NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी: सीएए मामले में पुलिस की ‘अतिरिक्त सक्रियता’, 40 प्रदर्शनकारियों के घर दबिश, 16 जुलाई को संपत्ति की नीलामी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएए के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान का हर्जाना वसूलने के लिए आईपीएस एसआर दारापुरी (सेवानिवृत्त), रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, कांग्रेसी नेता सदफ जफर और मौलाना सैफ अब्बास समेत अब तक करीब 40 प्रदर्शनकारियों के घर दबिश दी जा चुकी है। और एक रिक्शा चालक को जेल भेज दिया गया है।
असद रिज़वी
06 Jul 2020
यूपी: सीएए मामले में पुलिस की ‘अतिरिक्त सक्रियता

आठ पुलिस वालों की जान लेने वाले कुख्यात अपराधी विकास दुबे मामले में यूपी पुलिस को हालांकि अभी कोई कामयाबी नहीं मिली है। और ये कोई आज का मामला नहीं है। ऐसे अपराधी यूपी में बरसों-बरस से राज कर रहे हैं, लेकिन यूपी पुलिस सीएए जैसे मामलों में अति सक्रियता दिखाती है। जिसे अतिरिक्त सक्रियता कहा जा रहा है। घोषणा कर दी गई है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरुद्ध प्रदर्शन करने वालों की संपत्ति को लखनऊ में 16 जुलाई को नीलाम किया जायेगा। राजधानी लखनऊ में सीएए के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान का हर्जाना वसूलने के लिए अब तक करीब 40 प्रदर्शनकारियों के घर दबिश दी जा चुकी है।

प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने के लिए तहसीलदार ने दबिश डालकर 03 संपत्तियों को सील भी कर दिया है। एक आरोपित रिक्शा चालक को 21.76 लाख का जुर्माना जमा नहीं कर पाने की वजह से जेल भेज दिया गया है। आईपीएस एसआर दारापुरी (सेवानिवृत्त), रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब, कांग्रेसी नेता सदफ जफर और मौलाना सैफ अब्बास समेत 32 अन्य आरोपियों के घर हर्जाना वसूलने के लिए छापेमारी की गई है।

सीएए विरोधियों के घर दबिश

शनिवार की शाम तहसीलदार की टीम ने आईपीएस एसआर  दारापुरी (सेवानिवृत्त) के इंदिरा नगर घर पर छापा मारने गई। मौके पर दारापुरी नहीं मिले तो उनके घरवालो को टीम ने हड़काया और कहाकि अगर दारापुरी तहसीलदार कार्यालय में हाजिर नहीं हुए तो उनका घर सील करके नीलाम कर दिया जायेगा।

बता दें कि दारापुरी के साथ उनके घर में उनकी 74 वर्षीय हृदयरोगी पत्नी के अलावा उनके दो पुत्र अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ रहते हैं। आईपीएस एसआर दारापुरी (सेवानिवृत्त) ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

इसके अलावा कांग्रेसी नेता सदफ जाफर के घर भी तहसीलदार की टीम गई और उनके बच्चों (नाबालिग) से कहाकि उनकी मां को तहसीलदार आफिस में हाजिर होना है। सदफ जाफर का आरोप है कि तहसीलदार की भेजी टीम ने उनके अपार्टमेंट के बाहर खड़े लोगों से कहाकि यहां एक पत्थरबाज महिला रहती है। सदफ जाफर ने कहाकि उनके द्वारा तहसीलदार को नोटिस का जवाब भेजा गया था लेकिन जवाब को स्वीकार नहीं किया गया।

इसके अलावा तहसीलदार द्वारा भेजी गई टीम रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब के घर भी गई और प्रशासन द्वारा हर्जाने का नोटिस मौलाना सैफ अब्बास को भी भेजा गया है। तहसीलदार कार्यालय से एक पत्र भेज कर लखनऊ नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग से दारापुरी, शोएब, सदफ जफर और मौलाना सैफ अब्बास की संपत्ति का ब्यौरा भी मांगा है। ब्यौरा मिलने के बाद इनके नाम पर जो संपत्ति होगी उनको सील करके हर्जाने की रकम वसूल करने के लिए उसको नीलाम किया जायेगा।

रिक्शा चालक को भेजा जेल

तहसीलदार शंभु शरण ने बताया कि उन्होंने अब तक 57 लोगों को हर्जाना वसूलने ले लिए नोटिस भेजे हैं। अब तक 40 जगह दबिश दी जा चुकी है जबकि मोहम्मद कलीम नाम के रिक्शा चालक को हर्जाने के 21.76 लाख रुपये जमा नहीं करने के लिए जेल भेज दिया गया है। बता दें कि हर्जाना वसूली के लिए यह पहली गिरफ्तारी है। कलीम को इससे पहले प्रदर्शन में हुई हिंसा में शामिल होने के आरोप में जेल भेजा गया था।

कुर्क संपत्तियाँ

तहसीलदार के अनुसार अब तक 03 संपत्तियां कुर्क की गई हैं। जिनमे हसनगंज का एन0वाई0 फैशन स्टोर, माहेनूर चौधरी की बांसमंडी स्थित कबाड़ की दुकान और खुर्रम नगर स्थित मोहम्मद रईस की वेल्डिंग की दुकान शामिल है। तहसीलदार शंभु शरण ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी आगामी 16 जुलाई को होगी।

बता दें बीते वर्ष 19 दिसंबर को सीएए के विरुद्ध हुए प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में कई इलाकों में झड़प हो गई थी। जिसमें निजी-सार्वजनिक संपत्ति का काफी नुकसान हुआ था और एक व्यक्ति मोहम्मद वकील की मौत हो गई थी।

