NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
'सेल' पर है देश, बोलो क्या ख़रीदोगे!
यह बजट पिछले सौ वर्षों के किसी भी बजट से इसलिए महान है क्योंकि इसमें भारत बेचने की कोशिश अंग्रेज़ों के द्वारा भारत को बेचने की कोशिश से भी अधिक शिद्दत से की गई है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
07 Feb 2021
cartoon click

इस सरकार में यह खासियत है कि एक ही सप्ताह में व्यंग्य लिखने के लिए कई सारे विषय दे देती है। साप्ताहिक कॉलम लिखने बैठो तो समझ ही नहीं आता है कि किस विषय पर लिखो। अब इस सप्ताह की ही बात लो। समझ नहीं आता है कि किसानों की कील बंदी पर लिखें, पत्रकारों की लिखने/बोलने की आजादी पर लिखें, रेयाना और ग्रेटा के ट्वीट पर लिखें या फिर सरकार के ऐतिहासिक बजट पर लिखें। फिर लगा कि बजट पर ही लिखते हैं। बाकी सब पर लिखने का तो मौका इस सरकार के रहते बार बार मिलेगा पर बजट पर लिखने का मौका तो पूरे बावन सप्ताह बाद ही मिलेगा।

यह बजट ऐतिहासिक है। सरकार जी ने बजट प्रस्तुत होने से कई दिन पहले ही बता दिया था कि इस बार का बजट ऐतिहासिक होगा। बजट ऐसा होगा जैसा कि पिछले सौ साल में नहीं प्रस्तुत किया गया है। यह बजट पिछले सौ वर्षों के किसी भी बजट से इसलिए महान है क्योंकि इसमें भारत बेचने की कोशिश अंग्रेजों के द्वारा भारत को बेचने की कोशिश से भी अधिक शिद्दत से की गई है।

मेरे घर से कुछ ही किलोमीटर दूर, नोयडा में मॉल आफ इंडिया है। सभी बड़े शहरों में इससे मिलते-जुलते नाम के मॉल/मार्केट होंगे ही। इन मॉलों/बाजारों में सेल, महासेल लगती ही रहती है और हम खरीददारी करते ही रहते हैं। समाचार पत्रों, एफएम रेडियो आदि में विज्ञापन भी आता रहता है। ऑफ सीजन सेल, सीजन की ग्रेंड सेल, दीवाली धमाका, होली हुल्लड़, स्वतंत्रता दिवस की बम्पर सेल, गणतंत्र दिवस की महासेल। यहाँ तक कि तीज तक की सेल। सेल का कोई भी मौका नहीं छोड़न चाहते हैं ये मॉल ऑफ इंडिया वाले लोग।

मॉल ऑफ इंडिया में तो साल की सबसे बड़ी सेल भी लगती है। पर इस बार बजट ऑफ इंडिया में लगी है सदी की सबसे बड़ी सेल। उस सेल ने किसी भी सेल को पीछे छोड़ दिया है। इसीलिए हमारे मोदी जी ने इसे सदी का सबसे अलग बजट बताया था। इस बजट में है कि सब कुछ बेच डालेंगे। इस बजट में सब कुछ सेल पर है। मौका है, खरीद डालिये। ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा, कम से कम इस जीवन काल में तो नहीं ही मिलेगा। देश की संपदा खरीदने का इतना सुनहरा मौका। वन्स इन लाइफ टाइम। वन्स इन सेंचुरी। सौ सालों में एक बार।

अभी तक आप भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से पॉलिसी खरीदते हैं, अब एलआईसी को ही खरीद डालिये। बैंक में पैसा रखते हैं, बैंक से पैसे लोन लेते हैं, बैंक के मालिक ही बन जाईये। अगर लगता है ये छोटी मोटी चीजें हैं, कुछ बड़ा करने का मन है तो भारत के आणविक कार्यक्रम में हिस्सेदारी कर लीजिए। दो चार एटम बम आपके हिस्स में भी आ जायेंगे। या फिर अंतरिक्ष कार्यक्रम खरीद कर एक आध अंतरिक्ष यान ही उड़ा डालिये।

