NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: 26 जनवरी बिल्कुल ही सरकार जी की प्लानिंग के मुताबिक रही
सरकार की तैयारी मुक्कमल रही, राजपथ की परेड की भी और किसानों की ट्रैक्टर परेड की भी। कृषि मंत्री तोमर जी ने तो किसान नेताओं को चार दिन पहले ही बता भी दिया था कि अब हम अपनी तैयारी करेंगे। किसान नेता समझे ही नहीं...। पढ़िए डॉ. द्रोण का व्यंग्य
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
31 Jan 2021
cartoon click

छब्बीस जनवरी बिल्कुल ही सरकार जी की प्लानिंग के मुताबिक रही। कृषि मंत्री तोमर जी ने बाईस जनवरी की मीटिंग के बाद ही किसान नेताओं से कह दिया था कि जाइये, हम छब्बीस जनवरी की अपनी तैयारी करते हैं, आप अपनी कीजिए। सरकार की तैयारी मुक्कमल रही, राजपथ की परेड की भी और किसानों की ट्रैक्टर परेड की भी। पहले तो राजपथ पर सरकारी परेड हुई और फिर बाद में किसानों की ट्रैक्टर परेड। सरकारी परेड तो हमेशा की तरह भव्य ही हुई पर बाद में किसानों की जो ट्रैक्टर परेड हुई उसमें भी असलियत में सरकार जी की ही प्लानिंग दिखाई दी। सब कुछ योजना के अनुसार ही हुआ। न एक इंच इधर, न एक इंच उधर।

वैसे भी सरकारें बड़ी ही सयानी होती हैं। और यह सरकार तो औरों से भी अधिक सयानी है। वैसे तो सभी सरकारों को पता होता है कि इन जन आंदोलनों से कैसे निपटना है। पर इस सरकार को यह और भी अधिक अच्छी तरह से पता है। अगर आंदोलन हिंसक न हो तो सरकारों को उससे निपटने में मुश्किल आती ही है। इसीलिए सरकारें चाहती हैं कि आंदोलन हिंसक ही हो। हिंसक न हो तो हिंसक बन जाए। अपने आप न बने तो जबरदस्ती बनाया जाए। हिंसक आंदोलन को कुचलना किसी भी सरकार के लिए बहुत ही आसान होता है। यह पुराने जमाने का अंग्रेज़ी राजा भी जानता था और इस बात को आज का देशी राजा भी जानता है। 

पर पुराने जमाने के अंग्रेज़ी शासकों में शायद कम अक्ल थी। उन्हें पता ही नहीं था कि अहिंसक आंदोलनों में हिंसा कैसे घुसेड़ी जाये। अगर उनमें इसकी जरा सी भी अक्ल होती तो गांधी जी के आंदोलनों में भी वे हिंसा घुसेड़ देते और उनसे पार पा लेते। पर आजकल के शासकों को, जो कहते हैं कि उन्होंने चाणक्य को पढा़ है, इसके बारे में खासी जानकारी है। आज की सरकारें किसी अहिंसक आंदोलन को भी कुचलने के लिए कहीं तक भी जा सकती हैं। कोमल से लेकर कपिल मिश्रा तक, कपिल मिश्रा से दीप सिद्धू तक। कहीं भी। कभी भी। कैसे भी। 

लेकिन सरकार ने यह सब बिना वार्निंग दिये नहीं किया। सरकार ईमानदार है। कृषि मंत्री तोमर जी ने तो किसान नेताओं को चार दिन पहले ही बता भी दिया था कि अब हम अपनी तैयारी करेंगे। किसान नेता समझे ही नहीं तो वे अनाड़ी हैं। सरकार के पास पिछली बार कपिल मिश्रा था तो इस बार दीप सिद्धू है। और दीप सिद्धू ने भी बहुत ही जिम्मेवारी से अपने को दी गई जिम्मेदारी को निभाया। 

सरकार की प्लानिंग पक्की थी। सरकार जी ने प्लानिंग का, क्रोनालॉजी का काम श्री एएस जी को दिया था। अरे वही एएस जी, जिनका जिक्र अर्नब गोस्वामी की चैट में भी बार बार आता है। बताया जाता है कि ये श्री एएस जी क्रोनोलॉजी बनाने में बहुत ही माहिर हैं। और उन्होंने क्रोनोलॉजी बनाई भी। अरे भाई! राजपथ की परेड की क्रोनोलॉजी नहीं, ट्रैक्टर परेड की क्रोनोलॉजी। राजपथ की परेड की क्रोनोलॉजी तो वर्षों से फिक्स है। पहले सेना और उसके आयुद्ध की परेड। उसके बाद अर्ध सैनिक बल, स्कूली बच्चे और लोकनर्तक, और सड़क पर अंत में राज्यों की झांकियाँ। फिर आसमान में हैलीकॉप्टर और हवाई जहाज। इस बार रफ़ाल जहाज होना था और था भी। अंत में आसमान में उड़ते हजारों रंग बिरंगे गुब्बारे। इस बार भी परेड की यही क्रोनोलॉजी थी। इसमें श्री एएस जी की कहीं जरूरत ही नहीं थी।

