NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
यूपी पावर के निजीकरण के ख़िलाफ़ विद्युत कर्मचारी हड़ताल पर रहे
रिपोर्ट के अनुसार, यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) प्रबंधन और वीकेएसएसएस नेताओं के बीच सोमवार को वार्ता उस वक्त विफल हुई जब ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के बिना सुधारों को पेश करने के प्रस्ताव को प्रबंधन ने खारिज कर दिया।
अब्दुल अलीम जाफ़री
07 Oct 2020
यूपी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने वाराणसी की बिजली वितरण कंपनी पूर्वांचल विद्युत निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के प्रस्तावित निजीकरण के ख़िलाफ़ दूसरे दिन यानी मंगलवार 6अक्टूबर को अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। बिजली कर्मचारी, उप-मंडलीय अधिकारी, कार्यकारी इंजीनियरों और सुपरीटेंडेंट इंजीनियरों सहित अन्य कर्मचारियों ने यूपी विद्युत कर्मचारी संयुक्ता संघर्ष समिति (वीकेएसएस)द्वारा किए गए आह्वान के बाद अपने कार्य का बहिष्कार शुरू किया।

रिपोर्ट के अनुसार, यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड(यूपीपीसीएल) प्रबंधन और वीकेएसएसएस नेताओं के बीच सोमवार को वार्ता उस वक्त विफल हुई जब ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के बिना सुधारों को पेश करने के प्रस्ताव को प्रबंधन ने खारिज कर दिया। पावर मिनिस्टर श्रीकांत शर्मा और वीकेएसएस के बीच हुए समझौते पर यूपीपीसीएल के अध्यक्ष ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद, कर्मचारियों ने कहा कि उनका कार्य-बहिष्कार जारी रहेगा।

अखिल भारतीय पावर इंजीनियर्स फेडरेशन(एआईपीईएफ) के अध्यक्ष और संघर्ष समिति के नेता शैलेंद्र दुबे ने मीडिया को कहा कि यूपीपीसीएल प्रबंधन द्वारा हमारे सुधार प्रस्ताव को ठुकरा देने के बाद हमने सभी बिजली कर्मियों को पूर्व घोषित योजना के अनुसार सोमवार से पूरे दिन का कार्य-बहिष्कार शुरू करने को कहा है।

उन्होंने आगे कहा किया कि देश भर के 15 लाख बिजली कर्मचारी भी प्रदर्शनकारी श्रमिकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए काम का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए अपील किया है कि उन्होंने सरकार को प्रबंधन द्वारा गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए आगे कहा कि 5 अप्रैल 2018 को इंजीनियरों और ऊर्जा मंत्री के बीच हुए समझौते के अनुसार इस विभाग ने कहा था कि कर्मचारियों को विश्वास में लेने के बाद वितरण कंपनियों में सुधार लागू किए जाएंगे।

यूपी पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को निजीकरण को रोकने के लिए उनका समर्थन मांगते हुए सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस को ज्ञापन सौंपा।

वर्मा ने यह भी कहा कि अस्पतालों जैसी आवश्यक सेवाओं को कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से छूट दी गई है।

राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर बिजली आपूर्ति को बाधा पहुंचाते हुए उनका बहिष्कार जारी रहेगा तो वे सख्त कार्रवाई का सामना करेंगे।

राज्य की राजधानी लखनऊ में निजीकरण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे एक कार्यकारी इंजीनियर अतुल कुमार ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी इलेक्ट्रीसिटी ट्रांसमिशन और आपूर्ति कर्मचारी निजीकरण के फैसले का विरोध कर रहे हैं क्योंकि बिजली क्षेत्र ने सोशल रिड्रेस फील्ड के रूप में काम किया है।" एक बार निजीकरण होने के बाद,कर्मचारियों के स्वयं के कल्याण और सेवाओं के साथ किसानों और ग़रीबों को सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसलिए, वीकेएसएस के बैनर तले विद्युत् कर्मचारी का राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन हुआ है।"

