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यूपी: गोरखपुर में लूट-पाट की बड़ी वारदात, ‘बेहतर कानून व्यवस्था’ का दावा फुस्स!
लूट-पाट की वारदात के अलावा डकैतों पर महिलाओं और बच्चियों से अश्लील हरकत के साथ ही दुष्कर्म की कोशिश करने का आरोप भी लगा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Nov 2020
यूपी

उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा ‘बेहतर कानून व्यवस्था’ के दावे की लगातार फजीहत हो रही है। अपराधी बेखौफ एक के बाद एक वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जा रहे हैं। ताजा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर का है। यहां ईंट भट्ठे पर मजदूरों को बंधक बनाकर लूट-पाट का मामला सामने आया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि घटना के दौरान बदमाशों ने मजदूर परिवारों की महिलाओं से छेड़छाड़ और दुष्कर्म की कोशिश भी की।

क्या है पूरा मामला?

घटना गोरखपुर के गगहा इलाके के एक गांव की है। यहां मंगलवार, 10 नवंबर की रात लगभग 12- 1 बजे हथियारों से लैस करीब दर्जन भर डकैतों ने रामकृपाल ईंट-भट्ठे पर हमला बोल दिया। डकैतों ने वहां काम करने वाले मज़दूरों को एक झोपड़ी में बंधक बना दिया और फिर बाद लूट-पाट की वारदात को अंजाम दिया। डकैतों पर महिलाओं और अन्य किशोरियों से अश्लील हरकत के साथ ही दुष्कर्म की कोशिश करने का आरोप भी लगा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक भट्ठे पर झारखंड से मजदूर आकर अपने परिवार के साथ रहते हैं और यहां ईंट बनाने का काम करते हैं। रामकृपाल के विजय ब्रिक्स फिल्ड नाम के भट्ठे पर भी करीब 31 लोग झोपड़ी डालकर रहते है और वहीं पर काम करते हैं। इस घटना में डकैतों ने मज़दूरों के 76 हजार तीन सौ रुपये, 9 मोबाइल व गहने लूटकर बदमाश फरार हो गए।

पुलिस क्या कह रही है?

इस मामले में एसपी साऊथ विपुल श्रीवास्तव का कहना है कि पुलिस ने ईंट भट्ठा मालिक की तहरीर पर डकैती, दुष्कर्म, छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें लगाई हैं।

एसपी साऊथ ने मीडिया को बताया कि मेडिकल में महिलाओं या बच्चियों से रेप की पुष्टि नहीं हुई है। बल्कि छेड़खानी की बात सामने आई है। केस दर्ज कर बदमाशों की गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया जायेगा।

हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से दुष्कर्म (बलात्कार) के आरोप को जिस तरह खारिज किया, यह मामले को हलका करने की कोशिश है।

गौरतलब है कि गोरखपुर शहर आए दिन लूट-पाट और दुष्कर्म की घटनाओं से दो-चार होता रहता है। कभी अपराधी घर में घुस कर लूट-पाट की वारदात को अंजाम देते हैं तो कभी सरेआम हाईवे पर ट्रक डाइवरों और सामान को निशाना बनाया जाता है।

हालांकि ये सिर्फ गोरखपुर का हाल नहीं है पूरे सूबे की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही दिखाई पड़ती है। पिछले कुछ महीनों से ताबड़तोड़ आपराधिक घटनाओं के चलते राज्य की योगी सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर चौतरफा सवाल भी उठ रहे हैं।

सरकार का क्या दावा है?

पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से जारी आँकड़ों की बात करें तो साल 2013 के मुक़ाबले साल 2020 में बलात्कार के मामलों में 25.94 फ़ीसदी और साल 2016 के मुकाबले 38.74 फ़ीसदी की कमी आई है।

दावे के मुताबिक़, अन्य प्रकार के अपराधों में भी काफ़ी कमी आई है। सरकार के मुताबिक, पॉक्सो एक्ट के मामलों में प्रभावी पैरवी की वजह से एक जनवरी 2019 से इस साल 30 जून तक 922 मुक़दमों में अभियुक्तों को सज़ा हुई है जिनमें से पांच को मृत्युदंड की सज़ा दी गई है।

दावों और वादों के बीच सच्चाई क्या है?

सरकार का दावा है कि विभिन्न अपराध में काफी कमी आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिस तरह आपराधिक घटनाओं में तेज़ी दिख रही है, उनके आधार पर क्या इन आँकड़ों को तर्कसंगत ठहराया जा सकता है?

जानकारों का कहना है कि क़ानून-व्यवस्था बेहतर होने का मतलब अपराध पर लगाम लगनी चाहिए। सिर्फ आँकड़ों में ही नहीं, सामने जो घटित हो रहा है उसमें भी कमी आनी चाहिए। अपराध की तस्वीर जो आंकड़ों में दिख रही है वो ज़मीनी हक़ीक़त से बिल्कुल अलग नज़र आती है। बड़ी लूट-पाट, किडनैपिंग और फ़िरौती मांगने की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। ऐसे में अपराध कम हुए हैं, ये कैसे माना जा सकता है।

एनसीआरबी के आंकड़ें क्या कहते हैं?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2018 के आंकड़े देखें तो साल 2018 में देशभर में 50 लाख 74 हजार 634 अपराध दर्ज किए गए थे। ये आंकड़ा 2017 की तुलना में 1.3% ज्यादा था। इसमें भी अकेले उत्तर प्रदेश में इस साल 5 लाख 85 हजार 157 क्राइम रिकॉर्ड हुए थे। इस हिसाब से 2018 में देशभर में जितने भी क्राइम रिकॉर्ड हुए, उसमें से सबसे ज्यादा 11.5% मामले अकेले यूपी में दर्ज हुए थे।

वॉयलेंट क्राइम यानी ऐसे अपराध, जिसमें हिंसा हुई है। जैसे- बलात्कार, बलात्कार की कोशिश, हत्या, हत्या की कोशिश, चोरी-डकैती, दंगा या हिंसा भड़काना और वगैरह-वगैरह। ऐसे वॉयलेंट क्राइम में भी यूपी देश में टॉप पर है।

2018 में देशभर में 4 लाख 28 हजार 134 वॉयलेंट क्राइम दर्ज हुए थे। इसमें से 65 हजार 155 मामले अकेले यूपी में दर्ज हुए थे। यानी देश में जितने वॉयलेंट क्राइम रिकॉर्ड हुए, उसमें से 15% यूपी में दर्ज हुए थे।

इतना ही नहीं, 2018 में देश में 29 हजार 17 मर्डर हुए थे, इसमें से सबसे ज्यादा 4 हजार 18 हत्याएं यूपी में हुईं। 1 लाख से ज्यादा किडनैपिंग हुई थीं, उसमें से 21 हजार से ज्यादा किडनैपिंग यूपी में हुईं। बलात्कार के मामले में भी मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद यूपी तीसरे नंबर पर था।

अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपराध के मामले में भी उत्तर प्रदेश टॉप पर है। 2018 में देशभर में दलितों के खिलाफ अपराध के 42 हजार 793 मामले दर्ज किए गए थे। इसमें से तकरीबन 28% मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए थे। इस साल यूपी में दलितों के खिलाफ अपराध के 11 हजार 924 मामले रिकॉर्ड हुए थे। 

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