NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
यूपी: भर्ती और नियुक्ति घोटाले के बीच योगी सरकार पर लगातार उठते सवाल!
सरकार की एक और भर्ती विवादों में आ गई है। बांदा एग्री यूनिवर्सिटी में 15 प्रोफेसरों में से 11 ठाकुर नियुक्त हुए हैं, जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर दलित और पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लगा रहा है।
सोनिया यादव
11 Jun 2021
बांदा एग्री यूनिवर्सिटी

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक बार फिर भर्ती और नियुक्ति को लेकर सुर्खियों में है। बीते दिनों बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई की गरीब कोटे से हुई नियुक्ति को लेकर जमकर बवाल हुआ था। अब बांदा के कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हुई भर्तियों को लेकर विवाद जारी है। कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालय में प्रवक्ता के पदों पर हुई नियुक्ति के दौरान आरक्षण रोस्टर के नियमों को नज़रअंदाज़ कर एक विशेष जाति समुह के लोगों को तवज्जों दी गई है। विपक्ष सरकार पर दलित और पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लगा रही है तो वहीं सरकार फिलहाल जांच का हवाला देते हुए पूरे मामले पर कुछ भी कहने से बच रही है। हालांकि इस पूरे मामले को लाइमलाइट में लाने का काम भी बांदा के तिंदवारी सीट से बीजेपी विधायक बृजेश प्रजापति ने ही किया है।

क्या है पूरा मामला?

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने हाल ही में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 20 पदों के लिए भर्तियां निकाली थी। इन 20 में से 18 सामान्य और दो EWS कोटे की भर्तियां बताई गईं। इनमें से 15 नियुक्तियां की गईं। रिजल्ट एक जून को घोषित किया गया, इसके बाद लिस्ट की बारीकी को देखकर सवाल उठने लगा। 15 भर्तियों में से 11 पदों पर सामान्य वर्ग की एक ही जाति ‘ठाकुर’ समुदाय के लोगों का चयन किया गया, जबकि बाकी बचे चार पदों पर एक ओबीसी, एक अनुसूचित जाति, एक भूमिहार और एक मराठी समुदाय से नियुक्ति की गई है। अब खुद महकमे के मंत्री ठाकुर समुदाय से आते हैं, लिहाजा सवाल उठना लाजमी था। हालांकि सवाल पूछने वाले भी बीजेपी विधायक ही थे।

आरक्षण रोस्टर के नियमों का अनुपालन नहीं

बांदा के तिन्दवारी विधानसभा के भाजपा विधायक बृजेश कुमार प्रजापति ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायत की। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिख कर कहा कि बांदा कृषि विश्वविद्यालय में जो प्रवक्ता के पद पर नियुक्ति की गई है, उसमें आरक्षण रोस्टर के नियमों का अनुपालन नहीं किया गया है। इसके लिए जो विज्ञापन निकाले गए हैं, उसमें गंभीर अनियमिताएं हैं। इससे लोगों के बीच गलत संदेश जा रहा है और इसलिए इन नुक्तियों को निरस्त कर दोबारा प्रकिया शरू की जाए।

image

विधायक बृजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि नियुक्तियां गलत तरीके से हुई हैं। रोस्टर का पालन नहीं होने से आरक्षण के मानक पूरे नहीं हुए, जिससे पात्र लोगों को लाभ नहीं मिला सका। यह पूरी नियुक्ति गलत है, इसे रद कर फिर से प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। मैं जाति व क्षेत्रवाद की राजनीति नहीं करता। बुंदेलखंड में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अगर नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होती तो यहां के लोगों को भी मौका मिलता। कुछ लोगों को अनुचित लाभ देने के लिए ही भर्ती गलत तरीके से की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए, जो भी दोषी हो, उस पर कार्रवाई हो।

मालूम हो कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में भर्ती के नियम में भी छेड़छाड़ की बात भी सामने आ रही है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि भर्ती के लिए 80 अंक अकादमिक और 20 अंक साक्षात्कार के निर्धारित होते हैं। यही शासनादेश है, लेकिन इस भर्ती में 70 अंक अकादमिक व 30 अंक साक्षात्कार का कर दिया गया, जो संदेह पैदा करता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कह रहा है?

