NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
यूपी एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल : महामारी का डर और बिना वेतन पेट पालने की समस्या
कोरोना वायरस महामारी के बीच सुरक्षा किट और 2 महीने की सैलरी न मिलने को लेकर प्रदेश भर में एंबुलेंस कर्मियों ने की हड़ताल।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Apr 2020
यूपी एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल
Image courtesy: Bharatkhabar

“मैं चाहता हूं कि 22 मार्च को हम ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें जो जोखिम उठाकर आवश्यक कामों में लगे हैं, इस महामारी से लड़ने में मदद कर रहे हैं। रविवार को ठीक 5 बजे हम अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर, बॉलकनी-खिड़कियों के सामने खड़े होकर पांच मिनट तक ताली-थाली बजा कर उन लोगों के प्रति कृतज्ञता जताएं, जो कोरोना से बचाने में हमें लगे हैं। 22 मार्च को हमारा यह प्रयास, हमारा आत्म संयम, देश हित में कर्तव्य पालन के संकल्प का एक मजबूत प्रतीक होगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च को देश के नाम अपने संबोधन में ये बात कही थी। 22 मार्च यानी जनता कर्फ्यू के दिन इसका पालन भी हुआ। लोगों ने स्वस्थ्यकर्मियों और जरूरी सेवाओं में लगे लोगों का ताली और थाली से जमकर अभिवादन किया लेकिन क्या वाकई इससे उनके लिए कुछ बदला? 

हैरानी की बात है कि एक ओर प्रशासन इस महामारी से निपटने के लिए तमाम दावे कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर इस संकट की घड़ी में उत्तर प्रदेश के एंबुलेंस कर्मियों को शोषण के चलते हड़ताल पर जाना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश में 108, 102 व ALS (एएलएस : एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस सर्विस प्राइवेट कंपनी ‘जीवीके’ के जिम्मे है। इसका कॉन्ट्रैक्ट प्रदेश सरकार के अंतर्गत है। इसमें कुल 4700 एंबुलेंस और लगभग 19 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। मंगलवार, 31 मार्च को हजारों एंबुलेंस कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया, जिसके बाद दोपहर 12 बजे के बाद से लखनऊ, इलाहाबाद, बरेली, गोंडा समेत कई जिलों में एंबुलेंस सेवा ठप हो गई। इस बीच कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किया, साथ ही प्रशासन को मांगें पूरी न होने की स्थिति में काम छोड़कर अपने गांव वापस जाने की चेतावनी भी दी है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार सरकार को सूचना देने के बावजूद उन्हें दो महीने से वेतन नहीं मिला और अब जब महामारी का कहर जारी है तो उन्हें प्रशासन द्वारा एम्बुलेंसों में कोरोना से निपटने के लिए बेसिक सुरक्षा किट भी नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है।

क्या है इनकी पांच सूत्रीय मांगें?

- 2 महीने की बकाया सैलरी तुरंत दी जाए।

- कर्मचारियों का 8 महीने का पीएफ़ जमा हो।

- एंबुलेंस में कोरोना से निपटने के लिए सुरक्षा किट जैसे मास्क, ग्लव्स, सैनेलाइजर, पीपीएफ किट हो, क्योंकि सबसे पहले मरीज़ को हम लेने जाते हैं।

- हमें भी 50 लाख का बीमा कवर मिले, जो अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को सरकार दे रही है।

- अगर हमारी मांगे नहीं मानी जाती और हमारे साथ कोई हादसा हो जाये तो उस हाल में हमारी लाश पर तिरंगा कफ़न के रूप में हो।

एंबुलेंस कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हनुमान पांडे ने इस संबंध में कहा, “पिछले कई दिनों से लगातार सरकार के अधिकारियों को इसके बारे में सूचना दी जा रही थी लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसी कारण कर्माचारियों का सब्र टूट गया और वे हड़ताल पर चले गए। आप समझ सकते हैं एक ओर महामारी का डर है तो दूसरी ओर बिना वेतन पेट पालने की समस्या है।”

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी नेता अमित मौर्य ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया, “हम सभी इस समय कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं। हम अपनी जान की परवाह न करके 24 घंटे रात-दिन प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को सेवा दे रहे हैं। हमारे लिए मास्क, ग्लब्स समेत सैनेटाइजर का भी ठीक इंतजाम नहीं है। 2 महीने से सैलरी न मिलने से हमारा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। हम मजबूर होकर हड़ताल कर रहे हैं, अगर इसके बाद भी कुछ नहीं होता तो हमें अपने घर पलायन करना होगा।”

हड़ताल पर गए चालकों और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन का आरोप है कि जहां एक ओर उन्हें समय से वेतन नहीं मिल रहा है। वहीं उन्हें कम वेतन भी दिया जा रहा है। जबकि कई सालों के कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जा रही रही है। इसके साथ ही इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआइ की ओर से नए प्रोजेक्ट के तहत नई व्यवस्था की जा रही है। जिसके तहत 108 के वाहन कर्मियों को प्रति केस सौ रुपये और 102 को प्रति केस 60 रुपये दिए जाएंगे। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप है कि अगर केस न मिला तो उस दिन उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।

वहीं एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल को लेकर पहले स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के सचिव ने कार्रवाई करने का निर्देश दिया। लेकिन इसके बावजूद हड़ताली कर्मचारी अपनी मांगों पर डटे रहे। एंबुलेंस स्टाफ ने कहा कि कंपनी उनका शोषण कर रही है। कई लोगों को दो से तीन महीने का बकाया वेतन भी नहीं मिला है। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगे जब तक पूरी नहीं हो जाती वह अनवरत हड़ताल पर रहेंगें। एंबुलेंस कर्मियों की समस्याओं को सरकार ने नही समझा तो आने वाले दिनों में इनका विरोध और बढेगा।

मामला बढ़ता देख यूपी के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रकाश ने मीडिया से बातचीत में आश्वासन दिया कि वे कर्मचारियों की सैलरी दिलवाएंगे। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि प्रदेश में कुल 4700 एंबुलेंस हैं, जिनमें से हर एंबुलेंस रोजना आठ से 10 मरीजों को अस्पताल ले जाती है। अगर ये हड़ताल नहीं रुकती है तो प्रदेश में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

गौरतलब है कि लॉकडाउन में एंबुलेंस का संचालन न होने पर प्रदेश की स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसे लेकर फिलहाल प्रशासन कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगा। लेकिन जानकारों का कहना है कि इस महामारी काल में देश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है साथ ही हमारा विश्वगुरु बनने का सपना भी झूठा साबित हो गया है।

Coronavirus
COVID-19
Coronavirus Epidemic
UttarPradesh
UP ambulance personnel strike
yogi sarkar
Yogi Adityanath
BJP
Payment Problem

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License