NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी : क्या ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली जीत बीजेपी को दोबारा सत्ता में लाएगी?
अभी दो महीने पहले हुए ज़िला पंचायत सदस्यों के चुनाव परिणाम में समाजवादी पार्टी को सबसे ज़्यादा सीटें मिली थीं तो वहीं सत्ताधारी दल बीजेपी दूसरे नंबर पर ही रह गई थी। अब जब ज़िला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव परिणाम आए हैं, तो बीजेपी ने बाज़ी मार ली है। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Jul 2021
यूपी : क्या ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली जीत बीजेपी को दोबारा सत्ता में लाएगी?
फ़ोटो साभार: सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश में यूं तो ज़िला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव पर पहले भी विवाद हुए हैं लेकिन इस बार का चुनाव खासा सुर्खियों में रहा। ज़िला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में बाजेपी ने 75 में से 67 सीटें जीतीं तो वहीं पंचायत सदस्यों के चुनावों में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी महज 5 सीटों पर सिमट कर रह गई। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इन चुनावों में मिली प्रचंड जीत को बीजेपी विधानसभा चुनाव का सेमीफ़ाइनल बता रही है तो वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने चुनाव इन चुनावों में गंभीर धांधली के आरोप लगा रही है।

आपको बता दें कि अभी दो महीने पहले हुए ज़िला पंचायत सदस्यों के चुनाव में ज़िलों के कुल 3052 सदस्यों में से बीजेपी के महज़ 603 सदस्य ही जीते थे जबकि समाजवादी पार्टी के सदस्यों की संख्या 842 थी। सबसे ज़्यादा सीटें निर्दलीयों ने जीती थीं। हालांकि अब जब ज़िला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव परिणाम आए, तो बीजेपी ने बाज़ी मार ली। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि उनके उम्मीदवारों को ज़िलों में नामांकन ही नहीं करने दिया गया, मतदाताओं का अपहरण कर लिया गया और ज़िला प्रशासन और पुलिस अधिकारी ख़ुद इसमें शामिल रहे।

बीजेपी ने 46 सीटें जीती, समाजवादी पार्टी कुल पांच सीटों पर सिमटी

वैसे नामांकन के बाद ही यूपी के 75 ज़िलों में 22 ज़िलों के पंचायत अध्यक्ष पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे जिनमें 21 बीजेपी के और इटावा में समाजवादी पार्टी का एक उम्मीदवार ज़िला पंचायत अध्यक्ष बिना विरोध ही चुन लिया गया था। जिन 53 ज़िलों में चुनाव हुए, उनमें बीजेपी ने 46 सीटें जीती हैं। समाजवादी पार्टी को कुल पांच सीटें मिली हैं जबकि रालोद और राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल को एक-एक सीटों पर जीत हासिल हुई है।

अन्य पार्टियों की बात करें तो, ज़िला पंचायत सदस्यों के चुनाव में कांग्रेस और बसपा ने भी उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से बहुजन समाज पार्टी ने किनारा कर लिया और कांग्रेस ने जालौन और रायबरेली में अपने उम्मीदवार खड़े किए लेकिन दोनों ही उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।

चुनावों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार, धांधली और ख़रीद-फ़रोख़्त के आरोप तो इन चुनावों में पहले भी लगते रहे हैं और इस बार भी जमकर लगे हैं। समाजवादी पार्टी भी जब सत्ता में थी तब उस पर भी इन चुनावों में धांधली के जमकर आरोप लगे थे लेकिन अब सबसे ज़्यादा धांधली का आरोप समाजवादी पार्टी ही लगा रही है। सपा प्रमुख और प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता का इससे बदरंग चेहरा पहले कभी नहीं देखा गया है। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद भ्रष्टाचार के मामले में जीरों टॉलरेंस का दावा करने वाली बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया। खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के चुनाव बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम हैं।

अखिलेश यादव के आरोपों पर सीएम योगी ने कहा, “जब हम लोकसभा चुनाव जीतते हैं, विधानसभा चुनाव जीतते हैं तब दोष ईवीएम पर आता है। तब उन्होंने मांग की थी कि बैलट पेपर से चुनाव होने चाहिए। इस बार बैलट पेपर से चुनाव हुए तो वो प्रशासन पर आरोप लगाने लग गए।”

जो पार्टी पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीती, उसने विधानसभा में सत्ता खोई

मालूम हो कि पिछले करीब तीन बार से विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत अध्यक्षों के चुनाव हो रहे हैं और दिलचस्प बात ये है कि सत्ता में रहते हुए जिस पार्टी ने पंचायत अध्यक्षों के ज़्यादातर पद अपनी झोली में किए,अगले विधानसभा चुनाव में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। साल 2010 में बसपा ने पंचायत अध्यक्षों के ज़्यादातर पद जीते थे लेकिन 2012 में विधानसभा चुनाव में उसे हार का मुंह देखना पड़ा। 2016 में समाजवादी पार्टी के 63 ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुने गए थे लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में उसकी बुरी हार हुई।

