NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
कोरोना काल: कठिन प्रश्नों के सरल जवाब
कोरोना कहाँ जा कर रुकेगा, यह आज का यक्ष प्रश्न है। यह एक कठिन प्रश्न है। पर उत्तर बहुत ही आसान है। जहाँ सरकार चाहेगी, कोरोना को वहीं रुकना पड़ेगा। 
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
02 May 2021
कोरोना काल: कठिन प्रश्नों के सरल जवाब
Image courtesy : NDTV

कोरोना कहर ढा रहा है। चार लाख नये मरीज हर रोज तक हो गये हैं। अगर सरकार चाहेगी तो उसको चार लाख से आगे बढ़ने देगी और अगर चाहेगी तो उसे यहीं पर रोक देगी। पहली लहर के समय में भी सरकार ने कोरोना के मरीजों को एक लाख से नीचे ही रोके रखा था और इस बार भी सरकार जब चाहे कोरोना के मरीजों को बढऩे से रोक सकती है। यह सरकार के बायें हाथ का खेल है।

अभी सरकार अपने दायें हाथ से काम कर रही है इसलिए कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। मतलब यह है कि सरकार अभी कोरोना के टैस्ट कर रही है। ऐसा नहीं है कि ये टेस्ट आसानी से हो रहे हों या फिर सब के हो रहे हों पर हो तो रहे ही हैं न। चाहे हर एक के न हो पा रहे हों, मुश्किल से हो रहे हों, तीन तीन, चार चार दिन में लम्बी लम्बी लाइनों में लग कर हो रहे हों और फिर परिणाम भी पांच सात दिन में आ रहा हो। पर सब कुछ हो तो रहा है न। जिस देश में किसी भी परीक्षा का परिणाम आता ही नहीं हो और आता भी हो तो महीनों सालों में आता हो वहां कोरोना परीक्षण का परिणाम चार पांच दिन में या फिर अधिक से अधिक हफ्ते भर में आ जाता है, सुखद आश्चर्य ही है। और उससे भी बड़ा आश्चर्य यह है कि किसी भी कोरोना परीक्षण के रिजल्ट पर न तो सरकार ने और न ही किसी रोगी ने न्यायालय में जा कर परिणाम की घोषणा पर रोक लगाने की मांग की है ।

कोरोना कहाँ जा कर रुकेगा, यह आज का यक्ष प्रश्न है। यह एक कठिन प्रश्न है। पर उत्तर बहुत ही आसान है। जहाँ सरकार चाहेगी, कोरोना को वहीं रुकना पड़ेगा। पिछली लहर में भी ऐसा ही हुआ था। मरीज जब छियानवे-सत्तानवें हजार पहुंचे तो सरकार को लगा कि अब कोरोना को रुकना ही चाहिये। एक लाख पार नहीं होना चाहिये। तो सरकार ने टेस्ट कम कर दिए, बंद कर दिए। तो सरकार जब चाहेगी, इस बार भी कोरोना की लहर को इसी तरह रोक सकती है। यह है, कठिन प्रश्न का सरल उत्तर। कुछ राज्यों ने यह सरल उत्तर देना शुरू भी कर दिया है।

एक और कठिन, यक्ष प्रश्न हमारे सामने मूँह बाये खड़ा है। वह है, प्राणवायु अर्थात आक्सीजन की कमी का। हजारों लोग आक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं। इसमें सरकार जी की कोई गलती नहीं है। वायुमंडल में तो आक्सीजन वही बीस-इक्कीस प्रतिशत ही है। सरकार जी ने तो वायुमंडल की आक्सीजन में कोई कमी की नहीं है। वह तो सारी की सारी गलती मरीज और उसके फेफड़ों की है। उसके फेफड़े ही अब अधिक आक्सीजन मांगने लगे हैं तो बताईये इसमें सरकार जी क्या करे।

सरकार इस कठिन प्रश्न के कठिन उत्तर में उलझी है। विदेशों से आक्सीजन मंगा रही है। ट्रेनों में, टेंकरों में आक्सीजन इधर से उधर और उधर से इधर भेज रही है। आक्सीजन बनाने के प्लांट लगाने का प्लान बना रही है। लेकिन हमारे पास इस कठिन प्रश्न का सरल उत्तर उपलब्ध है। 

