NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
राजनीति
अमेरिका
तिरछी नज़र: 'अलविदा ट्रम्प, वेलकम बाइडेन'
वोटिंग मतपत्रों से। आविष्कार वेस्ट करे और लाभ उठाये ईस्ट। ये चुनाव इसी का उदाहरण है। पश्चिम वाले, चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ईवीएम ईज़ाद तो कर दी, पर चुनाव करवाते हैं मतपत्रों से।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
08 Nov 2020
'अलविदा ट्रम्प, वेलकम बाइडेन'
फोटो साभार : यूट्यूब

हमें तो लगता था कि अमेरिका बहुत ही उन्नत देश है। सारी आधुनिक वैज्ञानिक शोधों में सबसे आगे। जितने नोबेल पुरस्कार विजेता हमारे सारे देश में अब तक हुए हैं उतने तो वहाँ के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के एक एक विभाग में ही हैं। सबके सपनों का संसार है अमेरिका।

लेकिन इस बार के राष्ट्रपति चुनाव ने अमेरिका की सारी पोल खोल दीं। वैसे भी चुनावों के समय ये सारे तथाकथित आधुनिक देश भी पुरातनपंथी बन जाते हैं। अब अमेरिका में देखो। चुनाव हुए कितने दिन गुजर गये। अब जाकर पता चला कि कौन राष्ट्रपति बनेगा। वैसे अभी भी ट्रम्प जी का कुछ भरोसा नहीं। वे तो हार मानने को तैयार ही नहीं।

चलो, बाकायदा रिजल्ट घोषित करने के आलसीपने को तो छोड़ो, वोट डालने में भी आलस्य। इतने सारे लोगों ने पोस्टल वोट दिया कि गिनते ही नहीं बन रहा है। हमारे यहाँ तो गिनती के पोस्टल वोट होते हैं। ऐसे खास लोग ही पोस्टल वोट दे सकते हैं जो अपनी सरकारी ड्यूटी नहीं छोड़ सकते हैं जैसे चुनाव में लगे लोग या फौजी जवान। और वहाँ अमेरिका में कोई भी डाक से वोट डाल सकता है। क्या बेहूदगी है! लोकतंत्र का कैसा मजाक है! 

वोटिंग मतपत्रों से। आविष्कार वेस्ट करे और लाभ उठाये ईस्ट। ये चुनाव इसी का उदाहरण है। पश्चिम वाले, चाहे अमेरिका हो या यूरोप, ईवीएम ईज़ाद तो कर दी, पर चुनाव करवाते हैं मतपत्रों से। हम ही हैं तकनीकी का लाभ उठाने वाले असली लोग। चाहे कोई भी कितनी भी उंगली उठा ले, चुनाव करवायेंगे ईवीएम से ही। ईवीएम से फायदा ही फायदा है। मैनिपुलेशन का लाभ तो है ही, परिणाम भी जल्दी ही आ जाता है। अब देख लेना, बिहार में दस को सुबह गिनती शुरू होगी और शाम तक सभी परिणाम बाहर। 

वीडियो देखी, अमेरिका में जगह जगह बूथ लगे हैं सड़क के किनारे। लोग उनमें ही वोट की पर्ची डाल रहे हैं। कहीं कहीं पोलिंग बूथ भी बने थे। पर पुलिस, फौज नदारद थी। लोगों में डर पैदा नहीं करोगे तो काहे की वोटिंग, काहे का बूथ। हमारे यहाँ वोट डालने में सस्पेंस रहता है। आप पोलिंग बूथ पर गये तो पता चला कि आप का नाम तो वोटर लिस्ट में शामिल ही नहीं है। अब आप लाख कागजात दिखा दो, वहाँ बैठे बाबू को तो एक ही बात पता है। या फिर आपका नाम तो वोटर लिस्ट में तो शामिल है पर आपकी वोट पड़ चुका है। ऐसा नहीं है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ आपका नाम ही है, आपके नाम के साथ आपके चेहरे की फोटो भी है और आपका चेहरा आपके ही पास है, आपने किसी को उधार भी नहीं दिया है फिर भी आपका वोट पड़ जाता है। यह भारत के लोकतंत्र में ही संभव है।

