NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
इस साल यूपी को ज़्यादा बिजली की ज़रूरत
उत्तर प्रदेश की गर्मी ने जहां बिजली की खपत में इज़ाफ़ा कर दिया है तो दूसरी ओर बिजली कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ आंदोलन छेड़े हुए हैं। देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी के बीच कैसे समन्वय होता है।
रवि शंकर दुबे
01 Apr 2022
electricity
Image courtesy : The Economic Times

अप्रैल का महीना अभी शुरु ही हुआ है, लेकिन देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी के तेवर मई वाले हैं। ऐसे में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। क्योंकि 19वें इलेक्ट्रिक पावर सर्वे के अनुसार इस साल उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत बेहिसाब होने वाली है। सर्वे के मुताबिक साल 2022-23 में प्रदेश में 1.59 लाख मिलियन यूनिट से ज्यादा बिजली की आवश्यकता का आकलन किया गया है। जबकि खास बात ये है कि पावर कॉर्पोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग में दाखिल साल 2022-23 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव में 1.20 लाख मिलियन यूनिट बिजली की ज़रूरत बताई है।

एक अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष 2022-23 की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण यानी सीईए भारत सरकार की ओर से 19वां इलेक्ट्रिक पावर सर्वे किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के साथ पूरे देश में राज्यवार बिजली की आवश्यकता का आकलन किया गया। इस वित्तीय वर्ष के लिए पूरे भारत के लिए 16 लाख 50 हजार 594 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता साल 2022-23 के लिए आकलित की गई है।

देश के पांच राज्य जहां बिजली की आवश्यकता का आकलन लाखों में होता है, उसमें इस बार उत्तर प्रदेश देश का दूसरा ऐसा राज्य है, जहां साल 2022 -23 के लिए सबसे ज्यादा 1 लाख 59 हजार 412 मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता का आकलन किया गया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार उत्तर प्रदेश में जो आकलन सामने आया है, वह अब तक का सबसे बड़ा आकलन है। वैसे वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 1 लाख 15 हजार मिलियन यूनिट से लेकर 1 लाख 20 हजार मिलियन यूनिट बिजली की आवश्यकता साल में होती है। उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा 2 लाख 288 मिलियन यूनिट बिजली की ज़रूरत होगी।

कई रिपोर्ट्स के मुताबिक पुराने आंकड़ों पर नज़र डालें तो हर साल यूपी में बिजली की मांग में औसतन 7 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी होती है लेकिन इस बार 30 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश देश का बड़ा राज्य है। 25 करोड़ जहां देश में उपभोक्ताओं की संख्या है तो वहीं उत्तर प्रदेश में ही केवल 3 करोड़ से ऊपर विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या है। ऐसे में अगर आकलन के अनुसार बिजली की आवश्यकता पड़ती है तो निश्चित ही इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर देना चाहिए। आंकडों को देखने से जो आकलन सामने आ रहा हैं, उससे यह बात तो सिद्ध है कि सभी बिजली कंपनियों के प्रबंधन और डिस्कॉम के अभियंता अधिकारियों को अभी से कमर कस लेना चाहिए और पूरी ईमानदारी और निष्ठा से उपभोक्ता सेवा में सुधार और अच्छी गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति के लिए जुट जाना चाहिए। जिससे आने वाले इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति हो सके और उपभोक्ताओं को कोई समस्या ना उठानी पड़े।

अब सवाल ये है कि एक ओर जहां सीईए का सर्वे विद्युत विभाग को चेतावनी दे रहा है तो दूसरी ओर विद्युत विभाग के कर्मचारी सरकार के निजिकरण के खिलाफ प्रदर्शन करने का मन बनाए बैठे हैं। जिसका एक नमूना पिछले दिनों 28 और 29 मार्च को हुई देशव्यापी हड़ताल में दिखाई पड़ा था। ऐसे में फिलहाल कर्मचारियों की ये नाराज़गी फिलहाल कम होती नहीं दिखाई दे रही है। दूसरी ओर लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ बिजली अभियंताओं के आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। समिति ने सरकार को ये चेतावनी भी दे दी है कि अगर आंदोलन के कारण किसी भी अभियंता, अवर अभियंता या कर्मचारी का उत्पीड़न हुआ तो बिजली निगमों के कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता बिना किसी सूचना के सीधी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।

अब ऐसे में जहां एक ओर कर्मचारी और बिजली विभाग की तमाम समितियां सरकार के खिलाफ लामबंदी के लिए तैयार हैं तो ज़ाहिर है कि इतनी बड़ी बिजली की ज़रूरत की पूर्ति करना टेढ़ी खीर साबित होगा। ऐसे में देखना होगा कि सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगे मानी जाती हैं या फिर हमेशा की तरह काम चलाऊ योजनाएं बनाकर उनसे काम निकलवाया जाएगा।

UttarPradesh
UP Electricity
Electricity workers protest
privatization
Yogi Adityanath
yogi government

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

मलियाना नरसंहार के 35 साल, क्या मिल पाया पीड़ितों को इंसाफ?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण

ख़ान और ज़फ़र के रौशन चेहरे, कालिख़ तो ख़ुद पे पुती है


बाकी खबरें

  • Nehru
    न्यूज़क्लिक टीम
    पैगाम-ए-आज़ादी। जवाहरलाल नेहरु पर लेक्चर अदित्या मुख़र्जी द्वारा। लोकतंत्रशाला
    18 Mar 2022
    पैगाम-ए-आजादी श्रंखला लोकतंत्रशाला और न्यूजक्लिक की एक संयुक्त पहल है, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर केंद्रित है। श्रृंखला का यह व्याख्यान जवाहरलाल नेहरू पर केंद्रित होगा और आदित्य…
  • असद शेख़
    ओवैसी की AIMIM, मुसलमानों के लिए राजनीतिक विकल्प या मुसीबत? 
    18 Mar 2022
    यूपी चुनाव के परिणाम आ चुके हैं, भाजपा सरकार बनाने जा रही है, इस परिप्रेक्ष्य में हम ओवैसी की पार्टी से जुड़े तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा करेंगें– पहला ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल…
  • neo librelism
    प्रभात पटनायक
    नवउदारवादी व्यवस्था में पाबंदियों का खेल
    18 Mar 2022
    रूस के ख़िलाफ़ अब तक जो पाबंदियां लगायी गयी हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रूसी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं को, पश्चिमी दुनिया के वित्तीय ताने-बाने से काटे जाने का ही है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  
    18 Mar 2022
    रिपोर्ट्स में पता चला है कि 2019-2020 में हुए दस चुनावों में से नौ में बीजेपी को कांग्रेस की तुलना में विज्ञापनों के लिए फ़ेसबुक पर 29 फ़ीसदी कम कीमत चुकानी पड़ी थी।
  • Hijab Verdict
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुसलमानों को अलग थलग करता है Hijab Verdict
    17 Mar 2022
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License