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यूपी : कब और कैसे रुकेगा अवैध और ज़हरीली शराब का धंधा
अलीगढ़ की घटना प्रदेश में ज़हरीली शराब से होने वाली यह पहली त्रासदी नहीं है। अभी 28 अप्रैल को हाथरस में ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी।
असद रिज़वी
29 May 2021
यूपी : कब और कैसे रुकेगा अवैध और ज़हरीली शराब का धंधा
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: सोशल मीडिया

ज़हरीली शराब पीने से उत्तर प्रदेश में पिछले चार सालों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन प्रदेश सरकार ज़हरीली शराब के उत्पादन को रोकने में असफ़ल है।

ताज़ी घटना अलीगढ़ की है जहां ज़हरीली शराब पीने से शुक्रवार को क़रीब 18 लोगों की मौत हो गई। विपक्ष का आरोप है आबकारी विभाग-पुलिस प्रशासन और शराब माफियाओं की मिलीभगत से प्रदेश में करीब 10 हजार करोड़ के अवैध शराब के कारोबार का संचालन किया जा रहा है।

ज़हरीली शराब पीने से अलीगढ़ में क़रीब 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। जबकि 18 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में नाज़ुक हालत में भर्ती हैं। हालाँकि स्थानीय लोगों का दावा है कि 22 लोगों की मौत हुई है।

बताया जा रहा है कि मरने वालों 6 लोग ऐसे भी हैं, जिनके परिवारों ने बिना पुलिस प्रशासन को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया। प्रशासन उनकी मौत की पुष्टि नहीं कर रहा है।

प्रदेश में ज़हरीली शराब से होने वाली यह पहली त्रासदी नहीं है। लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से ज़हरीली शराब पीने से लोगों के मरने की ख़बरें प्राप्त होती रहती हैं। अभी पिछले महीने 28 अप्रैल को हाथरस ज़िले में कथित रूप से ज़हरीली शराब पीने से 5 लोगों की मौत हो गई थी।

हाथरस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एक दारोगा तथा एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया था और शराब बेचने वाले शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

प्रतापगढ़ में कथित तौर पर ज़हरीली शराब पीने से फ़रवरी में, पूर्व प्रधान सहित 6 लोगों की मौत हो गई। ज़िले में 24 फ़रवरी को तीन और 25 फ़रवरी को भी तीन लोगों की मौत से हड़कंप मच गया था। घटना के बाद आबकारी विभाग नींद से जागा और ज़हरीली शराब बनाने वालों के ख़िलाफ़ जाँच शुरू हुई।

12 मई को आई एक खबर के अनुसार अंबेडकरनगर, आजमगढ़ व बदायूं, ज़िलों में ज़हरीली शराब पीने से अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा लोगों में आंख की रौशनी कम होने की समस्या कही जा रही है।

इससे पहले साल 2021 के शुरू में ही, बुलंदशहर में 8 जनवरी को 5 लोगों की ज़हरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। यह इस वर्ष का पहला मामला था। लेकिन ज़हरीली शराब सालों से घरों को बर्बाद कर रही है। साल 2020 में भी ज़हरीली शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

इसे पढ़ें : बुलंदशहर में ज़हरीली शराब पीने से पांच की मौत, 16 लोग बीमार

पिछले वर्ष नवंबर में ज़हरीली शराब से प्रदेश में क़रीब 15  लोग मारे गये थे। राजधानी लखनऊ के बंथरा इलाक़े में 13 नवंबर को ज़हरीली शराब पीने से 6 लोगों की मौत हो गयी। इसके चार दिन बाद 17 नवंबर को फिरोजाबाद ज़िले खैरागढ़ क्षेत्र के शेखपुरा गांव में ज़हरीली शराब से 3 लोगों की जान गई। इस महीने में ही 21 नवंबर को प्रयागराज के फूलपुर में 6 लोगों की ज़हरीली शराब पीने से जान चली गयी। 

मेरठ और बागपत में 10 सितंबर 2020 को ज़हरीली शराब की वजह से 7 लोग मर गये। मरने वालों में बागपत के चांदीनगर क्षेत्र के चमरावल गाँव के 5 लोग और मेरठ के जानी के 2 लोग थे।

कानपुर के घाटमपुर में ज़हरीली शराब पीने से 12 अप्रैल 2020 को 2 लोगों की मौत हुई। अगर आबकारी विभाग और प्रशासन के आँकड़ों की बात करें तो 2017 में 18 लोगों की मौत, 2018 में 17 लोगों की मौत ज़हरीली शराब से हुई।

