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भारत
राजनीति
यूपी: दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा राज्यसभा चुनाव, बसपा ने सात बाग़ियों को किया निलंबित
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए 9 नवंबर को वोटिंग होनी है। इसके लिए भाजपा ने आठ, सपा ने एक और बसपा ने एक प्रत्याशी खड़ा किया है। किसी भी प्रत्याशी को जीतने के लिए 36 विधायकों की ज़रूरत होगी।
अमित सिंह
30 Oct 2020
यूपी
Image courtesy: Patrika

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बगावत हो गई है। बुधवार को बसपा के प्रत्याशी रामजी गौतम के पांच प्रस्तावकों (विधायक) ने निर्वाचन अधिकारी से अपना नाम वापस लेने का आवेदन कर दिया। इनके साथ दो और विधायक भी थे। इसके बाद गुरुवार को बसपा की प्रमुख मायावती ने पार्टी के इन सात बागी विधायकों को निलंबित कर दिया।

यूपी में राज्यसभा चुनाव

दरअसल उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 9 नवंबर को मतदान होना है। ये 10 सीटें 25 नवंबर को खाली हो रही हैं। इसके लिए भाजपा ने आठ, सपा ने एक और बसपा ने एक प्रत्याशी खड़ा किया है। एक निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बजाज के खड़े होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया।

हालांकि बुधवार को निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश बजाज का नामांकन ही रद्द कर दिया गया है। वह इस फैसले के बाद कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इसी समय बसपा में बगावत भी हो गई। ऐसे में बसपा प्रत्याशी रामजी गौतम की राह थोड़ी मुश्किल दिखने लगी।

क्या है गणित

सबसे पहले आपको यह बता दें कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की जो 10 सीटें खाली हो रही हैं उनमें से फिलहाल तीन सीटें भाजपा, चार सपा, दो बसपा और एक कांग्रेस के पास हैं। लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा की आठ सीटों पर जीत तय मानी जा रही है। एक सीट पर सपा उम्मीदवार की जीत तय हैं। दसवीं सीट पर बसपा ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया है। अब अगर चुनाव की स्थिति नहीं बनती तो इस सभी प्रत्याशियों की जीत तय हैं लेकिन अगर निर्दलीय प्रकाश बजाज भी मैदान में उतर पाएंगें तो मुकाबले की संभावना बनेगी।

दरअसल 403 सदस्यों वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा में अभी विधायकों की संख्या 395 ही है। इसमें भी सिर्फ 392 के ही वोट पड़ेंगे, क्योंकि जेल में बंद तीन विधायक मुख्तार अंसारी, तजीन फातिमा और विजय मिश्र वोट डालने नहीं आ पाएंगे। ऐसे में किसी भी प्रत्याशी को जीतने के लिए 36 विधायकों की जरूरत होगी।

ऐसे में बीजेपी के आठ उम्मीदवार आसानी से जीत दर्ज कर लेंगे। प्रदेश में उनके विधायकों की संख्या 304 है। सपा का एक उम्मीदवार भी आसानी से जीत दर्ज कर लेगा। उनके विधायकों की संख्या 48 है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के पास मात्र 18 विधायक हैं।

बीजेपी ने खड़े किए आठ प्रत्याशी

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के लिए भाजपा के आठ उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, हरिद्वार दुबे, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, गीता शाक्य, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी हैं। अगर हम गणना करें तो आठ सीटें जिताने की क्षमता के बाद भी भाजपा के पास 25 वोट अतिरिक्त हैं, लेकिन उसने नौवां प्रत्याशी उतारने का जोखिम नहीं लिया।

जानकारों का कहना है कि ऐसा करके पार्टी ने बसपा को वाकओवर दिया था। ऐसे में 18 विधायकों वाले बसपा के प्रत्याशी रामजी गौतम भी आसानी से राज्यसभा के लिए चुन लिए जाते लेकिन अंतिम मौके पर सपा ने निर्दलीय प्रत्याशी उतार कर लड़ाई को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया। इसके बाद बसपा में बगावत भी हो गई। आपको यह भी बता दें कि सपा प्रत्याशी राम गोपाल यादव की जीत भी तय है।

