NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तमिलनाडु: उजाड़ दी गईं मंदिर से सटी आदिवासी बस्तियां 
11 इरुलर आदिवासी परिवारों ने आरोप लगाया है कि यह जगह उन्हें स्थायी रिहाइश के लिए जमीन के पट्टे दिए जाने तक रहने के लिए दी गई थी।
श्रुति एमडी
07 Oct 2021
Tribal Settlement Near Tamil Nadu Temple Uprooted
तमिलनाडु के आदिवासी,फ़ोटो क्रेडिट- सन नेटवर्क

तमिलनाडु के राजस्व विभाग ने कथित रूप से 1 अक्टूबर को आदिवासियों की बस्ती को बिना किसी पूर्व सूचना के और उनकी रिहाइश का वैकल्पिक इंतजाम किए बगैर ही उजाड़ दिया है। इरुलर समुदाय के 11 आदिवासी परिवारों को तिरुवन्नामलाई जिले के पैरनामल्लूर नगरपालिका क्षेत्र में स्थित एक मुरुगन मंदिर के पास अस्थायी रूप से बसाया गया था। 

बेघरबार हुए इन 11 आदिवासी परिवारों ने अपने बचे-खुचे कुछ सामानों के साथ तहसीलदार के कार्यालय में अपना डेरा डाल दिया है और उनसे अपनी रिहाइश का तुरंत बंदोबस्त करने की मांग कर रहे हैं। भारी वर्षा के बावजूद सैंकड़ों लोग इन बेघर हुए परिवारों के प्रति सद्भावना और समर्थन में जमा हुए और देर रात तक सरकार की इस कार्रवाई का विरोध किया। ये लोग इन आदिवासियों को स्थायी घर के लिए भूमि पट्टे दिए जाने के अलावा कुछ भी सुनने-मानने के लिए राजी नहीं थे।

उजाड़ी गई बस्तियां। फ़ोटो क्रेडिट- सन नेटवर्क

प्रदर्शनकारी आदिवासी परिवारों का दावा है कि उन्हें तहसीलदार ने ही भूमि पट्टे दिए जाने तक के लिए यहां आज से 4 महीने पहले बसाया था। इन परिवारों का दावा है कि उन्हें आज इस जगह से उजाड़ने वाले राजस्व विभाग का कहना है कि अब इस जमीन का उपयोग दूसरे काम के लिए किया जाना है।

ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश: 22% आबादी वाले आदिवासी बार-बार विस्थापित होने को क्यों हैं मजबूर

इन आदिवासियों के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले तमिलनाडु अस्पृश्य उन्मूलन मोर्चा (टीएनएमएमएस) ने आरोप लगाया है कि इस क्षेत्र में रहने वाले एक दबंग व्यक्ति ने महसूस किया कि इरुलर आदिवासियों का मुरुगन मंदिर के नजदीक रहना वर्जित है, यही उनकी बस्तियां उजाड़े जाने की वजह है।

जमीन के पट्टे का धैर्यपूर्वक इंतजार करने वाले इन परिवारों  को तब धक्का लगा था, जब तहसीलदार और सरकार के  अन्य प्रतिनिधि शुक्रवार की सुबह “उनकी झोपड़ियों को उजाड़ने” आ धमके थे। टीएनयूईएफ के जिला सचिव सेल्वम त्रिवन्नामली ने कहा,“तहसीलदार चुपचाप खड़े इन बस्तियों का उजड़ना देखते रहे, जो इस बात का सबूत था कि चीजें उनके हाथ से निकल गई हैं और झोपड़ियों को उजाड़ने का आदेश राजस्व विभाग की तरफ से आया था।” 

तहसीलदार कार्यालय में लोगों को जबरन घुसने से रोकती पुलिस। फ़ोटो क्रेडिट:- सन नेटवर्क

त्रिवन्नमाली ने आरोप लगाया है  “हमें पता चला है कि इलाके के कोई गोविंदराजन नामक व्यक्ति की नजर इस जमीन पर थी। उसी ने कुछ लोगों को भड़काया कि इरुलर आदिवासी मांसभक्षी हैं और वे मुरुगन मंदिर की बगल में रह रहे हैं, जो ठीक नहीं है। उनसे यह जगह खाली करवा कर, इस जमीन का उपयोग अवश्य ही मंदिर से संबंधित गतिविधियों में किया जाना चाहिए,” 

इरुलर आदिवासी समुदाय के लोगों को चूहों एवं सांपों को पकड़ने वाले और उन्हें कच्चे ही चबा जाने वाले के रूप में जाना जाता है। हालांकि यह रिवाज उनमें अब काफी कम हो गया है। त्रिवन्नमाली ने आरोप लगाया कि ऐसा मालूम होता है कि “आदिवासी परिवारों को यहां से उजाड़ने के काम में कुछ पैसों का भी लेन-देन हुआ है।”

ये भी पढ़ें: झारखंड : अपने देस में ही परदेसी बन गईं झारखंडी भाषाएं

झोपड़ियों के गिराए जाने के पहले गोविंदराजन के कुछ करीबी सहयोगियों ने कथित रूप से इन आदिवासियों की बस्तियों को गिराने की कोशिश की थी। सीपीआइएम के नेता ने इस बारे में पेरनामल्लूर पुलिस स्टेशन में एक मामला भी दर्ज कराया था, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।  त्रिवन्नमाली ने आरोप लगाया कि “पुलिस ने इस मामले में गोविंदराजन के हलफनामे पर भरोसा किया जिसमें उसने कहा है कि इन लोगों ने अवैध तरीके से भूमि पर कब्जा किया है, जिसके चलते यहां विवाद हो सकता है।” 

