NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: कोरोना की लहर में चुनावी गणित
दूसरी लहर से देश में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि सब कुछ चरमरा गया है, सिर्फ़ सरकार को छोड़ कर। वह तो उसी मज़बूती से बैठी हुई है। थोड़ा उठती, काम करती तो संभव है, डगमगा सकती थी, इसीलिए बैठी ही रही।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
16 May 2021
तिरछी नज़र: कोरोना की लहर में चुनावी गणित

कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि पीक आ चुकी है और बाकी लोग मानते हैं कि पीक अभी आनी शेष है। पर एक बात पर सब सहमत हैं कि यह बीमारी अब बड़े शहरों से छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों की ओर रुख कर चुकी है। जब बीमारी छोटे कस्बों और गाँवों में पैर पसारेगी तो मरीज तो घटेंगे ही। अरे भाई! मरीज भले ही वास्तव में बढें, पर सरकारी आंकड़ों में तो घटेंगे ही न। गाँवों में, छोटे कस्बों में, न टेस्ट होंगे और न इलाज। कहने को तो पूरे गाँव में कोरोना का कोई भी मरीज नहीं होगा पर बीस-तीस लोग वैसे ही, बिना कोरोना के ही, स्वर्ग सिधार जायेंगे। और जहाँ तक रहे श्मशान के आंकड़े, उन्हें तो सरकारें शहरों में भी झुठला देती है। 

दूसरी लहर से देश में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई कि सब कुछ चरमरा गया है, सिर्फ सरकार को छोड़ कर। वह तो उसी मजबूती से बैठी हुई है। थोड़ा उठती, काम करती तो संभव है, डगमगा सकती थी, इसीलिए बैठी ही रही। मरीज फेल, अस्पताल फेल, डाक्टर और नर्सें फेल, दवाइयों ओर आक्सीजन की सप्लाई फेल, श्मशानघाट फेल। बीमार पड़ने से लेकर मरने तक का सारा का सारा सिस्टम ही फेल। सब कुछ फेल हो गया। लेकिन सरकार अभी भी पास है। बाकी सब तो इतना फेल हो गया है कि उसे पास कराने की कोशिश में पूरे विश्व को आना पड़ रहा है।

चारों ओर से सहयोग आया, सहायता आई। लोगों ने सहायता दी, देशों ने सहायता की। हमें बताया गया, विश्वास दिलाया गया, हमारे दिमाग में बैठाया गया है कि ये सहायता इस लिए नहीं आई है कि हमारी सरकार कोरोना महामारी सम्हाल नहीं पा रही है और सब कुछ फेल हो गया है। यह सहायता तो सिर्फ और सिर्फ इसलिए आ रही है कि हमारे यहाँ, हमारे पास मोदी जी हैं।

यह जो दूसरी लहर है न, हमने सिर्फ अपने देश में बुलाई है, बड़ी मेहनत से बुलाई है। मेले लगा कर, चुनाव करा कर बुलाई है। कुम्भ से पहले उत्तराखंड में सौ, दो सौ मरीज भी नहीं थे और कुम्भ के बाद, चार पांच हजार। पश्चिमी बंगाल में भी चुनावों से पहले दो-तीन सौ मरीज थे। और अब चुनाव के बाद, दस हजार, बारह हजार, पंद्रह हजार। बढ़ते ही जा रहे हैं। बड़ी मेहनत करनी पड़ती है बीमारी की इतनी बड़ी लहर लाने के लिए। सरकार को भी और जनता को भी। 

इस दूसरी लहर से हमने पड़ोसी देशों को दूर ही रखा है। मेहनत हम करें और लहर का मज़ा वे भी चखें, ऐसा नहीं हो सकता है। जब पहली लहर थी न, तो कितना बुरा लगता था। हमारी तुलना पाकिस्तान से होती थी, बंग्लादेश से होती थी। तुलना होती थी कि प्रति लाख इतने मरीज हैं भारत में हैं और इतने मरीज हैं पकिस्तान में। बंग्लादेश में मरने की दर इतनी है और हमारे अपने देश में इतनी। आदि, आदि, इत्यादि। बहुत ही हीन भावना आती थी कि आखिर किन देशों से हमारी, विश्वगुरु की तुलना की जा रही है। तो इस बार हमने निश्चय किया कि यह जो दूसरी लहर है, सिर्फ हमारे यहाँ, हमारे देश में आयेगी। आस पास के इन तुच्छ देशों में नहीं आयेगी। हमारी और इनकी क्या तुलना। इनकी क्या औकात कि हमारी बराबरी करें। 

वैसे इन छोटे छोटे तुच्छ पड़ोसी देशों में दूसरी लहर नहीं आई है। दूसरी लहर ऐसे ही नहीं आ जाती है। उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है। और हर एक नेता मोदी जी जितनी मेहनत नहीं कर सकता है। हर एक नेता के बूते यह नहीं है कि देश को महामारी के बीच में छोड़ कर सिर्फ और सिर्फ चुनाव प्रचार में लग जाये। लोग अस्पताल के बिना, आक्सीजन के बिना मर जायें और बंदा चुनावी सभाओं में ही व्यस्त रहे। ये इमरान खान, ये शेख हसीना, ये इतनी मेहनत हरगिज नहीं कर सकते हैं। फिर भी अगर वहाँ भी दूसरी लहर आ ही गई तो अब अपने पास तुलना करने के लिए अब और भी चीज़ें हैं। अमरीका ने किसकी ज्यादा सहायता की। ब्रिटेन ने किसके यहाँ ज्यादा वेंटिलेटर भिजवाए। जापान, जर्मनी और फ्रांस ने किस देश में ज्यादा आक्सीजन कंसंट्रेटर भिजवाए। सऊदी अरब ने किसके यहाँ कितने आक्सीजन टेंकर भिजवाए। हम और हमारे एंकर इसकी तुलना कर सकते हैं। 

चुनाव में निपुण नेता चुनावी गणित में भी माहिर होते हैं। मान लो, देश में तीसरी लहर, चौथी लहर आ ही गई। और आयेगी भी जरुर ही। बिना चुनावों के कुछ नेताओं को बदहजमी हो जाती है और बिना धर्म के कुछ का काम नहीं चलता है। जब चुनाव होगा तो चुनावी सभाएँ और रैलियां भी होंगी और धर्म होगा तो धार्मिक मेले भी। और इस चुनावी गणित में माहिर होने के लिये गणित में पीएचडी करने की जरूरत नहीं है। सातवीं पास या फेल भी यह महारथ हासिल कर सकते हैं। हमारे मोहल्ले का किराने के दुकानदार ने तो स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है पर हिसाब लगाने में वह कम्प्यूटर को भी मात देता है।

तो बात हम गणित की कर रहे हैं। वोटों के हिसाब की। अगर तीसरी और चौथी लहर भी आ जाये। दस-बारह करोड़ बीमार पड़ भी जायें (सरकारी आंकड़ों में) और पंद्रह-बीस लाख मर भी गये (यह भी सरकारी आंकड़ों के अनुसार) तो भी वोटर तो नब्बे करोड़ से अधिक हैं। अब सरकार जी को पता है कि चिंता किस आंकड़े की करनी है। जो ठीक हो जायेंगे वे तो मोदी जी को ही वोट करेंगे और जो मर गये, उनका तो वोट ही नहीं रहेगा। तो सरकार जी मरने वालों की चिंता क्यों करें। राज्यों में चाहे जो मरजी होता रहे, केंद्र में तो 'आयेगा तो मोदी ही'। उसका तो गणित भी पक्का है। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Coronavirus
COVID-19
BJP
Modi government

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License