NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
प्रदेश में काम न मिलने के अलावा मनरेगा से जुड़े मज़दूरों को समय पर भुगतान में देरी का मामला अक्सर सामने आता रहता है। बागपत में इस योजना के तहत काम कर चुके मज़दूर पिछले दो महीने से मज़दूरी के लिए तरस रहे हैं।
एम.ओबैद
19 Jan 2022
यूपीः योगी सरकार में मनरेगा मज़दूर रहे बेहाल
साभारः अमर उजाला, प्रतीकात्मक तस्वीर

ग्रामीण मज़दूरों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के उद्देश्य से लागू की गई मनरेगा योजना से जो उम्मीद थी वह हासिल नहीं हो पाई है। इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार, मजदूरों को 100 दिनों का काम न मिलने, समय पर मजदूरी का भुगतान न होने जैसी अन्य समस्याओं से जुड़ी खबरें अतीत में देश भर से सामने आती रही हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश भी इन समस्याओं से अछूता नहीं है जहां पिछले पांच वर्षों से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी के सरकार है। योगी सरकार मनरेगा को लेकर बड़े-बड़े दावे तो करती रही है लेकिन मजदूरों की स्थिति में बदलाव नहीं आया।

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने दिसंबर में राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि 18 दिसंबर2021 तक मनरेगा के तहत 15.63 करोड़ हाउसहोल्डर्स के पास जॉब कार्ड हैं। इनमें से सबसे ज्यादा जॉब कार्ड उत्तर प्रदेश (2.11करोड़) में है।

केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की हाल में आई सोशल ऑडिट रिपोर्ट के हवाले से मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच मनरेगा के तहत करीब 26.40 करोड़ रुपये घोटाले का मामला सामने आया है। इसमें से 7.41 करोड़ रुपये का घोटाला पिछले दो वर्षों में हुआ है। इस राशि में से मात्र33.88 लाख रुपये की वसूली ही हो पाई है। ये राशि घोटाले में सामने आई कुल राशि का महज 1.28 फीसदी ही है।

मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को काम देने के मामले उत्तर प्रदेश में समय समय पर उदासीनता देखने को मिली है। यूपी के संतकबीरनगर जिले में मनरेगा योजना के तहत काम मांगने पर भी मजदूरों को काम नहीं मिलने की खबर पिछले साल अक्टूबर महीने में सामने आई थी। जिले के आठ ब्लॉकों की 86 ग्राम पंचायतों में अक्टूबर महीने तक मनरेगा के तहत कार्य शुरू नहीं हो पाया था। इस समय तक जिले में 2,04,861 जॉबकार्ड धारक थें। इनमें से 1,13,205 जॉबकार्ड धारक सक्रिय थें। पिछले साल अप्रैल से अक्टूबर तक 1,35,412 मजदूर ऑनलाइन रोजगार की मांग कर चुके थें जिनमें से सिर्फ 78.03 प्रतिशत मजदूरों को ही रोजगार मिल पाया था। जिले की 754 ग्राम पंचायतों में से 84 ग्राम पंचायतों में अक्टूबर तक मनरेगा का कार्य शुरू हुआ था। इस समय तक मेंहदावल के 11, बेलहर के 5, सांथा के 3, नाथनगर के 5, पौली के 17, बघौली के 7, सेमरियावां के 23 और खलीलाबाद की 13 ग्राम पंचायतों में काम नहीं हो रहा था।

अमर उजाला की अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम में 84,605 मस्टर रोल मनरेगा में भरे गए थे जिसमें 9308 मस्टर रोल की मॉनीटरिंग मोबाइल सिस्टम से की गई। चार ब्लॉकों में 157 महिला मेट बनाई गई थीं जिनमें से सिर्फ दो महिला मेट को ही काम दिया गया था। जिले के खराब प्रगति वाले ब्लॉकों में बघौली, पौली, सेमरियावां और खलीलाबाद था। डीसी मनरेगा उमाशंकर तिवारी ने कहा था कि यह सच है कि मनरेगा में मजदूूूरों को मांग के सापेक्ष काम नहीं दिया जा सका। समय पर भुगतान में भी जिला पिछड़ गया। फेल ट्रांजक्शन का मामला भी रहा है।

