NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: फ़र्ज़ी अनामिका शुक्ला तो पकड़ी गई लेकिन इस भ्रष्टाचार का असली ज़िम्मेदार कौन है?
बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार फिलहाल शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और धांधलियों से जूझ रही है। एक ओर 69 हज़ार शिक्षक भर्ती का मामला पिछले तीन सालों से अधर में है, तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश में फ़र्ज़ी नाम-पता और डिग्री पर पैसे लेकर शिक्षकों की नियुक्ति का बहुत बड़ा गोरखधंधा चल रहा है।
सोनिया यादव
23 Jun 2021
अनामिका शुक्ला
फोटो साभार : अमर उजाला

भ्रष्टाचार पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली योगी सरकार के शिक्षा विभाग में साल 2020 में एक बड़ा घोटाला सामने आया था। अनामिका शुक्ला के नाम और दस्तावेज़ से यूपी के 5 जिलों में कई अन्य महिलाएं साइंस टीचर की पूर्णकालिक नौकरी कर रही थीं। सालभर से ज्यादा समय से 25 अलग-अलग स्कूलों से सैलरी ले रहीं थी। सरकार को एक करोड़ से अधिक रुपये का चूना भी लग गया, लेकिन विभाग में किसी को इसकी जानकारी तक नहीं लगी। इसका खुलासा तब हुआ जब शिक्षकों का डिजिटल डेटाबेस बनाया गया। मामला खुला तो विपक्ष ने सरकार को निशाने पर लिया। शिक्षक भर्ती से लेकर फ़र्ज़ी नियुक्ति तक तमाम सवाल पूछे गए। सरकार चुप्पी साधे रही और अब एफआईआर के सालभर बाद पुलिस ने इस मामले में एक और अनामिका शुक्ला, जिस पर 15 हज़ार का इनाम घोषित था उसकी गिरफ्तारी की है।

बता दें कि इस प्रकरण में बेसिक शिक्षा अधिकारी यानी बीएसए ने खुद एफआईआर दर्ज कराई थी। बीते वर्ष जून में शिक्षिका की संविदा समाप्त कर मानदेय के रूप में प्राप्त की गई धनराशि की रिकवरी के आदेश दिए गए थे। इस प्रकरण में लापरवाही पाए जाने पर दिसंबर 2020 में जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) को भी पद से हटा दिया गया था।

क्या है पूरा मामला?

बछरावां पुलिस के मुताबिक कस्तूरबा विद्यालय में अनामिका शुक्ला के नाम से काम करने वाली महिला लखनऊ के बालागंज चौराहा स्थित हेल्थ पॉइंट में काम कर रही थी। इस पर रविवार, 20 जून को पुलिस टीम ने बालागंज चौराहे के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 600 रुपये नकद और दो की-पैड मोबाइल मिले हैं।

अपर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि कस्तूरबा विद्यालय में अनामिका शुक्ला के नाम से दूसरी महिला नौकरी कर रही थी जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उस पर 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। बछरावां पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया है।

इस मामले में कब क्या-क्या हुआ?

इस महिला का असली नाम मंजेश कुमारी उर्फ अंजलि है। मंजेश कन्नौज जनपद के रामपुर बेहटा थाना सौरिख की रहने वाली है। 8 मार्च 2019 को मंजेश ने खुद को अनामिका शुक्ला बताकर बछरावां के विद्यालय में फुल टाइम टीचर की नौकरी हासिल कर ली थी। 7 मार्च 2020 को मंजेश होली की छुट्टी पर चली गई। छुट्टी से उसे 14 मार्च को लौटना था, लेकिन उसने फिर छुट्टी ले ली।

तब यूपी के स्कूली शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने मीडिया को बताया था, “कुछ जिलों के स्थानीय मीडिया में मार्च के महीने में इससे संबंधित स्टोरी छपी थी उसके बाद से ही इस मामले की जांच शुरू कर दी गई थी। जहां-जहां टीचर की तैनाती बताई गई वहां पर अधिकारियों से डेटाबेस तैयार कर जांच करने को बोला गया तो ये पूरा मामला सामने आया।“

इसी बीच कोरोना की पहली लहर आ गई, और लॉकडाउन लगा दिया गया। मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों व अधिकारियों का डेटा फीड किया जाने लगा। पूरे डेटा का डिजीटलीकरण हुआ और यहीं पर अनामिका शुक्ला वाला फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़ में आया। बाद में दीक्षा ऐप पर जब विद्यालयवार डेटा फ़ीड किया गया, तो सारी तहें खुल गयीं।

बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए 21 मार्च 2020 को अनामिका शुक्ला को नोटिस जारी किया और उन्हें अपने सभी शैक्षिक अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा। परंतु अभिलेख प्रस्तुत करने के बजाय अनामिका ने 26 मई को अपना त्यागपत्र बीएसए को भेज दिया और भूमिगत हो गई। वह कहां की रहने वाली थी और कहां है, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी। उसके विद्यालय की वार्डन समेत पूरे स्टाफ को उसका सही पता नहीं मालूम था कि वह कहां रहती है। तब बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर 20 जून 2020 को फर्जी अनामिका शुक्ला के खिलाफ बछरावां थाने में केस दर्ज कराया गया और तब से तलाश जारी थी। छानबीन में पता चला कि अनामिका शुक्ला के दस्तावेज़ों के आधार पर प्रदेश के 8 जिलों के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में साइंस टीचर की नौकरी की जा रही थी।

ख़बरों की मानें तो मंजेश ने ही अनामिका शुक्ला के नाम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की रायबरेली ब्रांच में खाता खुलवाया था। खाते के साथ आधार कार्ड लिंक नहीं था। इसी वजह से उसे हर बार रायबरेली आकर सैलरी निकालनी पड़ती थी। विभाग के बाबू ने कई बार मंजेश को आधार कार्ड लिंक कराने को कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उसका फर्जीवाड़ा एक साल तक पकड़ में नहीं आया, और वह तनख्वाह लेती रही।

असली अनामिका ने क्या बताया था?

