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प्रधानमंत्री के नाम ‘जन की बात’
यह युद्ध का माहौल होता है न, इसका बहुत लाभ होता है। सारा देश सारे मतभेद भुला, राजा के पीछे खड़ा हो जाता है। यह कोरोना का माहौल है न बड़ा ही उदासी भरा, अवसाद भरा है। कोरोना से कहीं कहीं देशभक्ति भी चटकने लगी है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
28 Jun 2020
modi

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

हम जनता तो ठीक ठाक ही हैं। वैसे तो कोरोना से पांच लाख से अधिक जनता बीमार हो चुकी है और कोई पंद्रह हजार मर गई है। हम जनता को कुछ भी होता रहे, पर आप ठीक हैं, आपको छींक भी नहीं आई है, यह जान हम जनता बहुत ही संतुष्ट हैं। राजा ठीक रहे, तो सब ठीक है। प्रजा का क्या है, वह तो आती जाती रहती है।

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कोरोना की बात तो अब पुरानी बात हो चुकी है। अब एक नई बात चाहिए तो युद्ध की बात शुरू हो गई है। पाकिस्तान से नहीं सर जी, चीन से। पाकिस्तान से तो युद्ध की बात हर समय चलती रहती है, पर यह जो चीन से युद्ध की बातें, जो अब चल रही हैं न, नई हैं। यह युद्ध का माहौल होता है न, इसका बहुत लाभ होता है। सारा देश सारे मतभेद भुला, राजा के पीछे खड़ा हो जाता है। यह कोरोना का माहौल है न बड़ा ही उदासी भरा, अवसाद भरा है। कोरोना से कहीं कहीं देशभक्ति भी चटकने लगी है। कोरोना तो अभी भी है पर अच्छा हुआ उसके माहौल से निजात मिली। अब यह युद्ध का जो माहौल है न, बड़ा उत्साहवर्धक, उत्तेजनापूर्ण माहौल है। देशभक्ति भी अपने चरम पर है। अच्छा किया जो आपने अपने मित्र चीन के साथ मिल कर माहौल ही बदल दिया

नया यह है सर जी कि आपके मित्र चीन ने, अभी पिछले सप्ताह ही हमारे बीस सैनिकों को मार दिया। सर, यह 1962 की नहीं, 2020 की ही बात है, अभी जून माह की ही, पंद्रह जून की। यही आपके शासन काल की ही। अभी आपका शासन काल ही चल रहा है न, सर

सर, यह क्या हुआ, कैसे हुआ, ढंग से पता ही नहीं चल पा रहा है। मैंने तो यह समझा और पढा़ था कि चीन के सैनिकों ने भारतीय सीमा के अंदर घुसपैठ कर ली थी। जब भारतीय सैनिक उन्हें निकालने गये, तो मारे गये, शहीद हो गए। पर वास्तव में ऐसा नहीं था, सर जी। प्रधानमंत्री जी, आपने ही सर्वदलीय बैठक में बताया "न वहाँ कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है"। सर जी, आप प्रधानमंत्री हैं, झूठ थोड़े ही न बोलेंगे।

प्रधानमंत्री महोदय, तो फिर क्या भारत के सैनिक चीन की सीमा के अंदर घुस गए थे। पर ऐसा भी नहीं हुआ होगा। युद्ध की स्थिति तो थी नहीं, और बिना युद्ध की स्थिति के हमारे सैनिक किसी दूसरे देश की सीमा में घुसते ही नहीं हैं। तो फिर असलियत में हुआ क्या था, न तो प्रधानमंत्री जी, आपने बताया और न ही आपके रक्षामंत्री या विदेश मंत्री जी ने। लगता है आप लोगों को सच्चाई पता ही नहीं है। हाँ, अगर अमित शाह जी को सच्चाई पता हो तो, जरा उन से कह दें, वे ही बता देंगे।