कुमार के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने पहले ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के लिए निजीकरण की निलामी की शुरुआत की है, जो वाराणसी,आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, संत रबी नगर(भदोही), मिर्जापुर, सोनभद्र, मऊ, बलिया, देवरिया,देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर आदि डिविजन को आपूर्तिकरती है।

एक अन्य प्रदर्शनकारी कर्मचारी को द टाइम्स ऑफ इंडिया में यह कहते हुए उद्धृत किया गया, "हमने काम बंद कर दिया है, लेकिन अभी भी आपातकालीन सेवाओं में भाग ले रहे हैं, क्योंकि हमारी लड़ाई आम आदमी के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि सरकार से है। अस्पतालों,पेयजल आपूर्ति को इस हड़ताल से छूट दी गई है।"

दुबे ने यह भी कहा कि अगर उनके कर्मचारियों को विरोध प्रदर्शन को लेकर गिरफ्तार किया जाता है तो वे राज्य-व्यापी हड़ताल करेंगे।

अपडेट : यूनियन व प्रबंधन के बीच समझौते के बाद हड़ताल आज 7 अक्टूबर को ख़त्म हो गई। मामले की समीक्षा 3 महीने बाद होगी।

ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

UP Power Workers’ Strike Against Privatisation of UP Power Discom Enters Second Day

Uttar pradesh power
UP power
power workers protest
privatisation in UP

Related Stories


बाकी खबरें

  • ओणम व्यापार मेले: कुदुम्बश्री इकाइयों ने की रिकॉर्ड बिक्री
    अज़हर मोईदीन
    ओणम व्यापार मेले: कुदुम्बश्री इकाइयों ने की रिकॉर्ड बिक्री
    07 Sep 2021
    केरल की कुदुम्बश्री इकाइयों ने ओणम व्यापार मेलों का आयोजन किया और इन मेलों जरिए पिछले महीने बाजारों में करीब 12.45 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज़ की है। कुदुंबश्री ने फिलहाल ऑनलाइन व्यापार मेले…
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 31,222 नए मामले, 290 मरीज़ों की मौत
    07 Sep 2021
    देश में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 30 लाख 58 हज़ार 843 हो गयी है।
  • पांचजन्य ने इंफ़ोसिस को बताया राष्ट्रविरोधी, संघ ने कहा हमारा मुखपत्र नहीं
    सोनिया यादव
    पांचजन्य ने इंफ़ोसिस को बताया राष्ट्रविरोधी, संघ ने कहा हमारा मुखपत्र नहीं
    07 Sep 2021
    लेख में इंफ़ोसिस पर यह कह कर निशाना साधा गया है क्योंंकि कंपनी “देशविरोधी", और "टुकड़े-टुकड़े गैंग" की फंडिंग करती है। हालांकि, जैसे ही विवाद ने तूल पकड़ा तो संघ ने अपने मुखपत्र से ही पल्ला झाड़ लिया और…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत, बिहार ग्रामीण बैंक स्कैम, नए कोरोना मामले…
    06 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी बिहार की ग्रमीण बैंक में बड़े घोटाले का आरोप, मुज़फ़्फ़रनगर किसान महापंचायत में तय हुआ आगे का एजेंडा,किसान महापंचायत ने सांप्रदायिक राजनीति को दी…
  • OBC राजनीति क्यों इस समय अनिश्चितता के दौर में हैं?
    न्यूज़क्लिक टीम
    OBC राजनीति क्यों इस समय अनिश्चितता के दौर में हैं?
    06 Sep 2021
    राजनीतिक विश्लेषक और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के फेलो डॉ राहुल वर्मा के अनुसार अगर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को प्रशासनिक श्रेणी से राजनीतिक रूप में बदला जाए तो इससे भारत में लोकतंत्र के चरित्र और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License