कई जगह तो और भी अधिक सस्पेंस रहता है। ऐसा सस्पेंस ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक होता है। आप वोट डालने गये हैं। दो घंटे लाइन में लग कर बस अब आपका नम्बर आने ही वाला है। तभी बूथ कैप्चर हो जाता है। सबको भगा दिया जाता है। जाओ, सब के वोट डल गये हैं। आप घंटों लाइन में लग मुंह लटका वापस आ जाते हैं। वैसे ऐसा रोमांच अब धीरे धीरे कम होता जा रहा है। 

लेकिन अमेरिका वासियों ने चुनाव से पहले की सरगर्मियों का लुत्फ भारतवासियों की तरह से ही उठाया। विरोधियों को बदनाम करना, उन्हें अजीब अजीब नाम से बुलाना और आक्षेप लगाना। सभी में अमेरिकी चुनाव भारतीय चुनावों से पीछे नहीं रहे। यहां तक कि ट्रम्प जी ने तो ठुमके भी लगा दिये। मनोरंजन के मामले में भारत हो या अमेरिका, चुनाव बराबर ही ठहरते हैं। 

लिखते लिखते : जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति चुन लिए गए। एक मुसीबत है। वह जो ह्यूस्टन में मोदी जी ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में ट्रम्प के पक्ष में नारे लगवाये थे, 'अबकी बार ट्रम्प सरकार' बुलवाया था, वह जो अहमदाबाद में 'नमस्ते ट्रम्प' किया था, सब बेकार गया। अगर बाइडेन ने उन चीजों को दिल में रखा हुआ हो तो, अगर उन्हें बुरा लगा हो तो। लेकिन चिंता न करें, सब राजनेता मोदी नहीं होते हैं। मोदी जी बाइडेन को खुश करने के लिए बाइडेन को बुला कर 'अलविदा ट्रम्प, वैलकम बाइडेन' कार्यक्रम भी कर सकते हैं। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
US Elections 2020
Joe Biden
Donand Trump

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • Akhilesh Yadav
    रवि शंकर दुबे
    ‘’पोस्टल बैलेट में सपा को 304 सीटें’’। क्या रंग लाएगा अखिलेश का दावा?
    16 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश चुनावों में भाजपा ने एक बार फिर सत्ता में वापसी कर भले ही इतिहास रच दिया हो लेकिन सपा ने जो दावा किया है वो चौंकाने वाला है।
  • बिहारः अब मेयर-डिप्टी मेयर को सीधे चुनेगी जनता, नीतीश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः अब मेयर-डिप्टी मेयर को सीधे चुनेगी जनता, नीतीश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
    16 Mar 2022
    अभी तक जनता वार्ड पार्षद को ही चुनती थी और चुने हुए वार्ड पार्षद अपने बीच से मुख्य पार्षद से लेकर मेयर तक चुनते थे लेकिन अब जनता सीधे मेयर-डिप्टी मेयर, मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद का चुनाव करेगी।
  • Aijaz ahmed
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एजाज़ अहमद ने मार्क्सवाद के प्रति आस्था कभी नहीं छोड़ी
    16 Mar 2022
    विश्वप्रसिद्ध मार्क्सवादी चिंतक व साहित्यिक विचारक एजाज़ अहमद की श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन पटना के अदालतगंज स्थित केदारभवन में किया गया। श्रद्धाजंलि सभा में शहर के बुद्धिजीवी, रँगकर्मी, साहित्यकार,…
  • G-23
    कृष्ण सिंह
    कांग्रेस बनाम कांग्रेस : जी-23 की पॉलिटिक्स क्या है!
    16 Mar 2022
    प्रश्न सिर्फ कांग्रेस नेतृत्व और उसकी कार्यशैली का नहीं है बल्कि उसके उन तमाम नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता का भी है जिन्होंने लंबे समय तक सत्ता का सुख भोगा है।
  • HIJAB
    नाइश हसन
    हिजाब मामले पर कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम महिलाओं के साथ ज़्यादतियों को देगा बढ़ावा
    16 Mar 2022
    इस फ़ैसले के असरात काफी गंभीर हो सकते हैं, हिंदू कट्टर पंथी ताकतों को और बढ़ावा मिलेगा, जिस काम के लिए नौजवान लड़कों का इस्तेमाल किया गया उन्हें भगवा गमछा पहनाया गया, यह काम वह देश में सभी जगह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License