बीजेपी पर नरम, सपा पर गरम

अपने कुछ विधायकों के पाला बदलने की अटकलों के बीच मायावती ने सपा पर निशाना साधा और कहा कि भविष्य में विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवारों को हराने के लिए उनकी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी तथा जरूरत पड़ी तो भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन देगी। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही बागी विधायक किसी भी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं तो बसपा उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन को सूचित किया गया है कि निलंबित विधायकों को पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए। मायावती ने एक बयान में कहा कि भविष्य में सपा उम्मीदवारों को हराने के लिए बसपा पूरी ताकत लगाएगी और जरूरत पड़ी तो भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन देगी।

आपको बता दें कि बसपा को बुधवार को उस समय झटका लगा था जब पार्टी के छह विधायकों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी और इसके बाद उन्होंने संकेत दिये थे कि वे पार्टी बदल सकते हैं।

मायावती ने खुद ही खोली अपनी पोल : सपा

समाजवादी पार्टी (सपा) ने राज्यसभा चुनाव में सपा प्रत्याशियों को हराने के लिए भाजपा तक का समर्थन करने के बसपा प्रमुख मायावती के बयान पर तंज करते हुए कहा कि इससे साबित हो गया कि मायावती की भाजपा से पहले से ही सांठगांठ है।

सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि मायावती का बयान इस बात की स्वीकारोक्ति है कि उनकी भाजपा से पहले ही सांठगांठ थी। उन्होंने कहा कि भाजपा से इसी अंदरूनी समझौते की वजह से मायावती ने विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल ना होने के बावजूद अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा और अब यह कहकर कि राज्यसभा चुनाव में सपा को हराने के लिए वह भाजपा तक का समर्थन कर सकती हैं, बसपा प्रमुख ने अपनी पोल खुद ही खोल दी है।

चौधरी ने कहा कि मात्र 18 विधायकों वाली बसपा के पास अब विधानसभा में केवल 10-11 विधायक ही हैं, जबकि राज्यसभा के एक प्रत्याशी को जिताने के लिए 36 विधायकों का समर्थन जरूरी है। इसके बावजूद मायावती ने रामजी लाल गौतम को उम्मीदवार बनाया। ऐसा करने से पहले उन्होंने विपक्ष के किसी भी दल से समर्थन नहीं मांगा। दूसरी ओर, भाजपा ने नौ सीटें जीतने की स्थिति में होने के बावजूद आठ उम्मीदवार ही उतारे। उसी वक्त जाहिर हो गया था कि मायावती की भाजपा से सांठगांठ हो चुकी है।

कांग्रेस और आप ने भी बसपा पर बोला हमला

मायावती के बयान पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी तंज कसा है। मायावती के प्रेस कांफ्रेंस में दिए गए बयानों का वीडियो ट्वीट करते हुए प्रियंका गांधी ने लिखा कि इसके बाद भी कुछ बाकी है?

वहीं, इस घमासान में आम आदमी पार्टी भी कूद पड़ी है। पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि एक राज्यसभा सीट के लिए मायावती ने दलितों के मुद्दे पर मुंह मोड़ लिया।

आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने मायावती पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यसभा की सिर्फ एक सीट के लिए मायावती ने बीजेपी से हाथ मिल लिया। इसीलिए उन्होंने बलरामपुर और हाथरस जैसी घटनाओं पर चुप्पी साध ली।

अब आगे क्या?

फिलहाल अभी प्रकाश बजाज का पर्चा खारिज होने के बाद राज्यसभा के लिए 10 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है। ऐसे में बसपा विधायकों की बगावत का कोई खास मतलब नहीं है। हालांकि पर्चा खारिज होने पर प्रकाश बजाज ने हाईकोर्ट में अपील की बात कही है। अगर उन्हें कोर्ट से राहत मिलती है तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में जनवरी में विधान परिषद की 12 सीटों पर चुनाव हो सकते हैं। इसमें एक सीट सदस्यता रद्द होने के कारण पहले से खाली चल रही है और 11 सीटें 30 जनवरी को खाली हो जाएंगी। विधायकों की संख्या इस चुनाव में भी जीत में अहम भूमिका निभाएगी। यही वजह है कि बीएसपी प्रमुख मायावती सपा को हिसाब बराबर करने की धमकी दे रही हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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