NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
सरकार जी!, जमाखोरी के बाद, रिश्वतखोरी भी कानूनी हो
सरकार ने जमाखोरी को कानूनी बना दिया है। यानी कोई एक व्यक्ति, यदि उसमें सामर्थ्य है तो पूरे देश का गेहूं, चावल या आलू-प्याज या फिर किसी भी अन्य वस्तु का असीमित भंडारण कर सकता है। जमाखोरी कानूनी है तो कालाबाजारी भी कानूनी बन ही जायेगी। तो सरकार से अब यह प्रार्थना है कि वह जल्द ही कानून बना रिश्वत लेने और देने, दोनों को कानूनी बना दे।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
04 Oct 2020
Tirchi Nazar

चलिये, आपको एक कहानी सुनाता हूँ। आप कहेंगे कि कहानी क्यों सुना रहे हो? कहानी सुनना और सुनाना हमारी पुरानी परंपरा रही है और यह जारी रहनी चाहिए। कहानी सुनना-सुनाना हमें दूसरे लोक में ले जाता है। कहानियाँ सारी परेशानियां भुला देती हैं। पेट की भूख मिटा देती हैं। मांएं भूखे बच्चों को पानी पिलाते हुए कहानी सुना सुला देती हैं। बच्चे भी कहानी सुनते हुए पानी को दूध समझ पी लेते हैं। प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि हम कहानी सुनने-सुनाने की इस प्रथा को न सिर्फ जारी रखें अपितु बढ़ायें। हम समस्याओं को सुलझायें नहीं, उनको भूल जायें। ये काम कहानियाँ बखूबी कर सकती हैं। चलो बेकार की भाषणबाजी नहीं, कहानी सुनते सुनाते हैं।

tirchi nazar_12.png

प्राचीन काल की बात है, भारत देश में यवनों के पदार्पण शुरू होने से काफ़ी समय पहले की। जम्बू द्वीप के भारत खण्ड में सुकर्ण शर्मा नाम के शासक का शासन था। वह शासक बहुत ही लोकप्रिय माना जाता था, जैसे कि हमारे आज के शासक माने जाते हैं। उसके मंत्रिमंडल में एक मंत्री था जो वैसे तो अपने कार्य से राजा को बहुत प्रसन्न रखता था पर स्वयं थोड़ा बेईमान और रिश्वतखोर था। अब जैसा कि होना ही था, उस मंत्री की बेईमानी और रिश्वतखोरी की कहानियां राजा जी के पास भी पहूँची। धीरे-धीरे जब राजा जी की भी बदनामी होने लगी, राजा जी ने उसको उसके मौजूदा पद से हटा दिया और एक ऐसी जगह नियुक्त कर दिया जहाँ रिश्वत की संभावना ही न हो।

राजा ने उस मंत्री को नदी के किनारे पर नियुक्त कर दिया कि यहाँ बैठ कर नदी की लहरों की गणना करो। राजा को लगा कि यह मंत्री यहां लहरों को गिनती करता हुआ रिश्वत कैसे लेगा। लहरें तो रिश्वत देने से रहीं। जल्दी ही इसकी बुरी आदत छूट जायेगी और फिर इसे राज्य के सामान्य कार्य में लगा दिया जायेगा।

पर मंत्री या अफसर तो वही योग्य है जो जहाँ अवसर मौजूद न हों, वहां पर भी बना सके। तो वे मंत्री जी टेंट लगा, अपनी मेज और कुर्सी बिछा, वहीं नदी के किनारे विराजमान हो गये और लगे नदी की लहरें गिनने। थोड़ी देर में पास के गांव के लोग नदी से पानी भरने आये। मंत्री महोदय ने सबको भगा दिया, कि यहाँ वे राजाज्ञा से नदी की लहरों की गणना कर रहे हैं और लोगों के पानी भरने से लहरों की गणना में गतिरोध पैदा होगा। पानी न भर पाने से लोग परेशान हो गए। अंततोगत्वा लोग रिश्वत देकर पानी भरने लगे।

आप कहेंगे कि इस कहानी को सुनाने का क्या अर्थ। अर्थ और वजह भी बहुत हैं । कहानी तो आगे और भी है पर हमारा अभिप्राय यहां तक की कहानी सुनाने से ही सिद्ध हो जाता है। अब जब देश में आर्थिक मंदी छाई हुई है, सरकारी खजाने में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कमी आई हुई है। हमारे देश में वर्तमान समय में जो भी कुछ हो रहा है, अभूतपूर्व और ऐतिहासिक ही हो रहा है। तो इस ऐतिहासिक काल में यह कहानी और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।

हम जानते ही हैं कि अभी दो सप्ताह पहले ही सरकार ने कानून बना जमाखोरी को कानूनी बना दिया है। यानी कोई एक व्यक्ति, यदि उसमें सामर्थ्य है तो पूरे देश का गेंहूं, चावल या आलू-प्याज या फिर किसी भी अन्य वस्तु का असीमित भंडारण कर सकता है। यह कानूनी होगा। जमाखोरी कानूनी है तो कालाबाजारी भी कानूनी बन ही जायेगी। तो सरकार से अब यह प्रार्थना है कि वह जल्द ही कानून बना रिश्वत लेने और देने, दोनों को कानूनी बना दे।

जब रिश्वतखोरी को कानूनी मान्यता प्राप्त हो जायेगी तो सरकार और सेवकों को उसका बहुत ही लाभ होगा। उसके लाभ पर तो ग्रंथ पर ग्रंथ भरे जा सकते हैं पर यहाँ हम संक्षेप में देखते हैं। 