बांदा कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से मीडिया को बताया गया कि प्रोफेसर पद पर यह नियुक्ति इंटरव्यू के आधार पर की गई है। इसके लिए पहले विज्ञापन निकाला गया। यह विज्ञापन अखबारों के अलावा रोजगार समाचार पत्रों में भी छपे थे। इसके बाद जितने एप्लीकेशन आए, उनकी स्क्रीनिंग की गई। स्क्रीनिंग के बाद एक पोस्ट के लिए अधिकतम 10 उम्मीदवारों को सिलेक्ट किया गया। इंटरव्यू का 3 चरण होता है। पहले चरण में एकेडमिक प्रोफाइल देखी गई। दूसरे चरण में अभ्यर्थियों के टीचिंग स्केल के लिए प्रेजेंटेशन देखा जाता है और फिर इंटरव्यू किया जाता है।

इसके लिए के लिए अलग-अलग नंबर निर्धारित किया गया। एकेडमिक प्रोफाइल के लिए 70 नंबर, इंटरव्यू के लिए 20 और टीचिंग स्केल के लिए 10 नंबर निर्धारित था। कुल 100 नंबरों में से ही अधिकतम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।

इस मामले में बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुरेंद्र सिंह ने आजतक से बातचीत में कहा कि इन नियुक्तियों में इतना पारदर्शी सिस्टम होता है कि इसमें कोई धांधली कर ही नहीं सकता है। ये पूरी प्रक्रिया एक चयन की हुई कमेटी के माध्यम से होती है। जो जिस कैटेगरी का होता है, उसमें ही उसका सलेक्शन होता है।  ये सभी लोग अपने-अपने नंबर देते हैं, नंबर कंपाइल करके नतीजा तैयार किया जाता है। इसके साथ ही इस प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग भी की जाती है। इसकी रिकॉर्डिंग कुलपति महोदया जी के यहां भी भेजी जाती है।

कुलसचिव सुरेंद्र सिंह ने इस मामले में कहा, “इसमें कुल 40 पोस्ट थी। जिसमें से 24 पोस्ट भरे गए हैं, कुछ पोस्ट पर NFS (कैंडिडेट नहीं आना) रहा। जबकि 24 पोस्ट पर देश से लोग आए। इसका इतना पारदर्शी सिस्टम होता है कि इसके लिए पूरी एक कमेटी बनाई जाती है। इस कमेटी में गर्वनर के द्वारा भी एक व्यक्ति नामित किया जाता है। इसके बाद डीन होते हैं, हेड होते हैं। सभी कैटेगरी के प्रतिनिधी भी होते हैं।”

विपक्ष क्या बोल रहा है?

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस मामले को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने अपने ट्वीट में योगी सरकार को दलित और पिछड़ा विरोधी बताते हुए इस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

ट्वीट में संजय सिंह ने लिखा, “मैं बार-बार कहता हूं भाजपा दलितों/पिछड़ों की विरोधी है। इस मामले में भी SC/ST/OBC की नौकरी खा ली गई। आदित्यनाथ जी एक बात साफ़ कीजिये अगर 15 में से 11 भर्ती एक जाति की हुई तो आरक्षण का क्या हुआ? ये तो खुलेआम SC/ST/OBC का हक़ मारा जा रहा है।”

मैं बार-बार कहता हूँ “भाजपा दलितों/पिछड़ों की विरोधी इस मामले में भी SC/ST/OBC की नौकरी खा ली गई”
आदित्यनाथ जी एक बात साफ़ कीजिये अगर 15 में से 11 भर्ती एक जाति की हुई तो आरक्षण का क्या हुआ?
ये तो खुलेआम SC/ST/OBC का हक़ मारा जा रहा है। pic.twitter.com/4SDWjxrFnz

— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) June 10, 2021

कांग्रेस नेता उदित राज ने इस मामले पर योगी सरकार को घेरते हुए कहा, “बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने 15 प्रोफ़ेसर की भर्ती 1 जून को घोषित किया। जिनमें 11 ठाकुर जाति के हैं, जबकि 1 ओबीसी, 1 एससी 1 भूमिहार और 1 मराठी शामिल है. हज़ारों साल से जाति ही मेरिट रही है और अभी चालू है।”

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने 15 प्रोफ़ेसर की भर्ती 1 जून को घोषित किया।जिनमें 11 ठाकुर जाति के हैं, जबकि 1ओबीसी, 1 एससी 1 भूमिहार &1 मराठी शामिल है।हज़ारों साल से जाति ही मेरिट रही है और अभी चालू है। pic.twitter.com/9uvqQRAiE9

— Dr. Udit Raj (@Dr_Uditraj) June 10, 2021

इसे भी पढ़ें: यूपी: 69 हज़ार शिक्षक भर्ती से लेकर फ़र्ज़ी नियुक्ति तक, कितनी ख़ामियां हैं शिक्षा व्यवस्था में?

