NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: सो सॉरी, सेल नहीं, रेंट
अब देश की संपत्तियां सेल पर हैं, बेची जा रही हैं, सॉरी! मतलब, किराये पर दी जा रही हैं। सरकार जी खुद ही दे रहे हैं। और हम भी उम्मीद से हैं कि कभी ना कभी हमारा भी मौका आएगा और हम भी कुछ खरीद पाएंगे।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
29 Aug 2021
तिरछी नज़र: सो सॉरी, सेल नहीं, रेंट
कार्टून साभार : ट्विटर

सरकार जी ने घोषणा कर दी है कि वह अब अपनी संपत्तियां किराये पर देंगे। आप कहेंगे, सरकार जी को अपनी ये संपत्तियां किराये पर देने की जरूरत क्या आन पड़ी। अरे सरकार जी बड़े आदमी हैं, सरकार जी की जरूरतें ज्यादा हैं। और अधिक जरूरतों के लिए अधिक पैसे की जरूरत होती है। तो अधिक पैसे के लिए जरूरत है जो कुछ है उसी से कुछ कमाया जाए, उसी को बेचा जाये।

आपको आश्चर्य होगा, कि हे ईश्वर! सरकार जी को ऐसी पैसे की क्या जरूरत आन पड़ी है कि पुश्तैनी चीजें बेचे जा रहे हैं, किराये पर देने की बात कर रहे हैं। ना परिवार है, ना बीवी और ना बच्चे। फिर ऐसे क्या अनाप-शनाप खर्चे हैं कि जो इतनी बड़ी तनख्वाह में भी अपना काम नहीं चला पा रहे हैं और जिन संपत्तियों को पहले बेचने की सोच रहे थे, उन्हीं को अब किराये पर देने की सोच रहे हैं। 

सरकार जी ने यह नहीं बताया है की वह जो इन सब संपत्तियों को किराये पर देने के लिए सोच रहे हैं तो किराया किस तरह से लेंगे। पगड़ी लेंगे या फिर हर महीने किराया लेंगे। या फिर थोड़ा सिक्योरिटी लेकर हर महीने किराया लेंगे। किराया मासिक होगा या वार्षिक या फिर सारा का सारा किराया एकमुश्त ही ले लिया जाएगा। सरकार जी ने अभी इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। स्पष्ट करें तो हम भी कुछ उम्मीद रखें।

हमारे शहर में भी एक हवेली हुआ करती थी, 'हकीम जी की हवेली'। अब तो सेठों को बिक चुकी है। जब भी हम उस हवेली के सामने से गुजरते थे तो बरामदे में रखी एक आराम कुर्सी पर हमारी निगाह जरूर पड़ती थी। चाहते थे ऐसी ही एक आराम कुर्सी घर में हो और हम उस पर बैठ कर अख़बार पढ़ें। हवेली वाले हकीम जी का बेटा कपूत निकला। काम काज कुछ करता नहीं था और ऐब ऐसे थे कि कुछ पूछो मत। रोजाना नई अचकन पहनना, नई से नई गाड़ी खरीदना। और सुनते थे कि विदेश भी बहुत जाता था।

जब तक हकीम जी थे तब तक तो उस पर कुछ कंट्रोल था और पर्दा भी। पर हकीम जी के जाने के बाद घर में रखी जमा पूंजी कब तक चलती। तो कुछ दिनों में खाने के लाले पड़ने लगी। तब घर की चीजों के बिकने की नौबत आई। जब भी बोली लगती तो हम उस कुर्सी की आशा में बोली में जरूर जाते। एक दिन हमारी किस्मत खुली और वह कुर्सी भी बोली में शामिल हुई। आज वह आराम कुर्सी हमारे घर की शोभा बढ़ा रही है और वह हवेली एक सेठ जी के पास है।

अब देश की संपत्तियां सेल पर हैं, बेची जा रही हैं, सॉरी! मतलब, किराये पर दी जा रही हैं। सरकार जी खुद ही दे रहे हैं। और हम भी उम्मीद से हैं कि कभी ना कभी हमारा भी मौका आएगा और हम भी कुछ खरीद पाएंगे। या फिर किराये पर ही ले पाएंगे। हमारी तो अपने घर के सामने वाली सड़क में रुचि है। रोजाना कार की पार्किंग को लेकर झगड़ा होता रहता है। और टेलीफोन की लाइन में भी। यह ससुरा टेलीफोन भी जब तब मरा पड़ा रहता है और एक बार मर जाता है तो महीनों जिंदा ही नहीं होता है। जब इनकी बोली लगेगी, तब हम जरूर बोली बोलेंगे। 

