NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
त्रिपुरा हिंसा : एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी ने की यूएपीए वापस लेने की मांग, सीपीआइएमएल का प्रदर्शन
त्रिपुरा हिंसा के बाद वकीलों और पत्रकारों पर प्रदेश की पुलिस द्वारा दर्ज किए गए यूएपीए को वापस लेने की मांग एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी व सीपीआइएमएल ने की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Nov 2021
Tripura Violence

त्रिपुरा में हुए सांप्रदायिक हिंसा और उसके बाद वकीलों तथा पत्रकारों के खिलाफ की गई पुलिस की कार्रवाई को लेकर सीपीआइएमएल, आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा (इंनौस) ने बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं ने यूएपीए के तहत वकीलों लऔर पत्रकारों के खिलाफ दर्ज किए गए केस वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि संघ और भाजपा देश में हिंसा और नफरत फैला रही है और संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा को मुसलमानों के कत्लेआम का गुजरात मॉडल बना दिया गया है। उन्होंने यूपीए कानून रद्द करने और त्रिपुरा में मुसलमानों पर हमले के दोषियों को सजा देने की मांग की। ये प्रदर्शन पटना स्थित बुद्ध स्मृति पार्क के पास किया गया और मांंगों को उठाया गया।

बुद्ध स्मृति पार्क के पास ऐक्टू नेता रणविजय कुमार की अध्यक्षता में हुई सभा को संगठन के नेता आरएन ठाकुर, गोप गुट कर्मचारी नेता रामबली प्रसाद, आशा नेत्री शशि यादव, इंनौस राज्य सचिव सुधीर तथा आइसा राज्य सह सचिव छात्र नेता कुमार दिव्यम ने संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि सच्चाई उजागर करने वाले सुप्रीम कोर्ट वकील मुकेश और अंसार इंदौरी सहित 100 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल पर लगाए गए यूएपीए कानून को वापस ले तथा यूएपीए कानून रद्द करे।

नेताओं ने कहा कि मोदी व त्रिपुरा की भाजपा सरकार त्रिपुरा के मुसलमानों पर जुल्म ढाने, उनके घरों और मस्जिदों को आग के हवाले करने वाले आतताइयों को गिरफ्तार नहीं कर रही और इसके उलट हिंसा की सच्चाई उजागर करने वाले सामाजिक कार्यकर्तओं, वकीलों, पत्रकारों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं पर यूएपीए जैसा खतरनाक कानून थोप रही है। नेताओं ने पीएम मोदी व भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसान आंदोलन, महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी जैसे सवालों से चौतरफा घिरी है जिससे ध्यान हटाने तथा यूपी सहित अन्य राज्यों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर चुनाव जीतने के लिए त्रिपुरा के मुसलमानों के खिलाफ हिंसा कर देश भर में संविधान व देश विरोधी सांप्रदायिक विभाजन की षड्यंत्र रचने में लगी है।

ज्ञात हो कि त्रिपुरा पुलिस ने 6 अक्टूबर को राज्य में सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर यूएपीए के तहत 68 ट्विटर हैंडल सहित करीब 102 सोशल मीडिया एकाउंट्स होल्डर्स पर मामला दर्ज किया।

एडिटर्स गिल्ड ने की आलोचना

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीओआइ) ने त्रिपुरा पुलिसा द्वारा पत्रकारों सहित 102 लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज करने को लेकर कड़ी आलोचना की है। ईजीओआइ ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला है।

त्रिपुरा पुलिस की इस कार्रवाई पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बयान जारी करते हुए कहा कि “श्याम मीरा सिंह नाम के एक पत्रकार ने कहा कि सिर्फ 'त्रिपुरा इज बर्निंग’ शब्द के ट्वीट करने को लेकर उन पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

ईजीओआइ ने आगे कहा कि “यह एक बेहद परेशान करने वाला ट्रेंड है, जहां इस तरह के कानून में जांच और जमानत आवेदनों की प्रक्रिया बेहद कठोर है, इसका इस्तेमाल केवल सांप्रदायिक हिंसा का विरोध करने और रिपोर्ट करने के लिए किया जा रहा है।”
ईजीओआइ ने आगे कहा की “गिल्ड का मत है कि बहुसंख्यकवादी हिंसा को नियंत्रित करने में अपनी विफलता से ध्यान हटाने का एक प्रयास है। साथ ही साथ इसके अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अपनी विफलता से ध्यान हटाने का एक प्रयास है। ईजीओआइ ने आगे कहा कि इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग को दबाने के लिए सरकारें यूएपीए का उपयोग नहीं कर सकती।

