NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
देश के सबसे अमीर मंदिर के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं!
लगभग 50 हजार करोड़ की कुल संपत्ति वाले तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट ने कोरोना महामारी के चलते 1300 कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया। मंदिर ट्रस्ट के इस फैसले से जहां पीड़ित कर्मचारी काफी दुखी हैं तो वहीं ट्रेड यूनियनों ने ट्रस्ट के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कड़ी आलोचना की है।
सोनिया यादव
04 May 2020
 तिरुपति बालाजी

देश के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार, लगभग दो हजार साल पुराना तिरुपति बालाजी मंदिर पहली बार अपनी संपत्ति या मिलने वाले दान को लेकर सुर्खियों में नहीं है बल्कि इस बार ये अमीर मंदिर अपने 1300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने को लेकर चर्चा में बना हुआ है।

काम से निकाले गए सभी 1300 कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर थे और ये लोग मंदिर ट्रस्ट के तीन गेस्ट हाउस विष्णु निवासम, श्रीनिवासम और माधवम में कई सालों से आव-भगत और सफाई का काम करते थे। बीते 30 अप्रैल को इनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया। जिसके बाद कोरोना महामारी के बीच मंदिर प्रशासन ने 1 मई से इन सभी कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया। मंदिर ट्रस्ट के इस फैसले से जहां पीड़ित कर्मचारी काफी दुखी हैं तो वहीं ट्रेड यूनियनों ने ट्रस्ट के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कड़ी आलोचना की है।

किसने क्या कहा?

काम से हटाए गए एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि कोरोना वायरस के चलते मंदिर 20 मार्च से ही बंद है। लेकिन यहां पर मंदिर के अंदर सुबह-शाम के अनुष्ठान और आरती-पूजा होती है।

उन्होंने कहा, “हमें पहले से कुछ खबर नहीं था इस बारे में। अभी भी बस इतना ही कहा गया है कि हम लोग जिस फर्म के जरिए यहां काम पर लगे थे, टीटीडी प्रशासन अब उसका कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं कर रहा, जिसकी वजह से हम सब की नौकरी चली गई है। हमारी टीटीडी प्रशासन से अपील की है कि वे इस मुश्किल समय में हमें काम से न निकाले। हम अभी कहां जाएंगे, क्या करेंगे। हमारा परिवार और बच्चा भी है, उन्हें क्या बोलेंगे, कैसे सब ठीक होगा?”

एक अन्य कर्मचारी ने बताया, हम यहां सालों से काम करते हैं, ट्रस्ट को इस समय हमारी मदद करनी चाहिए। सभी जानते हैं कि मेन मंदिर के अलावा 50 मंदिर और भी बंद हैं, जिसके चलते ट्रस्ट को दान नहीं मिल रहा, आमदनी नहीं हो रही। लेकिन ये भी सच है कि ट्रस्ट के पास बहुत पैसा है, हम छोटे लोगों का खर्चा तो ट्रस्ट आसानी से उठा सकता है। क्या अब मंदिर ट्रस्ट के पास हम लोगों को देने के लिए पैसा भी नहीं है? हमारा ट्रस्ट से अनुरोध है कि हमारी मदद करें, इस समय हमें काम से न निकालें।”

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने एक बयान जारी ट्रस्ट के इस कदम की सख्त आलोचना की है। सीटू का कहना है कि श्रमिक जिन्होंने हर वक्त मंदिर की स्वच्छता और रखरखाव का ध्यान रखा, तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए अपना जीवन जोखिम में डाल दिया। मंदिर ट्रस्ट ने संकट के वक्त उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट के प्रवक्ता टी रवि का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से सभी गेस्टहाउस बंद हैं, जिस वजह से इन कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि नियमित कर्मचारियों को भी इस दौरान कोई काम नहीं सौंपा है। सभी फैसले कानून के मुताबिक लिए गए हैं। काम बंद होने की वजह से कर्मचारियों को निकालने का फैसला लेना पड़ा।

हालांकि मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष वाई वी सुब्बा रेड्डी ने मुंबई मिरर को बताया कि कर्मचारियों की सेवाएं बंद कर दी गई हैं। उन्होंने कहा, "इस मुद्दे को मेरे संज्ञान में लाया गया है। हम मानवीय आधार पर उनकी मदद करने की कोशिश करेंगे।" 

आंध्र प्रदेश की स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता देविका वर्तकली कहती हैं, “ये कैसे संभव है कि देश के सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं है? रोजाना यहां औसतन 60 हजार लोग आते थे तब यही कर्मचारी सारी व्यवस्था संभाल रहे थे, अब जब मंदिर बंद हो गया तो इन्हें काम से निकालना गलत तो है ही साथ ही अमानवीय भी है। ईश्वर तो सबकी मदद के लिए है ना, फिर उसी ईश्वर के घर से इन लोगों को ऐसे समय में कोई कैसे निकाल सकता है? आखिर ट्रस्ट की संपत्ति किस दिन काम आएगी, यही समय है जब आप लोगों की सही मदद कर सकते हैं।”

