NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: दिल्ली सरकार का देशभक्ति बजट
वैसे सरकार ने यह भी नहीं बताया है कि देशभक्ति का अर्थ आख़िर में है क्या? देशभक्ति के पाठ्यक्रम में क्या क्या शामिल होगा? देशभक्ति के सिलेबस में देश की भक्ति ही होगी या फिर राजा की भक्ति भी शामिल होगी?
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
21 Mar 2021
दिल्ली सरकार का देशभक्ति बजट
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : New Indian Express

दिल्ली सरकार ने अपना बजट प्रस्तुत कर दिया है। बजट को नाम दिया है देश का पहला 'देशभक्ति बजट'। यानी देश में पिछले सत्तर सालों में प्रस्तुत किए गये सभी बजट, भले ही वे केन्द्र सरकारों के रहे हों या फिर राज्य सरकारों के, देशभक्ति बजट नहीं थे। मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजटों को भी देशभक्ति न बताना बहुत ही देशद्रोह की बात है। पिछली सरकारों के बजट को भले ही जो मर्जी कहो, कितनी भी गालियाँ दो पर मोदी जी की सरकार के द्वारा प्रस्तुत बजटों की बजाय अपने बजट को ही देश का पहला देशभक्ति बजट बताना सचमुच में ही देशद्रोही बात है।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बताया है कि दिल्ली के लोगों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार दिल्ली में पांच सौ स्थानों पर इतने ऊंचे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज लगायेगी जो दूर से तो दिखाई देंगे पर पास से देखने के लिए आपकी गर्दन को मशक्कत करनी पड़ेगी। उन तिरंगों को देख देख कर लोगों में देशभक्ति की भावना जाग्रत होगी। अब सरकार ने यह नहीं बताया कि जिन मोहल्लों, कॉलोनियों में तिरंगे नहीं लगाये जायेंगे वहाँ देशभक्ति की भावना कैसे जाग्रत होगी। कई बार तो मैं सोचता हूँ कि इन झंडों के लगने के बाद एक गली के लोग दूसरी गली के लोगों को चिढ़ायेंगे कि देखो, हम तो देशभक्त बन गये हैं, क्योंकि हमारे यहाँ तिरंगा लगा है। तुम कब देशभक्त बनोगे?

लेकिन लोग चिंता न करें। दिल्ली की देशभक्त सरकार अगले वर्ष के 'देशभक्ति बजट' में फिर से और झंडे लगायेगी। अगर सरकार की देशभक्ति ने जोर मारा तो संभव है अगले वर्ष एक हजार झंडे लगाये जायें। और उससे अगले वर्ष डेढ़ या दो हजार। पर फिर भी एक मोहल्ले वालों को दूसरे मोहल्ले वालों को चिढा़ने का मौका तो मिल ही जायेगा। कि हम तो तीन साल से देशभक्त हैं पर तुम तो इसी वर्ष देशभक्त बने हो।

लेकिन दिल्ली सरकार अपने यहाँ के निवासियों को देशभक्त बनाने के लिये सैकड़ों तिरंगों को लगाने के अलावा और भी कदम उठा रही है। दिल्ली सरकार ने यह निश्चय किया है कि वह अपने यहाँ के स्कूलों में देशभक्ति का पाठ्यक्रम लागू करेगी। शायद इस काम के लिये ही उन्होंने दिल्ली में शिक्षा के लिए एक नया बोर्ड बनाने का निश्चय भी किया है। पर इससे होगा यह कि दिल्ली बोर्ड के स्कूलों के छात्र तो देशभक्त बन जायेंगे पर दिल्ली में ही अन्य बोर्डों में आने वाले स्कूलों के छात्रों का क्या? वे तो देशभक्त बनने से रह जायेंगे। देश के अन्य राज्यों के छात्रों की बात तो रहने ही दीजिए।

अब आगे आने वाले समय में दिल्ली के स्कूलों से निकलने वाले छात्र खालिस देशभक्त बन कर निकलेंगे। पर उन सब का क्या होगा जो अपना छात्र जीवन समाप्त कर चुके हैं। जो अब नौकरी में सैटल हो कर मोटी तनख्वाह के साथ साथ रिश्वत भी कूट रहे हैं। वैसे उनको तो देशभक्ति पढ़ाने की जरूरत ही नहीं है। वे तो देशभक्त ही हैं। ये रिश्वतखोरी, ये भ्रष्टाचार, जब तक आंच न आये, जांच न हो, देशभक्ति ही है।

वैसे सरकार ने यह भी नहीं बताया है कि देशभक्ति का अर्थ आखिर में है क्या? देशभक्ति के पाठ्यक्रम में क्या क्या शामिल होगा? देशभक्ति के सिलेबस में देश की भक्ति ही होगी या फिर राजा की भक्ति भी शामिल होगी? और क्या राजा की भक्ति के साथ साथ धर्म की भक्ति भी इस देशभक्ति के पाठ्यक्रम में शामिल होगी या नहीं? वैसे राजा की भक्ति के बिना देशभक्ति का सिलेबस बने, यह तो कोई भी राजा नहीं चाहेगा। फिर वह राजा चाहे केजरीवाल हो या मोदी।