योगी आदित्यनाथ सरकार यह हर्जाना पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के नुकसान की भरपाई के तौर पर वसूलना चाहती है। हालाँकि प्रदर्शनकारी इसको गैरकानूनी मानते हैं और कहते हैं कि यह मामला शीर्ष अदालत में विचाराधीन है।

तहसीलदार के पास गिरफ़्तारी का वारंट

तहसीलदार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल 57 लोगों से 1.55 करोड़ रुपये की वसूली करना है। जिसके लिए उनके कार्यालय को चार आदेश प्राप्त हुए हैं। शंभु शरण के अनुसार उनके पास संपत्ति कुर्क करने के साथ सभी आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी है। उनका कहना है कि वह आरोपी की संपत्ति कुर्क करने और उनको गिरफ्तार करने दोनों के लिए स्वतंत्र हैं।

हर्जाने का संक्षिप्त विवरण

1) न्यायालय ए0डी0एम0 ईस्ट -(28 दोषी) धनराशि रुपये 6437637। (2) न्यायालय ए0डी0एम0 वेस्ट - (10 दोषी) धनराशि रुपए 6773900। (3) न्यायालय ए0डी0एम0 वेस्ट-(06 दोषी) धनराशि  रुपये 175000। (4) न्यायालय ए0डी0एम0 टी0जी0-(13 दोषी) धनराशि  रुपये 2176000।

गौरतलब है कि कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए घंटाघर पर 17 जनवरी से चल रहा प्रदर्शन 23 मार्च को प्रशासन और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच एक समझौते के बाद स्थगित कर दिया गया है। इसी तरह राजधानी के उजरियां में चल रहा धरना खत्म हो गया। इसके बाद लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई और सीएए का आंदोलन कमजोर हो गया।

घंटाघर पर पुलिस के शिविर

इस बीच प्रशासन ने धरनास्थल से महिलाओं के समझौते को नजरअंदाज किया और घंटाघर से महिलाओं द्वारा निर्मित मंच व दुपट्टे आदि वहाँ से हटा दिये। जबकि पुलिस-प्रशासन ने कहा था कि महिलाओं द्वारा छोड़ी गई किसी भी वस्तु के साथ छेड़छाड़ नहीं की जायेगी। इसके अलावा पुलिस ने घंटाघर से मिले मैदान में अपने शिविर लगा लिए हैं।

हालाँकि लॉकडाउन के दौरान किसी भी प्रदर्शनकारी के विरुद्ध गिरफ्तारी या हर्जाना का नोटिस भेजने की करवाई नहीं की गई। लेकिन प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि तालाबंदी के बाद प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हो रही कार्रवाई की रूपरेखा तालाबंदी के दौरान ही तैयार कर ली गई थी।

लॉकडाउन के बाद कार्रवाई

तालाबंदी (लॉकडाउन) में ढील होने के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध सख्त हो गई। घंटाघर की प्रदर्शनकारी महिलाओं को ठाकुरगंज थाने पर तलब किया गया। छात्र नेता पूजा शुक्ला ने बताया कि उनको थाने पर बुलाकर 4-5 नोटिस पर दस्तखत कराई गई, तब उनको मालूम हुआ कि उन पर घंटाघर जाने के लिए मुकदमे दर्ज किये गए हैं। वहीं, धरने पर सक्रिय उज्मा परवीन और सुमैया राना के घर नोटिस लेकर पुलिस स्वयं गई।

इसके अलावा कांग्रेस के नेता शाहनवाज आलम को भी सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जेल भेज दिया गया है। अब सीएए विरोधियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई हो रही है।लेकिन प्रदर्शनकारी अदालत पर भरोसा करते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाइयों का सामना कर कर रहे हैं।

CAA
Anti CAA
UttarPradesh
yogi sarkar
Yogi Adityanath
BJP
UP police
Sadaf Jafar
SR Darapuri

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • farmers
    चमन लाल
    पंजाब में राजनीतिक दलदल में जाने से पहले किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए
    10 Jan 2022
    तथ्य यह है कि मौजूदा चुनावी तंत्र, कृषि क़ानून आंदोलन में तमाम दुख-दर्दों के बाद किसानों को जो ताक़त हासिल हुई है, उसे सोख लेगा। संयुक्त समाज मोर्चा को अगर चुनावी राजनीति में जाना ही है, तो उसे विशेष…
  • Dalit Panther
    अमेय तिरोदकर
    दलित पैंथर के 50 साल: भारत का पहला आक्रामक दलित युवा आंदोलन
    10 Jan 2022
    दलित पैंथर महाराष्ट्र में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। इसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था और भारत की दलित राजनीति पर भी इसका निर्विवाद प्रभाव…
  • Muslim Dharm Sansad
    रवि शंकर दुबे
    हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
    10 Jan 2022
    पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या…
  • bjp punjab
    डॉ. राजू पाण्डेय
    ‘सुरक्षा संकट’: चुनावों से पहले फिर एक बार…
    10 Jan 2022
    अपने ही देश की जनता को षड्यंत्रकारी शत्रु के रूप में देखने की प्रवृत्ति अलोकप्रिय तानाशाहों का सहज गुण होती है किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री का नहीं।
  • up vidhan sabha
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: कई मायनों में अलग है यह विधानसभा चुनाव, नतीजे तय करेंगे हमारे लोकतंत्र का भविष्य
    10 Jan 2022
    माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर नए political alignments को trigger करेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह देश-दुनिया का पहला चुनाव है जो महामारी के साये में डिजिटल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License