सर, जैसे भी जो भी हुआ हो, हुआ यह कि पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में भारत चीन सीमा पर भारत के बीस सैनिक शहीद हो गए। सर, आप रक्षा मंत्रालय को जरा जोर की डांट लगाईये। जहाँ तक मुझे खबर है रक्षा मंत्रालय ने तो उन शहीदों के लिए शहीद (Martyer) शब्द का प्रयोग तक नहीं किया। रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति में उन शहीद जवानों के लिए शहीद हुए की बजाय मारे गए (Killed) शब्द का प्रयोग किया है। सर, जो लोग शहीद हुए थे, बिहार रेजिमेंट के थे। कई बिहारी भी थे। सर जी, बिहार में इसी साल चुनाव हैं, वे रक्षा मंत्रालय का बुरा मान गये तो। लेकिन सर जी, आप हैं, अमित शाह जी हैं, सब सम्हाल लेंगे। वैसे भी शब्दों का सही प्रयोग तो हम जैसी जनता के लिए जरूरी है। अन्यथा ट्रोल हो जाओगे। ये ट्रोलर्स सरकार को ट्रोल नहीं करते हैं।  

प्रधानमंत्री महोदय जी, कहा यह भी जा रहा है कि हमारे सैनिकों ने शस्त्रों का प्रयोग नहीं किया। हालांकि उनके पास शस्त्र थे लेकिन वे नियमों से बंधे हुए थे। कहते हैं कि वे सैनिक किसी ऐसी संधि से बंधे थे जिसमें शस्त्रों का प्रयोग वर्जित है। ऐसी नापाक संधि, जिसमें सैनिक अपने हथियारों का इस्तेमाल भी न कर सकें, ऐसी स्थिति में भी नहीं जब उन पर आक्रमण किया गया हो और उन्हें जान का खतरा हो, सर जी, आपके होते हुए कैसे बची रह गई। सर जी, आप छह साल से प्रधानमंत्री हैं, आपकी निगाह इस नापाक संधि पर क्यों नहीं गई।

सर जी, आप ठीक पहचाने हैं। यह जो चीन है न, हमारी सरकार की सफलताओं से परेशान है। सर जी, आपने कमाल की विदेश नीति अपनाई है। आपके दीपक के प्रकाश से सारा विश्व रौशन है, चुंधिया रहा है। भले ही आसपास में अंधेरा है। कहावत भी है कि 'दीपक तले अंधेरा'। आपके विश्व के सारे बड़े नेताओं से व्यक्तिगत संबंध हैं। पहले ओबामा से और अब राष्ट्रपति ट्रम्प से तो लंगोटिया यारी जैसी है आपकी। अभी हाल ही में आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने भी आपको वर्चुअल मीटिंग में समोसे खिलाये थे। बताईये ऐसा कभी नेहरू से पप्पू तक किसी के साथ हुआ है! 

आपकी दोस्ती तो चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से भी है। आपने उन्हें अहमदाबाद में झूले झुलाये, मामल्लापुरम में सागर तट की सैर कराई। पर ये जो चीनी लोग हैं न, जरा सा भी लिहाज नहीं करते। सर जी, ये तो बस दोस्त की पीठ में बस छूरा भोंकना जानते हैं, छूरा। लेकिन आप यारों के यार हैं। दोस्ती निभाना जानते हैं। मुझे पता है आपने यह बयान कि न वहाँ कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है, इसी दोस्ती के मद्देनजर दिया होगा। दोस्ती का मान रखना तो सर जी, कोई आपसे सीखे।

सर जी, हमारे पास पड़ोस के ये छोटे छोटे पड़ोसी कभी नहीं समझ सकते कि भारत अब आपके नेतृत्व में बड़े लोगों की सोहबत में आ गया है। ये सब आप से, भारत से चिढ़ते हैं। ये पड़ोसी होते ही ऐसे हैं। जरा सी उन्नति करो नहीं इन्हें चिढ़ होने लगती है। कोई भी अपने आस पड़ोस में देख ले। कोई अपने मकान की दूसरी मंजिल बनवायेगा, नई बड़ी कार खरीदेगा, तो ये पड़ोसी लोग जल भुन जायेंगे