पहली बात तो यह कि सरकार को अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने के झंझट से मुक्ति मिल जायेगी। सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा और सरकार अपने खजाने को उन्मुक्तता से जहाँ चाहे वहां खर्च कर सकेगी। आजकल जो हम पढ़ते सुनते रहते हैं कि फलाने राज्य के नर्सिंग स्टाफ को, ढिकाने राज्य के सफाई कर्मचारियों को तीन तीन, चार चार महीने से वेतन नहीं मिला है, ऐसी खबरें कम ही नहीं, समाप्त हो जायेंगी। 

दूसरा, नौकरी पेशा लोगों को अमूमन यह शिकायत रहती है कि महीने में एक बार पैसा आता है और महीने के अंत तक समाप्त हो जाता है। जब रिश्वत से आमदनी होने लगेगी तो पैसा घर में रोज आयेगा। बीवी भी महीने के अंत में हाथ तंग होने की बात नहीं करेगी।

तीसरा, कुछ कर्मचारी हमेशा भुनभुनाते रहते हैं कि सारा काम वे करते हैं और मलाई अफसर खा जाते हैं। रिश्वतखोरी को कानूनी मान्यता देने पर हर एक को बराबर का अवसर मिल सकेगा। हो सकता है कि होनहार कर्मचारी अफसरों से अधिक कमाई कर सकें। ऐसे होनहार कर्मचारी जो अधिक समर्थ हों, रिश्वतखोरी के कानूनी रूप से सही माने जाने के बाद अपनी आय अपनी योग्यता अनुसार बढा़ सकते हैं। ऎसा कानून आने के बाद सरकारी नौकरियों में असंतोष में कमी भी आयेगी।

चौथा, सरकार काले धन को समाप्त करने के लिए तमाम तरह के उपाय कर चुकी है। यहां तक कि नोटबंदी तक की। पर सरकार द्वारा किए गए किसी भी उपाय से कालाधन समाप्त नहीं हुआ। नोटबंदी ने भी काले धन को समाप्त नहीं किया अपितु सफेद ही बना दिया। लेकिन रिश्वत लेने - देने को वैध बनाने से निश्चित ही काला धन समाप्त भले ही न हो, कम तो अवश्य ही होगा। 

पांचवां, सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद, देश की छवि एक भ्रष्ट देश की ही बनी हुई है। वजह है रिश्वतखोरी। किसी भी दफ्तर में जाओ, कोई भी काम करवाओ, रिश्वत हर जगह चलती है। लोग बोलते हैं कितना गैरकानूनी काम हो रहा है। कितना भ्रष्टाचार है। जब रिश्वतखोरी कानूनी बना दी जायेगी तो यह भ्रष्टाचार का तमगा अपने आप से ही हट जायेगा। हम एक ही झटके में महाभ्रष्ट से महाईमानदार बन जायेंगे। 

छठा, सातवां, आठवां .... कहाँ तक गिनायें, लाभ तो बहुत सारे हैं रिश्वतखोरी को कानूनी जामा पहनाने के। बस आम जनता में विद्रोह न हो इसके लिए सरकार सभी कार्यों के लिए रिश्वत के रेट फिक्स कर सकती है। आम जनता का क्या है, वह तो बस इसी से खुश हो जायेगी और सरकार की ईमानदारी के गुण गाने लगेगी। तो सरकार बहादुर, तो कब ला रहे हो रिश्वतखोरी को कानूनी मान्यता देने का अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कानून। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Satire
Political satire
tirchi nazar
farmer
farmer crises
black money
demonitisation
Corruption

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • Russia Draws Red Lines for US
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अमेरिका के सामने खींची लाल लकीर 
    18 Oct 2021
    मान्यता देने से पहले हम कुछ क्षेत्रीय पहल की उम्मीद कर सकते हैं। मान्यता के लिए मानदंड आमतौर पर पूरे देश पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण होना ज़रूरी होता है।
  • ald
    सरोजिनी बिष्ट
    आख़िर जनांदोलनों से इतना डर क्यों...
    17 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड के विरोध में, उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार से सवाल करने का दम रखने वाली संघर्षशील ताकतें लगातार सड़कों पर उतर रही हैं तो उनके ख़िलाफ़ संविधान के विरुद्ध जाकर बेहद दमनात्मक…
  • press freedom
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़ाद पत्रकारिता से सत्ता को हमेशा दिक्कत रही
    17 Oct 2021
    हाल के सालों में भारत में प्रेस की आज़ादी कमज़ोर होती गई हैI इतिहास के पन्ने के इस अंक में लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने पत्रकार मासूम मुरादाबादी और जयशंकर गुप्ता से खास चर्चा की जिसमें प्रेस की आज़ादी…
  • संदीपन तालुकदार
    चीन द्वारा चाँद से धरती पर लाए पत्थरों से सामने आया सौर मंडल का नया इतिहास
    17 Oct 2021
    वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह से एकत्र किए गए पत्थरों के नमूनों के निष्कर्षों को साझा किया है, जिससे इसके कुछ आवश्यक पहलुओं के बारे में नई चीज़ें पता चली हैं।
  • अज़हर मोईदीन
    केरल बीजेपी में बदलाव से भी नहीं कम हुए बढ़ते फ़ासले
    17 Oct 2021
    हाल ही में संगठनात्मक नेतृत्व में फेरबदल और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रत्याशियों की घोषणा ने भाजपा की केरल इकाई के भीतर दरार को और बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License