कांग्रेस ने दावा किया है कि प्रदेश में पिछले चार साल में 400 लोगों की ज़हरीली शराब से मौत हुई है। पार्टी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कहना है कि आबकारी विभाग-पुलिस और शराब माफियाओं की मिलीभगत से प्रदेश में करीब 10 हजार करोड़ के अवैध शराब का कारोबार का संचालन किया जा रहा है। 

सरकार पर सीधे हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि योगी सरकार द्वारा ज़हरीली शराब के कारोबारियों के विरुद्ध कार्रवाई न करना यह साबित करता है कि शराब के अवैध कारोबारियों को प्रदेश सरकार का संरक्षण मिला हुआ है।

अलीगढ़ की घटना के बाद लल्लू ने कहा विगत चार वर्षों से लगातार प्रदेश के विभिन्न जनपदों में अवैध शराब से मौतें हो रही हैं। योगी सरकार यदि पूर्व में हुईं ज़हरीली शराब से मौतों को लेकर संवेदनशील होती और अवैध शराब कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई की गयी होती तो आज अलीगढ़ में हुईं मौतों को रोका जा सकता था। इसलिए अलीगढ़ में हुई मौतों के लिए योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार ज़िम्मेदार है।

प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का कहना है कि बिना स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की मिलीभगत से अवैध शराब का कारोबार सम्भव नहीं है। सपा प्रवक्ता का कहना है कि भाजपा सरकार पर शराब माफ़िया हावी हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि ज़हरीली शराब दर्जनों परिवार को बर्बाद कर चुकी है और कर रही है। लेकिन इसका कारोबार करने वालों को, पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग का संरक्षण प्राप्त है। भाजपा सरकार भी शराब माफ़िया दबावो में है। इसी लिए मुख्यमंत्री द्वारा चार साल में एक बार भी इस अवैध कारोबार को बंद करने के लिए विचार भी नहीं किया गया।

राष्ट्रीय लोकदल ने कहा है कि योगी सरकार ने अपनी पिछली ग़लतियों से भी सबक़ नहीं लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अनिल दुबे के अनुसार प्रदेश की भाजपा सरकार में ज़हरीली शराब के अवैध कारोबार को रोकने में असफ़ल रही है। प्रदेश में कई दर्जनों हादसे हुए और सैकड़ों जाने चली गई, लेकिन सिर्फ़ औपचारिक कार्रवाई हो कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। दुबे ने माँग है कि अलीगढ़ मामले में सम्मिलित सभी पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों को बर्खास्त किया जाये।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ मामले में कहा है कि दोषियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी अलीगढ़ कलानिधि नैथानी ने दावा किया है कि इस मामले में अब तक पुलिस ने शराब ठेका संचालक, सेल्समैन और पर्यवेक्षक सहित 4 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

आबकारी विभाग ने अपने विभाग की वेबसाइट पर अवैध शराब बनाने वालों को पकड़वाने की जनता से अपील की है। अवैध शराब बनाने वालों की सूचना देने वाले की पहचान भी छुपाने का वादा किया गया है। लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि स्वयं आबकारी विभाग के अधिकारी कितनी कार्रवाई करते हैं? अगर वह सतर्क रहें और सख़्ती बरतें तो शायद बार-बार ज़हरीली शराब से होने वाली इन घटनाओं पर रोक सकता है।

शुक्रवार को अलीगढ़ में हुई घटना ने एक बार यह फिर साबित कर दिया है कि ज़हरीली शराब के उत्पादन को रोकने के लेकर सरकार ज़रा गंभीर नहीं है। या फिर शराब माफ़िया सरकार पर भारी पड़ रहे हैं।

प्रदेश में जब भी ज़हरीली शराब से कोई त्रासदी होती है तो शासन प्रशासन द्वारा जांच समितियां बना दी जाती हैं। समितियां की रिपोर्ट के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम होता है। अगर त्रासदी बड़ी हो जाए तो, मामले को संभालने के लिए, पुलिस और आबकारी विभाग के एक-दो अधिकारियों को निलंबित या तबादला कर दिया जाता है। जिनमें से ज़्यादातर बाद में बहाल हो जाते हैं। अवैध शराब का कारोबार वैसे ही चलता रहता है, उसमें कमी आती नहीं दिखती।

(*प्राप्त आंकड़े आबकारी विभाग व प्रशासन के सूत्रों से हासिल किये गये हैं।)

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