इस संबंध में लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर रहीं आस्था सिंहा बताती हैं कि पंचायत अक्ष्यक्षों के चुनाव और विधानसभा के चुनाव को एक नज़रिए से नहीं देखा जा सकता क्योंकि ज़िला पंचायत अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता बल्कि ज़िला पंचायत सदस्य अध्यक्षों के लिए मतदान करते हैं।

अस्था सिंहा के मुताबिक, ”पहले भी ज़िला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप विवाद होता ही रहा है और ज्यादातर ये देखा भी गया है किअध्यक्ष पद पर अक़्सर उसी पार्टी के उम्मीदवार जीत जाते हैं जिस पार्टी की राज्य में सरकार होती है। सरकार बदलने के बाद कई बार अविश्वास प्रस्ताव के जरिए ज़िलों के पंचायत अध्यक्ष भी बदल जाते हैं। सरल भाषा में कहें तो जिसकी लाठी, उसकी भैंस।“

विधानसभा चुनाव की तैयारी और विपक्ष के मुद्दे

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सभी पार्टियां अपने एड़ी-चोटी का दम लगा देना चाहती हैं। जैसे-जैसे 2022 का विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है यूपी की राजनीति और पार्टियों की नीति और दिलचस्प होती जा रही है। चुनावी नतीजा जो भी हो इतना तो तय है कि कभी समाजवादी पार्टी को भ्रष्टाचार और गुंडई का आरोप लगाकर सत्ता से बाहर करने वाली बीजेपी पर अब खुद सत्ता में चार साल बीताने के बाद उन्हीं आरोपों को झेलती नज़र आ रही है।

योगी आदित्यनाथ की चार साल पुरानी सरकार में विपक्ष के पास मुद्दों की कोई कमी नहीं है। किसान आंदोलन, टीकाकरण की नीति और कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान महामारी से मुक़ाबले की रणनीति को लेकर सरकार पहले ही आलोचनाओं के घेरे में रही है। ऐसे में ये देखना होगा कि क्या पंचायत अध्यक्ष चुनाव की जीत बीजेपी की सत्ता को बरकरार रखती है या एक बार फिर इतिहास को दोहराती है।

इसे भी पढ़ें: ज़िला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: "गुंडागर्दी मुक्त राज" का दावा करने वाली भाजपा ने सेल्फ-गोल किया

UttarPradesh
Zilla Panchayat elections
District panchayat elections
UP ELections 2022
AKHILESH YADAV
SAMAJWADI PARTY
Yogi Adityanath
BJP

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • SC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब : क्या खोरीवासियों को पीएम आवास योजना से मिल सकता है घर?
    21 Sep 2021
    कोर्ट ने पुनर्वास के मामले में कहा कि जब खोरी गांव के पुनर्वास की नीति प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की बात करती है तो निश्चित रूप से आइडेंटिटी प्रूफ़ में से कोई एक एवं रेज़िडेंस प्रूफ़ में से कोई…
  • kisan andolan
    सरोजिनी बिष्ट
    सीतापुर महापंचायत: अवध में दस्तक के बाद पूर्वांचल की राह पकड़ेगा किसान आंदोलन
    21 Sep 2021
    पूर्वांचल के जिलों के लिए यह आंदोलन ख़ास मायने रखता है क्योंंकि पश्चिमी यूपी की तरह न तो यहां कोई सशक्त किसान संगठन है जो किसानों के सवालों के लिए लड़ता रहे और न ही यहां पश्चिमी यूपी की तरह अनाज…
  • SARS
    संदीपन तालुकदार
    जानवरों में पाए जाने वाले सार्स-जैसे वायरस हर साल 4,00,000 इंसानों को संक्रमित करते हैं
    21 Sep 2021
    जानवरों से दूसरों में प्रविष्ठ होने की घटनाओं को देखते हुए कोरोनावायरस से संक्रमण का सबसे अधिक खतरा दक्षिणी चीन, विएतनाम, कम्बोडिया और जावा जैसे क्षेत्रों में है।
  • Railway recruitment
    अभिषेक पाठक
    लोकसभा चुनावों से पहले किया था रेलवे भर्ती का ऐलान, ढाई साल बाद भी एग्ज़ाम का अता-पता नहीं
    21 Sep 2021
    रेलवे की एक भर्ती जिसका रजिस्ट्रेशन हुए 2.5 साल से भी अधिक का वक़्त को चुका है, आज तक उस भर्ती के लिए प्रथम चरण की परीक्षा भी नही कराई जा सकी है।
  • covid
    रिचा चिंतन
    क्या ग़रीब देश अपनी आबादी के टीकाकरण में सफल हो सकते हैं?
    21 Sep 2021
    दक्षिण अफ्रीका में जनता के आक्रोश ने जॉनसन एंड जॉनसन को देश में उत्पादित होने वाले अपने टीके (वैक्सीन) को यूरोप भेजने की बजाए घरेलू उपयोग के लिए ही रखने को मजबूर कर दिया। भारतीय नागरिक समाज ने भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License