गौरतलब है कि यूपी में 69000 शिक्षक भर्ती घोटाला हो या 2018 में UPSSSCद्वारा आयोजित ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती का मामला हो, हर जगह भ्रष्टाचार सुर्खियों में रहा है। हर बार की तरह इस बार भी बांदा कृषि विश्वविद्यालय की भर्ती मामले को तूल पकड़ता देख कृषि मंत्री सूय प्रताप शाही ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए। लेकिन पुराने मामलों की तरह जांच पर जांच और फिर नतीजा कब सामने आएगा कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि यूपी 2022 का विधानसभा चुनाव जरूर सिर पर है ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि कभी समाजवादी पार्टी को भ्रष्टाचार के नाम पर सत्ता के बाहर का रास्ता दिखाने वाली बीजेपी अपने कार्यकाल में हुए तमाम घोटालों पर क्या सफाई देती है।

इसे भी पढ़ें: यूपी: भर्ती परीक्षा का निरस्त होना योगी सरकार की नीयत और नीति पर कई सवाल खड़े करता है?

UttarPradesh
UP Government
Yogi Adityanath
unemployment in UP
UP Jobs
Minority quota
SC/ST/OBC
Banda University of Agriculture and Technology

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पापा टॉफी लेकर आएंगे......’ लखनऊ के सीवर लाइन में जान गँवाने वालों के परिवार की कहानी

यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 

यूपी चुनाव में दलित-पिछड़ों की ‘घर वापसी’, क्या भाजपा को देगी झटका?

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

यूपी : सत्ता में आरक्षित सीटों का इतिहास और नतीजों का खेल

यूपी: पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से एक आदिवासी की मौत, सरकारी अपराध पर लगाम कब?

पड़ताल: पश्चिमी यूपी में दलितों के बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट करने की है संभावना


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: विकास के नाम पर विध्वंस की इबारत लिखतीं सरकारें
    18 Sep 2021
    देहरादून में जोगीवाला से पेसिफिक गोल्फ सिटी तक, सहस्त्रधारा रोड को फोर लेन सड़क में बदलने का कार्य शुरू हो चुका है, इसके लिए लगभग 2,200 पेड़ों को काटा जायेगा, जिसके लिये प्रशासन द्वारा पेड़ों को चिह्नित…
  • जांच पर और सवाल करते हैं 9/11 मामले में एफबीआई के सार्वजनिक हुए दस्तावेज 
    अमिताभ रॉय चौधरी
    जांच पर और सवाल करते हैं 9/11 मामले में एफबीआई के सार्वजनिक हुए दस्तावेज 
    18 Sep 2021
    9/11 हमलों की साजिश में सऊदी अरब की कथित सांठगांठ के बारे में लंबे समय से गोपनीय रखे गए एफबीआई के दस्तावेजों का खुलासा कर दिया गया है, जिसके मुताबिक अमेरिका में रह रहे सऊदी के कुछ धार्मिक अधिकारियों…
  • Moplah Rebellion
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    भारतीय मुसलमानों से 'ख़तरे' को भड़काने के लिए संघ परिवार कर रहा है मोपला विद्रोह का इस्तेमाल
    18 Sep 2021
    मोपला विद्रोह पर राम माधव की टिप्पणी भारतीय मुसलमानों को निशाना बनाने और जीने के बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह आरएसएस की इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाली ही एक ओर साज़िश है।
  • Cartoon click
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: सबकुछ बिक जाएगा... काग़ज़ के मोल...
    18 Sep 2021
    जब ऐसे उपहारों या स्मृति चिह्न की भी नीलामी हो जिसे राष्ट्रीय संग्रालय में सहेज कर रखना चाहिए, ताकि आने वाली नस्लें प्रेरणा लें, तो कई सवाल और शंकाएं मन में उठती हैं।
  • Mahendra Pratap
    अनिल सिन्हा
    राजा महेंद्र प्रतापः इतिहास से मोदी का वही खिलवाड़ 
    18 Sep 2021
    असल में मोदी और उनका संघ परिवार आज़ादी की एक सांप्रदायिक कथा तैयार करने में लगे हैं। इसमें क्रांतिकारियों के नाम का इस्तेमाल ख़ासतौर पर होता  है जिनमें से शायद ही किसी का वास्तविक संबंध आरएसएस या…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License