NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
लो कर लो बात… अब किसान भी देशद्रोही और आतंकवादी हो गये!
किसान भाइयो, तुम या तो बहुत ही भोले हो या फिर नासमझ! अब निज़ाम बदल चुका है। अब लोकतंत्र का मतलब बस पांच साल में वोट देना रह गया है। बीच में विरोध, धरना, प्रदर्शन सभी मना हैं।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
29 Nov 2020
किसान
Image Courtesy: NDTV

लो भई, किसान भी देशद्रोही हो गये, आतंकवादी हो गये। इन देशद्रोही आतंकवादियों को रोकने के लिए सरकार द्वारा बंदोबस्त कर दिये गये हैं। हरियाणा की खट्टर सरकार ने सारे उपाय किए कि ये देशद्रोही आतंकवादी देश की राजधानी की ओर न बढ़ पायें। केंद्र की भाजपा सरकार का राज्य की भाजपा सरकार को पूरा निर्देश था कि दुश्मनों की यह सेना राजधानी तक न पहुंच पाये। राजा की राजधानी सुरक्षित रहे।

हमारी कंगना रणौत ने तो पहले ही घोषणा कर दी थी कि ये जो किसान हैं न, ये आतंकवादी हैं, ये देशद्रोही हैं। जो भी मोदी जी की बात न माने, सरकार से सहमत न हो वह देशद्रोही है, पाकिस्तानी है, आतंकवादी है। जो भाजपा को वोट न दे, वह देशद्रोही है। सारे विपक्षी दल, उनके नेता, समर्थक और वोटर, सभी देशद्रोही हैं। पूरे विश्व में एकमात्र हमारा देश ही ऐसा देश होगा जहाँ की आधी से अधिक आबादी देशद्रोही है।

बात तो हम किसानों की कर रहे हैं। ये किसान देश के दुश्मनों, मतलब मोदी जी के दुश्मनों के बहकावे में आ कर दिल्ली के लिये निकल पड़े। सरकार के इंतजाम भी पूरे थे। बैरिकेडिंग तो थी ही। पुलिस भी तैनात थी। पानी की बौछार की गई। अश्रु गैस के गोले दागे गये। सड़कें खुदवा दी गईं। लाठीचार्ज भी करवाया। किसान भाइयों को तो सरकार का अहसान मानना चाहिए कि अंततः सरकार ने उन्हें दिल्ली आने की इजाजत दे ही दी। नहीं तो सरकार देशद्रोहियों को रोकने के लिए पुलिस की बजाय फौज भी लगवा सकती है। पानी की बौछार के बदले गोलियों को की बौछार करवा सकती है। अश्रु गैस के गोलों की बजाय असली गोले दगवा सकती है। सड़कें खोदने की बजाय नदी-नालों पर बने पुल तक उड़वा सकती है।

ये किसान भी न बहुत ही भोले भाले हैं। देश के सबसे बड़े बहकाने वाले बहकाऊ के बहकावे में न आकर छोटे छोटे बहकाउओं के बहकावे में आ रहे हैं। जो देश को गर्त में ले जा कर ऊंचाईयों के सपने दिखाये, वह बड़ा बहकाऊ है या वे नेता जो अपनी सीट भी न बचा पायें। जो कोरोना काल में चुनाव करवाये, सरकारें गिराने के षड्यंत्र करे, परीक्षाएँ करवाये पर उसी कोरोना के बहाने तुम्हें रोके, तुम उसके बहकाने न आ कर औरों के बहकाने में आ रहे हो। किसान भाइयों, कितने भोले हो तुम लोग जो बड़े बहकाने वाले के बहकावे में न आ कर छोटे बहकाने वालों के चक्कर में आ रहे हो। किसान भाई, क्या आप इतने भी समझदार नहीं हैं। 

किसानों में रोष है कि सरकार ने कृषि बिल लाने से पहले उनसे सलाह नहीं की। यह सलाह सुलह बीते जमाने की बात हो गई है। अब तो सातवें आसमान में विचार आता है और तुरंत जमीन पर उतर आता है। अब बताओ, क्या नोटबंदी से पहले जनता से सलाह की गई। चलो उसकी बात छोड़ो, नोटबंदी लीक हो जाती। फिर भी जिनको लीक करनी थी, उनको तो कर ही दी गई थी। क्या जीएसटी लागू करने से पहले व्यापारियों से सलाह ली गई। नहीं न..! क्या धारा 370 हटाने से पहले उन लोगों से जिन लोगों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ना था, उन कश्मीरियों से सलाह ली गई। नहीं न..! क्या पूरे देश में लॉकडाउन करने से पहले महामारी के  विशेषज्ञों से, चिकित्सकों से सलाह की गई। नहीं न..! तो किसान भाइयों, तुम क्या खास हो जो तुम्हारे से सलाह लेते। जो खास हैं उनसे ले ली थी। अम्बानियों, अडानियों को दिखा दिया था कि ऐसा कानून पारित करने जा रहे हैं, ऐनी ओब्जैक्शन!

