NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी : कामगार संगठनों ने की योगी सरकार से "राम मंदिर के लिए ज़बरदस्ती चंदा न लेने" की अपील
राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अपने कर्मचारियों से 'स्वैच्छिक' ढंग से एक दिन के वेतन को राम मंदिर निर्माण के लिए चलाई जा रही सरकारी मुहिम में बतौर चंदा देने को कहा है।
अब्दुल अलीम जाफ़री, सुमेधा पाल
22 Jan 2021
यूपी : कामगार संगठनों ने की योगी सरकार से "राम मंदिर के लिए ज़बरदस्ती चंदा न लेने" की अपील

राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अपने कर्मचारियों से 'स्वैच्छिक' ढंग से एक दिन के वेतन को राम मंदिर निर्माण के लिए चलाई जा रही सरकारी मुहिम में बतौर चंदा देने को कहा गया है। राज्य के कामगार संगठन इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं। उत्तरप्रदेश सरकार ने इस मामले में आगे बढ़ते हुए निजी बैंक एचडीएफ़सी में पीडब्ल्यूडी के चंदे को इकट्ठा करने के लिए खाता भी खुलवा दिया है।

19 जनवरी को लिखे ख़त में विभाग के चीफ इंजीनियर राजपाल सिंह ने एचडीएफ़सी बैंक को "पीडब्ल्यूडी राम मंदिर कल्याण" नाम से खाता खोलने को कहा था। एक तरफ जहां सरकार चंदा इकट्ठा करने के लिए अपने कदम तेज़ कर रही है, वहीं कामग़ार संगठनों इस मनमाफ़िक कदम का विरोध करने के लिए प्रदर्शन की योजना बना चुके हैं। संगठनों ने इसे "गैरकानूनी" बताते हुए "धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सीधा उल्लंघन" बताया है। 

सफ़ाईकर्मियों ने शुरु किया विरोध प्रदर्शन

कामग़ार वर्ग की नाराज़गी ताजा कदम से बहुत बढ़ी है, क्योंकि पिछली बार कोरोना राहत कार्यक्रम के लिए PM CARES फंड में दिए चंदे को लेकर भी उनमें असंतोष था। यह कोष काफ़ी विवादों मे घिर गया था। सोशल मीडिया पर चीफ इंजीनियर के ख़त जारी होने के बाद पूरे राज्य से कामग़ारों ने प्रदर्शनों की शुरुआत कर दी है, कुछ तो सड़क पर भी उतर चुके हैं।

उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद शहर में सफ़ाईकर्मियों ने गुरुवार को एक विरोध प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप है कि उनसे जबरदस्ती प्रस्तावित मंदिर के लिए चंदा लिया जा रहा है। इस प्रदर्शन का हिस्सा रहे एक कर्मचारी अमित ने न्यूज़क्लिक से कहा, "जब हम भंगी हैं, मंदिर में नहीं जा सकते, तो पैसे किस बात के, ये सरासर गुंडागर्दी है साहब। मैं मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं दूंगा। इसके बजाए हम जरूरतमंदों को एक दिन का वेतन दे देंगे।" अमित ने यह भी कहा कि राज्य में हर दिन एक दलित लड़की का रेप किया जाता है, लेकिन समुदाय के समर्थन में कोई सड़क पर नहीं उतरता।

भले ही सरकार चंदे के योगदान को "स्वैच्छिक" कह रही हो, लेकिन कामग़ारों में डर है कि अगर उन्होंने कोष में पैसे देने से इंकार कर दिया, तो उनपर जांच बैठाई जा सकती है।

लखनऊ में एक कर्मचारी, जिसे सर्कुलर मिला है और उसने नाम ना छापने की शर्त रखी है, उसने हमसे बातचीत में कहा, "मैं यहां अकेला नहीं हूं, जो चंदा देना नहीं चाहता; यहां कई कर्मचारी हैं, जो मेरी तरह ही विचार रखते हैं। हम जानते हैं कि अगर हमने ना कहा तो हमें हिंदू-विरोधी, देशद्रोही, पता नहीं क्या-क्या करार दे दिया जाएगा। यहां तक की काम की जगहों पर हमारा बॉयकाट भी हो सकता है, लेकिन किसी धार्मिक कार्य के लिए चंदा ना देना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है।"

जिस तरह से सर्कुलर जारी किया गया है, उस पर सवाल भी उठ रहे हैं।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए पीडब्ल्यूडी कर्मचारी यूनियन के एक सदस्य सत्येंद्र कुमार मिश्रा ने कहा, "यह कदम पूरी तरह से असंवैधानिक और ग़ैर क़ानूनी है। इस कदम को उठाने के पहले कामग़ारों से बात नहीं की गई। यह पहली बार नहीं है जब कर्मचारियों पर "स्वैच्छिक" कटौती थोपी गई है। जबसे राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जिम्मेदारी संभाली है, तबसे इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। PM CARES राहत कोष के लिए भी हमारा वेतन काटा गया था। हमें अब भी नहीं पता कि हमारा पैसा कहां चला गया। अगर हम दान के लिए सहमति देते, तो मामला अलग होता। उन्होंने किसी भी कर्मचारी या कामग़ार संगठन से इस बारे में चर्चा नहीं की। सबसे बड़ी बात यहां जिस तरीके की अपारदर्शिता है, उससे मामला और भी ज़्यादा बदतर हो जाता है।"

