NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
त्रिपुरा हिंसा: फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम के वकीलों पर भी UAPA, छात्रों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का त्रिपुरा भवन पर प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने असम भवन से त्रिपुरा भवन तक मार्च निकाला। त्रिपुरा और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह प्रदर्शन त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा के बाद गई एक फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम के दो वकीलों और अन्य लोगों पर लगाए गए यूएपीए के खिलाफ आयोजित किया गया था।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Nov 2021
Tripura Violence

त्रिपुरा हिंसा के ख़िलाफ़ लिखने वाले, बोलने वाले, फ़ैक्ट फाइंडिंग करने वाले सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, पत्रकार इत्यादि तमाम लोगों के विरुद्ध त्रिपुरा पुलिस गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज कर रही है, नोटिस जारी कर रही है। इसे लेकर राजनीतिक, सामाजिक और सिविल सोसायटी में बेहद गुस्सा है।  

इसे के विरोध में शुक्रवार, 5 नवंबर को दिल्ली के त्रिपुरा भवन के सामने छात्रों, कार्यकर्ताओं और वकीलों के संगठनों ने प्रदर्शन किया।

आपको बता दें कि एडवोकेट अंसार इंदौरी और एडवोकेट मुकेश चार सदस्यों की एक टीम के साथ 29 और 30 अक्टूबर को त्रिपुरा गए जिसके बाद उन्होंने "ह्यूमेनिटी अंडर अटैक इन त्रिपुरा" नामक रिपोर्ट जारी की जिसके अनुसार त्रिपुरा की सांप्रदायिक हिंसा में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की कई मस्जिदों, दुकानों और घरों को नुकसान पहुंचाया गया। इस रिपोर्ट ने राज्य को हिलाकर रख दिया।

इस घटना को लेकर अन्य लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, और पत्रकारों आदि ने भी लिखा, बोला, लेकिन इन सबके खिलाफ यूएपीए जैसे कठोर कानून के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं। ट्विटर तक को नोटिस दिया जा रहा है।

त्रिपुरा पुलिस की इस कार्रवाई का व्यापक स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। इस विरोध में भाग लेने वाले संगठनों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), क्रन्तिकारी युवा संगठन (केवाईएस), ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (एआईएलएजे) और ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) शामिल थे। .

प्रदर्शनकारियों ने असम भवन से त्रिपुरा भवन तक मार्च निकाला, त्रिपुरा में भाजपा सरकार और केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों पुलिस कर्मी मौजूद थे, और त्रिपुरा भवन के सामने की सड़क को प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से बहुत पहले ही पीले बैरिकेड्स द्वारा बंद  कर दिया गया था। कार्यकर्ता, छात्र, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता इन बैरिकेड्स के ठीक सामने जमा हो गए और अपना विरोध दर्ज कराया- पुलिस कर्मियों की भारी उपस्थिति उन्हें डराने या उनके उत्साह को कम करने में पूरी तरह असफल रही।

पश्चिम अगरतला पुलिस ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के दिल्ली स्थित मानवाधिकार वकीलों मुकेश और नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (एनसीएचआर) के अंसार इंदौरी को नोटिस दिया, जिसमें कहा गया कि  उनके  सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों पर यूएपीए की (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए) धारा 13  के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हालाँकि अगरतला पुलिस ने इस तरह की कार्रवाई 100 अधिक सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले अन्य लोगों पर भी की है। इन सभी पोस्टों में त्रिपुरा हिंसा की निंदा की गई थी और सरकार की आलोचना की गई थी। परन्तु पुलिस ने सभी को भ्रामक और झूठा, धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक लोगों को भड़काने वाला बताकर सभी लिखने और प्रसार करने वालों पर यूएपीए के तहत केस दर्ज़ किया है। ट्वीटर इण्डिया से भी लगभग 60 से अधिक हैंडल को हटाने करने के लिए कहा है। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता और कुछ पत्रकार भी शामिल हैं।  

वकीलों द्वारा मंगलवार, 2 नवंबर को दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर फैक्ट फाइंडिंग की रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसे फेसबुक लाइव के माध्यम से स्ट्रीम किया गया था। इसके एक दिन बाद ही यह नोटिस दिया गया था।

इस रिपोर्ट में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि जैसे गुटों की भूमिका पर भी ध्यान डाला गया है, जिन्होंने अपनी रैली में नफरत फ़ैलाने और भीड़ को उकसाने का प्रयास किया। यह रैली तथाकथित रूप से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ रोष व्यक्त करने के लिए रखी गई थी। पर इस रैली से पानीसगर डिवीजन में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा करने के लिए आह्वान किया गया।

मुस्लिम लाइव्स मैटर हैशटैग के साथ इस रिपोर्ट में बताया गया था कि इस हिंसा में 12 मस्जिदों, नौ दुकानों और मुस्लिम समुदाय के लोगों के तीन घरों पर हुए हमला हुआ।  .

