NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!
धराऊ में बीते महीने पिछड़े समुदाय की एक 16 वर्षीय लड़की की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन डरा-धमकाकर शव का रातों-रात अंतिम संस्कार करवाया दिया। साथ ही गैंगरेप की घटना को प्रेम प्रसंग में हत्या का नाम देने की कोशिश की।
सोनिया यादव
04 Feb 2022
UP
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

चुनावी समर के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही अपने साक्षात्कारों में प्रदेश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन इसकी सच्चाई राज्य में आए दिन सामने आ रही घटनाओं से बखूबी समझी जा सकती है। हाल ही में बुलंदशहर का मामला सुर्खियों में आया जिसे लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस एक बार फिर शक के घेरे में है और उस पर लाठी-जेल का डर दिखाकर आधी रात में अंतिम संस्कार कराने का आरोप लग रहा है। इस घटना को दूसरा हाथरस कांड भी कहा जा रहा है।

बता दें कि ये घटना 21 जनवरी की है, जिसे कथित तौर पर पुलिस-प्रशासन ने डरा-धमकाकर दबा दिया था। परिवार का दावा है कि उनकी लड़की का अपहरण किया गया और फिर कुछ ब्राह्मण पुरुषों ने सामूहिक बलात्कार के बाद उसे मार डाला, लेकिन पुलिस इस मामले की अलग ही कहानी बताने में लगी है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। साथ ही उसके सहयोगी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बुलंदशहर और अलीगढ़ की सीमा पर बसे गांव डिबाई-गालिबपुर में हुई थी। पीड़िता के परिजनों के मुताबिक, किशोरी 21 जनवरी को घर से चारा लेने गई थी। दोपहर में धोरऊ गांव के रहने वाले सौरभ शर्मा और उसके तीन साथी उसे जबरन उठाकर उसी गांव में ट्यूबवेल पर ले गए, जहां सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद सौरभ ने किशोरी के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। 

किशोरी के परिजनों का आरोप है कि वहां ट्यूबवेल का कमरा बंद था। अंदर फर्श पर खून था और आरोपी भी वहीं था। पुलिस किशोरी और आरोपी को अलग गाड़ी में बैठाकर ले गई। शाम को ही पुलिस शव को बुलंदशहर जिला अस्पताल ले गई लेकिन परिजनों का कोई जानकारी नहीं दी गई।

पीड़ित परिवार ने कहा कि 22 जनवरी को अधिकारियों ने फोन कर बताया कि बुलंदशहर जिला अस्पताल में उनकी बेटी का पोस्टमार्टम हो रहा है। परिजनों ने अपनी मौजूदगी में अगले दिन पोस्टमार्टम करवाने की मांग की, लेकिन पुलिस ने उन्हें डंडे का डर दिखाकर शव रवाना कर दिया।

पीड़ित परिवार बलात्कार का अंदेशा जताती रही लेकिन पुलिस इससे इनकार करती रही। परिवार ने एफआईआर में गैंगरेप की धारा जोड़ने और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की लेकिन पुलिस ने उन्हें धमकाकर चुप करा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित परिवार 22 जनवरी की रात को अंतिम संस्कार नहीं कराना चाहता था लेकिन पुलिस ने महामारी एक्ट के प्रावधानों और कार्रवाई का दबाव बनाकर रात 12 बजे जबरन अंतिम संस्कार करा दिया।

पुलिस का क्या कहना है?

बुलंदशहर के एसएसपी संतोष सिंह ने मीडिया से कहा कि पुलिसकर्मियों ने परिवार पर किशोरी का अंतिम संस्कार करने का कभी दबाव नहीं बनाया। इस मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लड़की आरोपी की दोस्त थी। मामले में मुख्य आरोपी को लगता था कि वह उसे धोखा दे रही है।

एसएसपी ने कहा, "आरोपी ने बंदूक निकाली और किशोरी पर चला दी। आरोपी ने ब्लेड से अपने हाथ और गर्दन पर भी वार किया है। परिवार की मांग है कि मामले को अन्य पुलिस थाने में ट्रांसफर किया जाए और हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।"
इस मामले में परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोपियों के दबाव में एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने अब तक मामले में गैंगरेप की धारा नहीं जोड़ी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि यह मामला प्रेम प्रसंग का है। पुलिस के अनुसार आरोपी युवक ने गोली मारने के बाद ब्लेड से खुद के गले और हाथ की नसें काटने का प्रयास किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ग्रामीण ने बताया, "हैरान करने वाली बात यह है कि घटना 21 जनवरी की है लेकिन पुलिस के डराने-धमकाने की वजह से परिवार चुप रहा। मामले में नेताओं के ट्वीट करने के बाद पूरी बात सामने आ पाई।"

लड़की के परिजनों का क्या कहना है?