पिछले वर्ष अगस्त महीने में ही हरदोई के कोथावां विकास खंड में मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों की स्थिति बेहद खराब होने की बात सामने आई थी। हाल यह रहा कि मनरेगा से शुरू कराए गए वर्ष 2018-19 से वर्ष 2020-21 तक 2835 कार्य अगस्त तक पूरे ही नहीं हो पाए थें। इतना ही नहीं बीडीओ ने इस संबंध में कोई कार्रवाई भी नहीं की थी। ब्लाक से 16 महिला मेट मनरेगा के तहत चयनित थीं लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसी भी महिला मेट को एक भी दिन का कार्य उपलब्ध नहीं कराया गया था।

प्रदेश के महराजगंज जिले की बात करें तो पिछले साल दिसंबर की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नौ माह गुजर जाने के बावजूद जिले में मनरेगा के तहत 61,191 मजदूरों में से मात्र 3,183 मजदूरों को ही विभाग 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करा सका था।

काम न मिलने के अलावा प्रदेश में मजदूर द्वारा किए गए काम का पैसा न मिलने का भी मामला अक्सर देखने को मिलता है। दो दिनों पहले बागपत से ये खबर सामने आई कि मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूर काम करने के बावजूद मजदूरी के लिए तरस रहे है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दो महीने से उन्हें मजदूरी नहीं मिली है। जिम्मेदार अफसर भी हाथ खड़े कर चुके है। इससे मजदूर और उनके परिवारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

Uttar pradesh
MGNREGA
Labour
Yogi Adityanath
BJP
Coruuption

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

योगी सरकार द्वारा ‘अपात्र लोगों’ को राशन कार्ड वापस करने के आदेश के बाद यूपी के ग्रामीण हिस्से में बढ़ी नाराज़गी

यूपी : 10 लाख मनरेगा श्रमिकों को तीन-चार महीने से नहीं मिली मज़दूरी!

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

ग्राउंड रिपोर्ट: जल के अभाव में खुद प्यासे दिखे- ‘आदर्श तालाब’

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

मनरेगा: न मज़दूरी बढ़ी, न काम के दिन, कहीं ऑनलाइन हाज़िरी का फ़ैसला ना बन जाए मुसीबत की जड़

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़


बाकी खबरें

  • समर्थन के अभाव में बढ़ रहा 'कोविड विधवाओं' का संकट
    रेणुका काड
    समर्थन के अभाव में बढ़ रहा 'कोविड विधवाओं' का संकट
    30 Jun 2021
    कोविड-19 की वजह से विधवा हुईं महाराष्ट्र की ग्रामीण महिलाओं के बयानात से उनके संकट और भेदभाव, शोषण और लांछन की सच्चाई ज़ाहिर होती है।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 45,951 नए मामले, 817 मरीज़ों की मौत
    30 Jun 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 45,951 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में अब तक 96.91 फ़ीसदी यानी 2 करोड़ 94 लाख 27 हज़ार 330 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • मुद्दा: मेड, मज़दूर और चौकीदार कहां रहें!
    शंभूनाथ शुक्ल
    मुद्दा: मेड, मज़दूर और चौकीदार कहां रहें!
    30 Jun 2021
    नोएडा, गुरुग्राम, फ़रीदाबाद व ग़ाज़ियाबाद के प्रवासी मज़दूर लौट आए हैं। लेकिन यहां अब उन्हें पहले जैसा वेतन नहीं मिल रहा। उनके रहने के स्थान झुग्गियां उजाड़ दी गई हैं। अब उनके समक्ष एक बड़ी समस्या…
  • यूपी चुनाव 2022
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव 2022: फिर मुस्लिम वोटों और ओवैसी फैक्टर को लेकर बहस, फिर बीजेपी की ‘बी’ टीमों की चर्चा
    30 Jun 2021
    जब से यह ख़बर सुर्ख़ियों में आई की ओवैसी की पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ेगी, मीडिया के एक हिस्से ने ऐसा दिखाना शुरू कर दिया, जैसे 2022 में योगी बनाम ओवैसी होने जा रहा है। जबकि ओवैसी और उनकी…
  • 2025 तक टीबी फ्री भारत : हम स्वयं को मूर्ख बना रहे हैं !
    ऋचा चिंतन
    2025 तक टीबी फ्री भारत : हम स्वयं को मूर्ख बना रहे हैं !
    29 Jun 2021
    भारत ने 2025 तक टीबी से मुक्त होने का लक्ष्य रखा है और सरकार अब तक की हुई प्रगति से संतुष्ट है। हालांकि जमीनी सच्चाई यह है कि भारत अब भी पांच हाई बर्डेंन कंट्रिज में शुमार है, जहां लोग अपने जीने के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License