NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
बिहार चुनाव और कोरोना वैक्सीन : घर में नहीं दाने, साहेब चले भुनाने
तिरछी नज़र: सरकार का बस चलता तो पानी के टीके को ही कोरोना की वैक्सीन बता कर लगवा देती। पर ये वैज्ञानिक भी न, क्या बतायें! जब भी सरकार के नम्बर बनाने का मौका आता है तो कोई न कोई अडंगी मार ही देता है कभी वैज्ञानिक तो कभी विरोधी।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
25 Oct 2020
cartoon click

अभी तीन चार दिन पहले निर्मला सीतारमन जी ने बिहार में चुनाव घोषणा पत्र जारी करते हुए बिहार के लोगों से वायदा किया कि यदि उनकी सरकार आयी तो सभी बिहारियों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जाएगी, वह भी मुफ्त में। वैसे उन्होंने यह नहीं बताया कि यह योजना बिहार में रहने वाले बिहारियों के लिए है या फिर पूरे देश के बिहारियों के लिए भले ही वे देश के किसी भी हिस्से में रहते हों। या फिर यह योजना बिहार में रहने वाले उन सभी लोगों के लिए भी है जो रहते तो बिहार में हैं पर हैं बंगाली, उड़िया या फिर किसी अन्य राज्य के निवासी।

bihar chunav.jpg

वैसे तो वैक्सीन अभी दूर है। पता नहीं कितने महीने दूर या फिर हो सकता है कुछ साल दूर हो। कुछ बीमारियों की वैक्सीन बनाने की कोशिश तो वैज्ञानिक दशकों से कर रहे हैं पर अभी तक भी नहीं बना पाये हैं। एड्स तीस साल से अधिक पुरानी बीमारी है पर वैक्सीन, लाख कोशिशों के बावजूद, अभी तक नहीं बन पाई है। जब एड्स नया नया फैल रहा था तब भारत में भी प्रधानमंत्री थे और अमरीका में राष्ट्रपति भी। पर यह विश्व का दुर्भाग्य है कि न तो भारत में मोदी जी का शासन था और न ही अमेरिका में ट्रम्प जी का। नहीं तो एड्स की वैक्सीन भी तुरंत बन जाती। क्योंकि वैक्सीन बनाने का काम जो पुराने जमाने में वैज्ञानिक करते थे, आजकल नेता करते हैं।

वैसे तो वैक्सीन बनाने का काम आजकल भी वैज्ञानिक ही करते हैं पर उन पर नेताओं का डंडा रहता है। रहना भी चाहिए। नहीं तो ये वैज्ञानिक कितना स्लो काम करते हैं, सारी दुनिया जानती है। वह तो हमारे देश में वैक्सीन पन्द्रह अगस्त तक ही बन जाती लेकिन आलसी वैज्ञानिकों ने अनुसंधान के नियमों की दुहाई देकर टाल दी। पंद्रह अगस्त को सरकार जी को यह घोषणा कर के ही संतोष करना पड़ा कि जब भी वैक्सीन आयेगी तो सबसे पहले कोरोना योद्धाओं को ही लगाई जायेगी। बाद में सरकार जी ने यही घोषणा दो तीन बार और की। 

tirchi nazar_15.png

वैज्ञानिकों की काहिली ने सरकार जी को अभी तक यह घोषणा करने का मौका ही नहीं दिया कि वैक्सीन आ गई है। सरकार का बस चलता तो पानी के टीके को ही कोरोना की वैक्सीन बता कर लगवा देती। पर ये वैज्ञानिक भी न, क्या बतायें! जब भी सरकार के नम्बर बनाने का मौका आता है तो कोई न कोई अडंगी मार ही देता है कभी वैज्ञानिक तो कभी विरोधी। अब बिहार के लोगों को मुफ्त में टीका लगाने की बात कही गई तो विरोधियों ने प्रश्न उठाना शुरू कर दिया कि क्या बाकी प्रदेशों के लोगों को टीका पैसे लेकर लगाओगे। अरे भई, बिहारियों को हम यह मुफ्त का टीका तो वैक्सीन बनने से पहले तक ही लगा रहे हैं। जब तक वैक्सीन का टीका बन नहीं जाता तब तक सभी चुनावों में सभी वोटरों को टीका मुफ्त में ही लगाया जाएगा। 