असलियत में एएस जी को तो किसानों की ट्रैक्टर परेड की क्रोनोलॉजी ही बनानी थी। दीप सिद्धू का रोल इस परेड के लिए पहले से ही तैयार कर लिया गया था। उससे जब दिसम्बर में सन्नी देओल ने अपने रिश्ते समाप्त किए थे तभी अंदाजा हो जाना चाहिए था कि उसे कुछ बड़ा काम दिया जाने वाला है।  अब छब्बीस जनवरी को उसकी जरूरत आन पड़ी थी। वह पट्ठा तो तैयार था ही। बताते हैं कि पच्चीस की रात को ही उसने किसान आंदोलन का स्टेज कब्जा लिया था। एएस जी का भी अपनी इंटेलीजेंस को पूरा निर्देश था कि बस देखना है कि सब काम क्रोनोलॉजी के अनुसार हो रहा है या नहीं। बाकी करना कुछ भी नहीं है। 

फिर छब्बीस जनवरी को सब कुछ क्रोनोलॉजी से ही हुआ और पुलिस ने, इंटेलिजेंस ने कुछ नहीं किया। मुबरका चौक के मामूली से अवरोध के बाद दीप सिद्धू द्वारा तैयार किए गए उपद्रवी लोगों को कहीं भी कोई मुश्किल नहीं आई। वे इतनी आसानी से 15-20 किलोमीटर दूर लाल किला पहुँच गए जैसे जगह जगह निर्देश लगे हों कि लाल किला इधर है। वहाँ भी, बताया जाता है कि प्रहरियों ने उपद्रवियों को लाल किले का द्वार खोल ऊपर प्राचीर पर जाने दिया। जब सब कुछ क्रोनोलॉजी के हिसाब से ही हो रहा था तो एएस जी की पुलिस बस देखती रही, देखती ही रही। काम तो तब करती न जब कुछ क्रोनोलॉजी से अलग होता। सिद्धू ने सब कुछ क्रोनोलॉजी से ही किया था। इसीलिए पुलिस ने सिद्धू को आराम से भागने दिया। आखिर दोनों, सिद्धू भी और दिल्ली पुलिस भी एएस के निर्देशों का पालन ही कर रहे थे। हाँ, आईटीओ क्रोनोलॉजी में शामिल नहीं था। वहाँ पुलिस ने जरूर रोका। एक किसान की मृत्यु भी हुई। 

अब मौका भी मौजूद था और दस्तूर भी। कि किसानों के इस आंदोलन पर हिंसा का आरोप लगा कुचल दिया जाये। अब तो सरकार को और उसकी पूरी की पूरी पुलिस को हिंसक होने की पूरी आजादी थी। लेकिन क्या करें, किसी के आंसू सरकार की ताकत से ताकतवर निकले। आंसुओं ने आंदोलन में फिर से जान फूंक दी। 

पुरानी कहावत है:

 

जाट मरा तब जानियो, 

जब तेरही-तीजा होय। 

 

और अब अर्ज है:

 

धरना खतम तब मानियो, 

कानून निरस्त जब होय।। 

tirchi nazar
Satire
Political satire
26 January Kisan Parade
republic day
farmers on red fort
BJP
Narendra modi
delhi police

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • समीना खान
    हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी
    12 Apr 2022
    यहां मसला ये है कि आंचल, घूंघट, हिजाब, नक़ाब हो या बिकनी, हमेशा से पगड़ी के फ़ैसले इन सब पर भारी रहे हैं। इसलिए अब हमें आपके नज़रिए में ज़रा सा बदलाव चाहिए। जी! इस बार हमें आंचल भी चाहिए और आज़ादी भी…
  • ज़ाहिद खान
    सफ़दर भविष्य में भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे
    12 Apr 2022
    12 अप्रैल, सफ़दर हाशमी जयंती और ‘राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस’ पर विशेष।
  • jnu
    न्यूज़क्लिक टीम
    ‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र
    11 Apr 2022
    जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा के बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र अपना विरोध जताने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुँचे जहाँ उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया. छात्रों की बड़ी माँग थी कि पुलिस…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU में अब नॉन वेज को लेकर विवाद? ऐसे बनोगे विश्वगुरु ?
    11 Apr 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा JNU में हुए ABVP द्वारा राम नवमी के दिन मांसाहारी खाना खाने पर छात्रों की पिटाई की खबर पर चर्चा कर रहे हैं और वह भारत में तेज़ी से बढ़ रहे…
  • मुकुंद झा
    जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए
    11 Apr 2022
    घटना के विरोध में दिल्ली भर के छात्र सड़क पर उतरे। छात्र, पुलिस मुख्यालय पर विरोध जताने के लिए एकत्रित हुए परन्तु पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को अस्थायी हिरासत में ले लिया और चाणक्यपुरी, संसद मार्ग…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License