मंदिर के बारे में खास बातें

आंध्र प्रदेश के तिरुमाला पर्वत पर स्थित भगवान वेंकटेश्र्वर का तिरुपति बालाजी मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू स्थल है। साल के बारहों महीने यहां भक्तों की भारी भीड़ जमा रहती है। भगवान के दर्शन को लंबी-लंबी लाइने लगी रहती हैं। एक अनुमान के मुताबिक ट्रस्ट के पास कुल संपत्ति 50 हजार करोड़ की है। जिसमें 9 हजार किलो सोना भी शामिल है। बालाजी भगवान का श्रृंगार लगभग 550 किलो सोने के आभूषण से किया गया है। यहां का प्रसाद विश्वभर में मशहूर है। औसतन हर दिन लगभग 3 लाख लड्डू बिकते हैं तो वहीं साल में 10 करोड़ से ज्यादा लड्डू प्रसाद की बिक्री होती है। इसके अलावा ट्रस्ट के गेस्ट हाउस में 47 हजार दर्शनार्थियों के एक साथ ठहरने की सुविधा मौजूद है, जिसकी बुकिंग पहले से करवानी पड़ती है।

बता दें कि साल 2020 की शुरुआत में ही मंदिर ट्रस्ट ने देशभर के पिछड़े और आदिवासी इलाकों में तिरुपति मंदिरों के निर्माण की योजना बनाई थी। जिसके तहत पहला मंदिर आंध्र प्रदेश के ही अमरावती में बनना तय किया गया है। इस मंदिर को मूल तिरुपति की तर्ज पर ही भव्य बनाया जाएगा। इसके डिजाइन, ले-आउट समेत भूमि पूजन का भी काम पूरा हो चुका है। शुरुआती दिनों में ही ट्रस्ट को करीब 3.2 करोड़ रुपये चंदा भी मिल गया था। जिसमें प्रति व्यक्ति 10 हजार रुपये दान राशि के जरिए भगवान तिरुपति के विशेष दर्शन कराने का प्रावधान है।

गौरतलब है कि कोरोना का कहर लगभग हर तबके के लोगों और उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इस महामारी के चलते हजारों लोगों के हाथ से काम चला गया तो वहीं लाखों-करोड़ों नौकरियां दांव पर लगी है। लेकिन ऐसे समय में जब कई लोगों को भगवान का ही सहारा है तो वहीं देश के सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट से आई ये खबर निश्चित ही कर्मचारियों को निराश करने वाली है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि मात्र 40 दिनों में आखिर मंदिर का ख़ज़ाना इतना कैसे खाली हो गया कि 1300 कर्मचारियों के वेतन के पैसे भी नहीं बचे।

Coronavirus
Lockdown
Tirupati Balaji
Tirupati Balaji Workers
Workers salary
Tirupati Balaji Mandir Trust
CITU
Corona virus epidemic
Richest temple in the country

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर


बाकी खबरें

  • rbi
    भाषा
    चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान: आरबीआई
    08 Dec 2021
    आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए कहा कि मुद्रास्फीति के अगले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में नरम पड़कर पांच प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
  •  नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    भाषा
    नगालैंड में मातम छाया, लोगों ने मारे गए आम नागरिकों की याद में शोक जताया
    08 Dec 2021
    विभिन्न नगा संस्थाओं ने मृतकों के लिए पांच दिनों के शोक का आह्वान किया है, जो शुक्रवार को समाप्त होगा। नगा छात्र संघ ने मृतकों के लिए न्याय की अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल आवास के समक्ष धरना देने की…
  • राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    भाषा
    राज्यसभा में उठी अफ़्सपा वापस लिए जाने की मांग
    08 Dec 2021
    एनपीएफ का कहना है कि सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार देश के और किसी भी हिस्से में नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि लागू किए जाने के दौरान भी इस कानून का व्यापक विरोध किया गया था।
  • रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021-22
    भाषा
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार 2021, 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा : आयोजक
    08 Dec 2021
    रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार वर्ष 2021 और 2022 के लिए एक साथ दिया जाएगा। आयोजक और प्रकाशक पीटर बुंडालो ने यह जानकारी दी।
  • Ethiopia
    पवन कुलकर्णी
    टीपीएलएफ़ के पिछले महीने की बढ़त को रोकते हुए उत्तरी इथियोपिया का गृह युद्ध संघीय सरकार के पक्ष में बदला
    08 Dec 2021
    पश्चिमी और पूर्वी मोर्चे पर अपनी जीत के बाद संघीय सरकार और अम्हारन मिलिशिया के संयुक्त बलों ने डेसी और कोम्बोल्चा जैसे रणनीतिक तौर पर अहम शहरों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License