इसलिए जरूरी है कि जो भी सरकार से सवाल पूछते हैं, सरकार के द्वारा बनाए कानूनों का विरोध करते हैं, सरकार की नीतियों और नीयत पर उंगली उठाते हैं, उन सभी देशद्रोहियों को भी देशभक्ति सिखाई जाये। पर मुश्किल यह है कि उनमें से अधिकतर अपनी पढ़ाई समाप्त कर चुके हैं या कम से कम स्कूली शिक्षा तो पूरी कर ही चुके हैं। उन्हें देशभक्ति सिखाने के लिए सरकार को चाहिए कि प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम में भी देशभक्ति का सिलेबस लागू करे। इस काम में सरकार अब और देर न करे। पहले ही बहुत देर हो चुकी है। और इस प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम में आज कल के राजनेताओं को जरूर एनरोल किया जाये। वास्तव में उन्हें ही देशभक्ति के मायने सिखाने की सबसे ज्यादा जरूरत है। और मां कसम, अगर उन्हें देशभक्ति सिखा दी गई तो करोड़ों लोग अपने आप ही देशभक्ति सीख जायेंगे।

अब स्कूल में देशभक्ति के सिलेबस से ही बच्चे देशभक्त बनेंगे तो फिर गोखले, गांधी, लाला लाजपत राय, सुभाष चंद्र बोस, और सावरकर, चलो सावरकर को भी देशभक्त मान लेते हैं, कैसे देशभक्त बने? और फिर रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, भगतसिंह और आजाद कैसे देशभक्त बने? वे तो अंग्रेजों के शासन में पले बढ़े थे। उन्हें तो देशभक्ति के किसी सिलेबस से शिक्षा नहीं मिली थी। उन्हें तो किसी ने पाठ्यक्रम में देशभक्ति नहीं पढ़ाई थी।

ये सब लोग देशभक्त बने अंग्रेजों की गुलामी से न कि किसी देशभक्ति के सिलेबस से। वे सभी देशभक्त बने अंग्रेजों के जुल्म से, अंग्रेजों की तानाशाही से। तभी तो केन्द्र सरकार देशवासियों को देशभक्त बनाने के लिए कोशिश कर रही है कि देश में फिर से वही अंग्रेजों के जमाने वाला जुल्म, वही तानाशाही शुरू कर दी जाए। केन्द्र सरकार को पता है कि नागरिकों को देशभक्त बनाने के लिए क्या जरूरी है। तो किसी के भी लिए कोई भी कानून बना दो। अरे भाई! जनता तो गुलाम हैं, उससे पूछने की, सलाह लेने की भला क्या जरुरत है। कोई भी विरोध करे, धरना-प्रदर्शन करे, आंदोलन करे, तो कुचल डालो। इतना जुल्म ढहाओ कि लोगों को अंग्रेजों की याद आ जाये। लोग अपने आप ही देशभक्त बन जायेंगे। बेकार में ही दिल्ली सरकार की तरह जगह जगह राष्ट्रीय झंडे लगाने, देशभक्ति का सिलेबस बनाने की क्या जरूरत है।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Delhi Budget
AAP
Arvind Kejriwal

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड:  रेलवे ठेकदार द्वारा खोदे गड्ढे में डूबकर गांव की 7 बच्चियों की मौत
    24 Sep 2021
    गुस्साए ग्रामीणों का आरोप है कि यहां से गुज़रनेवाली रेलवे लाइन में मिट्टी भराई के लिए रेलवे ठेकेदार ने गांव से सटी ज़मींन में ही खनन मानक के नियमों का उल्लंघन कर गड्ढे खुदवा दिए थे। इन्हीं में से एक…
  • Sensex
    न्यूज़क्लिक टीम
    सेंसेक्स ऊपर मतलब अमीरों के अच्छे दिन
    24 Sep 2021
    सेंसेक्स में पिछ्ले तीन सालों में 65% उछाल आया है, जबकि हमारी जीडीपी का हाल खस्ता है। इसका कारण है की देश की बड़ी कंपनियों का मुनाफ़ा तेज़ी से बढ़ा है, लेकिन कामगारों का वेतन और मजदूरी तीन साल में घट…
  • supreme court on caste census
    अजय कुमार
    जातिवार जनगणना न कराने से जुड़े सरकार के तर्क बेहद बचकाना!
    24 Sep 2021
    सरकार सुप्रीम कोर्ट से कह रही है कि प्रशासनिक जटिलताओं की वजह से जातिवार जनगणना कराना मुमकिन नहीं। क्या इस तर्क में दम है?
  • scheme workers
    मुकुंद झा
    स्थायी नौकरी और वेतन की मांग को लेकर देशभर में स्कीम वर्कर्स की हड़ताल और प्रदर्शन
    24 Sep 2021
    ये प्रदर्शन अखिल भारतीय संयुक्त समिति के आह्वान पर किए गए। एक दिवसीय हड़ताल के तहत पूरे देश में जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों व कार्यस्थलों पर आंगनवाड़ी, मिड डे मील और आशा कर्मचारियों द्वारा जोरदार…
  • kisan
    बादल सरोज
    हुक्काम बनाम अवाम : 17 सितंबर बनाम 27 सितंबर
    24 Sep 2021
    ख़ैरियत की बात यह है कि भारत दैट इज़ इंडिया नाम के सॉवरिन सेक्युलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक में एक पब्लिक है अभी और वो सब जानती है। यही पब्लिक 17 सितंबर के इस झूठे, कल्पित और आभासीय रिकॉर्ड के खिलाफ 27…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License