NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव: पश्चिमी यूपी के लोग क्यों भाजपा को हराना चाहते हैं?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और किसान आंदोलन का गढ़ है। चर्चा से तो लगता है कि लोग बदलाव चाहते हैं।
महेश कुमार
28 Jan 2022
up elections
चुनाव प्रचार का एक दृश्य। 

मोहम्मद इलयास जोकि सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किलाना गाँव के निवासी हैं, ने कहा कि “हिन्दू हो या मुसलमान, समाज के सभी तबकों ने भाजपा को हारने और सपा-लोकदल गठबंधन को जीतने के लिए कमर कस ली है”।

न्यूज़क्लिक ने जब उनसे पूछा कि ऐसे कौन से कारण या मुद्दे हैं जिनकी वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग भाजपा से इतने खफ़ा हो गए हैं, तो उन्होने तफसील से बताया कि “प्रदेश का हर तबका बहुत परेशान है, फिर चाहे वे किसान हों या मजदूर”।

इलयास ने बताया कि “लोगों के पास रोजगार नहीं है, दिहाड़ी पहले के मुक़ाबले कम हो गई है, किसान को फसल के उपयुक्त दाम नहीं मिल रहे हैं और उस पर योगी सरकार ने किसानों को गन्ने का बकाया भी नहीं दिया है, गन्ने का भुगतान अप्रैल 2021 तह की किया गया है वह भी तब चुनाव नजदीक आ गए हैं”। उन्होने कहा कि “इतनी कठोर परिस्थितियों में कोई कैसे जीवन व्यतीत कर सकता है। “हालत यह है कि गाँव के लोगों को खाना बनाने के लिए ईंधन या गोबर के उपले खरीदने पड़ रहे हैं क्योंकि मोदी सरकार ने जो एलपीजी सिलेन्डर बांटे थे, बढ़ते दामों की वजह से उनमें गैस भरवाने का इंतजाम आम लोगों के पास नहीं है”।

इलयास के साथ उसी गाँव के विकास और सोनू कुमार ने बताया कि, “हालांकि आम लोगों में असंतोष पहले से ही बढ़ रहा था लेकिन तीन कृषि क़ानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन ने इस असंतोष को बढ़ा दिया है और अब यह पूरे प्रदेश में अब इसका असर दिख रहा है और लोग गठबंधन की तरफ मुखातिब हो रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या औवेसी की पार्टी के खड़े होने से मुस्लिम वोट बंटेगा तो उनका दो टूक जवाब था कि इस बार 90 प्रतिशत वोट गठबंधन को ही जाएगा, यद्द्पि बसपा को 10 प्रतिशत वोट जाने की संभावना है।

दौराला के रहने वाले 72 वर्षीय फूल सिंह ने कहा कि “अबकी बार गठबंधन की सरकार होगी क्योंकि लोग योगी सरकार से लोग बेहद दुखी हैं। दौराला, सरदाना विधानसभा के तहत आता है और इसकी आबादी 19,776 है। यह एक नगर पंचायात है और दौराला चीनी मिल इस नगर की सबसे प्रसिद्ध पहचान है। फूल सिंह कहते हैं कि “युवाओं के सामने रोजगार की बहुत बड़ी समस्या है। मजदूरों के पास काम नहीं है और ईंट भट्टे भी कोरोना महामारी के चलते अधिकतर बंद पड़े हैं। यही कारण है कि समाज का हर तबका योगी सरकार के खिलाफ मतदान की तैयारी कर रहा है"।

नाम न छापने की शर्त पर एक भट्टा मजदूर ने बताया कि “एक तो ईंट भट्टो में काम नहीं है ऊपर से उत्तर प्रदेश में एक मजदूर को 1000 ईंट तैयार करने पर मात्र 550 रुपए मिलते हैं जबकि उसी मजदूर को पंजाब में 1000 ईंट के लिए 805 रुपए मिलते हैं। उत्तर प्रदेश में मजदूरों का काफी शोषण होता है उनकी आवाज़ उठाने के लिए कोई सशक्त यूनियन भी नहीं है। यहाँ भट्टा मालिक राजनीतिक रूप से काफी मजबूत हैं और वे किसी भी यूनियन को कामयाब नहीं होने देते हैं। इसलिए इसका खामियाज़ा मजदूरों को भुगतना पड़ता है और कम मजदूरी पर काम करना पड़ता है। खाली दिनों में खेतों में काम नहीं मिलता है। सीजन में भी मुश्किल एक या दो महीनों का काम मिलता है और पूरे दिन मेहनत करने के बाद पुरुष श्रमिक को केवल 400 रुपए और महिला श्रमिक को 220 रुपए मिलते हैं। इतनी कम आम्दानी में परिवार का खर्च चालान नामुमकिन है, नतीजतन बड़ी तादाद में खेतिहर या भट्टा मजदूर भारी कर्ज़ में डूबे रहते हैं। हालांकि हमारे जैसे मजदूरों को किसी सरकार से उम्मीद नहीं है लेकिन फिर भी सरकार बदलने के लिए हम लोग एक बेहतर और जीतने वाले विकल्प को ही वोट देंगे।"