सर, इधर आप विश्व में धाक जमाने के चक्कर में अपने छोटे छोटे पड़ोसियों को जरा सी देर के लिए भूल गए तो चीन ने उन्हें पटाना शुरू कर दिया। नहीं तो नेपाल की क्या औकात कि वो भारत के नक्शे पर उंगली उठा दे और अपना नक्शा जारी कर दे। और चीन, ये तो बंगलादेश, श्रीलंका और मालदीव को भी अपने बस में करना चाहता है। पर ये पड़ोसी हैं न, हमारा एहसान बिल्कुल भी याद नहीं रखते हैं। श्रीलंका को याद नहीं है कि कैसे हजारों साल पहले हमारे भगवान श्रीराम ने लंका की जमीन को अपने चरण स्पर्श से पवित्र किया था। न ही बंगलादेश को 1971 याद है। और नेपाल और मालदीव, अगर हमारी कृपा न होती तो.....। खैर छोड़ो हम तो नेकी कर दरिया में डाल देते हैं। इसीलिए हमारे देश में जरा सी बारिश होने पर नदी नाले ओवरफ्लो करने लगते हैं। पर इन देशों को तो हमारा एहसान नहीं भूलना चाहिए था न।

वैसे सर जी, देखा जाये तो इस घटना में सारी की सारी गलती कांग्रेस की है। एक तो आजकल राहुल गांधी को काम है नहीं। जब देखो सरकार से कुछ न कुछ पूछता रहता है, ट्वीट करता रहता है। हिम्मत है तो सामने आ कर पूछ, क्या ट्वीट करता फिरता है। इसे पता नहीं है कि आपकी सरकार से प्रश्न पूछना देशद्रोह है। आप मालिक हैं, राजा हैं, प्रजा को क्या बताना है क्या नहीं, यह आपकी मर्जी है। अब आपने समय पर यह नहीं बताया कि दस सैनिक चीन के कब्जे में भी हैं, तो यह तो आपका अधिकार है। सर जी, आपने तो फिर भी बता दिया पर चीन ने तो अभी तक ढंग से नहीं बताया है कि उसके कितने सैनिक मारे गए और कितने घायल हुए

सर जी, लेकिन गलती किसी की नहीं है, आपकी तो हरगिज नहीं। सारी गलती गांधी और नेहरू की है। न गांधी रहे होते और न हमारे सैनिक हथियारों का प्रयोग करने से वंचित रहते। और नेहरू, उसने तो देश का बेड़ा ही गर्क कर दिया था। उसने अगर 1962 में ही चीन को नेस्तनाबूद कर दिया होता तो न हमें आज यह दिन देखना पड़ता और न विश्व को कोरोना। सर, अब यह चीन को नेस्तनाबूद करने का काम भी आप ही करेंगे। सर, आप को ही नेहरू के द्वारा की गई सारी गलतियां सुधारनी हैं।

सर जी, हम तो चीन को बरबाद करने के लिए चीन में बनी सभी चीजों का बहिष्कार कर देंगे। कहते हैं दवाइयाँ बनाने के रसायन में उसकी दो तिहाई से अधिक भागीदारी है। हम गौमूत्र का, गोबर का, रामदेव की दवाईयों का सेवन कर अपना इलाज कर लेंगे। बीमारी से मर जायेंगे, पर चीनी रसायनों से बनी दवाइयों का सेवन नहीं करेंगे। पर सर, ये जो चीनी हैं न, मैं सच बोल रहा हूँ, बंगाल के काला जादू से ज्यादा असरदार है इनका जादू। सर जी, जब आप सर्वदलीय बैठक के बाद बोल रहे थे, सच मानिये आप के उपर चीनी जादू चल गया था। सर जी, इसीलिये जब आप बोल रहे थे तो ऐसा लग रहा था जैसे चीन का राष्ट्रपति या उनका प्रतिनिधि बोल रहा हो। मैं सच बोल रहा हूँ सर जी, अगर जादू नहीं होता तो आप ऐसा हरगिज नहीं बोलते जैसा आपने बोला।

लेकिन सर, आप अपनी भाषा बोलिए या चीन की, दुश्मन अगर आँख उठा कर देखेगा तो सारा देश आपके पीछे रहेगा। सर जी, विरोध आपका हो सकता है, आपकी नीतियों का हो सकता है, आपकी सोच का हो सकता है पर देश का कोई विरोध नहीं है। देश की सुरक्षा के लिए सब एक साथ हैं।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

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