NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
वार इन गेम: एक नया खेल
पहले जनता खेल को खेल की तरह लेती थी और युद्ध को युद्ध की तरह। पूरी की पूरी जनता मूर्ख थी।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
14 Nov 2021
 India-Pakistan match

भारत कृषि प्रधान देश है, भारत धर्म प्रधान देश है, भारत अब एक देशभक्ति प्रधान देश भी है। पहले नहीं होता था, अब बन गया है। खेलों में भारत एक क्रिकेट प्रधान देश है। भारत का अघोषित राष्ट्रीय खेल क्रिकेट है। हालांकि घोषित राष्ट्रीय खेल तो हॉकी ही है पर अघोषित राष्ट्रीय खेल क्रिकेट है। क्रिकेट पूरे देश में खेला जाता है और पूरे देश में मनाया जाता है।

आजकल एक और लोकप्रिय खेल है, देशभक्ति का खेल। देश भक्ति तो देश में पहले से ही है। क्रिकेट से भी पहले से है। पर यह देशभक्ति खेल अभी हाल में ही बनी है। पिछले सात-आठ साल में ही बनी है। अब देशभक्ति जज्बा कम, खेल अधिक हो गई है। देशभक्ति का खेल खेलने में खेल खेलने वालों को तो मजा आता ही है, सरकार को भी मजा आता है।

पुराने जमाने में एक प्रधानमंत्री होते थे, वही जवाहरलाल नेहरू, मतलब वही नेहरू जी। जिनका आज जन्म दिन भी है। वे कहते थे खेल को खेल की भावना से खेलो। यानी कि खेल को खेलते हुए एंजॉय करो। खेल को देखते हुए भी एंजॉय करो। खेल को युद्ध की तरह से न तो खेलो और न ही देखो। बहुत सालों तक देश की 'मूर्ख' जनता उन्हीं की बात मानती रही और खेल एंजॉय करती रही। क्रिकेट देखती थी तो अगर कपिल देव की फास्ट बॉल पर ताली बजाती थी तो इमरान खान की आउटस्विंगर को भी एंजॉय करती थी। अगर सुनील गावस्कर के शॉट पर शोर मचा कर खुश होती थी तो जहीर अब्बास के स्क्वायर ड्राइव पर भी स्टेडियम सिर पर उठा लेती थी। हॉकी का खेल देखती थी तो भी यही हालात थे। चाहे भारत का अजीत पाल सिंह हो या पाकिस्तानी सलीम शेरवानी, दोनों के ही मूव दोनों देशों की जनता को उत्तेजित कर देते थे। और तब ऐसा दोनों ही तरफ होता था।

ऐसे दिन भी थे जब मिल्खा सिंह और अब्दुल खालिक की प्रतिद्वंद्विता का दोनों देश के लोग मजा उठाते थे। यह कौन भूल सकता है कि मिल्खा सिंह को 'फ्लाइंग सिख' का खिताब किसी और ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने ही दिया था। पर ऐसा अब कहां, न यहां, न वहां।

पहले जनता खेल को खेल की तरह लेती थी और युद्ध को युद्ध की तरह। पूरी की पूरी जनता मूर्ख थी। नेहरू ने कहा तो शांति का दूत बनी फिरती थी। फिर 2014 आया। सरकार जी की सरकार बनी। देश को 'नई आजादी' मिली। कुछ लोगों के हिसाब से तो 'आजादी' ही तभी मिली जब सरकार जी की सरकार आई। इस 'नई आजादी' में देश की जनता को समझाया गया कि देश में हर समय युद्ध चल रहा है। देश के अंदर भी युद्ध है और देश के बाहर भी युद्ध है। देश की जनता को यही समझाया गया, बड़ी अच्छी तरह से समझाया गया और जनता की समझ में आ भी गया। सरकार जी तो हर समय युद्ध के मूड में रहते ही हैं, जनता भी उसी मूड में रहने लगी।

अब जनता खेल में युद्ध ढूंढने लगी है। जब ओलंपिक चल रहा था तब भी बहुत सारे लोगों को नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक जीतने की इतनी खुशी नहीं थी जितनी इस बात की खुशी थी कि पाकिस्तानी खिलाड़ी पांचवें नंबर पर रहा। उन लोगों ने तो नीरज चोपड़ा की इस बात के लिए भी ट्रोल किया कि उसने पाकिस्तानी खिलाड़ी को अपना भाला (फेंकने के लिए) आखिर दिया ही क्यों। पाकिस्तानी खिलाड़ी अगर भाला फेंक ही नहीं पाता तो उन लोगों को इस बात की खुशी नीरज चोपड़ा को स्वर्ण पदक मिलने की खुशी से भी अधिक होती।