ईजीओआइ ने मांग की है कि राज्य सरकार पत्रकारों और सिविल सोसायटी के एक्टिविस्टों को दंडित करने के बजाय दंगों की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच करे।

पत्रकारों को डराने का प्रयास

इंडियन वीमेन्स प्रेस कॉर्प्स ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि पत्रकार श्याम मीरा सिंह पर यूएपीए दर्ज करना मीडिया को डराने का प्रयास है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। आइडब्ल्यूपसी ने कहा कि यूएपीए के तहत अन्य सौ लोगों सहित पत्रकार श्याम मीरा सिंह पर त्रिपुरा पुलिस द्वारा केस दर्ज करने की कार्रवाई ने चौंका दिया है। श्याम मीरा सिंह ने आरोप लगाया कि उन पर केवल "त्रिपुरा इज बर्निंग” ट्वीट करने पर मुकदमा दर्ज किया गया। पत्रकारों का काम सूचना देना और घटनाओं को उजागर करना और मौजूदा सच्ची तस्वीर पेश करना है। आइडब्ल्यूपसी ने कहा कि श्याम मीरा सिंह पर यूएपीए दर्ज करना उन्हें डराने के लिए कानून का दुरूपयोग करना पत्रकारों को चुप करने का स्पष्ट प्रयास है।

Tripura Violence
Editors Guild
IWPC demand withdrawal of UAPA
UAPA
CPIML

Related Stories

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

दिल्ली दंगा : अदालत ने ख़ालिद की ज़मानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख़ पूछा

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च

RTI क़ानून, हिंदू-राष्ट्र और मनरेगा पर क्या कहती हैं अरुणा रॉय? 

कश्मीर यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर को 2011 में लिखे लेख के लिए ग़िरफ़्तार किया गया

4 साल से जेल में बंद पत्रकार आसिफ़ सुल्तान पर ज़मानत के बाद लगाया गया पीएसए

गाँधी पर देशद्रोह का मामला चलने के सौ साल, क़ानून का ग़लत इस्तेमाल जारी


बाकी खबरें

  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब चुनावः बेरोज़गार मांगे नौकरी, पार्टियों के पास नहीं जवाब
    06 Feb 2022
    पंजाब में चुनावी सरगर्मियों के बीच रोज़गार को लेकर राजनीतिक पार्टियां बात करने को लेकर बच रही है. वही इसके उलट राज्य में बेरोज़गारी सबको सता रही है. मज़दूर बताते है कि उन्हें महीने में सिर्फ़ 10 दिन…
  • History
    न्यूज़क्लिक टीम
    कैसे स्थापित की गई संसद और राजपथ पर मूर्तियां?
    06 Feb 2022
    हाल ही में प्रधानमंत्री ने घोषणा की नेताजी की मूर्ति स्थापित करने के बारे में। क्या है संसद और राजपथ पर स्थित मूर्तियों का इतिहास ? क्यों बिना किसी बातचीती और विमर्श के नेताजी की मूर्ति को स्थापित…
  • uttarakhand
    कृष्ण सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: पहाड़ के अस्तित्व से जुड़े सवालों का नेपथ्य में चले जाना
    06 Feb 2022
    प्राकृतिक और मानव-निर्मित दोनों ही तरह की आपदाओं से जूझते इस राज्य का पहाड़ी क्षेत्र वर्तमान में जिस तरह के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संकटों से गुजर रहा है उसमें उसके भविष्य के लिए…
  • ganga
    विजय विनीत
    Exclusive : गंगा किनारे बालू की अंधाधुंध लूट, भाजपा और सालों से जमे अफसरों की नीयत पर सवालिया निशान
    06 Feb 2022
    सिर्फ बनारस ही नहीं, पूरे प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की लूट मची हुई है। इस लूट की सबसे बड़ी शिकार हुई है गंगा। इसे काशी में साफ-साफ देखा जा सकता है। सरकार और प्रशासन की लूट वाली नीति और नीयत के…
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव: राज्य में बढ़ते दमन-शोषण के बीच मज़दूरों ने भाजपा को हराने के लिए संघर्ष तेज़ किया
    06 Feb 2022
    रुद्रपुर: उत्तराखंड में चुनावी शोर है। आगामी 14 फरवरी को पूरे राज्य में एक ही चरण में मतदान होना है। हर दल अपने-अपने विकास के दावे कर रहा है। लेकिन इन सबके बीच मेहनतकश वर्ग कहीं पी
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License