NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
सऊदी अरब द्वारा "प्राइस वार" की घोषणा के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उथल-पुथल
भारत जैसे तेल आयात करने वाले अधिकांश देशों के लिए कीमतों में गिरावट अच्छी खबर हो सकती है।
पीपल्स डिस्पैच
11 Mar 2020
sa

मंगलवार 10 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद कुछ वृद्धि देखी गई। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सोमवार 9 मार्च को 25% कम होने के बाद लगभग 30 डॉलर प्रति बैरल हो गई जो कि अब 35 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। ये गिरावट 2016 के बाद से सबसे कम है और 1991 में खाड़ी युद्ध के बाद एक दिन में सबसे ज़्यादा है।

इस गिरावट में ठहराव अमेरिका और जापान से आर्थिक उभाड़ की अपेक्षाओं पर आधारित है। हालांकि, कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है जब तक कि उत्पादन में काफी कमी न हो। पिछले हफ्ते रूस के साथ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) की वार्ता की विफलता के बाद कीमतों में गिरावट का श्रेय सऊदी अरब द्वारा किए गए तेल मूल्य युद्ध को दिया जाता है। कोविड -19 या कोरोनावायरस के प्रसार के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की गिरती मांगों का हवाला देते हुए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले ओपेक देश समन्वय उत्पादन में कटौती चाहते थे। इस वायरस के चलते अधिकांश यूरोपीय और एशियाई देशों में आर्थिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हो गई है।

रूस ने कथित तौर पर अपने उत्पादन को कम करने से इनकार कर दिया। इसने सऊदी अरब को सस्ती दरों पर अपने तेल की पेशकश करने और 1 अप्रैल 2020 से अपने उत्पादन में वृद्धि का प्रस्ताव देने के लिए प्रेरित किया। इससे तेल की आपूर्ति में वृद्धि की संभावना ऐसे समय में बनती है जब इसकी मांग रुक रही है या नीचे गिर रही है।

दुनिया में तेल का सबसे बड़ा आयातक चीन पहले ही मांग में कमी देख चुका है। इसने सऊदी अरब से अपने आयात को आधा करने का फैसला किया है।

सऊदी सरकार द्वारा नियंत्रित दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको के सीईओ ने कहा है कि वह अप्रैल में उत्पादन को रिकॉर्ड 12.3 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ाएगा जो कि 9.8 मिलियन बैरल के अपने वर्तमान दैनिक उत्पादन से लगभग 2.5 मिलियन बैरल अधिक होगा।

तेल की कीमतों में किसी भी दीर्घकालिक गिरावट का रूस और अमेरिका में उत्पादकों पर प्रभाव पड़ेगा लेकिन यह उन खाड़ी देशों को भी प्रभावित करेगा जिनके लिए तेल निर्यात राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है। ईरान और वेनेजुएला जैसे प्रमुख उत्पादक देशों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है जो पहले से ही विभिन्न आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, कीमतों में गिरावट से भारत जैसे देशों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है जो अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80% आयात करते हैं।

 

prices of oil in International market
Saudi Arabia
US and Japan
OPEC

Related Stories

रूसी तेल की चिकनाहट पर लड़खड़ाता यूरोपीय संघ 

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

डोनबास में हार के बाद अमेरिकी कहानी ज़िंदा नहीं रहेगी 

यमन में ईरान समर्थित हूती विजेता

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

यमन के लिए यूएन का सहायता सम्मेलन अकाल और मौतों की चेतावनियों के बीच अपर्याप्त साबित हुआ

ईरान नाभिकीय सौदे में दोबारा प्राण फूंकना मुमकिन तो है पर यह आसान नहीं होगा

AUKUS के विश्वासघात के ख़िलाफ़ मैक्रोन का बदला

तुर्की-यूएई रिश्तों में सुपर ब्लूम के मायने क्या हैं?

एक और महाशक्ति का पीछा करती तेल की क़ीमत


बाकी खबरें

  • स्वामीनाथन आयोग के आधार पर किसानों को नहीं मिली एमएसपी, सरकार कर रही है भ्रमित
    अजय कुमार
    स्वामीनाथन आयोग के आधार पर किसानों को नहीं मिली एमएसपी, सरकार कर रही है भ्रमित
    13 Sep 2021
    किसानों का कहना है कि कृषि उपज की लागत को स्वामीनाथन आयोग के फार्मूला के तहत ( C 2) निर्धारित किया जाए, ( A2+F L) वाले फार्मूला के तहत नहीं है। कंप्रिहेंसिव कॉस्ट के तहत खेती करने में लगी पूरी लागत…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: काम किसी का, नाम किसी का!
    13 Sep 2021
    यूपी की योगी सरकार विज्ञापन के जरिये अपनी छवि चमकाना चाहती है, लेकिन यह दांव उसपर उल्टा पड़ गया है। कार्टूनिस्ट इरफ़ान के मुताबिक अब तो शायद यूपी सरकार को हर विज्ञापन के साथ यह सूचना छापनी पड़े- “…
  • तालिबान ने झंडा फहराया, क्या हैं इसके मायने?
    एम. के. भद्रकुमार
    तालिबान ने झंडा फहराया, क्या हैं इसके मायने?
    13 Sep 2021
    इसमें कोई शक नहीं कि अफ़ग़ानिस्तान में झंडा फहराना तालिबान का उस सत्ता पर दावा है जिस दावे के ज़रिए उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के 20 साल बाद वे सत्ताधारी अभिजात वर्ग के रूप में वापस लौट आए हैं, और यह एक…
  • भूपेंद्र पटेल
    अनिल सिन्हा
    गुजरातः ‘हिंदुत्व की प्रयोगशाला’ बचाने में जुटे हैं मोदी-आरएसएस 
    13 Sep 2021
    भूपेंद्र पटेल पहली बार के विधायक हैं। उन्हें कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है। उनकी एक ही ख़ासियत है कि वह पटेल समुदाय से आते हैं और अगले साल हो रहे विधानसभा चुनावों के लिए जाति-समीकरण साधने में काम आएंगे।
  • जतिन दास
    हर्षवर्धन
    जतिन दास से फादर स्टेन स्वामी तक: राजनैतिक क़ैदियों की दुर्दशा
    13 Sep 2021
    जतिन दास की शहादत आज से 92 साल पहले लाहौर जेल में राजनैतिक बंदियों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए हुई थी। निर्मम ब्रिटिश सरकार ने कपट से जतिन दास की हिरासत को मौत की सज़ा में बदल दिया था। आज़ाद भारत की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License