अब क्रिकेट का टी 20 विश्व कप चल रहा है। आज रविवार को अंतिम मतलब फाइनल मुकाबला है, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच। तीन दिन पहले ही दूसरे सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को हराया था। पहले ग्रुप मैच में पाकिस्तान ने भारत को लगभग एक तरफा मैच में दस विकेट से हराया था। उस मैच में जिन लोगों को पाकिस्तान का क्रिकेट का खेल पसंद आया, वे देशद्रोही बन गये। सरकार को भी खुशी हुई कि पाकिस्तान के जीतने से वह कुछ देशद्रोहियों को और जेल भेज सकी। यह सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि यही मानती है कि वह अधिक से अधिक लोगों को देशद्रोह की धाराओं में गिरफ्तार कर सके। भले ही बाकी अपराधी छुट्टे खुले घूमते रहें। 

भारत-पाकिस्तान मैच में तो आपको एक ही तरफ होना होता है। आप खेल की तरफ भी हो सकते हैं बशर्ते तभी जब भारत अच्छा खेल रहा हो। आप खेल को एंजॉय भी तभी कर सकते हैं जब भारतीय अच्छा खेल रहे हों। विरोधी टीम के तो अच्छे शॉट, अच्छी फील्डिंग या फिर बॉलिंग की प्रशंसा तो आप कर ही नहीं सकते हैं। अन्यथा आप देशद्रोही बन जाएंगे। भारत पाक मैच में शर्त लगाना या सट्टा खेलना भी बिल्कुल ही बंद हो जाता हैै। क्योंकि पाकिस्तान के पक्ष में शर्त लगाना या सट्टा खेलना देशद्रोहियों का काम होता है। पाकिस्तान के पक्ष में शर्त लागने वालों और सट्टा खेलने वालों की देशद्रोह की धाराओं में गिरफ्तारी संभव है।

भारत-पाक मैच में तो यह स्पष्ट था कि आपको किस तरफ होना है। पर पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए दूसरे सेमीफाइनल में मन में बड़ा द्वंद्व था। वजह थी कि पिछले कुछ सालों में मन में दो तरह की देशभक्ति विकसित हो चुकी है। एक तो तार्किक देशभक्ति और दूसरी मूढ़ देशभक्ति। तार्किक देशभक्ति तो तर्क से चलती है। इस तार्किक देशभक्ति को लगता था कि अगर पाकिस्तान फाइनल में पहुंचेगा तो वे दोनों टीमें, जिनसे भारत ग्रुप स्टेज में हारााहै, फाइनल में पहुंचेंगी और उन्हीं में से एक विजेता बनेगी। संदेश यह जाएगा कि भारत की टीम भी मजबूत टीम थी पर मजबूत ग्रुप में होने की वजह से सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाई। पर मूढ़ देशभक्ति तो किसी भी हालात में पाकिस्तान की हार ही चाहती है। और ऐसी ही मूढ़ देशभक्ति इधर ही नहीं, उधर भी है। यह 'वार इन गेम' इधर भी है और उधर भी।

tirchi nazar
Satire
Political satire
War in Game
india-pakistan
Farm Laws
ICC World T20
India-Pakistan match

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • Hum Bharat Ke Log
    डॉ. राजू पाण्डेय
    संविधान पर संकट: भारतीयकरण या ब्राह्मणीकरण
    05 Feb 2022
    न्याय प्रणाली में मनुवादी सोच की पुनर्प्रतिष्ठा के प्रयासों को न्याय व्यवस्था के भारतीयकरण का नाम दिया जा रहा है। नागरिक अधिकारों और संविधान के संरक्षक सर्वोच्च न्यायालय पर यदि ब्राह्मणवादी सोच हावी…
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    इस बजट से गरीबों को कोई फायदा नहीं
    04 Feb 2022
    हाल ही में वित्त मंत्री ने बजट पेश किया पर क्या इस बजट से बेरोज़गारी, गरीबी और अन्य चीज़ों पर कुछ असर पड़ेगा? आइये जानते हैं ऑनिंद्यो से
  • firing on owaisi
    रवि शंकर दुबे
    कौन हैं ओवैसी पर गोली चलाने वाले दोनों युवक?, भाजपा के कई नेताओं संग तस्वीर वायरल
    04 Feb 2022
    AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर हमला करने वाले दोनों आरोपियों को 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एक आरोपी सचिन पंडित की तस्वीरें भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ वायरल होने से कई सवालों ने…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    ग्राउंड रिपोर्ट: हापुड़ का सूदना गांव सुना रहा अपनी चुनावी कहानी
    04 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने हापुड़ के सूदना गांव में चल रही सैनेटरी पेड की फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं, खेती से जुड़े समुदायों के सवालों-राजनीतिक रुझानों पर की चर्चा
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक : बस ये चुनाव और पार करा दे
    04 Feb 2022
    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के संबंध में एक समिति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License