सरकार इसमें भी बहुत कुछ कर सकती है। माना कि डाक्टर लोग मेडिकल कॉलेज में पढे़ हैं और नर्सें नर्सिंग स्कूल में। इंजीनियर इंजीनियरिंग काॅलेजों में और अधिकतर अधिकारी अच्छे विश्वविद्यालयों में पढे़ हैं। पर हमारे सारे के सारे मंत्री तो अखिल भारतीय वाट्सएप विश्वविद्यालय में पढ़े हैं, आज भी पढ़ रहे हैं। इसी यूनिवर्सिटी की वजह से आज हम जानते हैं कि नेहरू मुसलमान था और कितना निकम्मा था। और अब तो डाक्टर, इंजीनियर, अधिकारी सभी अपनी डिग्री ले, नौकरी पा इसी अखिल भारतीय वाट्सएप विश्वविद्यालय के छात्र बने हुए हैं। 

यही अखिल भारतीय वाट्सएप विश्वविद्यालय हमें आक्सीजन की कमी जैसे कठिन प्रश्न का सरल और टिकाऊ उत्तर देता है। यह वाट्सएप यूनिवर्सिटी हमें पढ़ाती है कि गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो सांस निकालते हुए भी आक्सीजन छोड़ता है। यह वाट्सएप यूनिवर्सिटी अपनी सारी खोजों को अमरीकी संस्थान नासा द्वारा कन्फर्म किया गया बताती है। तो हम सब अखिल भारतीय वाट्सएप विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध छात्र जानते हैं कि गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो सांसो में आक्सीजन लेता है और आक्सीजन ही छोड़ता है। और इसी में छुपा है आक्सीजन की कमी से निपटने का उपाय।

देश में गाय का हमेशा से ही बहुत महत्व रहा है। यह महत्व पिछले कुछ वर्षों में और बढ़ गया है। इस कोरोना काल में तो वह और अधिक बढ़ना चाहिए। कोरोना के मरीजों में आक्सीजन की कमी को देखते हुए सरकार को यह करना चाहिए कि एकांत वास में रह रहे हर कोरोना के मरीज के कमरे में मरीज के साथ एक एक गौमाता को बंद कर देना चाहिए। जिन मरीजों की आक्सीजन कम हो रही है, या फिर जो अस्पतालों के जनरल वार्ड में भर्ती हैं, उनके बिस्तर के पास दो दो गौमाता बांध दी जानी चाहियें। आईसीयू में भर्ती मरीज के चारों ओर गौमाता हों और जो मरीज वेंटिलेटर पर हों, उनके चारों ओर तो गौमाता का पूरा का पूरा झुंड हो। मरीजों को भी गाय जी से मिलने वाली आक्सीजन के अतिरिक्त गौमूत्र सेवन और गोबर लेपन का लाभ भी मिलेगा। फिर देखना, हमारे कोरोना के मरीज कितना जल्दी ठीक होते हैं। पूरा विश्व हमारे विज्ञान का, हमारी अखिल भारतीय वाट्सएप यूनिवर्सिटी का कायल हो जायेगा। वैसे अच्छा तो यह होगा कि गौशालाओं को ही अस्पतालों में ही तब्दील कर दिया जाये। बस मरीज की खटिया गौशाला में बिछानी होगी और मरीज को आक्सीजन, गौमूत्र और गोबर, सब एक साथ ही मिल जायेंगे। 

यह गौमाता वाला प्रयोग तब तक जारी रहना चाहिए जब तक हमारे बहुमुखी प्रतिभा वाले, वैज्ञानिक प्रधानमंत्री जी पानी में से आक्सीजन को हवा में उड़ाने या फिर वायुमंडल में मौजूद कार्बनडाइआकसाइड में से कार्बन को धूल चटाने के तरीके की खोज नहीं कर लेते हैं।

क्षमा याचना: लेखक क्षमा प्रार्थी है उन सभी से जिनकी भावना मनुष्य की मृत्यु की बजाय गाय के लिए आहत होती है और उन सभी से भी जो वैज्ञानिक सोच की बजाय अंध विश्वास में अधिक विश्वास रखते हैं। क्योंकि इस व्यंग्य से ऐसे सभी लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Coronavirus
COVID-19
BJP
Modi government

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
    24 Feb 2022
    IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
  • Himachal Pradesh Anganwadi workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी
    24 Feb 2022
    प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन…
  • Sulaikha Beevi
    अभिवाद
    केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया
    24 Feb 2022
    एलडीएफ़ सरकार ने मठीपुरम में मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए 1,032 घर बनाने की योजना तैयार की है।
  • Chandigarh
    सोनिया यादव
    चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
    24 Feb 2022
    बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार…
  • Russia targets Ukraine
    एपी
    रूस ने यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों, सैन्य आधारभूत ढांचे को बनाया निशाना, अमेरिका-नाटो को चेताया
    24 Feb 2022
    रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेना ने घातक हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों एवं अन्य सैन्य आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिये किया है। उसने आगे दावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License