ये पूरी रिपोर्ट न्यूज़क्लिक पर मौजूद है जिसे इस लिंक पर जाकर देखा जा सकता है।  

छात्र संगठन केवाईएस ने अपने बयान में कहा है कि इस टीम की आवाज़ को दबाने के लिए एडवोकेट अंसार इंदौरी और ऐडवोकेट मुकेश को यूएपीए के तहत नोटिस भेजा गया है। साथ ही साथ, उन पर भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) की कई धाराएं लगाई गईं हैं। पुलिस और सरकार द्वारा उनको डराए जाने के प्रयासों के बावजूद दोनों वकील अपनी रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर लिखे सार्वजनिक पोस्ट्स में कही बातों पर अडिग हैं।

आगे उन्होंने कहा कि यूएपीए और अन्य आतंक विरोधी कानूनों को अक्सर जनता के विरोध स्वर को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाना अब एक आम प्रक्रिया बन गई है। यह भयावह स्थिति है क्योंकि इन कानूनों का इस्तेमाल करके सरकार ऐसे सांप्रदायिक मामलों में खुद की मिलीभगत से जनता का ध्यान दूर खींचना चाहती है। हिंसा के लिए जिम्मेदार दोषियों को ढूंढ कर उन्हे कड़ी सजा देने के बजाय सरकार ने न्याय मांग रही लोकतांत्रिक आवाजों को ही चुप कराने का प्रयत्न किया है।

केवाईएस मांग करता है कि फैक्ट फाइंडिंग टीम के वकीलों पर लगाए निराधार आरोपों को तुरंत वापस लिया जाए। संगठन का कहना है कि यूएपीए और अन्य आतंक विरोधी कानूनों की ऐतिहासिक जड़ें उपनिवेशी सरकारों के राज में हैं, जो लगातार इन कानूनों से देश में आजादी की मांग उठाने वालों को दबाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा था। आज इन कानूनों को रद्द करने की जरूरत है क्योंकि लोकतंत्र में इनकी कोई जगह नहीं है। सरकारों द्वारा जनाक्रोश और बढ़ते विरोध स्वर से खुद को बचाने की इन कोशिशों के खिलाफ केवाईएस देश की सभी लोकतांत्रिक ताकतों को साथ आने का आह्वान करता है।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए , एसएफआई दिल्ली राज्य सचिव, प्रीतीश मेनन आज़ाद, जो विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे। उन्होंने कहा, "जैसा कि हम सभी जानते हैं, बांग्लादेश में हुई घटनाओं के बाद, त्रिपुरा में हिंदुत्व समूहों द्वारा प्रतिशोध किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति और जीवन का नुकसान किया गया। जब हम एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक देश में होने की बात करते हैं, तो इस तरह की स्थितियां देश के नागरिकों के लिए अस्वीकार्य हैं, और सरकार के लिए भी ऐसा ही होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के बजाय कि अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित लोग सुरक्षित रहे और उन्हें न्याय मिले, राज्य ने हिंसा के अपराधियों की रक्षा के लिए अपनी मशीनरी का इस्तेमाल किया है। जो इस सच्चाई को उजागर करता है उन्हें  यूएपीए के  तहत केस दर्ज़ कर डराया जा रहा है।

यह नोटिस जैसा कि न्यूज़क्लिक के पास है उसमें , पश्चिम अगरतला पुलिस ने कहा है कि अधिवक्ता मुकेश और अंसार इंदौरी के खिलाफ "उनके द्वारा प्रसारित सोशल मीडिया पोस्ट / धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक लोगों को भड़काने के लिए है। दो समुदायों को शांति भंग करने के लिए  दिए गए बयानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।"

पुलिस ने उनसे "सोशल मीडिया में उनके  द्वारा प्रसारित किए गए इन मनगढ़ंत और झूठे बयानों / टिप्पणियों को तुरंत हटाने" के लिए कहा। हालाँकि, नोटिस में विशिष्ट सोशल मीडिया पोस्ट को निर्दिष्ट नहीं किया गया था। इसके अलावा, मुकेश और इंदौरी को 10 नवंबर को पश्चिम अगरतला पुलिस स्टेशन के पुलिस उप-निरीक्षक के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था।

विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए, ऐक्टू की सुचेता डे ने कहा, "यूएपीए के आरोप में जिन दो वकीलों पर आरोप लगाया गया है, उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जिसका इस्तेमाल हिंसा भड़काने के लिए किया जा सकता है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप और कुछ नहीं बल्कि उन्हें चुप कराने के लिए राजनीति से प्रेरित प्रयास हैं। सरकार ने हमें दिखाया है कि भाजपा शासित राज्य में फैक्ट फाइंडिंग के लिए भी कोई जगह नहीं है। हालांकि, हम अपने देश में इस तरह की चीजें नहीं होने देंगे।"

प्रदर्शन को संबोधित करने वाले अन्य वक्ताओं ने भी इसी तरह की भावनाओं को व्यक्त किया।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के तहत भेजे गए नोटिस में इन आईपीसी अपराधों का भी उल्लेख किया गया है - धारा 153 ए / 153 बी (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा, आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) 469 (जानकारी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जालसाजी), 503 (आपराधिक धमकी), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और 120 बी (आपराधिक साजिश के लिए सजा)।

ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ने भी त्रिपुरा पुलिस की कथित कार्रवाई की निंदा और विरोध करते हुए एक बयान जारी किया। उन्होंने  पुलिस कार्रवाई को अत्यधिक अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताया। बयान में कहा गया है, "सांप्रदायिक हिंसा के बारे में रिपोर्ट करना और विरोध करना और लोकतांत्रिक अधिकारों है। ये एक राष्ट्र विरोधी या आतंकवादी गतिविधि नहीं है।"

न्यूज़क्लिक से फोन पर बात करते हुए, AILU के महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी सुरेंद्रनाथ ने कहा, "UAPA का इस्तेमाल इस तरह की चीजों के लिए नहीं किया जाता है। इन वकीलों ने जो किया वह राष्ट्र विरोधी गतिविधियां नहीं थीं। उन्होंने वही किया जो किसी भी व्यक्ति को करना चाहिए था। लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। उनके खिलाफ दायर आरोप पूरी तरह से संविधान के खिलाफ हैं। अगर आरोप निरस्त नहीं किए गए, तो हम आगे बढ़ेंगे और बड़ी कार्रवाई करेंगे।"

Tripura
Tripura Violence Fact Finding
Communal Hate
Religion Politics
Religious Hate
Tripura Police
AILU
SFI
UAPA
kys
AISA
AILAJ
AICCTU
NCHR

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई


बाकी खबरें

  • indian student in ukraine
    मोहम्मद ताहिर
    यूक्रेन संकट : वतन वापसी की जद्दोजहद करते छात्र की आपबीती
    03 Mar 2022
    “हम 1 मार्च को सुबह 8:00 बजे उजहोड़ सिटी से बॉर्डर के लिए निकले थे। हमें लगभग 17 घंटे बॉर्डर क्रॉस करने में लगे। पैदल भी चलना पड़ा। जब हम मदद के लिए इंडियन एंबेसी में गए तो वहां कोई नहीं था और फोन…
  • MNREGA
    अजय कुमार
    बिहार मनरेगा: 393 करोड़ की वित्तीय अनियमितता, 11 करोड़ 79 लाख की चोरी और वसूली केवल 1593 रुपये
    03 Mar 2022
    बिहार सरकार के सामाजिक अंकेक्षण समिति ने बिहार के तकरीबन 30% ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर बताया कि मनरेगा की योजना में 393 करोड रुपए की वित्तीय अनियमितता पाई गई और 11 करोड़ 90 लाख की चोरी हुई जबकि…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 6,561 नए मामले, 142 मरीज़ों की मौत
    03 Mar 2022
    देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 14 हज़ार 388 लोगों अपनी जान गँवा चुके है।
  • Civil demonstration in Lucknow
    असद रिज़वी
    लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें
    03 Mar 2022
    युद्ध भले ही हज़ारों मील दूर यूक्रेन-रूस में चल रहा हो लेकिन शांति प्रिय लोग हर जगह इसका विरोध कर रहे हैं। लखनऊ के नागरिकों को भी यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों के साथ युद्ध में मारे जा रहे लोगों के…
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में 'अपर-कास्ट हिन्दुत्व' की दरार, सिमटी BSP और पिछड़ों की बढ़ी एकता
    03 Mar 2022
    यूपी चुनाव के छठें चरण मे पूर्वांचल की 57 सीटों पर गुरुवार को मतदान होगे. पिछले चुनाव में यहां भाजपा ने प्रचंड बहुमत पाया था. लेकिन इस बार वह ज्यादा आश्वस्त नहीं नज़र आ रही है. भाजपा के साथ कमोबेश…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License