किशोरी के पिता का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने रात में जबरन अंतिम संस्कार के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि परिवार 22 जनवरी की रात को अंतिम संस्कार नहीं कराना चाहता था। क्योंकि हमारे यहां इसे अशुभ माना जाता है। इसलिए हम सामाजिक रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिस नहीं मानी।

ब्राह्मणों पर सामूहिक बलात्कार के आरोप की इस घटना ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में जातिगत विभाजन को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। परिवार का आरोप है कि धराऊ के सरपंच महेंद्र शर्मा के बेटे और उसके दोस्तों- जिनमें एक सौरभ भी है- ने लड़की के साथ बलात्कार किया और उन्हें भाजपा के मंत्री अनिल शर्मा द्वारा बचाया जा रहा है।

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की चाची ने कहा, "हम लंबे समय से गांव में रह रहे हैं और सभी को जानते हैं। हमें अच्छी तरह पता है कि सौरभ को बाइक चलाना नहीं आता था। लड़की को यहां लाने के लिए उसने 16 किलोमीटर गाड़ी कैसे चलाई?”

उन्होंने आगे कहा, "यही नहीं लड़की का वजन 80 किलोग्राम से अधिक था। ऐसे में यह संभव नहीं है कि सिर्फ एक व्यक्ति उसका अपहरण कर सके और यहां तक गाड़ी चलाकर ला सके। इसमें और भी लोग शामिल हैं।"

उन्होंने कहा, "ब्राह्मणों ने हमारी लड़की के साथ बलात्कार किया और उन्हें बचाया जा रहा है क्योंकि पूरी व्यवस्था इन आठ प्रतिशत लोगों से ही चलती है। कोई हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है क्योंकि क्षेत्र में ब्राह्मण वोट मायने रखता है।”

लड़की के परिवार ने आगे कहा कि ऊंची जातियों के लोग उनके साथ ‘अमानवीय’ व्यवहार करती हैं क्योंकि वे बहुजन समाज से आते हैं और अपने समुदाय को बचाते हैं। अन्य ग्रामीणों ने भी यही भाव जाहिर किया।

पीड़ित परिवार के वकील का क्या कहना है?

पीड़ित परिवार की वकील लखनऊ उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाली लक्ष्मी राजपूत ने मीडिया से कहा कि 21 जनवरी को ऐसी जघन्य घटना घटने के बाद भी पुलिस की ओर से कोई सक्रियता नहीं दिखाई गयी।

उन्होंने कहा, "घटना के तकरीबन 11 दिनों के बाद जाकर कहीं 1 फरवरी को पुलिस के द्वारा पीड़िता के परिवार का बयान दर्ज किया गया। पुलिस की ओर से किसी तरह लेन-देन के जरिये समझौता कर लेने की मंशा बनी हुई है। एक बार फिर से हाथरस कांड को दोहराया गया है।”

इसे भी पढ़ें: यूपी: ‘न्यूनतम अपराध’ का दावा और आए दिन मासूमों साथ होती दरिंदगी!

विपक्ष ने क्या कहा?

बुलंदशहर में पीड़िता के परिवार से मुलाकात के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला किया। प्रियंका ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद कहा कि जैसे हाथरस की घटना हुई ठीक उसी तरह से परिवार पर दबाव बनाकर आधी रात में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस मिली हुई है। FIR की कॉपी अभी परिवार को नहीं मिली है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि अनिल शर्मा का फोन पुलिस को आ रहा था, परिवार को शक है कि इनका इस घटना के साथ कनेक्शन है। परिवार का कहना है गैंगरेप हुआ है, लेकिन पुलिस इसे नकार रही है। 17 साल की बच्ची को पुलिस 21 साल का बता रही है। मैं हर तरह पीड़ित परिवार की मदद करूंगी, हम इनके लिए लड़ेंगे।

वहीं इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब योगी सरकार महिला सुरक्षा पर झूठ बोलना बंद करे। यूपी में कानून व्यवस्था सबसे आगे है, ये दावा बीजेपी के नेता कर रहे हैं। लेकिन आज जो घटना बुलंदशहर में हुई, वह घटना हाथरस की घटना की याद दिलाती है।

उन्होंने आगे घटना पर दुख जताते हुए कहा, ''एक बहन के साथ ऐसी घटना हुई है। पुलिस को दोषियों को पकड़ना चाहिए, कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार पर सवाल है, सरकार कह रही है ज़ीरो टॉलेरेंस है, जीरो टॉलेरेंस वाली सरकार में एक बहन के साथ ऐसी घटना हो गई।''

इसे भी पढ़ें: हाथरस मामले में सरकार और प्रशासन का दोहरा रवैया क्यों दिखाई पड़ता है?

