुभाष चन्द्र बोस, रविंद्रनाथ टैगोर या राजा राममोहन राय को भारत रत्न दिलवाने की घोषणा कर दें। नहीं तो हमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी के रूप में एक और भारत रत्न झेलना पड़ सकता है।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Narendra modi
Savarkar
Modern history
BJP
Shiv sena
maharastra election
Rabindranath Tagore
Raja Ram Mohan Roy
Shyama Prasad Mukherjee
तिरछी नज़र

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • इज़रायल और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायल और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
    23 Jul 2021
    तीन सदस्यीय जांच आयोग का नेतृत्व नवी पिल्ले करेंगे जो 2008-2014 के बीच यूएनएचआरसी के प्रमुख थे।
  • 400 से अधिक पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, बुद्धिजीवियों की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन से क्यूबा पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग
    पीपल्स डिस्पैच
    400 से अधिक पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, बुद्धिजीवियों की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन से क्यूबा पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग
    23 Jul 2021
    400 से अधिक हस्तियों द्वारा हस्ताक्षरित एक खुला पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान क्यूबा पर लगाए गए 243 एकतरफ़ा प्रतिबंधों को हटाने की मांग करता है जिसने इस द्वीप…
  • अध्ययन के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद की सबसे भयावह त्रासदी’, सरकार ने किया आंकड़े से इंकार
    दित्सा भट्टाचार्य
    अध्ययन के मुताबिक भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद सबसे बड़ी त्रासदी’, सरकार का आंकड़े से इंकार
    23 Jul 2021
    रिपोर्ट में कहा गया है, “वास्तविक मौतों का आंकड़ा कई लाखों में होने का अनुमान है, न कि कुछ लाख में, जो इसे यकीनन विभाजन और स्वतंत्रता के बाद से भारत की सबसे भयावह मानवीय त्रासदी बना देता है।” 
  • अयोध्या में बीएसपी के कार्यक्रम का पोस्टर। बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा के ट्विटर हैंडल से साभार
    असद रिज़वी
    दलित+ब्राह्मण: क्या 2007 दोहरा पाएगी बीएसपी?
    23 Jul 2021
    पार्टी अपने 2007 के सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग को दोहराने की कोशिश कर रही है, लेकिन ये इस बार इतना आसान नहीं होगा। एक विश्लेषण...
  • ज़मीन और आजीविका बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, गुजरात सरकार वलसाड में बंदरगाह बनाने पर आमादा
    दमयन्ती धर
    ज़मीन और आजीविका बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, गुजरात सरकार वलसाड में बंदरगाह बनाने पर आमादा
    23 Jul 2021
    वलसाड में उमरागाम तालुक के स्थानीय लोग प्रस्तावित बंदरगाह के निर्माण का विरोध 1997 से ही करते आ रहे हैं, जब पहली बार इसकी घोषणा की गई थी। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License