इरुलर आदिवासी आमतौर पर 10 से 15 परिवारों के एक छोटे से समूह मेंफूस की झोपड़ियों में रहते हैं। वे लंबे समय से पक्के मकान और पट्टों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। अपनी झोपड़ी उजाड़े जाने से हताश और आक्रोशित इन 11 परिवारों की महिलाएं विरोधस्वरूप अपने बच्चों समेत खाने के बर्तन एवं चूहे ली हुई हैं और उन्होंने तहसीलदार के कार्यालय परिसर में अपना कब्जा जमा लिया है।

टीएनयूएफ, टीएनएमएमएस एवं माकपा के लगभग 100 अधिक कार्यकर्ता इन आदिवासी परिवारों के समर्थन में तहसीलदार के कार्यालय पर पहुंचे, जिन्हें पुलिस ने गेट पर ही बलात रोक दिया। तहसीलदार एवं राजस्व विभाग के विरुद्ध नारे लगाते हुए ये कार्यकर्ता पूरे तीन घंटे तक वहां रहे और भूमि के पट्टे के अलावा कुछ भी स्वीकार न करने की बात दोहरा रहे थे।

तहसीलदार के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते माकपा के कार्यकर्ता। फ़ोटो क्रेडिट- सन नेटवर्क 

त्रिवन्नमाली ने कहा, “आखिरकार 11 बजे रात में एक महिला पुलिस अधिकारी ने माना कि बिना किसी पूर्व सूचना के आदिवासियों की बस्तियों को उजाड़ना एक गलती थी, जो नहीं होनी चाहिए थी।” उन्होंने कहा, “यहां तक कि सरकार के प्रतिनिधियों ने भी इन परिवारों को जल्द से जल्द जमीन के पट्टे दिए जाने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हम प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग पुलिस की जीप में उस प्रस्तावित स्थल को देखने भी गए, जहां इन उजड़े आदिवासियों को फिर से बसाने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद, हमने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।”

अभी तक, 11 में से 8 परिवारों को रिहाइश का पट्टा मिल चुका है। इस बीच, क्षेत्र में भारी बरसात ने प्रक्रियायों को कुछ दिनों के लिए रोक दिया है।

इरुलर आदिवासी तमिलनाडु के सर्वाधिक निर्धन समुदाय हैं। ये परम्परागत रूप से वनवासी हैं, जो अब कई पीढ़ियों से नगरों एवं शहरों में आ गए हैं। शहरी क्षेत्रों में वे तिरपाल की छत वाली झोपड़ी में बिना बिजली एवं शौचालयों के ही रहते हैं। उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत आज भी लकड़ी काटना एवं छोटे जानवरों का शिकार करना ही है।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: 

Tribal Settlement Near Tamil Nadu Temple Uprooted

tamil nadu
Irular
DMK
stalin
huts
Demolition
Murugan temple
Peranamallur
Tiruvannamalai
CPI(M)

Related Stories

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

तमिलनाडु : विकलांग मज़दूरों ने मनरेगा कार्ड वितरण में 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

बेलगाम बुलडोज़र: इस तरह के विध्वंस पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय क़ानून क्या कहता है?

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर

जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग

तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 

सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'


बाकी खबरें

  • French President Emmanuel Macron (L) and US President Joe Biden
    एम. के. भद्रकुमार
    AUKUS पर हंगामा कोई शिक्षाप्रद नज़ारा नहीं है
    21 Sep 2021
    ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका [AUKUS] के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते को लेकर राजनयिक टकराव अभी शुरू होने वाला है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 26,115 नए मामले, 252 मरीज़ों की मौत
    21 Sep 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 35 लाख 4 हज़ार 534 हो गयी है।
  • UP
    सबरंग इंडिया
    डेंगू, बारिश से हुई मौतों से बेहाल यूपी, सरकार पर तंज कसने तक सीमित विपक्ष?
    21 Sep 2021
    स्थानीय समाचारों में बताया गया है कि 100 से अधिक लोगों को डेंगू, वायरल बुखार ने काल का ग्रास बना लिया। बारिश से संबंधित घटनाओं में 24 लोगों की मौत का अनुमान है
  •  Collapses in Uttarakhand
    रश्मि सहगल
    उत्तराखंड में पुलों के ढहने के पीछे रेत माफ़िया ज़िम्मेदार
    21 Sep 2021
    जो अधिकारी ग़ैरक़ानूनी खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हैं, उनके ख़िलाफ़ ताकतवर राजनेता मोर्चा खोल देते हैं। लेकिन स्थानीय लोग धड़ल्ले से चल रहे खनन में छुपे निजी हितों और नियमों के उल्लंघन को खुलकर सामने ला…
  • Internet Shutdowns
    इशिता चिगिल्ली पल्ली
    क्यों भारतीय राज्य इंटरनेट शटडाउन पर अपनी निर्भरता बढ़ाता जा रहा है?
    21 Sep 2021
    एक बार फिर भारतीय राज्य ने इंटरनेट शटडाउन का विकल्प अपनाया है, इस बार हरियाणा में यह प्रतिबंध लागू किए गए हैं, ताकि क़ानून-व्यवस्था पर नियंत्रण किया जा सके। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License