जब उनसे पूछा गया कि दलित इस बार किस पार्टी की तरफ रुख करेंगे तो उन्होने कहा कि “दलित वोट सपा गठबंधन और बसपा में बटेंगे। हालांकि ज़ोर गठबंधन का है और बहुमत वोट उसी की तरफ जाएंगे"।

बड़ौत विधानसभा से मुस्लिम युवाओं की एक टोली से सब पूछा गया तो उन्होंने भी नाम न छापने की शर्त पर कहा कि : मुस्लिम मतदाताओं का पूरा वोट सपा गठबंधन को जाएगा। हमने तो तय कर लिया है बाकी का हमें भरोसा नहीं है। लेकिन एक उम्मीद है कि किसान आंदोलन के बाद लोगों में जागरूकता पैदा हुई है उनका भी रुख अब गठबंधन की तरफ होगा"।

लोनी के रहने वाले नरेश कुमार ने बताया कि लोनी विधानसभा सीट पर भाजपा और सपा गठबंधन में कांटे की टक्कर होगी। इसलिए इस सीट के मामले में कुछ भी कहना आसान नहीं है।

जब न्यूज़क्लिक बड़ौत विधानसभा का दौरा कर रहा था तो बसपा के उम्मीदवार अंकित शर्मा का प्रचार अभियान चल रहा था। उनके प्रचार का कार्यभार संभालने वाले अंकुर मुनखिया ने बताया कि “बसपा अभी प्रचार में उतरी है और क्षेत्र में हमारे उम्मीदवार को भारी समर्थन मिल आढ़ा है।" यह पूछे जाने पर कि इस बार के चुनाव में सपा गठबंधन का ज़ोर है तो उन्होंने इसे खारिज कर दिया और कहा कि बसपा का मतदाता शांत मतदाता है और वक़्त आने पर चोट करेगा"।

बसपा उम्मीदवार अंकित शर्मा ने एक छोटी सी चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में बसपा की 200 सीटें आएगी। प्रदेश का किसान और मजदूर बसपा के साथ है क्योंकि उसने देखा है कि बहन मायावती की सरकार ने न केवल गन्ने की फसल का भाव बढ़या बल्कि किसानों को वक़्त पर भुगतान भी किया था। लेकिन योगी सरकार ने अभी तक पिछले साल के बाकाए का भी भुगतान भी नहीं किया है"।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना, थाना भवन, शामली, बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी (एससी), मुजफ्फरनगर, खतौली, मीरापुर, सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर (एससी), किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ, मेरठ साउथ, छपरौली, बड़ौत, बागपत, लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदी नगर, धौलाना, हापुड़ (एससी), गढ़मुक्तेश्वर, नोएडा, दादरी, जेवर, सिकंदराबाद, बुलंदशहर, स्याना, अनूपशहर, देबाई, शिकारपुर, खुर्जा (एससी), खैर (एससी), बरौली, अतरौली, और छर्रा में मतदान 10 फरवरी को होगा। इसलिए यहाँ चुनाव प्रचार काफी ज़ोरों पर चल रहा है और हर ओर गठबंधन ने पूरी ताकत लगा दी है। याद रहे कि भाजपा नेता और गृहमंत्री अमित शाह ने भी पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कैराना क्षेत्र से प्रचार की शुरुआत की है।

इसे पढ़ें : यूपी; नोट करें: आपके आस-पड़ोस में कब पड़ेंगे वोट, किस दिन आएगी आपकी बारी

प्रचार ने ज़ोर पकड़ लिया है और लोग अपने-अपने मुद्दों को लेकर बेताब हैं। देखना यह कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जो कि राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और किसान आंदोलन का गढ़ है किस तरफ करवट लेता है। चर्चा से तो लगता है कि लोग बदलाव चाहते हैं।

पश्चिमी यूपी में 2017 में क्या रहा था सीटों का गणित, देखिए-- https://electionsviz.newsclick.in/

Uttar pradesh
Western UP
UP Assembly Elections 2022
UP election 2022
BJP
Yogi Adityanath
Modi Govt

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

उपचुनाव:  6 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 23 जून को मतदान

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया

पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

BJP से हार के बाद बढ़ी Akhilesh और Priyanka की चुनौती !

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License