पैसे कम हैं तो भी चिंता मत कीजिए। कम बजट के खरीदारों के लिए भी सामान है सेल में। कोई हाईवे खरीद लो, गेल (GAIL) की पाइप लाइन खरीद लो। कोई रेलगाड़ी खरीद लो। लम्बी दूरी की न सही, छोटी दूरी की ही खरीद लो। और कुछ नहीं तो किसी हाइवे पर कोई टोल टैक्स का बूथ ही खरीद लो। कोई छोटा मोटा हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन या फिर खेल का मैदान खरीद लो। पर कुछ न कुछ खरीद जरुर लो।

दुकानदार सेल लगाता है तो नया सामान दुकान में डालता है। कोई आम आदमी सम्पत्ति बेचता है तो नई सम्पत्ति बनाता है। पर चिंता मत कीजिए। सरकार की ऐसी कोई दकियानूसी मंशा नहीं है। सरकार यह सब बेच कर कुछ खरीदने या बनाने नहीं जा रही है। सरकार इतनी बेवकूफ़ नहीं है कि आज वह कुछ खरीदे या बनाये और फिर दस, बीस, पचास साल बाद उसे बेच डाले। सरकार तो जो भी कुछ बेच रही है, बस अपना खर्चा चलाने के लिए बेच रही है।

हां! तो मेहरबानों, कद्रदानों, खरीददारों। देसी हों या फिर विदेशी। अंतिम मौका है। फिर मत कहना कि खबर भी नहीं हुई और मौका हाथ से निकल गया। भारत सेल के लिये हाजिर है। भारत की सरकार बेच रही है। सब कुछ कानूनी है। जागो भारत वासियों, जो खरीद सकते हो, खरीद लो। नहीं तो आने वाले समय में पोते पूछेंगे, कि दादा जी, क्या तब सो रहे थे जब मोदी जी देश बेच रहे थे। दादा जी ने कुछ भी जो नहीं खरीदा। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Satire
Political satire
tirchi nazar
Union Budget 2021-22
Nirmala Sitharaman
privatization
Modi government

Related Stories

हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    अब साहित्य का दक्षिण टोला बनाने की एक कोशिश हो रही है: जयप्रकाश कर्दम
    13 Feb 2022
    इतवार विशेष: दलित साहित्य और दलित लेखकों के साथ भेदभाव हो रहा है जैसे गांव में होता है न, दलित बस्ती दक्षिण टोला। दलित साहित्य को भी यह मान लीजिए कि यह एक दक्षिण टोला है। इस तरह वे लोग दलित साहित्य…
  • Saharanpur
    शंभूनाथ शुक्ल
    यूपी चुनाव 2022: शांति का प्रहरी बनता रहा है सहारनपुर
    13 Feb 2022
    बीजेपी की असली परीक्षा दूसरे चरण में हैं, जहां सोमवार, 14 फरवरी को वोट पड़ेंगे। दूसरे चरण में वोटिंग सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूँ, शाहजहांपुर ज़िलों की विधानसभा…
  • Uttarakhand
    कृष्ण सिंह
    चुनाव 2022: उत्तराखंड में दलितों के मुद्दे हाशिये पर क्यों रहते हैं?
    13 Feb 2022
    अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी दलित समाज के अस्तित्व से जुड़े सवाल कभी भी मुख्यधारा के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रश्न नहीं रहे हैं। पहाड़ी जिलों में तो दलितों की स्थिति और भी…
  • Modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: अगर आरएसएस न होता...अगर बीजेपी नहीं होती
    13 Feb 2022
    "...ये तो अंग्रेजों की चापलूसी में लगे थे। कह रहे थे, अभी न जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं"
  • election
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: चुनाव आयोग की साख पर इतना गंभीर सवाल!
    13 Feb 2022
    हर हफ़्ते की कुछ खबरें और उनकी बारिकियाँ बड़ी खबरों के पीछे छूट जाती हैं। वरिष्ठ पत्रकार जैन हफ़्ते की इन्हीं कुछ खबरों के बारे में बता रहे हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License