आप हमें पागल समझेंगे। कहेंगे कि बोली तो बड़ी बड़ी चीजों की लग रही है। नेशनल हाईवेज की, एक्सप्रेस वे की लग रही है। बड़े-बड़े टॉवरों की लग रही है। रेलवे और पाइप लाइनों की लग रही है। इन छोटी मोटी सड़कों-गलियों की, टेलीफोन-लाइनों की बोली नहीं लगने वाली है। अरे भाई, जब हकीम जी के घर के सामान की बोली लगी थी न, तो मियां, कौन सा सबसे पहले आराम कुर्सी की ही बोली लग गई थी। सबसे पहले तो सोने चांदी के जेवरात की बोली लगी थी। उसके बाद बड़े-बड़े, काम न आने वाले बर्तनों की बोली लगी थी। आराम कुर्सी की बोली तो कहीं बाद में ही लगी थी। मियां, याद रखना, अगर यही सरकार जी रहे तो, एक दिन हमारे घर के सामने की गली और हमारे घर आने वाली टेलीफोन लाइन भी जरूर बिकेगी या फिर किराये पर ही दी जाएगी और उसे यह ख़ाकसार ही खरीदेगा। मियां, उम्मीद पर ही दुनिया कायम है।

बस एक ही अड़चन है। वह यह कि ये संपत्तियां सरकार जी की अपनी नहीं है। सरकार जी तो वैसे भी फकीर आदमी हैं, कोई संपत्ति-वंपत्ति बनाई ही नहीं है, बस बेचे जा रहे हैं। यह संपत्तियां तो सरकार जी के पास तब तक हैं जब तक वह सरकार जी हैं। अड़चन यह है कि अगर मेरी गली का नम्बर आने से पहले ही कोई दूसरा सरकार जी बन गया तो, और वह इन सरकार जी जितना ही होशियार नहीं निकला तो। उसने पुरखों की संपत्तियां बेचनी बंद कर दीं तो। उसने किराये पर दी गई संपत्तियां वापस मांग लीं तो...। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
privatization
Narendra modi
Nirmala Sitharaman
Modi Govt
BJP

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...


बाकी खबरें

  • मालिनी सुब्रमण्यम
    छत्तीसगढ़ : युद्धग्रस्त यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों ने अपने दु:खद अनुभव को याद किया
    09 Mar 2022
    कई दिनों की शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलने के बाद, अंततः छात्र अपने घर लौटने कामयाब रहे।
  • EVM
    श्याम मीरा सिंह
    मतगणना से पहले अखिलेश यादव का बड़ा आरोप- 'बनारस में ट्रक में पकड़ीं गईं EVM, मुख्य सचिव जिलाधिकारियों को कर रहे फोन'
    08 Mar 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव परिणामों में गड़बड़ी की आशंकाओं के बीच अपनी पार्टी और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को चेताया है कि वे एक-एक विधानसभा पर नज़र रखें..
  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    मालिक महान है बस चमचों से परेशान है
    08 Mar 2022
    भारत एक मौज के इस एपिसोड में संजय राजौरा आज बात कर रहे हैं Ukraine और Russia के बीच चल रहे युद्ध के बारे में, के जहाँ एक तरफ स्टूडेंट्स यूक्रेन में अपनी जान बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार से सवाल…
  •  DBC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों की हड़ताल 16वें दिन भी जारी, कहा- आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए
    08 Mar 2022
    DBC के कर्मचारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  ये कर्मचारी 21 फरवरी से लगातार हड़ताल पर हैं। इस दौरान निगम के मेयर और आला अधिकारियो ने इनकी मांग पूरी करने का आश्वासन भी दिया। परन्तु…
  • Italy
    पीपल्स डिस्पैच
    इटली : डॉक्टरों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ हड़ताल की
    08 Mar 2022
    इटली के प्रमुख डॉक्टरों ने 1-2 मार्च को 48 घंटे की हड़ताल की थी, जिसमें उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की और स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण के ख़िलाफ़ चेतवनी भी दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License