जब मामला मीडिया में तूल पकड़ने लगा तो असली अनामिका शुक्ला सामने आयीं। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति से मिलीं और अपने दस्तावेज पेश किए और बताया कि वो तो अब तक बेरोज़गार हैं।

अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया था कि उनकी मेरिट हाई थी। उन्होंने पांच जिलों- सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखनऊ में वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए आवेदन किया था। काउंसिलिंग का समय आया तो वह उसमें शामिल नहीं हो सकीं। उस समय उन्होंने ऑपरेशन के जरिए बेटी को जन्म दिया था, और साल 2019 में बेटे का जन्म हुआ। असली अनामिका शुक्ला ने उस समय बताया था कि दो छोटे बच्चे होने के कारण वह नौकरी करने में असमर्थ थीं और इसलिए अभी भी बेरोज़गार हैं।

गौरतलब है कि बेहतर शिक्षा, सुरक्षा और रोज़गार के वादे के साथ 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार फिलहाल शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और धांधलिंयों से जूझ रही है। एक ओर 69 हज़ार शिक्षक भर्ती का मामला पिछले तीन सालों से अधर में लटका हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश में फ़र्ज़ी नाम-पता और डिग्री पर पैसे लेकर शिक्षकों की नियुक्ति का बहुत बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। सरकार जांच और कार्रवाई का हवाला तो दे रही है लेकिन इन एक के बाद एक सामने आते मामले कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। अनामिका शुक्ला मामले में गिरफ्तारी तो हो गई, लेकिन ये सब जानते हैं कि ये अंत नहीं है। ऐसे अनेकों घोटाले सुर्खियां बनते हैं और फिर ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। शासन-प्रशासन में बैठे इस मामले के असली जिम्मेदार लोगों पर कोई आंच तक नहीं आती, जो फिर एक नए घोटाले को जन्म देती है।

इसे भी पढ़ें : यूपी: 69 हज़ार शिक्षक भर्ती से लेकर फ़र्ज़ी नियुक्ति तक, कितनी ख़ामियां हैं शिक्षा व्यवस्था में?

UttarPradesh
UP Government
Yogi Adityanath
Anamika Shukla
KGBV
Bareli police
Corruption in UP
BJP

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • Uddhav Thackeray
    सोनिया यादव
    लचर पुलिस व्यवस्था और जजों की कमी के बीच कितना कारगर है 'महाराष्ट्र का शक्ति बिल’?
    24 Dec 2021
    न्याय बहुत देर से हो तो भी न्याय नहीं रहता लेकिन तुरत-फुरत, जल्दबाज़ी में कर दिया जाए तो भी कई सवाल खड़े होते हैं। और सबसे ज़रूरी सवाल यह कि क्या फांसी जैसी सज़ा से वाक़ई पीड़त महिलाओं को इंसाफ़ मिल…
  • jammu and kashmir
    अशोक कुमार पाण्डेय
    जम्मू-कश्मीर : परिसीमन को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है बीजेपी
    24 Dec 2021
    बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर श्रीनगर में हिंदू मुख्यमंत्री बनवाने का जुनून सवार है। इसके लिए केंद्र सरकार कश्मीर घाटी व दूसरी जगह के लोगों को, ख़ुद के द्वारा पहुंचाए जा रहे दर्द को नज़रअंदाज़…
  • modi biden
    मोनिका क्रूज़
    2021 : चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की युद्ध की धमकियों का साल
    24 Dec 2021
    जो बाइडेन प्रशासन लगातार युद्ध की धमकी देने, निराधार आरोपों और चीन के विरुद्ध बहु-देशीय दृष्टिकोण बनाने के संकल्प को पूरा करने के साथ नए शीत युद्ध को गरमाए रखना जारी रखे हुए है।
  • unemployment
    रूबी सरकार
    लोगों का हक़ छीनने वालों पर कार्रवाई करने का दम भरने वाले मुख्यमंत्री ख़ुद ही छीन रहे बेरोज़गारों का हक़!
    24 Dec 2021
    इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, एमबीए करने के बाद भी मध्यप्रदेश के आईटीआई में शिक्षक सिर्फ 7200 रुपये प्रति महीने में काम करने के लिए मजबूर हैं, राज्य सरकार की ओर से राहत देने की बात भी हवाबाज़ी ही साबित हुई…
  • modi yogi
    लाल बहादुर सिंह
    चुनाव 2022: अब यूपी में केवल 'फ़ाउल प्ले' का सहारा!
    24 Dec 2021
    ध्रुवीकरण और कृपा बाँटने का कार्ड फेल होने के बाद आसन्न पराजय को टालने के लिए, अब सहारा केवल फ़ाउल प्ले का बचा है। ऐन चुनाव के समय बिना किसी बहस के जिस तरह निर्वाचन कार्ड को आधार से जोड़ने का कानून बना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License