हमें सरकार की नीयत पर शक नहीं करना चाहिए। सरकार जो भी करती है बिना मतलब के नहीं करती है। जब सरकार जी कोरोना योद्धाओं को सबसे पहले वैक्सीन देने की बात कह रहे थे तो उन्हें पता था कि वे कोरोना वारियर्स को न सुरक्षा किट (पीपीई किट) दे पा रहे हैं और न ही समय पर वेतन। न जाने कितने डाक्टर, नर्से और आशा वर्कर्स इनके लिए मांग और हड़ताल करते रहे हैं। तो सरकार ने इन्हें सबसे पहले कोरोना वैक्सीन देने का वायदा कर दिया। हम तो जानते ही हैं, वायदे मुफ्त में ही किए जाते हैं और मुफ्त के ही किए जाते हैं। 

अब बिहार में चुनाव हैं तो मुफ्त टीके की बात की जा रही है। बिहार के बाद बंगाल में चुनाव होंगे तो बंगाली बाबू को मुफ्त टीका देने की बात कही जा सकती है। बिहार में, पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष सैकड़ों बच्चे एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) से मरते हैं। उसका टीका सालों से मौजूद है पर उसके टीके को मुफ्त देने का वायदा कोई नहीं करता है। 

सरकार जी, आप वैक्सीन बनने पर किसी को भी पहले देने का वायदा करें। किसी को भी मुफ्त देने का भरोसा दिलायें। पर सर जी, सबसे पहले वैक्सीन का टीका आप ले लेना। जनता का काम तो चल ही जायेगा। दसियों बीमारियों की वैक्सीन वर्षों से नहीं, दशकों से मौजूद है पर उसे मिल नहीं पा रही है। वह वैसे ही बीमार पड़ रही है, मर रही हैं। पर बताइए क्या उसने कभी शिकायत की है! 

तो सर जी, सबसे पहले वैक्सीन का टीका आप ले लेना। हमें समझ है, वैक्सीन के अभाव में आप विदेश नहीं जा पा रहे हैं। आपकी तड़प अब हमसे और नहीं देखी जाती है। हमारी तो बस एक ही गुज़ारिश है। सैर-सपाटा के लिए अमेरिका और यूरोप के देशों में ही न जायें। कभी कभार पड़ोस के देशों में भी हो आइए। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम और यहाँ तक कि पाकिस्तान भी। इन सभी गरीब छोटे मुल्कों ने कोरोना को हराने में हमसे कहीं अच्छा प्रदर्शन किया है। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Bihar election 2020
COVID-19
corona vaccine
NDA Govt
modi sarkar
Narendra modi

Related Stories

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 
    20 May 2022
    देश में दो दिनों तक गिरावट के बाद फिर से कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी होने लगी है। देश में पिछले 24 घंटो में कोरोना के 2,259 नए मामले सामने आए हैं। 
  • पारस नाथ सिंह
    राज्यपाल प्रतीकात्मक है, राज्य सरकार वास्तविकता है: उच्चतम न्यायालय
    20 May 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड के एक दोषी एजी पेरारिवलन को रिहा कर दिया, क्योंकि तमिलनाडु के राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सज़ा को माफ़ करने की सलाह को बाध्यकारी नहीं माना।
  • विजय विनीत
    मुद्दा: ज्ञानवापी मस्जिद का शिवलिंग असली है तो विश्वनाथ मंदिर में 250 सालों से जिसकी पूजा हो रही वह क्या है?
    20 May 2022
    ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े सवालों का जवाब ढूंढने के लिए ‘न्यूज़क्लिक’ के लिए बनारस में ऐसे लोगों से सीधी बात की, जिन्होंने अपना बचपन इसी धार्मिक स्थल पर गुज़ारा।
  • पार्थ एस घोष
    पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?
    19 May 2022
    यह हो सकता है कि आरएसएस के प्रचारक के रूप में उनके प्रशिक्षण में ही नेहरू के लिए अपार नफ़रत को समाहित कर दी गई हो। फिर भी देश के प्रधानमंत्री के रूप में किए गए कार्यों की जवाबदेही तो मोदी की है। अगर…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज्ञानवापी, ताज, क़ुतुब पर बहस? महंगाई-बेरोज़गारी से क्यों भटकाया जा रहा ?
    19 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों जनता को महंगाई, बेरोज़गारी आदि मुद्दों से भटकाया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License