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प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच से लग रहा है कि बदमाश लूट के इरादे से आए और घटना को अंजाम दिया है। आशंका है कि हत्यारों ने सुबूत मिटाने के लिए उन्होंने घर में आग लगा दी थी। फिलहाल फारेंसिक और डाग स्क्वायड की टीमें जांच-पड़ताल में जुटी है।
विजय विनीत
23 Apr 2022
UP Police

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सामूहिक हत्याओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। थरवई थाना क्षेत्र के खेवराजपुर गांव में 22 अप्रैल 2022 की देर रात हत्यारों ने एक ही परिवार के पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया। सभी की हत्या धारदार हथियार से गला रेत की गई है। हत्यारों ने दो साल की बच्ची को भी नहीं बख्शा, वहीं पांच साल की दूसरी बेटी जीवन-मौत से जूझ रही है। कत्ल के बाद हमलावरों ने सबूत मिटाने के लिए घर में आग लगा दी।

हत्यारों ने जिन लोगों की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या की है उसमें राजकुमार यादव (55 साल), इनकी पत्नी कुसुम यादव (50 साल), बेटी मनीषा यादव (25 साल), बहू सविता यादव (30 साल) और पोती मीनाक्षी (2 साल) शामिल हैं। हत्यारों ने वारदात को अंजाम देने के बाद शवों को जलाने के लिए घर में आग लगा दी। घटनास्थल पर पुलिस, फॉरेंसिक टीम मौजूद है। मरने वालों में सविता पांच माह की गर्भवती थी। सविता की एक बेटी मीनाक्षी की हत्या कर दी गई है, वहीं 5 साल की दूसरी बेटी साक्षी घायल है। सविता के पति सुनील ने अपनी पत्नी और बहन दोनों के साथ रेप की आशंका भी जताई है।

हत्या के बाद धू-धूकर जलता घर

इलाहाबाद जोन के एडीजी प्रेम प्रकाश के मुताबिक शुरुआती जांच से लग रहा है कि बदमाश लूट के इरादे से आए और घटना को अंजाम दिया है। आशंका है कि हत्यारों ने सुबूत मिटाने के लिए उन्होंने घर में आग लगा दी थी। फिलहाल फारेंसिक और डाग स्क्वायड की टीमें जांच-पड़ताल में जुटी है। हत्याकांड का पर्दाफाश करने के लिए सात टीमें बनाई गई हैं। जल्द ही वारदात का खुलासा किया जाएगा। परिजनों की तहरीर लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को मौके पर पहुंच कर निष्पक्षता के साथ जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई करने के निर्देश दिए।

प्रयागराज में पिछले पांच सालों में छह परिवारों के 25 से अधिक लोगों की हत्या हो चुकी हैं। प्रयागराज में अभी बीती 16 अप्रैल की सुबह एक ही परिवार के पांच लोगों के शव घर में मिले थे। घटना नवाबगंज थाना क्षेत्र के खागलपुर गांव की थी। यहां पत्नी और तीन बेटियों को धारदार हथियार से मौत के घाट उतारा गया। वहीं, पति का शव आंगन के जाल से फांसी पर लटका मिला। मृतकों की शिनाख्त पति राहुल तिवारी (42), पत्नी प्रीति (38) और तीन बेटी माही, पीहू और पोहू के रूप में हुई थी।

इसे पढ़ें: प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

इससे पहले 25 अक्टूबर 2021 को गोहरी में एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या और युवती के साथ दुष्कर्म की बात भी सामने आई थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई थी। इस मामले में पुलिस ने गोहरी गांव के पास के ही पवन सरोज सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन सबूतों के अभाव में पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा। एसएसपी अजय कुमार ने कहा था कि जल्द ही आरोपी पकड़ में होंगे। अभी तक पुलिस हत्यारों को नहीं पकड़ सकी है।

दो साल पहले पांच जनवरी 2020  को प्रयागराज के सोरांव इलाके के यूसुफपुर में विजय शंकर तिवारी, उसकी पत्नी सोनी और सोन, मासूम बच्चे कान्हा, कुंज की धारदार हथियार से हत्या की गई थी। पुलिस ने इस घटना को अंजाम देने वाले वाले बिहार के एक गैंग के छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इसी तरह दो जुलाई 2020 को प्रयागराज के होलागढ़ थाना क्षेत्र के बरई हरख गांव के शुकुलपुर मजरा निवासी विमलेश पांडेय, उनके बेटे प्रिंस, बेटी श्रेया और शीबू की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। कातिलों ने विमलेश की पत्नी ऊषा पर हमला किया, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। इस मामले में पुलिस ने छेमार गैंग के बदमाशों को गिरफ्तार किया था।

इसी तरह सात सितंबर 2018  को इसी जिले के सोरांव थाना क्षेत्र के बिगहिया गांव में सरकारी कर्मचारी कमलेश देवी, उसकी बेटी, दामाद प्रताप नरायण सहित उसके नाती विराट की हत्या की गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक महीने बाद पट्टीदार और रिश्तेदार को हत्या में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। खुलासे को लेकर पुलिस के ऊपर सवालिया निशान उठे थे। 19 मार्च 2018  को नवाबगंज के शहावपुर उर्फ पसियापुर गांव में तीन की हत्या की गई थी। मृतकों में सुशीला देवी और उसके दो बेटे सुनील, अनिल शामिल थी। इस मामले में पुलिस ने सुशीला के एक रिश्तेदार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

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