हाथरस की याद और बेहतर कानून व्यवस्था की बात

गौरतलब है कई जगह इस मामले की तुलना हाथरस से की जा रही है। 14 सितंबर 2020 को हाथरस में सवर्ण जाति के चार युवकों ने 19 साल की दलित युवती के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करने के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया था। 29 सितंबर को इलाज के दौरान युवती ने दम तोड़ दिया था, जिसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में देर रात उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। वैसे योगी सरकार महिला सुरक्षा के कितने भी कसीदे पढ़ ले लेकिन जमीनी हकीकत की बात करें तो आज भी महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश टॉप पर है।

राष्ट्रीय महिला आयोग के मुताबिक साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से रिपोर्ट हुए, जो कुल शिकायतों का आधा से ज्यादा का आंकड़ा है। आयोग की हालिया जारी रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 30 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। जिसमें सबसे अधिक 15,828 शिकायत यूपी से थीं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा क्राइम के आंकड़ें देखें तो यहां भी उत्तर प्रदेश टॉप पर है। यहां साल 2020 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के 49,385 मामले दर्ज कराये गये थे।

बलात्कार के मामले में भी उत्तर प्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। यानी राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश ही वो राज्य है जहां महिलाएं सबसे अधिक बलात्कार का शिकार हो रही हैं। साल 2020 में देश भर में बलात्कार के कुल 28046 मामले दर्ज किए गए, जिसमें से अकेले उत्तर प्रदेश में कुल 2,769 मामले दर्ज हुए।

ताजा आंकड़ों की बात करें तो यूपी के 16 जिलों में पिछले एक माह में 41 लड़कियों से रेप और छेड़छाड़ के संगीन मामले सामने आए। इनमें 33 नाबालिग हैं। सिर्फ एक माह में साढ़े 3 साल की बच्ची से लेकर 30 साल की महिला तक से रेप की खबरें सुर्खियां बटोर चुकी हैं।

और तो और जहां तक गुंडों को सही जगह पहुंचाने का दावा है तो उसकी भी सच्चाई जान ही लीजिए। एनसीआरबी 2020 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश हत्या के मामले में भी नंबर एक पर है। रिपोर्ट की मानें तो साल 2020 में देश में कुल 29,193 हत्याएं हुईँ, जिसमें से अकेले उत्तर प्रदेश में 3,779 मामले दर्ज हुए। 2019 की तुलना में ये आंकड़ा ज्यादा है। ऐसे में मुख्यमंत्री साहब का दावा कहां टिकता है? ये तो सीएम योगी और उनकी टीम ही बता सकती है।

इसे भी पढ़ें: यूपी: चुनावी समर में प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा का दावा कितना सही?

Uttar pradesh
Bulandshahr
Bulandshahr case
National Crime Records Bureau
crimes against women
violence against women
NCRB 2020
Yogi Adityanath
AKHILESH YADAV
PRIYANKA GANDHI VADRA

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!

आज़म खान-शिवपाल का साथ छोड़ना! क्या उबर पाएंगे अखिलेश यादव?

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित


बाकी खबरें

  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 39,796 नए मामले, 723 मरीज़ों की मौत
    05 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 39,796 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.57 फ़ीसदी यानी 4 लाख 82 हज़ार 71 हो गयी है।
  • खाद्य सामग्री की ऊंची क़ीमतें परिवारों के पोषण को तबाह कर रही हैं
    सुबोध वर्मा
    खाद्य सामग्री की ऊंची क़ीमतें परिवारों के पोषण को तबाह कर रही हैं
    05 Jul 2021
    प्रोटीन के बुनियादी स्रोत जैसे मांस, अंडे, दालें आम आदमी की पहुँच से बाहर हो गए हैं और रसोई गैस की क़ीमत की तरह खाना पकाने के तेल की क़ीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। 
  • लेखक को भविष्य की उम्मीद दिखानी चाहिए
    न्यूज़क्लिक टीम
    लेखक को भविष्य की उम्मीद दिखानी चाहिए
    04 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक की ख़ास पेशकश में वरिष्ठ कवि व राजनीतिक विश्लेषक अजय सिंह ने उपन्यासकार-गद्यकार गीता हरिहरन से उनके उपन्यास I have become the tide के बहाने मौजूदा दौर पर विस्तृत बातचीत की। अजय सिंह ने…
  • Economic Liberalisation: 30 साल में क्या बदला, क्या नहीं?
    न्यूज़क्लिक टीम
    Economic Liberalisation: 30 साल में क्या बदला, क्या नहीं?
    04 Jul 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन 1991 Economic Liberalisation की बात कर रहे है. क्या है इसका इतिहास और इसे क्यों लागू किया गया था, आइये जानते हैं
  • नासिरा शर्मा‌‌
    श्याम कुलपत
    नासिरा शर्मा‌‌: मिट्टी और पानी की तासीर पर बात करने का न्योता
    04 Jul 2021
    भाषा के चहुं ओर जो दीवारें हमसे खड़ी हो रही हैं वह कोई साहित्यिक अमल नहीं ‌है। नासिरा शर्मा ने इसे उसकी गैर अदबी अभिव्यक्ति कहा, जो भाषा के पक्ष में नहीं विपक्ष में जाती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License