उत्तरप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश मिश्रा ने मुख्य इंजीनियर राजपाल सिंह की आलोचना की है। उन्होंने कहा, "हमें इस बारे में बुधवार को पता चला, जब राजपाल सिंह का ख़त सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जब हमने इसकी जांच की, तो पता चला कि किसी को इस बारे में पता ही नहीं था, क्योंकि सरकार ने इस बारे में कोई दिशा-निर्देश ही जारी नहीं किए। चंदा देने का फ़ैसला चीफ इंजीनियर ने खुद से लिया है।"

भारत का संविधान कहता है कि धर्म के आधार पर कर का एकत्रीकरण नहीं किया जा सकता। लेकिन ताजा कदम को कर ना बताकर स्वैच्छिक योगदान बताया जा रहा है। राज्य के प्रशासनिक तंत्र के गलत उपयोग को आधार बनाकर इसे भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

वकील संजय सिंघवी ने न्यूज़क्लिक को बताया, "यह कदम पूरी तरह से गैरकानूनी है। पहले भी सरकारें ऐसा करती रही हैं, इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।"

चंदा इकट्ठा करने के दौरान उत्तरप्रदेश के कई हिस्सों में तनाव बढ़ा है। जनवरी में बुलंदशहर में एक हिंदूवादी संगठन द्वारा राम मंदिर निर्माण को चंदा इकट्ठा करने के लिए निकाली गई रैली के दौरान सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था। यह रैली जब मुस्लिम बहुल कॉलोनी में पहुंची, तब कथित तौर पर रैली में शामिल लोगों ने वहां के स्थानीय रहवासियों के खिलाफ़ गाली-गलौज की।

स्थानीय लोगों की शिकायत पर बुलंदशहर पुलिस ने IPC की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को भड़काना), धारा 153 A (दो समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया है।

चंदा इकट्ठा करने वाली रैलियों से मध्यप्रदेश में भी अशांति फैली है। इस दौरान मुस्लिमों के घर में लूट की गई और उनके घरों को ढहाया गया।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

UP: Workers Unions Ask Yogi Government to ‘Stop Imposing Donations for Ram Temple’

PWD
UP
ayodhya
Ram Mandir Donations
government employees
BJP
Ram Temple Fund Collection
Ram Temple Rallies
Madhya Pradesh Ram Temple
Uttar pradesh

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • Mehsi oyster button industry
    शशि शेखर
    बिहार: मेहसी सीप बटन उद्योग बेहाल, जर्मन मशीनों पर मकड़ी के जाल 
    26 Oct 2021
    बिहार के पूर्वी चंपारण के मेहसी स्थित विश्व प्रसिद्ध सीप-बटन उद्योग की मशीनों पर मकड़ी के जाले लग चुके हैं। बिजली की सप्लाई नहीं है। उद्योग यूनिट दर यूनिट बंद हो रहे हैं। इस उद्योग के कारीगर पंजाब-…
  • coal crisis
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोयला संकट से होगा कुछ निजी कंपनियों को फायदा, जनता का नुकसान
    26 Oct 2021
    कोयले के संकट से देश में बिजली की किल्लत हो रही है। इस किल्लत की वजह क्या है? इस संकट से किसको फायदा और किसको नुकसान होगा? जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने बात की पूर्व कोयला सचिव अनिल स्वरुप से
  • Biden’s Taiwan Gaffe Meant no Harm
    एम. के. भद्रकुमार
    ताइवान पर दिया बाइडेन का बयान, एक चूक या कूटनीतिक चाल? 
    26 Oct 2021
    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले गुरुवार को सीएनएन टाउन हॉल में यह कहा है कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो वाशिंगटन उसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों का स्थायी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन, हड़ताल की चेतावनी दी
    26 Oct 2021
    लगभग 3500 से अधिक कर्मचारी दिल्ली के तीनों नगर निगम में अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं। राजधानी में डेंगू और अन्य ऐसी महामारी की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद ये ठेके प्रथा के तहत कार्यरत…
  • instant loan
    शाश्वत सहाय
    तत्काल क़र्ज़ मुहैया कराने वाले ऐप्स के जाल में फ़ंसते नौजवान, छोटे शहर और गाँव बने टार्गेट
    26 Oct 2021
    इन ऐप्स के क़र्ज़ वसूली एजेंटों की ओर से किये जा रहे उत्पीड़न के चलते 2020 और 2021 के बीच पूरे भारत में कम से कम 21आत्महत्याएं हुई हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License