किसान भाइयों, तुम्हें लगता है कि तुम्हारी मांग छोटी सी है। एमएसपी को कानून में शामिल कर लो। कोई भी व्यापारी, उद्योगपति, टाटा हो या बिरला, अम्बानी हो या अडानी, कोई भी एमएसपी से कम में नहीं खरीदे। तुम्हें भले ही लगता हो, पर क्या यह मांग छोटी है! ये सारे उद्योगपति अरबों खरबों रुपये तुम्हें दे कर अपने पैसे बर्बाद करना चाहेंगे, या फिर उसी पैसे को नेताओं को खरीदने में लगायेंगे। बताते हैं, अमेरिका में तो कई उद्योगपति सरकार तक को भी खरीदे रहते हैं। अब यह प्रथा हमारे देश में भी शुरू हो रही है तो क्या बुराई है। 

किसान भाइयो, तुम या तो बहुत ही भोले हो या फिर नासमझ! अब निज़ाम बदल चुका है। अब लोकतंत्र का मतलब बस पांच साल में वोट देना रह गया है। बीच में विरोध, धरना, प्रदर्शन सभी मना हैं। तुमने एक बार जो सरकार चुन ली, उसे ही पांच साल झेलो। अगर तुम्हें या किसी भी और को लगता है कि बीच में राजधानी जाओगे और राजा जी से बात कर आओगे और राजा जी अपना फैसला बदल देंगे, तो गलती पर हो। 

लिखते लिखते: गृहमंत्री अमित शाह जी ने कहा है कि  किसान लोग अपना शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन सरकार द्वारा निर्धारित स्थान पर करें। सरकार को जब छोटे मोटे, सभी चुनावों से फुरसत मिल जायेगी, सरकार उनसे बात करेगी। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Farmer protest
Farm bills 2020
DILLI CHALO
BJP
Modi government
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • COVID, MSMEs and Union Budget 2022-23
    आत्मन शाह
    कोविड, एमएसएमई क्षेत्र और केंद्रीय बजट 2022-23
    07 Feb 2022
    बजट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए घोषित अधिकांश योजनायें आपूर्ति पक्ष को ध्यान में रखते हुए की गई हैं। हालाँकि, इसके बजाय हमें मौजूदा संकट से निपटने के लिए मांग-पक्ष वाली नीतिगत कर्रवाइयों की कहीं अधिक…
  • congress
    रवि शंकर दुबे
    सिद्धू की ‘बग़ावत’ पर चन्नी के 111 दिन हावी... अब कांग्रेस को कितना मिलेगा 'गुरु’ का साथ!
    07 Feb 2022
    राहुल गांधी ने अपने कहे मुताबिक पंजाब कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया है, हालांकि लंबे वक्त से बग़ावत किए बैठे सिद्धू भी सरेंडर करते नज़र आए और हर फ़ैसले में राहुल गांधी का साथ…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी की पहली रैली cancel! विपक्ष का करारा हमला!
    07 Feb 2022
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज प्रधानमंत्री मोदी की रद्द हुई रैली पर बात कर रहे हैं। वहीं रैली रद्द होने पर जयंत चौधरी ने कहा है कि भाजपा को हार का डर सता रहा है।
  • राजेश टम्टा
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव 2022 : अल्मोड़ा की पहचान रहा ताम्र उद्योग पतन की ओर, कारीगर परेशान!
    07 Feb 2022
    कभी उत्तराखंड ही नहीं देश का गौरव रहे तांबा कारीगर आज अपने गुज़र-बसर के लिए मजबूर हो गए हैं। वर्तमान विधानसभा चुनाव में हर दल इस उद्योग को अल्मोड़ा की संस्कृति से जोड़ रहा है और उसे राज्य का गौरव बता…
  • patna
    सोनिया यादव
    बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'
    07 Feb 2022
    बीते सालों में मुज़फ़्फ़रपुर, पटना, मधुबनी समेत तमाम दूसरे शेल्टर होम से लड़कियों के भागने और रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब होने तक की खबरें सामने आईं, लेकिन शासन-प्रशासन इस सब के बाद भी कभी इस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License